गीडा में होटल-स्पा की आड़ में ‘काला कारोबार’ का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल* * गोरखपुर/गीडा। गीडा के पिपरौली चौकी क्षेत्र और खासकर सेक्टर-22 में संचालित कुछ होटल, रेस्टोरेंट और स्पा सेंटर एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सवालों के घेरे में हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से यहां लंबे समय से होटल और स्पा सेंटरों की आड़ में कथित रूप से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सवाल अब सिर्फ कारोबार पर नहीं, बल्कि उन जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी उठ रहा है, जिनकी निगरानी में यह पूरा क्षेत्र आता है। *नोटिस, कार्रवाई और फिर वही कहानी* बताया जाता है कि पूर्व में गीडा प्राधिकरण के तत्कालीन एसीओ की ओर से करीब दो दर्जन से अधिक होटल संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ होटल संचालक थोड़े समय बाद फिर से अपने प्रतिष्ठान संचालित करने में सफल रहे। यही स्थिति सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है—अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं हुई? और अगर सब कुछ नियमानुसार है तो बार-बार शिकायतें आखिर क्यों सामने आ रही हैं?सेक्टर-22 पर क्यों नहीं लग पा रहा ‘ब्रेक’? ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर-22 में पिछले कुछ वर्षों के दौरान होटल और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई और छापेमारी की बात भी सामने आई, जबकि कुछ होटल संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने और जेल जाने की बातें भी कही जाती रही हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। यानी सवाल यह नहीं कि कार्रवाई हुई या नहीं, सवाल यह है कि कार्रवाई का असर आखिर कितने दिन रहा? *‘सर्विस’ के नाम पर हजारों रुपये वसूली का आरोप* स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ होटलों में कमरा लेने के बाद कथित रूप से अलग-अलग ‘सर्विस’ के नाम पर 2,000 से 5,000 रुपये तक अतिरिक्त रकम मांगी जाती है।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि ऐसी शिकायतें सही हैं तो यह केवल अनैतिक गतिविधियों का मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं से कथित अवैध वसूली और संबंधित नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय बन सकता है। *वायरल वीडियो और ‘सूत्रों’ के दावों ने बढ़ाए सवाल* क्षेत्र में समय-समय पर वायरल वीडियो और स्थानीय सूत्रों के दावों के जरिए होटल व स्पा सेंटरों में कथित अनियमितताओं की बातें सामने आती रही हैं। कुछ सूत्र जिम्मेदारों तक कथित रूप से रकम पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाते हैं। यू लेकिन यही वह बिंदु है जहां जांच की सबसे ज्यादा जरूरत है।यदि किसी होटल संचालक द्वारा किसी अधिकारी या कर्मचारी को अवैध रकम दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं बिना ठोस प्रमाण किसी व्यक्ति या विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना भी उचित नहीं होगा। *एक निलंबित सिपाही का मामला भी बना नजीर* होटल से जुड़े मामलों में कथित धनउगाही को लेकर एक पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई और बर्खास्तगी की घटना पहले सामने आ चुकी है। इसके बावजूद यदि उसी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं तो यह पुलिस व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। क्या एक कार्रवाई के बाद पूरा तंत्र सक्रिय हुआ था, या मामला कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद फिर ठंडे बस्ते में चला गया? *अंशिका सिंह समेत अन्य घटनाओं के तार गीडा से जोड़ने के दावे* हाल में सामने आए अंशिका सिंह प्रकरण को लेकर भी गीडा क्षेत्र से कथित कनेक्शन की बातें कही जा रही हैं। इसी तरह गोरखनाथ थाना क्षेत्र की एक अन्य घटना के तार भी गीडा से जुड़े होने के दावे किए जा रहे हैं।इन मामलों में वास्तविक तथ्य क्या हैं, यह जांच का विषय है। लेकिन यदि अलग-अलग गंभीर घटनाओं में बार-बार एक ही क्षेत्र का नाम सामने आ रहा है तो पुलिस-प्रशासन के लिए यह महज संयोग मानकर आगे बढ़ जाने का विषय नहीं होना चाहिए। आखिर खिलाड़ी कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है— *क्या गीडा प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था कमजोर है* क्या स्थानीय पुलिस को गतिविधियों की जानकारी नहीं? *क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव है?* या फिर कुछ प्रभावशाली लोगों की वजह से कार्रवाई के बाद भी अवैध कारोबार दोबारा खड़ा हो जाता है? इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकता है। *‘एक्शन’ नहीं, अब चाहिए स्थायी समाधान* जरूरत सिर्फ छापेमारी की नहीं है। यदि किसी होटल या स्पा सेंटर में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा, भवन मानचित्र, व्यापारिक अनुमति, होटल संचालन की वैधता और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही हैं, उनकी गतिविधियों की निष्पक्ष निगरानी और नियमित सत्यापन जरूरी है। क्योंकि सवाल किसी एक होटल, किसी एक अधिकारी या किसी एक विभाग का नहीं है—सवाल गीडा की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। *अब जिम्मेदारों से जनता का सीधा सवाल* अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है तो शिकायतों और आरोपों की जांच सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं होती?