भागलपुर के कहलगांव नप के पटेलनगर में त्रिवेणी महोत्सव के तहत आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन भक्ति रस की सरिता प्रवाहित हुई। व्यासपीठ से आचार्य स्वामी रामानंद शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया। इस दौरान, कृष्णावतार के बाद बाल गोपाल की माखनचोरी, यमुना तट पर कालियानाग दमन और इंद्र का मान मर्दन कर गोवर्धन पूजा की विस्तृत कथा झांकियों सहित सुनाई गई। कथावाचक के ओजस्वी प्रवचन और सुमधुर भजनों ने पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा पंडाल "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयकारों से गूंज उठा, जिससे भक्तगण बाल कृष्ण की लीलाओं को सुनकर भावविभोर हो गए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ० प्रवीण कुमार राणा और संजय कुमार सिंह ने किया, जबकि ऑर्गन पर दिलीप यादव तथा तबला पर जयराम और दिलीप यादव की जुगलबंदी ने कथा में चार चांद लगा दिए। इस धार्मिक आयोजन में समिति के धर्मेंद्र बाबा, गोपाल भात, डॉ० राजेंद्र महतो, धनंजय कुमार सिंह, डॉ० रघुवंश यादव, संजय सिंह, योगेश प्रसाद मंडल, कुमुद कुमार और हृदय नारायण यादव सहित सैकड़ों भक्तगण उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव में श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है और कथा का समापन एक भव्य भंडारे के साथ होगा।
भागलपुर के कहलगांव नप के पटेलनगर में त्रिवेणी महोत्सव के तहत आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन भक्ति रस की सरिता प्रवाहित हुई। व्यासपीठ से आचार्य स्वामी रामानंद शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया। इस दौरान, कृष्णावतार के बाद बाल गोपाल की माखनचोरी, यमुना तट पर कालियानाग दमन और इंद्र का मान मर्दन कर गोवर्धन पूजा की विस्तृत कथा झांकियों सहित सुनाई गई। कथावाचक के ओजस्वी प्रवचन और सुमधुर भजनों ने पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा पंडाल "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयकारों से गूंज उठा, जिससे भक्तगण बाल कृष्ण की लीलाओं को सुनकर भावविभोर हो गए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ० प्रवीण कुमार राणा और संजय कुमार सिंह ने किया, जबकि ऑर्गन पर दिलीप यादव तथा तबला पर जयराम और दिलीप यादव की जुगलबंदी ने कथा में चार चांद लगा दिए। इस धार्मिक आयोजन में समिति के धर्मेंद्र बाबा, गोपाल भात, डॉ० राजेंद्र महतो, धनंजय कुमार सिंह, डॉ० रघुवंश यादव, संजय सिंह, योगेश प्रसाद मंडल, कुमुद कुमार और हृदय नारायण यादव सहित सैकड़ों भक्तगण उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव में श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है और कथा का समापन एक भव्य भंडारे के साथ होगा।
- मथुरापुर और प्यालापुर क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह से बारिश के पानी से भर गई हैं। यह स्थिति कल शाम लगभग 5:30 बजे आई जोरदार बारिश और आंधी-तूफान के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें गरज के साथ पानी बरसा। लोगों और बच्चों को आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, साथ ही यह भी अपील की गई है कि बारिश होने पर घर से बाहर न निकलें।1
- राजस्थान के चूरू जिले में एक रेत का बवंडर देखा गया। यह जानकारी मगही शेर अभिषेक रंजन नामक हैंडल से साझा की गई है।1
- झारखंड के बड़ा तालबोना गाँव से एक घटना सामने आई है जहाँ एक गाय ने लात मारकर सारा दूध गिरा दिया। इस घटना के बाद, लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की जा रही है।1
- लोगों ने सरकार से अत्यंत भावुक निवेदन किया है कि उन्हें 'जाने आने की रस्म' प्रदान की जाए। यह मार्मिक अपील इसलिए की गई है क्योंकि उन्हें 'जाने आने' के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है।2
- राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।1
- करोड़ों के एक्सप्रेसवे के व्यापक प्रचार और ढिंढोरे के बावजूद, यह सवाल उठाया गया है कि आखिर सरकारी बसों को चलाने के लिए भी जनता को क्यों धक्का लगाना पड़ रहा है।1
- ओडिशा के पुरी में एक घटना सामने आई है जहाँ अधिकारियों द्वारा एक ठेलेवाले को अवैध वेंडिंग के आरोप में हटाए जाने के बाद, स्थानीय लोगों ने उसकी खाजा मिठाइयों को लूट लिया।1