भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का वैवाहिक रिश्ता खत्म, 9 साल बाद कोर्ट ने दी तलाक को मंजूरी प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : मध्य प्रदेश के शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी अब वैवाहिक रिश्ते में नहीं हैं। अनूपपुर जिले के राजेंद्र ग्राम स्थित जिला न्यायालय ने दोनों की सहमति के बाद विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी है। बताया गया है कि यह डिक्री 3 सितंबर 2026 को पारित हुई। दोनों का विवाह 23 नवंबर 2017 को पुष्पराजगढ़ में हुआ था। बताया जाता है कि विवाह के शुरुआती वर्षों में दोनों का पारिवारिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। याचिका में हिमाद्री सिंह की ओर से कहा गया कि समय के साथ विवाद बढ़ते गए और दोनों ने अलग-अलग रहना शुरू कर दिया। वर्ष 2021 से दोनों के अलग रहने की बात भी सामने आई है। राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो हिमाद्री सिंह ने अपने पिता एवं पूर्व सांसद दलवीर सिंह की राजनीतिक विरासत के साथ कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की थी। वर्ष 2016 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें भाजपा के तत्कालीन मंत्री ज्ञान सिंह से हार मिली। वर्ष 2017 में नरेंद्र मरावी से विवाह के बाद हिमाद्री सिंह भाजपा में शामिल हुईं। वर्ष 2019 में भाजपा ने उन्हें शहडोल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद वह लगातार लोकसभा चुनाव जीतती रहीं। दोनों के बीच मतभेद की वजह को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आती रही हैं। कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक गतिविधियों और कामकाज में हस्तक्षेप को लेकर मतभेद की बात कही जाती रही है, हालांकि तलाक का वास्तविक कानूनी आधार न्यायालय के दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों से ही स्पष्ट माना जाएगा। याचिका में हिमाद्री सिंह ने अपनी बेटी गिरिशा कुमारी सिंह को अपने साथ रखने की बात कही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों के बीच गुजारा भत्ता, आभूषण या संपत्ति को लेकर किसी विवाद की बात सामने नहीं आई है। इस तरह करीब नौ वर्ष चले वैवाहिक रिश्ते का अब कानूनी रूप से अंत हो गया है।
भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का वैवाहिक रिश्ता खत्म, 9 साल बाद कोर्ट ने दी तलाक को मंजूरी प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : मध्य प्रदेश के शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी अब वैवाहिक रिश्ते में नहीं हैं। अनूपपुर जिले के राजेंद्र ग्राम स्थित जिला न्यायालय ने दोनों की सहमति के बाद विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी है। बताया गया है कि यह डिक्री 3 सितंबर 2026 को पारित हुई। दोनों का विवाह 23 नवंबर 2017 को पुष्पराजगढ़ में हुआ था। बताया जाता है कि विवाह के शुरुआती वर्षों में दोनों का पारिवारिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। याचिका में हिमाद्री सिंह की ओर से कहा गया कि समय के साथ विवाद बढ़ते गए और दोनों ने अलग-अलग रहना शुरू कर दिया। वर्ष 2021 से दोनों के अलग रहने की बात भी सामने आई है। राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो हिमाद्री सिंह ने अपने पिता एवं पूर्व सांसद दलवीर सिंह की राजनीतिक विरासत के साथ कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की थी। वर्ष 2016 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें भाजपा के तत्कालीन मंत्री ज्ञान सिंह से हार मिली। वर्ष 2017 में नरेंद्र मरावी से विवाह के बाद हिमाद्री सिंह भाजपा में शामिल हुईं। वर्ष 2019 में भाजपा ने उन्हें शहडोल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद वह लगातार लोकसभा चुनाव जीतती रहीं। दोनों के बीच मतभेद की वजह को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आती रही हैं। कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक गतिविधियों और कामकाज में हस्तक्षेप को लेकर मतभेद की बात कही जाती रही है, हालांकि तलाक का वास्तविक कानूनी आधार न्यायालय के दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों से ही स्पष्ट माना जाएगा। याचिका में हिमाद्री सिंह ने अपनी बेटी गिरिशा कुमारी सिंह को अपने साथ रखने की बात कही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों के बीच गुजारा भत्ता, आभूषण या संपत्ति को लेकर किसी विवाद की बात सामने नहीं आई है। इस तरह करीब नौ वर्ष चले वैवाहिक रिश्ते का अब कानूनी रूप से अंत हो गया है।