अगर अवैध गतिविधियां हो रही हैं तो कार्रवाई के बाद वे दोबारा कैसे शुरू हो जाती हैं? और अगर किसी स्तर पर संरक्षण या मिलीभगत के आरोप हैं तो उसकी जांच कौन करेगा?गीडा के सेक्टर-22 में उठते इन सवालों का जवाब अब सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच दे सकती है। *फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है* गीडा में होटल-स्पा की आड़ में कथित काले कारोबार का खेल आखिर कब खत्म होगा और इसके पीछे छिपे असली चेहरे कब सामने आएंगे?”वहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा अनुज मलिक ने कहा कि मामले की जांच कराकर कार्यवाही किया जाएगा।
गीडा में होटल-स्पा की आड़ में ‘काला कारोबार’ का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल* * गोरखपुर/गीडा। गीडा के पिपरौली चौकी क्षेत्र और खासकर सेक्टर-22 में संचालित कुछ होटल, रेस्टोरेंट और स्पा सेंटर एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सवालों के घेरे में हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से यहां लंबे समय से होटल और स्पा सेंटरों की आड़ में कथित रूप से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सवाल अब सिर्फ कारोबार पर नहीं, बल्कि उन जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी उठ रहा है, जिनकी निगरानी में यह पूरा क्षेत्र आता है। *नोटिस, कार्रवाई और फिर वही कहानी* बताया जाता है कि पूर्व में गीडा प्राधिकरण के तत्कालीन एसीओ की ओर से करीब दो दर्जन से अधिक होटल संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ होटल संचालक थोड़े समय बाद फिर से अपने प्रतिष्ठान संचालित करने में सफल रहे। यही स्थिति सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है—अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था तो कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं हुई? और अगर सब कुछ नियमानुसार है तो बार-बार शिकायतें आखिर क्यों सामने आ रही हैं?सेक्टर-22 पर क्यों नहीं लग पा रहा ‘ब्रेक’? ट्रांसपोर्ट नगर सेक्टर-22 में पिछले कुछ वर्षों के दौरान होटल और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई और छापेमारी की बात भी सामने आई, जबकि कुछ होटल संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने और जेल जाने की बातें भी कही जाती रही हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। यानी सवाल यह नहीं कि कार्रवाई हुई या नहीं, सवाल यह है कि कार्रवाई का असर आखिर कितने दिन रहा? *‘सर्विस’ के नाम पर हजारों रुपये वसूली का आरोप* स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ होटलों में कमरा लेने के बाद कथित रूप से अलग-अलग ‘सर्विस’ के नाम पर 2,000 से 5,000 रुपये तक अतिरिक्त रकम मांगी जाती है।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि ऐसी शिकायतें सही हैं तो यह केवल अनैतिक गतिविधियों का मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं से कथित अवैध वसूली और संबंधित नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय बन सकता है। *वायरल वीडियो और ‘सूत्रों’ के दावों ने बढ़ाए सवाल* क्षेत्र में समय-समय पर वायरल वीडियो और स्थानीय सूत्रों के दावों के जरिए होटल व स्पा सेंटरों में कथित अनियमितताओं की बातें सामने आती रही हैं। कुछ सूत्र जिम्मेदारों तक कथित रूप से रकम पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाते हैं। यू लेकिन यही वह बिंदु है जहां जांच की सबसे ज्यादा जरूरत है।यदि किसी होटल संचालक द्वारा किसी अधिकारी या कर्मचारी को अवैध रकम दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं बिना ठोस प्रमाण किसी व्यक्ति या विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना भी उचित नहीं होगा। *एक निलंबित सिपाही का मामला भी बना नजीर* होटल से जुड़े मामलों में कथित धनउगाही को लेकर एक पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई और बर्खास्तगी की घटना पहले सामने आ चुकी है। इसके बावजूद यदि उसी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं तो यह पुलिस व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। क्या एक कार्रवाई के बाद पूरा तंत्र सक्रिय हुआ था, या मामला कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद फिर ठंडे बस्ते में चला गया? *अंशिका सिंह समेत अन्य घटनाओं के तार गीडा से जोड़ने के दावे* हाल में सामने आए अंशिका सिंह प्रकरण को लेकर भी गीडा क्षेत्र से कथित कनेक्शन की बातें कही जा रही हैं। इसी तरह गोरखनाथ थाना क्षेत्र की एक अन्य घटना के तार भी गीडा से जुड़े होने के दावे किए जा रहे हैं।