उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा त्वरित समस्या समाधान का सबसे बड़ा माध्यम बताई जाने वाली मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जमीनी हकीकत पर हरदोई जिले के हरपालपुर क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत का समाधान किए बिना ही अधिकारियों ने उसे कागजों में निस्तारित दिखाकर शासन को गुमराह किया है। मामला हरपालपुर विकासखंड के एक गांव से संबंधित है, जहां ग्रामीणों ने लंबे समय से बनी नाली की गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों की उम्मीद के विपरीत, कथित तौर पर संबंधित ग्राम सचिव अभय प्रताप सिंह ने कार्यालय में बैठे-बैठे ही शिकायत पर एक फर्जी आख्या लगाकर उसे निस्तारित कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी नाली की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे गांव में जलभराव और गंदगी के कारण लोगों का जीवन दूभर हो गया है। मौके की तस्वीरें भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि शिकायत के बावजूद धरातल पर कोई कार्य नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी कार्यशैली से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का मज़ाक बना रहे हैं। वास्तविक निस्तारण करने के बजाय, फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामलों को बंद कर दिया जाता है, जिससे जनता का भरोसा लगातार कमज़ोर हो रहा है। ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाने और जांच में फर्जी आख्या लगाने की पुष्टि होने पर, संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, स्पष्टीकरण, प्रतिकूल प्रविष्टि और अनुशासनात्मक कार्यवाही की तलवार लटक सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई और उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनकी मांग है कि मौके पर टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनता की शिकायतों के साथ खिलवाड़ न हो सके।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा त्वरित समस्या समाधान का सबसे बड़ा माध्यम बताई जाने वाली मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जमीनी हकीकत पर हरदोई जिले के हरपालपुर क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत का समाधान किए बिना ही अधिकारियों ने उसे कागजों में निस्तारित दिखाकर शासन को गुमराह किया है। मामला हरपालपुर विकासखंड के एक गांव से संबंधित है, जहां ग्रामीणों ने लंबे समय से बनी नाली की गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों की उम्मीद के विपरीत, कथित तौर पर संबंधित ग्राम सचिव अभय प्रताप सिंह ने कार्यालय में बैठे-बैठे ही शिकायत पर एक फर्जी आख्या लगाकर उसे निस्तारित कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी नाली की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे गांव में जलभराव और गंदगी के कारण लोगों का जीवन दूभर हो गया है। मौके की तस्वीरें भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि शिकायत के बावजूद धरातल पर कोई कार्य नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी कार्यशैली से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का मज़ाक बना रहे हैं। वास्तविक निस्तारण करने के बजाय, फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामलों को बंद कर दिया जाता है, जिससे जनता का भरोसा लगातार कमज़ोर हो रहा है। ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाने और जांच में फर्जी आख्या लगाने की पुष्टि होने पर, संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, स्पष्टीकरण, प्रतिकूल प्रविष्टि और अनुशासनात्मक कार्यवाही की तलवार लटक सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई और उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनकी मांग है कि मौके पर टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनता की शिकायतों के साथ खिलवाड़ न हो सके।
- उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की अमृतपुर तहसील के मौजा अमैयापुर में एक जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। एक शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि उनकी जमीन पर कथित रूप से 10 वर्षों से अधिक समय से कब्जा है और कई बार शिकायत तथा राजस्व टीम की पैमाइश के बावजूद आज तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। प्रार्थना पत्र के अनुसार, गाटा संख्या 223, रकबा 0.166 हेक्टेयर भूमि खातेदार नरेंद्र पाल सिंह पुत्र रामपाल सिंह के नाम दर्ज है। आरोप है कि जमीन मालिक लंबे समय से गांव में नहीं रह रहे थे और जब वे वापस लौटे, तो उन्हें पता चला कि उनकी भूमि पर वर्षों से कथित रूप से कब्जा और अतिक्रमण कर लिया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीन पर अस्थायी व स्थायी निर्माण और अन्य सामग्री रखकर कब्जा बनाए रखा गया है। इस मामले में वर्ष 2025 के दौरान राजस्व विभाग की ओर से पैमाइश भी कराई गई थी और अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया गया था, लेकिन आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में दोबारा राजस्व अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण और पैमाइश की गई, फिर भी कथित कब्जा बरकरार है। शिकायतकर्ता ने मनजीत उर्फ बटेश्वर पुत्र मंत्रराम, सुनीता पत्नी घनश्याम और सुखपाल पुत्र जयराम सहित 7 कब्जे धारकों को नामजद करते हुए आरोप लगाया है कि दबंगई के कारण प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है। वर्तमान में शाहजहांपुर जनपद में निवास कर रहे पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री, डीएम और एसपी से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए अवैध कब्जा हटवाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। इस संबंध में, अमृतपुर के नायब तहसीलदार ने कहा है कि लेखपाल, कानूनगो और पुलिस फोर्स के साथ मौके पर जाकर कब्जा मुक्त कराया जाएगा और वे स्वयं भी इसमें शामिल रहेंगे।2