- चेहराकलां प्रखंड में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा पूजा, पंडित ऋषभ पाठक ने बताया महत्व चेहराकलां प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना श्रद्धा और उत्साह के साथ की गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रतिष्ठानों, कार्यस्थलों, दुकानों, वर्कशॉप, औद्योगिक इकाइयों एवं अन्य स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की गई। पूरे क्षेत्र में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा। पूजा को लेकर सुबह से ही लोगों में उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर अपने कार्यस्थल, मशीनरी एवं औजारों की भी पूजा की। कई स्थानों पर प्रसाद वितरण और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंडित ऋषभ पाठक ने विश्वकर्मा पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों का निर्माण किया था। भगवान विश्वकर्मा की पूजा विशेष रूप से निर्माण, शिल्प, तकनीक, मशीनरी और औजारों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रम, कौशल, तकनीक और सृजन के प्रति सम्मान का पर्व भी है। इस दिन लोग अपने औजारों और मशीनों की पूजा कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं तथा कार्य में सफलता, उन्नति और समृद्धि की कामना करते हैं। प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में पूजा को लेकर लोगों ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया। श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा से सुख-समृद्धि और कार्यों में निरंतर प्रगति की कामना की। देर शाम तक पूजा पंडालों और विभिन्न आयोजन स्थलों पर लोगों की आवाजाही बनी रही।3
- टीवीएस, के,राधा कृष्ण शोरूम का भावी उद्घाटन समारोह हाजीपुर ,गदाई सराय हाई स्कूल के सामने चंद्रलेय लालगंज रोड // टीवीएस, के,राधा कृष्ण शोरूम का भावी उद्घाटन समारोह हाजीपुर ,गदाई सराय हाई स्कूल के सामने चंद्रलेय लालगंज रोड //1
- बिहार में श्रद्धा के साथ आज होगी भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : विश्वकर्मा पूजा को लेकर गुरुवार को बिहार के विभिन्न शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों के बाजारों में सुबह से ही उत्सवी माहौल देखने को मिला। छोटे-बड़े चौक-चौराहों से लेकर प्रमुख बाजारों तक भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर लोगों में खासा उत्साह नजर आया। पूजा सामग्री, सजावट के सामान, भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर, प्रसाद, कपड़े और गिफ्ट की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही। पूजा को लेकर कई स्थानों पर दुकानों, गैरेज, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। सुबह से ही श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा एवं तस्वीर के समक्ष विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते नजर आए। इस दौरान कई जगहों पर प्रसाद वितरण भी किया गया। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला और तकनीकी कार्यों का आराध्य देव माना जाता है। इसी कारण मोटर संचालक, चालक, मैकेनिक, गैरेज संचालक, लोहे से संबंधित व्यवसायी, कारीगर, कल-कारखानों से जुड़े लोग तथा विभिन्न तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के बीच विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। पूजा को लेकर बाजारों में हुई खरीदारी से कारोबारियों के चेहरे पर भी खुशी नजर आई। लोगों ने अपने प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर सुख-समृद्धि, उन्नति और व्यवसाय में वृद्धि की कामना के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा की। पूरे दिन कई स्थानों पर भक्तिमय वातावरण बना रहा।1
- राजस्व अभिलेख भवन की स्थिति काफी जर्जर अवस्था में, पीपल के पेड़ से क्षतिग्रस्त होने की संभावना से इंकार नहीं प्रखंड सह अंचल कार्यालय चेहराकलां के प्रागंण में राजस्व अभिलेख भवन की स्थिति मरम्मती के अभाव में जर्जर हालत में पहुंची।भवन पर पीपल का पेड़ कभी भी क्षतिग्रस्त कर सकतीं हैं।इस मामले में राजस्व अधिकारी कुमार गौरव ने बताया कि पीपल के पेड़ को कटवा दिया जायेगा।पर भवन के जीर्णोद्धार के लिए अंचलाधिकारी को लिखा गया है। इसके आलोक में अंचलाधिकारी अनील कुमार ने बताया कि पीपल के कटवाया दिया जायेगा।पर भवन को जीर्णोद्धार के पत्राचार करने की बात कही।1
- महंत गिरजानंदन भगत की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता पहुंचे1
- पुल टूटा, 6 महीने से इंतजार! लोहे का हिसाब कौन देगा? रास्ता नहीं, जनता परेशान! नया पुल आखिर कब बनेगा? #BiharNews #Muzaffarpur #Aurai #GroundReport #PublicIssue #ViralVideo #BiharNews #WorldBiharNews1
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