इन मामलों में वास्तविक तथ्य क्या हैं, यह जांच का विषय है। लेकिन यदि अलग-अलग गंभीर घटनाओं में बार-बार एक ही क्षेत्र का नाम सामने आ रहा है तो पुलिस-प्रशासन के लिए यह महज संयोग मानकर आगे बढ़ जाने का विषय नहीं होना चाहिए। आखिर खिलाड़ी कौन? सबसे बड़ा सवाल यही है— *क्या गीडा प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था कमजोर है* क्या स्थानीय पुलिस को गतिविधियों की जानकारी नहीं? *क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव है?* या फिर कुछ प्रभावशाली लोगों की वजह से कार्रवाई के बाद भी अवैध कारोबार दोबारा खड़ा हो जाता है? इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकता है। *‘एक्शन’ नहीं, अब चाहिए स्थायी समाधान* जरूरत सिर्फ छापेमारी की नहीं है। यदि किसी होटल या स्पा सेंटर में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा, भवन मानचित्र, व्यापारिक अनुमति, होटल संचालन की वैधता और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही हैं, उनकी गतिविधियों की निष्पक्ष निगरानी और नियमित सत्यापन जरूरी है। क्योंकि सवाल किसी एक होटल, किसी एक अधिकारी या किसी एक विभाग का नहीं है—सवाल गीडा की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। *अब जिम्मेदारों से जनता का सीधा सवाल* अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है तो शिकायतों और आरोपों की जांच सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं होती?अगर अवैध गतिविधियां हो रही हैं तो कार्रवाई के बाद वे दोबारा कैसे शुरू हो जाती हैं? और अगर किसी स्तर पर संरक्षण या मिलीभगत के आरोप हैं तो उसकी जांच कौन करेगा?गीडा के सेक्टर-22 में उठते इन सवालों का जवाब अब सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच दे सकती है। *फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है* गीडा में होटल-स्पा की आड़ में कथित काले कारोबार का खेल आखिर कब खत्म होगा और इसके पीछे छिपे असली चेहरे कब सामने आएंगे?”वहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा अनुज मलिक ने कहा कि मामले की जांच कराकर कार्यवाही किया जाएगा।
- हनुमान मंदिर पर भंडारे का आयोजन, श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह गोरखपुर के पाली क्षेत्र में नगर पंचायत घघसरा स्थित हनुमान गोरखपुर के पाली क्षेत्र में नगर पंचायत घघसरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में मंगलवार को भंडारे का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं श्रद्धा के इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं और आसपास के लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला। भंडारे के शुभ अवसर पर हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण शुरू किया गया। जैसे-जैसे भंडारे की जानकारी लोगों को हुई, वैसे-वैसे मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। आयोजकों और सहयोगियों की ओर से श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया गया। लोगों ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक आयोजन की सराहना की। भंडारे में स्थानीय लोगों के साथ युवाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर सेवा कार्य किया और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया। मंदिर परिसर में पूरे समय श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर डुमरी के अध्यापक सौरभ राज, अनिल राज, सौरभ राज, सतीश चौबे, प्रदीप वर्मा, राजेश, बड़कू अग्रहरि, ऋषभ राज, राकेश विश्वकर्मा, रमेश प्रधान तथा लाभजनक मौर्य सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने भंडारे के आयोजन में अपना सहयोग दिया और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण में सहभागिता की। आयोजकों ने कहा कि धार्मिक आयोजनों और भंडारे का उद्देश्य केवल प्रसाद वितरण करना ही नहीं, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा, सेवा और सद्भाव की भावना को मजबूत करना भी है। ऐसे आयोजनों से लोगों को एक साथ आने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का अवसर मिलता है। भंडारे में शामिल श्रद्धालुओं ने हनुमान जी का दर्शन-पूजन कर प्रसाद ग्रहण किया तथा आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। देर तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।3
- मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान पर नेहा बोहरा के खिलाफ FIR की मांग सहजनवां/गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक, मानहानिकारक और भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत त्रिपाठी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल मीडिया पर प्रसारित संबंधित वीडियो और पोस्ट को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कराने की भी मांग की है। शिकायत के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को एक सार्वजनिक सभा के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोहरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबंध में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त बयान सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ, जिससे सार्वजनिक शांति और सामाजिक सद्भाव प्रभावित होने की आशंका है। प्रशांत त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि