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प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ की संभागीय कार्ययोजना बैठक 70–80 शिक्षकों की उपस्थिति में संपन्न: मनेन्द्रगढ़/एमसीबी: प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ द्वारा “98 से सेवा गणना लाभ सहित सकल लाभ” की मांग को लेकर आज सूरजपुर–जयनगर के केनापारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर शाला परिसर में एक संभागीय संकल्प बैठक का आयोजन किया गया। बैठक उपप्रांताध्यक्ष. दिनेश सिंह एवं संभाग अध्यक्ष हज़रत अली के नेतृत्व में संपन्न हुई। आयोजन की जिम्मेदारी कार्यकारी संभाग अध्यक्ष गुलाब देवांगन द्वारा बोधन राजवाड़े सहित सहयोगी साथियों के साथ निभाई गई। बैठक में लगभग 70–80 शिक्षक साथियों के साथ-साथ शून्य पेंशन पर सेवानिवृत्त कुछ शिक्षक साथियों ने भी सहभागिता दर्ज कराई। सभी ने शासन–प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये के प्रति विरोध प्रकट करते हुए 98 से सेवा गणना एवं सकल लाभ की मांग पर एकजुट संघर्ष का संकल्प दोहराया। बैठक को बगीचा जिला अध्यक्ष प्रधान एवं पुरंदर ने संबोधित करते हुए लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया तथा शिक्षकों में आशा और उत्साह का संचार किया। इसी क्रम में मनेंद्रगढ़ जिला अध्यक्ष कोरिया कुमार साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने भावी रणनीतियों एवं कार्ययोजनाओं पर अपने विचार रखे। संभाग अध्यक्ष हज़रत अली ने क्रमोन्नति प्रकरण से संबंधित अद्यतन जानकारी साझा करते हुए हाईकोर्ट में प्रचलित मामले को लेकर अपने अधिवक्ता को ऑनलाइन माध्यम से जोड़कर माइक के जरिए केस की वर्तमान स्थिति एवं भावी रणनीति से अवगत कराया तथा इस पर पुनः विचार-विमर्श का आह्वान किया। बैठक के दौरान कार्यकारिणी विस्तार करते हुए कुछ नए साथियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। अंत में उपप्रांताध्यक्ष दिनेश सिंह ने भावी प्रांतीय रणनीति एवं कार्ययोजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आगामी आंदोलनों की सफलता में जनबल और धनबल दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ब्लाक स्तर पर इन्हीं कमियों के कारण बड़े कार्यक्रमों की तिथियों की घोषणा में विलंब हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित दो प्रमुख कार्यक्रम- _प्रदेशभर के सभी जिलों से रायपुर तक मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने हेतु प्रांतीय रैली, _मुख्यमंत्री की गरिमामयी अध्यक्षता में सरगुजा महा सम्मेलन पूर्व से प्रस्तावित हैं। इन कार्यक्रमों को दृष्टिगत रखते हुए उपप्रांताध्यक्ष दिनेश सिंह ने सभी ब्लाक अध्यक्षों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने ब्लाकों में शिक्षक साथियों का सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर 15 जनवरी 2026 तक आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करें, ताकि आगामी कदम मजबूती के साथ उठाए जा सकें। बैठक में संभाग, जिला एवं ब्लाक अध्यक्षों सहित संघ के अधिकांश पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

on 15 December
user_M.D. KASIM
M.D. KASIM
Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
on 15 December
20864c86-13de-4d1c-8e91-2b8872424b89

प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ की संभागीय कार्ययोजना बैठक 70–80 शिक्षकों की उपस्थिति में संपन्न: मनेन्द्रगढ़/एमसीबी: प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ द्वारा “98 से सेवा गणना लाभ सहित सकल लाभ” की मांग को लेकर आज सूरजपुर–जयनगर के केनापारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर शाला परिसर में एक संभागीय संकल्प बैठक का आयोजन किया गया। बैठक उपप्रांताध्यक्ष. दिनेश सिंह एवं संभाग अध्यक्ष हज़रत अली के नेतृत्व में संपन्न हुई। आयोजन की जिम्मेदारी कार्यकारी संभाग अध्यक्ष गुलाब देवांगन द्वारा बोधन राजवाड़े सहित सहयोगी साथियों के साथ निभाई गई। बैठक में लगभग 70–80 शिक्षक साथियों के साथ-साथ शून्य पेंशन पर सेवानिवृत्त कुछ शिक्षक साथियों ने भी सहभागिता दर्ज कराई। सभी ने शासन–प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये के प्रति विरोध प्रकट करते हुए 98 से सेवा गणना एवं सकल लाभ की मांग पर एकजुट संघर्ष का संकल्प दोहराया। बैठक को बगीचा जिला अध्यक्ष प्रधान एवं पुरंदर ने संबोधित करते हुए लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया तथा शिक्षकों में आशा और उत्साह का संचार किया। इसी क्रम में मनेंद्रगढ़ जिला अध्यक्ष कोरिया कुमार साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने भावी रणनीतियों एवं कार्ययोजनाओं पर अपने विचार रखे। संभाग अध्यक्ष हज़रत अली ने क्रमोन्नति प्रकरण से संबंधित अद्यतन जानकारी साझा करते हुए हाईकोर्ट में प्रचलित मामले को लेकर अपने अधिवक्ता को ऑनलाइन माध्यम से जोड़कर माइक के जरिए केस की वर्तमान स्थिति एवं भावी रणनीति से अवगत कराया तथा इस पर पुनः विचार-विमर्श का आह्वान किया। बैठक के दौरान कार्यकारिणी विस्तार करते हुए कुछ नए साथियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। अंत में उपप्रांताध्यक्ष दिनेश सिंह ने भावी प्रांतीय रणनीति एवं कार्ययोजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आगामी आंदोलनों की सफलता में जनबल और धनबल दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ब्लाक स्तर पर इन्हीं कमियों के कारण बड़े कार्यक्रमों की तिथियों की घोषणा में विलंब हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित दो प्रमुख कार्यक्रम- _प्रदेशभर के सभी जिलों से रायपुर तक मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने हेतु प्रांतीय रैली, _मुख्यमंत्री की गरिमामयी अध्यक्षता में सरगुजा महा सम्मेलन पूर्व से प्रस्तावित हैं। इन कार्यक्रमों को दृष्टिगत रखते हुए उपप्रांताध्यक्ष दिनेश सिंह ने सभी ब्लाक अध्यक्षों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने ब्लाकों में शिक्षक साथियों का सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर 15 जनवरी 2026 तक आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करें, ताकि आगामी कदम मजबूती के साथ उठाए जा सकें। बैठक में संभाग, जिला एवं ब्लाक अध्यक्षों सहित संघ के अधिकांश पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

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  • बैकुंठपुर /कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर स्थित प्रेमाबाग में देवरहा बाबा आयोजक समिति के द्वारा होलिका दहन का कार्यक्रम संपन्न कर एक दूसरे को लगाए अबीर ग़ुलाल देखिये पूरा वीडियो
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    बैकुंठपुर /कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर स्थित प्रेमाबाग में देवरहा बाबा आयोजक समिति के द्वारा होलिका दहन का कार्यक्रम संपन्न कर एक दूसरे को लगाए अबीर ग़ुलाल देखिये पूरा वीडियो
    user_Editor In Chief vivekanand Pandey Swaranjali News
    Editor In Chief vivekanand Pandey Swaranjali News
    पत्रकार पटना, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • आज की बड़ी खबर आ रही है छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से, जहां कृषि उपज मंडी मेंड्राकला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंडी में नियुक्त चौकीदार की जगह एक गरीब मजदूर से काम कराया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि उस मजदूर को महज 7 हजार रुपये महीने पर रखा गया, और उसे पिछले दो से तीन महीने से वेतन तक नहीं मिला है। आख़िर क्यों एक नियमित कर्मचारी घर पर आराम कर रहा है और एक गरीब मजदूर रात भर ड्यूटी देने को मजबूर है? देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट। “छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से बड़ी खबर! मंडी में चौकीदार घर में आराम कर रहा है… और एक गरीब मजदूर रात भर पहरा देने को मजबूर है! आरटीआई में हुआ बड़ा खुलासा — 7 हजार रुपये में काम… वो भी बिना वेतन के! क्या यही है व्यवस्था? क्या गरीब का हक़ ऐसे ही मारा जाएगा? हम सवाल पूछेंगे… जवाब लेकर रहेंगे!” तो क्या गरीब मजदूर के हक़ पर डाका डाला जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई? अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। फिलहाल के लिए इतना ही, लेकिन इस खबर पर हमारी नजर बनी रहेगी।
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    आज की बड़ी खबर आ रही है छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से, जहां कृषि उपज मंडी मेंड्राकला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंडी में नियुक्त चौकीदार की जगह एक गरीब मजदूर से काम कराया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि उस मजदूर को महज 7 हजार रुपये महीने पर रखा गया, और उसे पिछले दो से तीन महीने से वेतन तक नहीं मिला है।
आख़िर क्यों एक नियमित कर्मचारी घर पर आराम कर रहा है और एक गरीब मजदूर रात भर ड्यूटी देने को मजबूर है? देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
“छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से बड़ी खबर!
