मध्य प्रदेश के कटनी जिले स्थित बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री नियमों के खुलेआम उल्लंघन को लेकर स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। तेज रफ्तार ओवरलोड वाहनों के आतंक और लगातार मंडरा रहे हादसों के खतरे से परेशान बड़वारा के जागरूक नागरिकों और युवाओं ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए बड़वारा तहसीलदार और थाना प्रभारी को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन सौंपते हुए, आंदोलन की अगुवाई कर रहे जय सूर्यवंशी ने स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग पर सीधे व गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा नो-एंट्री का समय निर्धारित करना केवल कागजी खानापूर्ति है, क्योंकि जमीनी हकीकत में भारी डंपर, ट्रक और विशालकाय ट्राले बेधड़क और पूरी रफ्तार से बस्ती के बीच से गुजर रहे हैं। जय सूर्यवंशी ने आरोप लगाया कि इन वाहनों को रोकने वाला कोई नहीं है, जिससे साफ है कि नियमों को ताक पर रखकर इन वाहन मालिकों को शह दी जा रही है। उन्होंने पूर्व में हुए कई 'हृदयविदारक' और बड़े सड़क हादसों का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या प्रशासन किसी और बड़ी 'लाश गिरने' का इंतजार कर रहा है। उनके अनुसार, आबादी वाले क्षेत्र में इन भारी वाहनों की अमानवीय रफ्तार के कारण सड़कों पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जान हमेशा खतरे में रहती है। ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों में बड़वारा बस्ती के प्रवेश और निकास द्वारों पर तुरंत 'नो-एंट्री' के बड़े साइन बोर्ड लगाने, नो-एंट्री के समय को कड़ाई से लागू करवाने के लिए मुख्य चौराहों पर स्थायी पुलिस बल तैनात करने और आबादी वाले क्षेत्र में क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर सख्त कानूनी व चालानी कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में प्रशासन को साफ चेतावनी दी गई है कि यदि एक दिवस (२४ घंटे) के भीतर इस जानलेवा ट्रैफिक पर रोक नहीं लगी और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखी, तो बड़वारा की जनता अपनी आत्मरक्षा के लिए उग्र आंदोलन, धरना प्रदर्शन और चक्काजाम करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस दौरान जय सूर्यवंशी, नागेन्द्र अहिरवार, रामखिलवान, अनुज, धनेंद्र सहित भारी संख्या में स्थानीय युवा और बड़वारा बस्ती के पीड़ित नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
मध्य प्रदेश के कटनी जिले स्थित बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री नियमों के खुलेआम उल्लंघन को लेकर स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। तेज रफ्तार ओवरलोड वाहनों के आतंक और लगातार मंडरा रहे हादसों के खतरे से परेशान बड़वारा के जागरूक नागरिकों और युवाओं ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए बड़वारा तहसीलदार और थाना प्रभारी को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन सौंपते हुए, आंदोलन की अगुवाई कर रहे जय सूर्यवंशी ने स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग पर सीधे व गंभीर
आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा नो-एंट्री का समय निर्धारित करना केवल कागजी खानापूर्ति है, क्योंकि जमीनी हकीकत में भारी डंपर, ट्रक और विशालकाय ट्राले बेधड़क और पूरी रफ्तार से बस्ती के बीच से गुजर रहे हैं। जय सूर्यवंशी ने आरोप लगाया कि इन वाहनों को रोकने वाला कोई नहीं है, जिससे साफ है कि नियमों को ताक पर रखकर इन वाहन मालिकों को शह दी जा रही है। उन्होंने पूर्व में हुए कई 'हृदयविदारक' और बड़े सड़क हादसों का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या प्रशासन किसी और बड़ी 'लाश गिरने'
का इंतजार कर रहा है। उनके अनुसार, आबादी वाले क्षेत्र में इन भारी वाहनों की अमानवीय रफ्तार के कारण सड़कों पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जान हमेशा खतरे में रहती है। ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों में बड़वारा बस्ती के प्रवेश और निकास द्वारों पर तुरंत 'नो-एंट्री' के बड़े साइन बोर्ड लगाने, नो-एंट्री के समय को कड़ाई से लागू करवाने के लिए मुख्य चौराहों पर स्थायी पुलिस बल तैनात करने और आबादी वाले क्षेत्र में क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर सख्त कानूनी व चालानी कार्रवाई करने की मांग
की है। ज्ञापन में प्रशासन को साफ चेतावनी दी गई है कि यदि एक दिवस (२४ घंटे) के भीतर इस जानलेवा ट्रैफिक पर रोक नहीं लगी और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखी, तो बड़वारा की जनता अपनी आत्मरक्षा के लिए उग्र आंदोलन, धरना प्रदर्शन और चक्काजाम करने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस दौरान जय सूर्यवंशी, नागेन्द्र अहिरवार, रामखिलवान, अनुज, धनेंद्र सहित भारी संख्या में स्थानीय युवा और बड़वारा बस्ती के पीड़ित नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
