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सिरमौर तहसील की ग्राम पंचायत पड़री में दलित और आदिवासी किसान भाइयों की सैकड़ों एकड़ स्वामित्व वाली जमीन के सीमांकन में राजस्व विभाग के कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह जमीन कांग्रेस सरकार द्वारा गरीबों को 5-5 एकड़ के भूखंड के रूप में दी गई थी, जिस पर दलित और आदिवासी किसान खेती करके अपना जीवन यापन करते थे। यूथ कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार में यह जमीन गरीबों से छीनी जा रही है। यूथ कांग्रेस की टीम का कहना है कि वे ऐसा नहीं होने देंगे और जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उनके प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
उमेश पाठक सेमरिया रीवा
सिरमौर तहसील की ग्राम पंचायत पड़री में दलित और आदिवासी किसान भाइयों की सैकड़ों एकड़ स्वामित्व वाली जमीन के सीमांकन में राजस्व विभाग के कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह जमीन कांग्रेस सरकार द्वारा गरीबों को 5-5 एकड़ के भूखंड के रूप में दी गई थी, जिस पर दलित और आदिवासी किसान खेती करके अपना जीवन यापन करते थे। यूथ कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार में यह जमीन गरीबों से छीनी जा रही है। यूथ कांग्रेस की टीम का कहना है कि वे ऐसा नहीं होने देंगे और जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उनके प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
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- चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन के कारण सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई जा रही है, जहाँ सख्त जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद खुलेआम नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यह पूरा मामला राजापुर तहसील के मोरम खनन क्षेत्र 'तीर घुमाई गंगू खंड 3' से जुड़ा है। आरोप है कि एस एस मल्टीसिटी सर्विशेष के प्रोपराइटर सुरेंद्र शुक्ला ने खनन अधिनियम एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया है। खनन स्थलों से 100 से अधिक ओवरलोड ट्रकों और ट्रेलरों का भारी ट्रैफिक देखा जा रहा है, जहाँ हैवी वेट पोकलैंड मशीनों का उपयोग कर खनन किया जा रहा है। खनन स्थल से भंडारण स्थल तक मोरम परिवहन कर रहे ट्रकों का धर्मकांटा नहीं किया जाता, और कई ट्रक बिना नंबर प्लेट के ही अवैध रूप से परिवहन में संलिप्त हैं। इस अवैध गतिविधि में स्थानीय प्रशासन की संलिप्तता के गंभीर आरोप हैं, जिसके चलते प्रशासन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती कर रहा है और वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही है।3
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- सतना में विंध्य चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अशोक अग्रवाल के जनसंपर्क अभियान के दूसरे दिन व्यापारियों और नागरिकों का व्यापक उत्साह और जनसमर्थन देखने को मिला। अभियान की शुरुआत बिहारी चौक स्थित भगवान श्रीकृष्ण एवं हनुमान जी के दर्शन-पूजन और आशीर्वाद से हुई। इसके बाद अशोक अग्रवाल ने व्यापारियों, उद्यमियों और नागरिकों से संपर्क साधा, जहां उनका आत्मीय स्वागत किया गया और उन्हें समर्थन व आशीर्वाद प्रदान किया गया। जनसंपर्क के दौरान, अशोक अग्रवाल ने ज़ोर देकर कहा कि विंध्य चैंबर व्यापारियों की आवाज़ है। उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं में व्यापारिक हितों की रक्षा, समस्याओं का समाधान और उद्योग व व्यापार को नई दिशा देना बताया। अग्रवाल ने यह भी विश्वास दिलाया कि वे व्यापारी हितों के लिए लगातार संघर्षरत रहेंगे और चैंबर को अधिक सशक्त व प्रभावी बनाने का काम करेंगे। इस अभियान को मिल रहे अपार समर्थन ने चुनावी माहौल को और भी रोचक बना दिया है। उनके समर्थकों का मानना है कि अग्रवाल का अनुभव, सक्रियता और व्यापारिक वर्ग से गहरा जुड़ाव उन्हें अध्यक्ष पद का एक मज़बूत दावेदार बनाता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अशोक अग्रवाल बदलाव और जनप्रियता के साथ अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे हैं। 'आपका विश्वास, हमारी जिम्मेदारी' के संकल्प के साथ उनका जनसंपर्क अभियान आगे बढ़ रहा है और उन्हें मिल रहा जनसमर्थन उनकी दावेदारी को नई मज़बूती प्रदान कर रहा है।1
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- सतना जिले के सिलपरी में आयोजित श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर भव्य राम विवाह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाराती बने, जिन्होंने घोड़ा गाड़ी और आतिशबाजी के साथ धूमधाम से निकली राम बारात में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र 'जय सियाराम' के उद्घोष से गूंज उठा।1
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- मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्रामीण इलाकों में एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र स्कूल जाने की है, खुद को उत्तर प्रदेश के बरगढ़ क्षेत्र का बताकर गाँव-गाँव में गठिया और वात रोग की दवाएं बेचते हुए दिख रहे हैं। इन बच्चों के साथ कौन लोग जुड़े हैं, वे किस कंपनी या संस्था की दवा बेच रहे हैं, और इन दवाओं की गुणवत्ता व वैधता का सत्यापन हुआ है या नहीं, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। न ही इन बच्चों के पास कोई लाइसेंस, अनुमति या स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति होने की बात सामने आई है। यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग वात और गठिया से पीड़ित हैं और बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण या सरकारी निगरानी के ये दवाएं बेची जा रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े विभाग इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं, जबकि ठगी, चोरी और संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ते मामलों के बीच ऐसे प्रकरणों की जांच और सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। जनता प्रशासन से मांग कर रही है कि इन बच्चों, उनके संचालकों और उनके द्वारा बेची जा रही दवाओं की तत्काल जांच की जाए। यह मामला बाल श्रम से भी जुड़ा है, जहाँ बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन वे दवाएं बेचने के लिए सड़कों पर घूम रहे हैं। बाल अधिकारों की रक्षा का दावा करने वाला बाल आयोग भी इस विषय पर मौन है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।1