मंडी में चौकीदार घर में आराम कर रहा है…
और एक गरीब मजदूर रात भर पहरा देने को मजबूर है!
आरटीआई में हुआ बड़ा खुलासा —
7 हजार रुपये में काम… वो भी बिना वेतन के!
क्या यही है व्यवस्था?
क्या गरीब का हक़ ऐसे ही मारा जाएगा?
हम सवाल पूछेंगे… जवाब लेकर रहेंगे!”
तो क्या गरीब मजदूर के हक़ पर डाका डाला जा रहा है?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?
अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है।
फिलहाल के लिए इतना ही, लेकिन इस खबर पर हमारी नजर बनी रहेगी।
    user_SUMIT KUMAR
    SUMIT KUMAR
    Newspaper publisher सरगुजा, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • केरजू समिति में 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कर 1.92 करोड़ का घोटाला: तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी, शाखा प्रबंधक और कैशियर सहित 8 पर FIR … अम्बिकापुर | आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केरजू में फर्जी ऋण आहरण का एक बड़ा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। जांच में 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1,92,82,006 रुपये (एक करोड़ बयानवे लाख बयासी हजार छह रुपये) का अवैध आहरण पाया गया है। इस वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारियों, शाखा प्रबंधक, सहायक लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कुल 8 संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए हैं। 127 किसानों के हक पर डाका: फर्जी हस्ताक्षर से निकाला पैसा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीतापुर की अध्यक्षता में गठित संयुक्त जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सहकारी समिति के भीतर एक सुनियोजित तरीके से किसानों के नाम पर कर्ज निकाला गया। रिकॉर्ड के अनुसार, कुल 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और उनके खाते से करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासन ने निम्नलिखित कर्मचारियों और अधिकारियों को सीधे तौर पर दोषी पाया है: मदन सिंह (तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी) जोगी राम (तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी) सैनाथ केरकेट्टा (वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं प्राधिकृत अधिकारी) भूपेन्द्र सिंह परिहार (तत्कालीन शाखा प्रबंधक) शिवशंकर सोनी (सहायक लेखापाल) ललिता सिन्हा (कैशियर) सुमित कुमार (सामान्य सहायक) दीपक कुमार चक्रधारी (कम्प्यूटर ऑपरेटर)
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    केरजू समिति में 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कर 1.92 करोड़ का घोटाला: तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी, शाखा प्रबंधक और कैशियर सहित 8 पर FIR …
अम्बिकापुर | आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केरजू में फर्जी ऋण आहरण का एक बड़ा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। जांच में 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1,92,82,006 रुपये (एक करोड़ बयानवे लाख बयासी हजार छह रुपये) का अवैध आहरण पाया गया है। इस वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारियों, शाखा प्रबंधक, सहायक लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कुल 8 संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
127 किसानों के हक पर डाका: फर्जी हस्ताक्षर से निकाला पैसा
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सीतापुर की अध्यक्षता में गठित संयुक्त जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सहकारी समिति के भीतर एक सुनियोजित तरीके से किसानों के नाम पर कर्ज निकाला गया। रिकॉर्ड के अनुसार, कुल 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और उनके खाते से करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रशासन ने निम्नलिखित कर्मचारियों और अधिकारियों को सीधे तौर पर दोषी पाया है:
