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रानी मेरी भी थी मेरे भाई लेकिन उसके राजा कोई और था

14 hrs ago
user_अंशुमन निराला
अंशुमन निराला
भरगामा, अररिया, बिहार•
14 hrs ago

रानी मेरी भी थी मेरे भाई लेकिन उसके राजा कोई और था

More news from बिहार and nearby areas
  • रानी मेरी भी थी मेरे भाई लेकिन उसके राजा कोई और था
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    रानी मेरी भी थी मेरे भाई  लेकिन उसके राजा कोई और था
    user_अंशुमन निराला
    अंशुमन निराला
    भरगामा, अररिया, बिहार•
    14 hrs ago
  • ye bhabhi ji Kho gaya hai dosto 🥺 please pata jarur karna/ #news #madhepura #kumarkhand #shankarpur #shurulocalapps
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    ye bhabhi ji Kho gaya hai dosto 🥺 please pata jarur karna/ #news #madhepura #kumarkhand #shankarpur #shurulocalapps
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
    10 hrs ago
  • 😢😢😢🤔🤔🤔
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    😢😢😢🤔🤔🤔
    user_Raju yadav
    Raju yadav
    मुरलीगंज, मधेपुरा, बिहार•
    7 hrs ago
  • Post by Vinod Kumar bindas
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    Post by Vinod Kumar bindas
    user_Vinod Kumar bindas
    Vinod Kumar bindas
    छातापुर, सुपौल, बिहार•
    9 hrs ago
  • दैनिक अयोध्या टाइम्स/ DAT NEWS/ अपना भारत देश के 16 राज्य में प्रकाशित/ हर खबर हम और आप तक हर दिन
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    दैनिक अयोध्या टाइम्स/ DAT NEWS/ अपना भारत देश के 16 राज्य में प्रकाशित/ हर खबर हम और आप तक हर दिन
    user_S.alam D.A.T/M.D.E news
    S.alam D.A.T/M.D.E news
    पत्रकार छातापुर, सुपौल, बिहार•
    11 hrs ago
  • कटिहार में तबाही! कुर्सेला बाजार में भीषण आग, 500 दुकानें राख, करोड़ों का हुआ नुकसान। आग पर काबू पाने में घंटों लगे।
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    कटिहार में तबाही! कुर्सेला बाजार में भीषण आग, 500 दुकानें राख, करोड़ों का हुआ नुकसान।
आग पर काबू पाने में घंटों लगे।
    user_Csi news
    Csi news
    Local News Reporter फारबिसगंज, अररिया, बिहार•
    32 min ago
  • बिहार के मधेपुरा से सरकारी लापरवाही की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उनकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई। मामला मुरलीगंज प्रखंड का है, जहां बुजुर्ग अब अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। मामला मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत पोखराम परमानंदपुर पंचायत के नवटोलिया, वार्ड संख्या–12 का है। सुरेंद्र यादव, सुगिया देवी और जयमंती देवी वर्षों से वृद्धा पेंशन योजना का लाभ ले रहे थे। लेकिन अचानक उनके खाते में पेंशन की राशि आनी बंद हो गई। जब प्रखंड कार्यालय में जानकारी ली गई, तो पता चला कि सरकारी पोर्टल पर उन्हें ‘मृत’ दिखा दिया गया है। बिना किसी भौतिक सत्यापन और जांच के जिंदा लोगों को सिस्टम में मृत घोषित कर देना प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। बाइट – सुगिया देवी, पीड़ित वृद्धा: “हम जिंदा हैं, फिर भी कागज पर मरा दिया गया… पेंशन बंद हो गया… हम गरीब लोग कहां जाएं?” वृद्धा पेंशन ही इन बुजुर्गों के लिए जीवनयापन का मुख्य सहारा थी। पेंशन बंद होने से दवा, राशन और दैनिक जरूरतों पर संकट गहरा गया है। परिजनों का कहना है कि कई बार कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला है, समाधान नहीं। बाइट – जयमंती देवी, पीड़ित वृद्धा बाइट – सुरेंद्र यादव, पीड़ित वृद्ध बाइट – रितेश यादव, स्थानीय ग्रामीण स्थानीय ग्रामीणों ने मुरलीगंज प्रखंड कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। ग्रामीणों का आरोप है कि हर काम के लिए घूस मांगी जाती है और गरीबों की सुनवाई नहीं होती। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसकी लापरवाही से जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया? क्या यह महज डेटा एंट्री की गलती है या किसी स्तर पर गंभीर अनियमितता? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि गरीब और बुजुर्ग लाभुकों की संवेदनशील योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि कब तक इन ‘जिंदा’ लोगों को उनके जिंदा होने का हक और पेंशन वापस मिलती है।
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    बिहार के मधेपुरा से सरकारी लापरवाही की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उनकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई। मामला मुरलीगंज प्रखंड का है, जहां बुजुर्ग अब अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
मामला मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत पोखराम परमानंदपुर पंचायत के नवटोलिया, वार्ड संख्या–12 का है।
सुरेंद्र यादव, सुगिया देवी और जयमंती देवी वर्षों से वृद्धा पेंशन योजना का लाभ ले रहे थे। लेकिन अचानक उनके खाते में पेंशन की राशि आनी बंद हो गई।
जब प्रखंड कार्यालय में जानकारी ली गई, तो पता चला कि सरकारी पोर्टल पर उन्हें ‘मृत’ दिखा दिया गया है।
बिना किसी भौतिक सत्यापन और जांच के जिंदा लोगों को सिस्टम में मृत घोषित कर देना प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
बाइट – सुगिया देवी, पीड़ित वृद्धा:
“हम जिंदा हैं, फिर भी कागज पर मरा दिया गया… पेंशन बंद हो गया… हम गरीब लोग कहां जाएं?”
वृद्धा पेंशन ही इन बुजुर्गों के लिए जीवनयापन का मुख्य सहारा थी। पेंशन बंद होने से दवा, राशन और दैनिक जरूरतों पर संकट गहरा गया है।
परिजनों का कहना है कि कई बार कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला है, समाधान नहीं।
बाइट – जयमंती देवी, पीड़ित वृद्धा
बाइट – सुरेंद्र यादव, पीड़ित वृद्ध
बाइट – रितेश यादव, स्थानीय ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों ने मुरलीगंज प्रखंड कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना पैसे के कोई काम नहीं होता।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर काम के लिए घूस मांगी जाती है और गरीबों की सुनवाई नहीं होती।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसकी लापरवाही से जिंदा लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया? क्या यह महज डेटा एंट्री की गलती है या किसी स्तर पर गंभीर अनियमितता?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि गरीब और बुजुर्ग लाभुकों की संवेदनशील योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि कब तक इन ‘जिंदा’ लोगों को उनके जिंदा होने का हक और पेंशन वापस मिलती है।
    user_RAMAN KUMAR
    RAMAN KUMAR
    REPORTER मधेपुरा, मधेपुरा, बिहार•
    58 min ago
  • #shuruapps #madhepura
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    #shuruapps #madhepura
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
    11 hrs ago
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