- पूरे बिहार राज्य में ईद-उल-अज़हा का त्योहार अमन, भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंत्री मोo जमा खान ने पूरे बिहार परिवार की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री Samrat Choudhary जी को हृदय से धन्यवाद दिया। मंत्री मोo जमा खान ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में बेहतर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और आपसी सौहार्द का वातावरण कायम रहा, जिसके कारण लोगों ने खुशी और शांति के साथ त्योहार मनाया। उन्होंने यह कामना भी की कि बिहार की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारा हमेशा ऐसे ही बना रहे।1
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- धीना के नदहा-गुरैनी लघु डाल कैनाल क्षेत्र में गंगा कटान को लेकर किसानों का धरना गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष दीनानाथ श्रीवास्तव की अगुवाई में किसान पंप कैनाल पर बैठकर गंगा कटान को तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं। धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने सरकारी धन के घोर दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गंगा किनारे कटान रोकने के लिए लगभग 395.97 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया कार्य पूरी तरह से पानी में बह गया, फिर भी कटान नहीं रुका। किसानों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था की घोर लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये गंगा में समाहित हो गए। किसानों ने स्पष्ट मांग रखी है कि कार्यदायी संस्था से खर्च की गई राशि की रिकवरी कराई जाए और दोबारा गुणवत्तापूर्ण बोल्डर लगवाए जाएं, ताकि गंगा कटान पर प्रभावी ढंग से रोक लग सके। इसी क्रम में, किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने विधायक सुशील सिंह के एक बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, “माननीय कहते हैं कि सुशील सिंह शिलान्यास करते हैं तो उद्घाटन भी करते हैं, लेकिन यहां कटान अब तक नहीं रुका। शिलापट्ट भी कमरे में सुरक्षित रखा गया है।”1
- कैमूर जिले के दुर्गावती थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ प्रसिद्ध कुलेश्वरी देवी शक्तिपीठ (कुलड़िया) के महंत लल्लन गिरी पर शुक्रवार सुबह दातुन करने के दौरान एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में महंत गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, हर रोज की तरह शुक्रवार की सुबह महंत लल्लन गिरी अपने परिसर में दातुन कर रहे थे तभी घात लगाए बैठे एक अधेड़ व्यक्ति ने उन पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया। हमले के बाद महंत लहूलुहान होकर परिसर में ही गिर पड़े और हमलावर वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायल महंत को आनन-फानन में नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया। घायल महंत के पुत्र के अनुसार, कुल्हाड़ी के कई वार होने के कारण महंत के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर बेहद गहरे जख्म आए हैं, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय दुर्गावती थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और मामले की छानबीन में जुट गई है। पुलिस हमलावर की पहचान करने और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। इलाके के प्रसिद्ध शक्तिपीठ के महंत पर हुए इस हमले के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है।4
- चंदौली जिले के महादेवपुर कलां गांव में ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति ठप होने के विरोध में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 13 मई को आई आंधी के बाद से गांव में बिजली गुल होने और उसके बाद से अब तक बहाल न होने के कारण उपजे गहरे आक्रोश का परिणाम है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव में बिजली व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए। इस मामले में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के युवा नेता शैलेश कुमार ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि महादेवपुर कलां में जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।1
- चहनिया लछमनगढ़ क्षेत्र में, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा ब्रह्म बाबा मंदिर के समीप जल निकासी की उचित व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।1
- सोनभद्र के थाना रामपुर बरकोनिया क्षेत्र में अराजक तत्वों द्वारा हनुमान जी की एक मूर्ति को खंडित किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, जिसकी जानकारी अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) सोनभद्र, श्री ऋषभ रुणवाल ने एक बाइट के माध्यम से दी।1
- लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर एक टिन शेड गिरने से कई लोग घायल हो गए, जिसके बाद भाजपा के 'करप्शन मॉडल' पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पोस्ट में कहा गया है कि ऐसे हादसे भाजपा सरकार की पहचान बन चुके हैं, जहाँ घटिया क्वालिटी का काम कर जनता के पैसों की लूट-खसोट की जाती है। दावा है कि एक तरफ भाजपा के नेता और जिम्मेदार अधिकारी मौज काटते हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता को उसके हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिस पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए 'शर्म आनी चाहिए' कहा गया है।1