बयान में मुख्यमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के साथ ‘योगी’ और ‘भगवा वस्त्र’ जैसे धार्मिक प्रतीकों को भी कथित रूप से अपमानजनक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 299 और 352 के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र में पुलिस से मांग की गई है कि मामले की तत्काल जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए तथा सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को संरक्षित किया जाए। साथ ही जांच के दौरान सामने आने वाली अन्य संबंधित धाराओं में भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह जांच में पुलिस को आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार हैं और प्रकरण में की गई कार्रवाई की लिखित रूप से जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान पर नेहा बोहरा के खिलाफ FIR की मांग, अधिवक्ता प्रशांत त्रिपाठी ने एसएसपी को सौंपा शिकायत प्रार्थना-पत्र सहजनवां/गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक, मानहानिकारक और भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत त्रिपाठी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल मीडिया पर प्रसारित संबंधित वीडियो और पोस्ट को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कराने की भी मांग की है। शिकायत के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को एक सार्वजनिक सभा के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोहरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबंध में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त बयान सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ, जिससे सार्वजनिक शांति और सामाजिक सद्भाव प्रभावित होने की आशंका है। प्रशांत त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि बयान में मुख्यमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के साथ ‘योगी’ और ‘भगवा वस्त्र’ जैसे धार्मिक प्रतीकों को भी कथित रूप से अपमानजनक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 299 और 352 के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र में पुलिस से मांग की गई है कि मामले की तत्काल जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए तथा सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को संरक्षित किया जाए। साथ ही जांच के दौरान सामने आने वाली अन्य संबंधित धाराओं में भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह जांच में पुलिस को आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार हैं और प्रकरण में की गई कार्रवाई की लिखित रूप से जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। सहजनवां/गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक, मानहानिकारक और भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत त्रिपाठी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर को शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल मीडिया पर प्रसारित संबंधित वीडियो और पोस्ट को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कराने की भी मांग की है। शिकायत के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को एक सार्वजनिक सभा के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोहरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबंध में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त बयान सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ, जिससे सार्वजनिक शांति और सामाजिक सद्भाव प्रभावित होने की आशंका है। प्रशांत त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि बयान में मुख्यमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के साथ ‘योगी’ और ‘भगवा वस्त्र’ जैसे धार्मिक प्रतीकों को भी कथित रूप से अपमानजनक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 299 और 352 के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र में पुलिस से मांग की गई है कि मामले की तत्काल जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए तथा सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को संरक्षित किया जाए। साथ ही जांच के दौरान सामने आने वाली अन्य संबंधित धाराओं में भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह जांच में पुलिस को आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार हैं और प्रकरण में की गई कार्रवाई की लिखित रूप से जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।1