मदन सिंह (तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी)
जोगी राम (तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी)
सैनाथ केरकेट्टा (वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं प्राधिकृत अधिकारी)
भूपेन्द्र सिंह परिहार (तत्कालीन शाखा प्रबंधक)
शिवशंकर सोनी (सहायक लेखापाल)
ललिता सिन्हा (कैशियर)
सुमित कुमार (सामान्य सहायक)
दीपक कुमार चक्रधारी (कम्प्यूटर ऑपरेटर)
    user_Jarif Khan
    Jarif Khan
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    16 hrs ago
  • सरगुजा जिले के घाटबर्रा गांव में कोयला खदान विस्तार के दौरान श्मशान घाट में जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। दावा है कि रात के समय अचानक रोने की आवाज सुनकर चालक मशीन छोड़कर भाग गया। गांव में दहशत का माहौल है, लोग इसे रहस्यमयी घटना से जोड़ रहे हैं। फिलहाल रात में खनन कार्य बंद बताया जा रहा है।
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    सरगुजा जिले के घाटबर्रा गांव में कोयला खदान विस्तार के दौरान श्मशान घाट में जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। दावा है कि रात के समय अचानक रोने की आवाज सुनकर चालक मशीन छोड़कर भाग गया। गांव में दहशत का माहौल है, लोग इसे रहस्यमयी घटना से जोड़ रहे हैं। फिलहाल रात में खनन कार्य बंद बताया जा रहा है।
    user_Ambikapur Express
    Ambikapur Express
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • Post by Ashok Sondhiya
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    Post by Ashok Sondhiya
    user_Ashok Sondhiya
    Ashok Sondhiya
    Paan shop Sohagpur, Shahdol•
    30 min ago
  • कोरबा मानिकपुर रेलवे कॉलोनी मुख्य मार्ग पेट्रोल पंप के पास तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से एक बाइक सवार युवक की घटना स्थल पर दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद राहगीरो की भीड़ एकत्रित हो गई । हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। Vo इस दुर्घटना में मृतक की पहचान 22 वर्षीय गौरव श्रीवास के रूप में की गई जो सीएसईबी का रहने वाला था।पुलिस की सूचना के बाद उसके मित्र और परिजन मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि बाइक सवार युवक गौरव मुड़ापार की तरफ से टीपी नगर की जा रहा था । तेज रफ्तार भारी वाहन पीछे से उसे अपनी चपेट में लेते हुए मौके से फरार हो गया। वाहन का पहिया उसके सिर पर चढ़ गया जिसके चलते घटना स्थल पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। Clip Vo इस घटना के बाद पुलिस को मौके से एक मोबाइल मिला जो लॉक था । गौरव की मौत के बाद भी उसके अंगूठे से थम लेकर लॉक खोला गया और इसकी सूचना उसके परिजनों को दी गई।
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    कोरबा मानिकपुर रेलवे कॉलोनी मुख्य मार्ग पेट्रोल पंप के पास तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से एक बाइक सवार युवक की घटना स्थल पर दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद राहगीरो की भीड़ एकत्रित हो गई । हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। 
Vo इस दुर्घटना में मृतक की पहचान 22 वर्षीय गौरव श्रीवास के रूप में की गई जो सीएसईबी का रहने वाला था।पुलिस की सूचना के बाद उसके मित्र और परिजन मौके पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि बाइक सवार युवक गौरव मुड़ापार की तरफ से टीपी नगर की जा रहा था । तेज रफ्तार भारी वाहन पीछे से उसे अपनी चपेट में लेते हुए मौके से फरार हो गया। वाहन का पहिया उसके सिर पर चढ़ गया जिसके चलते घटना स्थल पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। Clip 
Vo इस घटना के बाद पुलिस को मौके से एक मोबाइल मिला जो लॉक था । गौरव की मौत के बाद भी उसके अंगूठे से थम लेकर लॉक खोला गया और इसकी सूचना उसके परिजनों को दी गई।
    user_Manoj kumar dinkar
    Manoj kumar dinkar