- एनसीसी संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर 36 का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस महत्वपूर्ण शिविर में कुल 500 कैडेट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जो विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।1
- नीम करोली बाबा की पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान दिनभर बाबा के जयकारे गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।1
- फर्रुखाबाद पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 125 खोए हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद किए गए इन मोबाइल फोनों का कुल मूल्य 28 लाख रुपये बताया गया है।1
- फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नगला मंहड गांव, पोस्ट मौढ़ा से देव चौधरी ने एक शिकायत की है। उन्होंने बताया कि गांव में मंदिर के पास और मंदिर परिसर में जानबूझकर पानी, गोबर और अन्य कूड़ा-करकट फैलाया जा रहा है, जिससे गंदगी का अंबार लग गया है। चौधरी के अनुसार, गांव के दबंग लोग जबरदस्ती मंदिर की भूमि पर कब्जा कर चुके हैं और उसी कब्ज़ाई हुई जमीन पर यह कूड़ा-गोबर डालते हैं। इस कृत्य से मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और अन्य लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए और मंदिर की भूमि पर कब्जा कर कूड़ा फैलाने वाले दबंगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।1
- शुरू ऐप अपने उपयोगकर्ताओं को हर पल की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने का अवसर देता है। इस माध्यम से, हर छोटी-बड़ी ख़बर की जानकारी तत्काल पाठकों तक पहुँचाई जाती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें लगातार अपडेट मिलती रहे।1
- नैमिषारण्य के गुरुकुल विद्यालय से अपहृत बाबरपुर निवासी एक छात्र के सकुशल बरामद होने के बाद उसकी आपबीती ने सभी को झकझोर दिया है। छात्र ने बताया कि कैसे एक अजनबी व्यक्ति ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने की कोशिश की और धीरे-धीरे उसे अपने कब्जे में ले लिया। छात्र के अनुसार, आरोपी ने शुरू में दोस्ताना व्यवहार कर उसका विश्वास जीता और फिर विभिन्न झांसे देकर उसे अपने साथ ले गया। बच्चे ने बताया कि वह उस व्यक्ति को पहले से नहीं जानता था, लेकिन उसकी बातों में आकर वह उसके साथ चला गया, जिसके बाद उसे एहसास हुआ कि वह गलत व्यक्ति के साथ फँस गया है। परिजनों और पुलिस की सक्रियता के कारण छात्र को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस घटना के बाद छात्र ने अन्य बच्चों और अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उसने सलाह दी कि किसी भी अजनबी व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें और यदि कोई व्यक्ति लालच देकर या बहाने से कहीं ले जाने की कोशिश करे, तो तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को सूचित करें। इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मत है कि अभिभावकों को बच्चों को नियमित रूप से "गुड टच-बैड टच", अजनबियों से उचित दूरी बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने के बारे में जागरूक करना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने भी लोगों से बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है, क्योंकि समय रहते सतर्कता ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।1
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा त्वरित समस्या समाधान का सबसे बड़ा माध्यम बताई जाने वाली मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जमीनी हकीकत पर हरदोई जिले के हरपालपुर क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत का समाधान किए बिना ही अधिकारियों ने उसे कागजों में निस्तारित दिखाकर शासन को गुमराह किया है। मामला हरपालपुर विकासखंड के एक गांव से संबंधित है, जहां ग्रामीणों ने लंबे समय से बनी नाली की गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों की उम्मीद के विपरीत, कथित तौर पर संबंधित ग्राम सचिव अभय प्रताप सिंह ने कार्यालय में बैठे-बैठे ही शिकायत पर एक फर्जी आख्या लगाकर उसे निस्तारित कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी नाली की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे गांव में जलभराव और गंदगी के कारण लोगों का जीवन दूभर हो गया है। मौके की तस्वीरें भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि शिकायत के बावजूद धरातल पर कोई कार्य नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी कार्यशैली से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का मज़ाक बना रहे हैं। वास्तविक निस्तारण करने के बजाय, फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामलों को बंद कर दिया जाता है, जिससे जनता का भरोसा लगातार कमज़ोर हो रहा है। ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाने और जांच में फर्जी आख्या लगाने की पुष्टि होने पर, संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, स्पष्टीकरण, प्रतिकूल प्रविष्टि और अनुशासनात्मक कार्यवाही की तलवार लटक सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगा। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई और उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनकी मांग है कि मौके पर टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में जनता की शिकायतों के साथ खिलवाड़ न हो सके।1