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उत्तर प्रदेश में फ्री राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है। इसके तहत, फ्री राशन के लिए 8 नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ राशन कार्ड भी रद्द कर दिए गए हैं।
प्रमोद कुमार कश्यप
उत्तर प्रदेश में फ्री राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है। इसके तहत, फ्री राशन के लिए 8 नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ राशन कार्ड भी रद्द कर दिए गए हैं।
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- एक विशिष्ट प्रकरण के संबंध में गाजियाबाद के आदरणीय पुलिस आयुक्त महोदय को शिकायत प्रेषित करने का निर्देश दिया गया है।1
- गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र से संबंधित एक अपराध का मामला सामने आया है।1
- गाजियाबाद कमिश्नरेट में लूट और जानलेवा हमलों की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। पोस्ट में कहा गया है कि NCR और पंडित समाज की बेटियों के साथ अशोभनीय अभद्रता के मामले सामने आए हैं, जिससे उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार में डूबी हुई नजर आ रही है। इस स्थिति पर माननीय मुख्यमंत्री जी के कार्यालय और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को टैग करते हुए ध्यान आकर्षित किया गया है।1
- गाजियाबाद के मोदीनगर कमिश्नरेट में लूट और जानलेवा हमले की एक घटना सामने आई है, जिसमें एनसीआर और पंडित समाज की बेटियों के साथ अशोभनीय अभद्रता भी हुई। इस घटना को 'साधारण' बताए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, और आरोप लगाया गया है कि इससे उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार में डूबी हुई नजर आ रही है। इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश सहित अन्य अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश में फ्री राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है। इसके तहत, फ्री राशन के लिए 8 नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ राशन कार्ड भी रद्द कर दिए गए हैं।1
- छत्तीसगढ़ में मारुति सुजुकी शोरूम के CEO पर कंपनी की एक महिला कर्मचारी के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगा है। यह सफ़ेद टी-शर्ट और ब्लैक पेंट में दिख रहा शख्स शोरूम का CEO बताया गया है। छेड़छाड़ की घटना से गुस्साई महिला कर्मचारी ने पुलिस के सामने ही उसकी जमकर पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, लड़की ने पहले उसके चेहरे पर स्याही फेंकी, जिसके बाद वहाँ खूब हंगामा हुआ। लड़की के साथ छेड़छाड़ करने की यह घटना कथित तौर पर CEO को बहुत महंगी पड़ी।1
- उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बुधवार सुबह से ही पत्रकार ललित चौधरी और अपूर्वा चौधरी को उनके ही घरों में नज़रबंद कर दिया गया है। पुलिस ने यह कदम पत्रकारों द्वारा बुलाए गए एक विशाल विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाया है, जिसे पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए निर्धारित किया गया था। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन की तानाशाही पर सवाल उठाते हुए चुनौती दी है कि "आप मुझे कब तक रोकेंगे?" यह पूरा मामला सिद्धार्थ विहार जल निगम पुलिस थाने से शुरू हुआ था, जहाँ संपादक ललित चौधरी और पत्रकार अपूर्वा चौधरी, साथी पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ हुए दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज कराने गए थे। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही विरोधी पक्ष ने उनके साथ गाली-गलौज की। इसके बजाय कार्रवाई करने के, मौके पर तैनात उप-निरीक्षक आयुष कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों ने ललित चौधरी के साथ बेरहमी से मारपीट की, उन्हें घसीटा और अपशब्दों का इस्तेमाल किया। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने विजयनगर पुलिस थाने के प्रभारी धर्मपाल से शिकायत की, तो उन्होंने सुनने के बजाय उन्हें धमकाकर थाने से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद, एसीपी उपासना पांडे, डीसीपी सिटी और पुलिस कमिश्नर को फोन पर सूचित किया गया और अगले दिन एक लिखित शिकायत व ज्ञापन भी सौंपा गया। हालांकि, न्याय दिलाने के बजाय, मामले को 'ठंडे बस्ते में' डाल दिया गया और इसमें देरी की कोशिशें की गईं, जिससे दोषियों को लगातार बचाया जा रहा है और जाँच की दिशा में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। पुलिस की क्रूरता और न्याय न मिलने से हताश, पत्रकार अपूर्वा चौधरी पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी थी कि यदि दोषी सब-इंस्पेक्टर आयुष कुमार, स्टेशन इंचार्ज धर्मपाल और अन्य लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसके लिए गाजियाबाद पुलिस पूरी तरह से जिम्मेदार होगी। पत्रकारों का कहना है कि यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "ज़ीरो टॉलरेंस" नीति की अवहेलना है, और गाजियाबाद पुलिस पर उत्पीड़न, मारपीट और तानाशाही के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन के संवेदनहीन और तानाशाही रवैये के खिलाफ गाजियाबाद के पत्रकारों में भारी गुस्सा है। उन्होंने आज (बुधवार, 27 मई, 2026) जिला पुलिस आयुक्त के कार्यालय पर एक विशाल और अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। इसे दबाने के लिए, दर्जनों पुलिसकर्मियों ने ललित चौधरी और अपूर्वा चौधरी के पूरे सोसाइटी को एक छावनी में बदल दिया और उन्हें सुबह से ही नज़रबंद कर दिया। अब पत्रकारों को नज़रबंद किए जाने के बाद, गाजियाबाद के पत्रकार समुदाय में और भी अधिक रोष है। एकजुट पत्रकारों ने साफ तौर पर कहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हो रहे इस अत्याचार को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और पुलिस चाहे जो भी हथकंडा अपना ले, न्याय की यह लड़ाई रुकेगी नहीं।1
- उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोदीनगर क्षेत्र में हुई लूट और जानलेवा हमले की घटनाओं को 'साधारण' बताए जाने पर माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कमिश्नरेट गाजियाबाद, मोदीनगर में NCR और पंडित समाज की बेटियों के साथ हुई 'अशोभनीय अभद्रता' जैसी गंभीर घटनाओं को भी हल्के में लिया जा रहा है, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई नजर आती है।1