- प्रेमी को छुड़ाने थाने पहुंची शादीशुदा महिला, साथ जाने की जिद पर अड़ी संभल, उत्तर प्रदेश: रजपुरा थाना क्षेत्र में प्रेम-प्रसंग से जुड़ा एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक शादीशुदा महिला ने रात के समय अपने प्रेमी को घर बुलाया। इसी दौरान परिजनों को दोनों के बारे में जानकारी हो गई और उन्होंने दोनों को पकड़ लिया। परिजनों द्वारा दोनों के साथ मारपीट किए जाने का आरोप है। इसके बाद प्रेमी को पुलिस के हवाले कर दिया गया। मामला सामने आने के अगले दिन महिला अपने प्रेमी को छुड़ाने के लिए थाने पहुंच गई। बताया जा रहा है कि महिला थाने में अपने प्रेमी के साथ जाने की जिद पर अड़ गई। इस दौरान काफी देर तक मामला चर्चा का विषय बना रहा। आरोप है कि बाद में महिला के परिजन उसे थाने के बाहर से अपने साथ ले गए। जानकारी के मुताबिक महिला का पति दिल्ली में मजदूरी करता है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर पुलिस की ओर से जांच की जा रही है। महिला और उसके प्रेमी के संबंध में सामने आए दावों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।1
- राष्ट्रवादी पार्टी जिंदाबाद माननीय अखिलेश सिंह जिंदाबाद1
- गोरखपुर में महंगाई-बेरोजगारी के खिलाफ पीस पार्टी का हल्लाबोल | राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन | Attaullah Shahi1
- श्मशान घाट बना मौत का रास्ता: अंतिम संस्कार में पहुंचे तीन लोग करंट की चपेट में, बिजली विभाग की लापरवाही पर फूटा गुस्सा* सिकरीगंज/गोरखपुर। सिकरीगंज थाना क्षेत्र के हरपुर गांव में सोमवार को एक अंतिम यात्रा उस समय दहशत में बदल गई, जब श्मशान घाट जाने वाले रास्ते पर गिरे बिजली के पोल और करंट दौड़ रहे तार की चपेट में तीन लोग आ गए। ग्रामीणों की तत्परता से तीनों की जान बच गई, लेकिन घटना ने बिजली विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हरपुर निवासी अवधेश गुप्ता पुत्र शकल गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में विदेश यात्रा के दौरान मौत हो गई थी। उनका शव गांव पहुंचने के बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए सिकरीगंज के श्मशान घाट पहुंचे। आरोप है कि श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता झाड़-झंखाड़ से पटा था और बीच रास्ते में बिजली का पोल व तार जमीन पर गिरा पड़ा था। रास्ता साफ करने के प्रयास में शिवकुमार (55) पुत्र रामदास, महेंद्र गुप्ता (30) पुत्र शिवनाथ और हरिनंदन गुप्ता (35) पुत्र शिवकुमार गुप्ता करंट की चपेट में आ गए। तीनों को तड़पता देख अंतिम यात्रा में शामिल लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने लकड़ी और डंडों की मदद से उन्हें तार से अलग कर सुरक्षित बाहर निकाला। घटना की सूचना मिलते ही बिजली विभाग को जानकारी दी गई, जिसके बाद तत्काल बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद कर्मचारियों को गिरे हुए पोल और तार को ठीक करने के लिए भेजा गया। *अधिशासी अभियंता बोले* अधिशासी अभियंता सत्येंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही लाइन कटवा दी गई थी और गिरे हुए पोल व बिजली के तार को तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। *ग्रामीणों का आरोप* ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते लोगों ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती, तो अंतिम यात्रा में बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने श्मशान घाट तक सुरक्षित रास्ता और बिजली विभाग की लापरवाही की जांच कर कार्रवाई की मांग की।1
- आखिर सड़को पर भिखारी क्यो बने भाजपा विद्यायक,मुंबई की सड़कों पर क्या दिखा नजारा,5000 करोड़ के है मालिक..! आखिर सड़को पर भिखारी क्यो बने भाजपा विद्यायक,मुंबई की सड़कों पर क्या दिखा नजारा,5000 करोड़ के है मालिक..!1
- विवेचना कर लौट रहे थे दोनों पुलिसकर्मी, अचानक सामने आई बकरी से अनियंत्रित हुई बाइक सहजनवा, गोरखपुर। थाना सहजनवा में तैनात उपनिरीक्षक (एसआई) भवानी फर और कांस्टेबल गुरु प्रसाद मंगलवार को एक मामले की विवेचना के सिलसिले में ग्राम सभा मडर गए थे। विवेचना पूरी करने के बाद दोनों पुलिसकर्मी बाइक से वापस सहजनवा थाने लौट रहे थे। इसी दौरान सहजनवा-बखिरा मार्ग पर अचानक एक बकरी बाइक के सामने आ गई। बकरी को बचाने के प्रयास में बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई। हादसा इतना तेज था कि बाइक से गिरने के कारण एसआई भवानी फर के पैर में गंभीर चोट लग गई और पैर में फ्रैक्चर हो गया। वहीं कांस्टेबल गुरु प्रसाद के हाथ और पैर में चोट आई है। बाइक की चपेट में आने से बकरी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मार्ग पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और घायलों की मदद में जुट गए। देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर अन्य पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचे और दोनों घायल पुलिसकर्मियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों पुलिसकर्मी खतरे से बाहर हैं, हालांकि एसआई भवानी फर के पैर में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें विशेष उपचार की आवश्यकता बताई गई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी ली। पुलिस ने मृत बकरी के शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सहजनवा-बखिरा मार्ग पर कई स्थानों पर आवारा पशुओं का सड़क पर विचरण करना आम बात है। अचानक पशुओं के सड़क पर आ जाने से वाहन चालकों को उन्हें बचाने में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क पर घूमने वाले आवारा पशुओं पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।4