    Journalist कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • स्लग: पारंपरिक ‘निकारि’ प्रथा स्थान: मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता। जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है। निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं। निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं। यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।” ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं। आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।
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    स्लग: पारंपरिक ‘निकारि’ प्रथा 
स्थान: 
मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला
रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव
मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। 
भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता।
जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है।
निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं।
निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं।
यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।”
ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं।
आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।
    user_Manoj shrivastav
    Manoj shrivastav
    चिरमिरी, मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • आकांक्षा टोप्पो द्वारा भ्रामक एवं निराधार सोशल मीडिया वीडियो के संबंध में कोरिया पुलिस का खंडन* दिनांक 01.03.2026 को आकांक्षा टोप्पो द्वारा अपने फेसबुक एवं यूट्यूब माध्यम पर एक वीडियो अपलोड कर थाना चरचा के मर्ग क्रमांक 05/2026 में दर्ज मृतिका के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन कथन प्रस्तुत किए गए हैं। उक्त वीडियो में पुलिस प्रशासन तथा माननीय विधायक के संबंध में भी अनुचित एवं आधारहीन आरोप लगाए गए हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि दिनांक 26.02.2026 को प्रार्थी गोविन्द वर्मा, वार्ड बॉय, जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर द्वारा अस्पताली मेमो थाना बैकुंठपुर में प्रस्तुत किया गया था, जिस पर थाना बैकुंठपुर में मर्ग क्रमांक 0/26 पंजीबद्ध किया गया। मर्ग डायरी प्राप्त होने पर प्रकरण थाना चरचा को हस्तांतरित किया गया, जहाँ मर्ग क्रमांक 05/2026 धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत कायम कर विधिवत जांच प्रारंभ की गई। जांच के दौरान पंचगण एवं गवाहों के कथन दर्ज किए गए। मृतिका के पति, पुत्र एवं अन्य परिजनों के बयानों से यह तथ्य प्रकाश में आया कि मृतिका अत्यधिक शराब सेवन की आदी थी तथा कभी-कभी मानसिक संतुलन भी खो बैठती थी। अधिक मात्रा में मदिरापान करने के पश्चात वह कई बार गिर जाती थी और वहीं पड़ी रहती थी। आकांक्षा टोप्पो द्वारा वायरल किए गए वीडियो में यह उल्लेख किया गया है कि मृतिका के साथ हत्या कर उसके निजी अंग में शराब की बोतल डाली गई है, जो पूर्णतः असत्य एवं मनगढ़ंत है। मर्ग जांच तथा पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक द्वारा ऐसी किसी भी घटना की पुष्टि नहीं की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक द्वारा शरीर में अल्कोहल की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए विधि अनुसार विसरा संरक्षित किया गया है, जिसे विधिवत एफएसएल परीक्षण हेतु भेजा जाना है। अतः बिना तथ्यात्मक जानकारी के भ्रामक वीडियो बनाकर जनसामान्य को गुमराह करने एवं कोरिया पुलिस की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जिसका कोरिया पुलिस द्वारा पूर्णतः खंडन किया जाता है। मर्ग पंचनामा के दौरान परिवारजनों को बुलाकर घटना के सम्बन्ध पूछताछ कथन लिया गया एवं शव निरीक्षण के दौरान महिला पंचानो के दारा मृतिका के अंडरगारमेंट के अन्दर शराब की 180 ML की प्लास्टिक की शीशी बरामद की गई है, शराबी प्रवृत्ति की महिलाएं अक्सर कोई भी अवैधानिक वस्तुओ को अपने अंडरगारमेंट्स में छुपा लेती है। प्रकरण की समस्त परिस्थितियों का परीक्षण करते हुए DySP बैकुंठपुर द्वारा बारिकी से विवेचना की जा रही है।
