आस्था और भक्ति की अनोखी मिसाल: 72 दिनों में दंडवत प्रणाम करते हुए हरिद्वार से गाजियाबाद पहुंचा शिवभक्त कहते हैं कि जब दिल में भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो इंसान के भीतर ऐसी शक्ति जाग जाती है, जिसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं होता। सावन के पवित्र महीने में ऐसी ही आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। शाहदरा निवासी हिमांशु प्रजापति भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए निकले। खास बात यह है कि हिमांशु ने यह यात्रा पैदल चलकर नहीं, बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की। हर कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद वह जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं और फिर उसी तरह अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। इस कठिन और लंबी यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन लगे। रास्ते की तमाम मुश्किलों, थकान और मौसम की चुनौतियों के बावजूद हिमांशु की आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही। हिमांशु की यह यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति और संकल्प को देखकर लोग इसे भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल बता रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हिमांशु दंडवत प्रणाम करते हुए अपने कंधे पर भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस कठिन यात्रा का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना है। हिमांशु की भक्ति यह संदेश देती है कि जब संकल्प मजबूत हो और मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है। कहते हैं कि जब दिल में भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो इंसान के भीतर ऐसी शक्ति जाग जाती है, जिसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं होता। सावन के पवित्र महीने में ऐसी ही आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। शाहदरा निवासी हिमांशु प्रजापति भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए निकले। खास बात यह है कि हिमांशु ने यह यात्रा पैदल चलकर नहीं, बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की। हर कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद वह जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं और फिर उसी तरह अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। इस कठिन और लंबी यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन लगे। रास्ते की तमाम मुश्किलों, थकान और मौसम की चुनौतियों के बावजूद हिमांशु की आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही। हिमांशु की यह यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति और संकल्प को देखकर लोग इसे भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल बता रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हिमांशु दंडवत प्रणाम करते हुए अपने कंधे पर भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस कठिन यात्रा का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना है। हिमांशु की भक्ति यह संदेश देती है कि जब संकल्प मजबूत हो और मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है।
आस्था और भक्ति की अनोखी मिसाल: 72 दिनों में दंडवत प्रणाम करते हुए हरिद्वार से गाजियाबाद पहुंचा शिवभक्त कहते हैं कि जब दिल में भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो इंसान के भीतर ऐसी शक्ति जाग जाती है, जिसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं होता। सावन के पवित्र महीने में ऐसी ही आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। शाहदरा निवासी हिमांशु प्रजापति भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए निकले। खास बात यह है कि हिमांशु ने यह यात्रा पैदल चलकर नहीं, बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की। हर कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद वह जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं और फिर उसी तरह अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। इस कठिन और लंबी यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन लगे। रास्ते की तमाम मुश्किलों, थकान और मौसम की चुनौतियों के बावजूद हिमांशु की आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही। हिमांशु की यह यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति और संकल्प को देखकर लोग इसे भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल बता रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हिमांशु दंडवत प्रणाम करते हुए अपने कंधे पर भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस कठिन यात्रा का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना है। हिमांशु की भक्ति यह संदेश देती है कि जब संकल्प मजबूत हो और मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है। कहते हैं कि जब दिल में भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो इंसान के भीतर ऐसी शक्ति जाग जाती है, जिसका उसे खुद भी अंदाजा नहीं होता। सावन के पवित्र महीने में ऐसी ही आस्था और भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। शाहदरा निवासी हिमांशु प्रजापति भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी गहरी आस्था के चलते हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए निकले। खास बात यह है कि हिमांशु ने यह यात्रा पैदल चलकर नहीं, बल्कि दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी की। हर कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद वह जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हैं और फिर उसी तरह अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। इस कठिन और लंबी यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब 72 दिन लगे। रास्ते की तमाम मुश्किलों, थकान और मौसम की चुनौतियों के बावजूद हिमांशु की आस्था उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रही। हिमांशु की यह यात्रा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति और संकल्प को देखकर लोग इसे भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा की मिसाल बता रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह हिमांशु दंडवत प्रणाम करते हुए अपने कंधे पर भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनकी इस कठिन यात्रा का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करना और गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना है। हिमांशु की भक्ति यह संदेश देती है कि जब संकल्प मजबूत हो और मन में भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है।
- 17 अगस्त को देशभर में BMS का बड़ा आंदोलन, मजदूरों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी प्रेस विज्ञप्ति विषय: 17 अगस्त 2026 को भारतीय मजदूर संघ का देशव्यापी आंदोलन एवं 4 श्रम संहिताओं में संशोधन की मांग नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ BMS ने श्रमिक हितों की रक्षा के लिए 17 अगस्त 2026 को पूरे देश में "देशव्यापी आंदोलन" का ऐलान किया है। इस दिन BMS के कार्यकर्ता दिल्ली सहित देश सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर सरकार को 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। आंदोलन का मुख्य कारण: 4 नए लेबर कोड में मजदूर विरोधी प्रावधान केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में पारित 4 श्रम संहिताओं पर BMS ने गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉ दीपेंद्र चाहर, महामंत्री, BMS दिल्ली प्रदेश ने कहा कि "Ease of Doing Business" के नाम पर मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और यूनियन की स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है। जब तक मजदूरों के हितों की रक्षा नहीं होगी, तब तक BMS इन कोड का समर्थन नहीं कर सकता। BMS की प्रमुख आपत्तियां एवं मांगें 1. औद्योगिक संबंध संहिता 2020 को-ऑपरेटिव, पोर्ट, खदान, स्कूल, सरकारी कार्यालय को "उद्योग" में शामिल किया जाए। मूल वेतन को 50% तक सीमित करने से PF, ग्रेच्युटी कम होगी। सभी भत्ते वेतन में जोड़े जाएं। "कामगार" की वेतन सीमा 18,000 से बढ़ाकर 36,000 की जाए। यूनियन मान्यता के लिए 51% की शर्त हटाकर सबसे ज्यादा सदस्य वाली 4 यूनियनों को मान्यता दी जाए। छंटनी की सीमा 300 से घटाकर 100 की जाए। हड़ताल का 60 दिन का नोटिस सिर्फ अत्यावश्यक सेवाओं तक सीमित रहे। 2. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य की स्थिति संहिता 2020 फैक्ट्री की सीमा 10/20 से बढ़ाकर 20/40 नहीं की जाए। सफाई, सुरक्षा, कैंटीन को "कोर एक्टिविटी" से बाहर न किया जाए। ठेका श्रम कानून की सीमा 20 से 50 करने का विरोध। इसे 20 ही रखा जाए। BOCW फंड की परियोजना सीमा 10 लाख ही रहे। प्रवासी मजदूरों के लिए बेरोजगारी भत्ता वापस जोड़ा जाए। महिलाओं की रात्रि पाली के लिए सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान हों। 3. BMS की 10 सूत्रीय राष्ट्रीय मांगें न्यूनतम मजदूरी ₹30,000 प्रति माह की जाए। ESIC की वेतन सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 की जाए। EPF की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 की जाए। बोनस गणना सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और पात्रता ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 की जाए। EPS-95 पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 + DA + चिकित्सा योजना लागू हो। ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा ₹40 लाख की जाए। आशा, आंगनबाड़ी, मनरेगा सहित सभी योजना कर्मियों का मानदेय बढ़ाकर नियमित वेतन व सामाजिक सुरक्षा दी जाए। सरकारी ठेका कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। श्रम कानूनों से मजदूर विरोधी प्रावधान हटाए जाएं। पृष्ठभूमि BMS ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और श्रम कानूनों में बदलाव के कारण संगठित और असंगठित क्षेत्र का मजदूर संकट में है। इस आंदोलन में फैक्ट्री मजदूर, निर्माण मजदूर, किसान, महिला श्रमिक और योजना कर्मी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। डॉ दीपेंद्र चाहर ने सरकार से मांग की कि मजदूर विरोधी प्रावधानों को हटाकर ही श्रम संहिताओं को लागू किया जाए। अन्यथा BMS देशभर में और बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। जारीकर्ता डॉ दीपेंद्र चाहर महामंत्री, भारतीय मजदूर संघ, दिल्ली प्रदेश #BMS #BhartiyaMazdoorSangh #भारतीयमजदूरसंघ #BMSAndolan #देशव्यापीआंदोलन #MazdoorAndolan #मजदूरआंदोलन #MazdoorHaq #मजदूरोंकेहक #LabourCode #LabourCodes #लेबरकोड #LabourRights #मजदूरअधिकार #MinimumWage #न्यूनतमवेतन #ESIC #EPF #EPS95 #Pension #Gratuity #EqualPay #समानकामसमानवेतन #ContractWorkers #ठेकाकर्मचारी #17August2026 #DelhiNews #Delhi #NewDelhi #WorkersProtest #TradeUnion #श्रमिक #श्रमिकअधिकार #सरकार #BreakingNews #LatestNews #HindiNews #NewsUpdate #OpenChallenge24News1
- जॉब करना चाहते हैं तो आप ही जुड़े अपना बायोडाटा नाम फोटो वोटर आईडी कार्ड हमारे व्हाट्सऐप नंबर 9355637235 पर भेजे पार्ट एंड फुल्ल टाइम जॉब करने के लिए मौका ना जाने दें सिर्फ 9 दिन ही भर्ती होने का मौका है जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम1
- दिल्ली सरकार में गृह मंत्री आशीष सूद ने रोहिणी स्थित फॉरेंसिक लैब का किया दौरा, कार्यों की समीक्षा की दिल्ली के रोहिणी स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब पहुंचे गृह मंत्री आशीष सूद ने लैब के अलग-अलग विभागों का निरीक्षण किया. इस दौरान फॉरेंसिक लैब के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे. अधिकारियों ने गृह मंत्री को लैब में किए जा रहे विभिन्न वैज्ञानिक परीक्षणों और जांच प्रक्रियाओं की जानकारी देते हुए कार्यों का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया. इसके बाद गृह मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक कर लैब की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से समीक्षा की. दौरे के दौरान गृह मंत्री ने फॉरेंसिक जांच व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की तथा बेहतर समन्वय और दक्षता पर भी जोर दिया.1
- *दालमंडी चौडीकरण का भूमि पूजन विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी द्वारा किया गया* वाराणसी *दालमंडी चौडीकरण का भूमि पूजन विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी द्वारा किया गया* वाराणसी। दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। दालमंडी में भूमि पूजन हुवा। शहर दक्षिणी विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी विधिवत पूजा-अर्चना कर सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत किए। करीब 221 करोड़ रुपये की लागत से दालमंडी की लगभग 650 मीटर लंबी सड़क को 17.4 मीटर चौड़ा किया जाना है। भूमि पूजन के बाद सबसे पहले सड़क निर्माण के लिए जमीन का समतलीकरण किया जाएगा। इसके बाद ड्रेन और डक्ट निर्माण के लिए खुदाई का काम शुरू होगा। लंबे समय से चर्चा में रही दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के धरातल पर उतरने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था और आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।1
- happy birthday dear wife 🎉 राम भैया भगत जी यूपी 14 🙏🙏1
- फर्रुखाबाद: 'तारीख पर तारीख' से परेशान युवती का कोर्ट में हंगामा, वीडियो वायरल 📰 फर्रुखाबाद | उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की कायमगंज तहसील स्थित एसडीएम कोर्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक युवती न्याय में हो रही कथित देरी से नाराज़ होकर कोर्ट परिसर में अपना विरोध दर्ज कराती दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, युवती का आरोप है कि उसके मामले में लगातार लंबी-लंबी तारीखें दी जा रही हैं, जिससे उसे बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उसका यह भी आरोप है कि विपक्षी पक्ष की ओर से मामले को लंबा खींचने की कोशिश की जा रही है। युवती का कहना है कि कई बार अदालत आने के बावजूद उसे समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा, जिससे परेशान होकर उसने कोर्ट में अपना आक्रोश व्यक्त किया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल Media पर चर्चा का विषय बन गया है। मामले के संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे की कार्रवाई और जांच की प्रतीक्षा है।1
- रांची- जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना दे रहे छात्रों और सरकार के बीच लंबी वार्ता के बावजूद सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच सहित अहम मांगों पर सहमति नहीं बन सकी, छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी दी है1