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    आकांक्षा टोप्पो द्वारा भ्रामक एवं निराधार सोशल मीडिया वीडियो के संबंध में कोरिया पुलिस का खंडन*
दिनांक 01.03.2026 को आकांक्षा टोप्पो द्वारा अपने फेसबुक एवं यूट्यूब माध्यम पर एक वीडियो अपलोड कर थाना चरचा के मर्ग क्रमांक 05/2026 में दर्ज मृतिका के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन कथन प्रस्तुत किए गए हैं। उक्त वीडियो में पुलिस प्रशासन तथा माननीय विधायक के संबंध में भी अनुचित एवं आधारहीन आरोप लगाए गए हैं। 
वास्तविक स्थिति यह है कि दिनांक 26.02.2026 को प्रार्थी गोविन्द वर्मा, वार्ड बॉय, जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर द्वारा अस्पताली मेमो थाना बैकुंठपुर में प्रस्तुत किया गया था, जिस पर थाना बैकुंठपुर में मर्ग क्रमांक 0/26 पंजीबद्ध किया गया। मर्ग डायरी प्राप्त होने पर प्रकरण थाना चरचा को हस्तांतरित किया गया, जहाँ मर्ग क्रमांक 05/2026 धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत कायम कर विधिवत जांच प्रारंभ की गई।
जांच के दौरान पंचगण एवं गवाहों के कथन दर्ज किए गए। मृतिका के पति, पुत्र एवं अन्य परिजनों के बयानों से यह तथ्य प्रकाश में आया कि मृतिका अत्यधिक शराब सेवन की आदी थी तथा कभी-कभी मानसिक संतुलन भी खो बैठती थी। अधिक मात्रा में मदिरापान करने के पश्चात वह कई बार गिर जाती थी और वहीं पड़ी रहती थी। 
आकांक्षा टोप्पो द्वारा वायरल किए गए वीडियो में यह उल्लेख किया गया है कि मृतिका के साथ हत्या कर उसके निजी अंग में शराब की बोतल डाली गई है, जो पूर्णतः असत्य एवं मनगढ़ंत है। मर्ग जांच तथा पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक द्वारा ऐसी किसी भी घटना की पुष्टि नहीं की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक द्वारा शरीर में अल्कोहल की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए विधि अनुसार विसरा संरक्षित किया गया है, जिसे विधिवत एफएसएल परीक्षण हेतु भेजा जाना है। अतः बिना तथ्यात्मक जानकारी के भ्रामक वीडियो बनाकर जनसामान्य को गुमराह करने एवं कोरिया पुलिस की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जिसका कोरिया पुलिस द्वारा पूर्णतः खंडन किया जाता है।
मर्ग पंचनामा के दौरान परिवारजनों को बुलाकर घटना के सम्बन्ध पूछताछ कथन लिया गया एवं शव निरीक्षण के दौरान महिला पंचानो के दारा मृतिका के अंडरगारमेंट के अन्दर शराब की 180 ML की प्लास्टिक की शीशी बरामद की गई है, शराबी प्रवृत्ति की महिलाएं अक्सर कोई भी अवैधानिक वस्तुओ को अपने अंडरगारमेंट्स में छुपा लेती है। प्रकरण की समस्त परिस्थितियों का परीक्षण करते हुए DySP बैकुंठपुर द्वारा बारिकी से विवेचना की जा रही है।
    user_Editor In Chief vivekanand Pandey Swaranjali News
    Editor In Chief vivekanand Pandey Swaranjali News
    पत्रकार पटना, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    19 hrs ago
  • सूचना का अधिकार बनाम प्रशासनिक मानसिकता: मेन्द्राकला मंडी प्रकरण से उठते सवाल लोकतंत्र में पारदर्शिता केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था का मूल तत्व है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 इसी उद्देश्य से अस्तित्व में आया था — ताकि नागरिक सरकार से प्रश्न पूछ सके और शासन जवाबदेह बने। परंतु जब स्वयं सार्वजनिक संस्थान सूचना देने से बचते दिखाई दें, तो यह केवल एक कार्यालय का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि व्यवस्था की सोच पर प्रश्नचिह्न बन जाता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले, अंबिकापुर स्थित कृषि उपज मंडी समिति मेन्द्रा कला से जुड़ा हालिया प्रकरण इसी बहस को पुनः जीवित करता है। मुद्दा केवल 7230 रुपये का नहीं आरटीआई आवेदन के माध्यम से पिछले दो वर्षों के टेंडर, भुगतान, एमबी बुक, सब्सिडी एवं अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई। जवाब में कार्यालय ने 3615 पृष्ठों की प्रतिलिपि बताकर 7230 रुपये शुल्क जमा करने का निर्देश दिया। कानूनन प्रति पृष्ठ निर्धारित शुल्क लिया जा सकता है — यह व्यवस्था का हिस्सा है। परंतु प्रश्न यह है कि जब सूचना डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा सकती है, तब केवल छायाप्रति के रूप में देने पर जोर क्यों? क्या यह तकनीकी सुविधा का अभाव है, या प्रक्रिया को जटिल बनाने की प्रवृत्ति? सूचना का अधिकार केवल कागजों का लेन-देन नहीं, बल्कि पारदर्शिता का माध्यम है। यदि सूचना देने की प्रक्रिया ही इतनी महंगी और बोझिल बना दी जाए कि आम नागरिक पीछे हट जाए, तो कानून का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? धारा 4(1)(b) की आत्मा आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(b) सार्वजनिक प्राधिकरणों को कई जानकारियां स्वतः सार्वजनिक करने का निर्देश देती है। टेंडर, भुगतान, कार्यादेश और बैठकों के निर्णय — ये सभी ऐसी सूचनाएं हैं जिन्हें नियमित रूप से वेबसाइट या सूचना पट्ट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। यदि दो वर्षों की जानकारी 3615 पृष्ठों में फैली है, तो यह भी विचारणीय है कि क्या इनका नियमित डिजिटलीकरण और सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ? यदि नहीं, तो क्यों? प्रशासनिक प्रशिक्षण और संवेदनशीलता मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अधिकारी द्वारा आरटीआई की धाराओं की जानकारी न होने संबंधी कथन सुनाई देता है। यदि ऐसा है, तो यह केवल व्यक्तिगत त्रुटि नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और जवाबदेही की कमी का संकेत है। जन सूचना अधिकारी का दायित्व मात्र आवेदन स्वीकार करना नहीं, बल्कि अधिनियम की भावना को समझते हुए नागरिक को सहयोग देना है। “जैसा अधिकारी कहेगा वैसा होगा” जैसी मानसिकता पारदर्शी शासन के सिद्धांत से मेल नहीं खाती। बड़ा प्रश्न: क्या व्यवस्था पारदर्शिता से सहज है? यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप का विषय नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रश्न का संकेत है — क्या हमारी संस्थाएं पारदर्शिता को सहजता से स्वीकार कर पा रही हैं? यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं, तो सूचना उपलब्ध कराने में संकोच क्यों? यदि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी है, तो दस्तावेज साझा करने में हिचक क्यों? लोकतंत्र में विश्वास दस्तावेजों से बनता है, बयानों से नहीं। आगे क्या? ऐसे मामलों में आवश्यक है कि: विभागीय स्तर पर पारदर्शिता की समीक्षा हो डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाए जन सूचना अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण हो स्वप्रकाशन (Proactive Disclosure) को सख्ती से लागू किया जाए सूचना का अधिकार कोई एहसान नहीं, बल्कि नागरिक का विधिक अधिकार है। शासन की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि वह सवालों से कितना सहज है। मेन्द्राकला मंडी प्रकरण एक अवसर भी है — व्यवस्था आत्ममंथन करे और पारदर्शिता को कागजों से निकालकर व्यवहार में उतारे। #ChhattisgarhNews #RaipurNews #CGViral #BilaspurNews #Chhattisgarh @PMOIndia @ChhattisgarhCMO @mandiboardcg @narendramodi @DoPTGoI @CIC_India @DCsofIndia @SurgujaDist @AmbikapurPro @rti_online @prsIndia @NCPrincipals #RightToInformation #RTI #RTIAct2005 #Transparency #Accountability #OpenGovernment #DigitalIndia #Section4_1_b #PublicAccountability #AdministrativeReform #Governance #CitizenRights #Loktantra #Democracy #Chhattisgarh #Sarguja #Ambikapur #Mandi #PublicFunds #TenderProcess #CorruptionFreeIndia #SystemReform #JanAdhikar #InformationIsPower #RTIMovement #cg
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    सूचना का अधिकार बनाम प्रशासनिक मानसिकता: मेन्द्राकला मंडी प्रकरण से उठते सवाल
लोकतंत्र में पारदर्शिता केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था का मूल तत्व है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 इसी उद्देश्य से अस्तित्व में आया था — ताकि नागरिक सरकार से प्रश्न पूछ सके और शासन जवाबदेह बने। परंतु जब स्वयं सार्वजनिक संस्थान सूचना देने से बचते दिखाई दें, तो यह केवल एक कार्यालय का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि व्यवस्था की सोच पर प्रश्नचिह्न बन जाता है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले, अंबिकापुर स्थित
कृषि उपज मंडी समिति मेन्द्रा कला
से जुड़ा हालिया प्रकरण इसी बहस को पुनः जीवित करता है।
मुद्दा केवल 7230 रुपये का नहीं
आरटीआई आवेदन के माध्यम से पिछले दो वर्षों के टेंडर, भुगतान, एमबी बुक, सब्सिडी एवं अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई। जवाब में कार्यालय ने 3615 पृष्ठों की प्रतिलिपि बताकर 7230 रुपये शुल्क जमा करने का निर्देश दिया।
कानूनन प्रति पृष्ठ निर्धारित शुल्क लिया जा सकता है — यह व्यवस्था का हिस्सा है। परंतु प्रश्न यह है कि जब सूचना डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा सकती है, तब केवल छायाप्रति के रूप में देने पर जोर क्यों? क्या यह तकनीकी सुविधा का अभाव है, या प्रक्रिया को जटिल बनाने की प्रवृत्ति?
सूचना का अधिकार केवल कागजों का लेन-देन नहीं, बल्कि पारदर्शिता का माध्यम है। यदि सूचना देने की प्रक्रिया ही इतनी महंगी और बोझिल बना दी जाए कि आम नागरिक पीछे हट जाए, तो कानून का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?
धारा 4(1)(b) की आत्मा
आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(b) सार्वजनिक प्राधिकरणों को कई जानकारियां स्वतः सार्वजनिक करने का निर्देश देती है। टेंडर, भुगतान, कार्यादेश और बैठकों के निर्णय — ये सभी ऐसी सूचनाएं हैं जिन्हें नियमित रूप से वेबसाइट या सूचना पट्ट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
यदि दो वर्षों की जानकारी 3615 पृष्ठों में फैली है, तो यह भी विचारणीय है कि क्या इनका नियमित डिजिटलीकरण और सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ? यदि नहीं, तो क्यों?
प्रशासनिक प्रशिक्षण और संवेदनशीलता
मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अधिकारी द्वारा आरटीआई की धाराओं की जानकारी न होने संबंधी कथन सुनाई देता है। यदि ऐसा है, तो यह केवल व्यक्तिगत त्रुटि नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और जवाबदेही की कमी का संकेत है।
जन सूचना अधिकारी का दायित्व मात्र आवेदन स्वीकार करना नहीं, बल्कि अधिनियम की भावना को समझते हुए नागरिक को सहयोग देना है। “जैसा अधिकारी कहेगा वैसा होगा” जैसी मानसिकता पारदर्शी शासन के सिद्धांत से मेल नहीं खाती।
बड़ा प्रश्न: क्या व्यवस्था पारदर्शिता से सहज है?
यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप का विषय नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रश्न का संकेत है —
क्या हमारी संस्थाएं पारदर्शिता को सहजता से स्वीकार कर पा रही हैं?
यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं, तो सूचना उपलब्ध कराने में संकोच क्यों?
यदि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी है, तो दस्तावेज साझा करने में हिचक क्यों?
लोकतंत्र में विश्वास दस्तावेजों से बनता है, बयानों से नहीं।
आगे क्या?
ऐसे मामलों में आवश्यक है कि:
विभागीय स्तर पर पारदर्शिता की समीक्षा हो
डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाए
जन सूचना अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण हो
स्वप्रकाशन (Proactive Disclosure) को सख्ती से लागू किया जाए
सूचना का अधिकार कोई एहसान नहीं, बल्कि नागरिक का विधिक अधिकार है। शासन की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि वह सवालों से कितना सहज है।
मेन्द्राकला मंडी प्रकरण एक अवसर भी है —
व्यवस्था आत्ममंथन करे और पारदर्शिता को कागजों से निकालकर व्यवहार में उतारे।
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    SUMIT KUMAR
    Newspaper publisher सरगुजा, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
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