उत्तराखंड की स्वादिष्ट पहाड़ी सब्जी: लिंगुड़ उत्तराखंड की स्वादिष्ट पहाड़ी सब्जी: लिंगुड़ उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली यह सब्जी स्वाद के साथ सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं, 'लिंगुड़' या 'डिंगरी' के नाम से जानी जाती यह सब्जी जो जंगलों और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगती है। यह कवक जैसी संरचना वाली सब्जी स्थानीय लोगों के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर बागेश्वर जैसे जिलों में। लिंगुड़ का स्वाद बहुत अच्छा होता है, जो पहाड़ी व्यंजनों को विशेष बनाता है। लिंगुड़ पौष्टिकता का खजाना है, जिसमें विटामिन ए, सी, ई, आयरन और भरपूर फाइबर मौजूद होते हैं। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने, इम्यूनिटी मजबूत करने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक है। पहाड़ी जीवनशैली में यह सब्जी ऊर्जा का स्रोत बनी रहती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं। नियमित सेवन से त्वचा चमकदार रहती है और थकान दूर होती है। लिंगुड़ को विभिन्न तरीकों से बनाया जाता है—सबसे सरल तरीका है इसे धोकर उबालना, फिर घी में तड़का लगाकर खाना। इसे आलू के साथ सब्जी बनाई जा सकती है, सूप में डाला जा सकता है या अचार के रूप में संरक्षित किया जा सकता है। तेल में तलकर भी इसका स्वाद बढ़ जाता है। बागेश्वर के घरों में यह चाव से खाया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है।
उत्तराखंड की स्वादिष्ट पहाड़ी सब्जी: लिंगुड़ उत्तराखंड की स्वादिष्ट पहाड़ी सब्जी: लिंगुड़ उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली यह सब्जी स्वाद के साथ सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं, 'लिंगुड़' या 'डिंगरी' के नाम से जानी जाती यह सब्जी जो जंगलों और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगती है। यह कवक जैसी संरचना वाली सब्जी स्थानीय लोगों के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर बागेश्वर जैसे जिलों में। लिंगुड़ का स्वाद बहुत अच्छा होता है, जो पहाड़ी व्यंजनों को विशेष बनाता है। लिंगुड़ पौष्टिकता का खजाना है, जिसमें विटामिन ए, सी, ई, आयरन और भरपूर फाइबर मौजूद होते हैं। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने, इम्यूनिटी मजबूत करने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक है। पहाड़ी जीवनशैली में यह सब्जी ऊर्जा का स्रोत बनी रहती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं। नियमित सेवन से त्वचा चमकदार रहती है और थकान दूर होती है। लिंगुड़ को विभिन्न तरीकों से बनाया जाता है—सबसे सरल तरीका है इसे धोकर उबालना, फिर घी में तड़का लगाकर खाना। इसे आलू के साथ सब्जी बनाई जा सकती है, सूप में डाला जा सकता है या अचार के रूप में संरक्षित किया जा सकता है। तेल में तलकर भी इसका स्वाद बढ़ जाता है। बागेश्वर के घरों में यह चाव से खाया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति का हिस्सा है।
- दीवानराम, नैनीताल उत्तराखंडओखलकांडा, नैनीताल, उत्तराखंडगुड गर्मी के,दिन, बहुत स्वादिष्ट होती है3 hrs ago
- दीपों की रोशनी में नहाया महोत्सव, बैजनाथ धाम में सायंकालीन दीपोत्सव बना आस्था का अद्भुत दृश्य मेरा हक न्यूज़ में आपका स्वागत है। कत्यूर महोत्सव के अंतर्गत सायंकालीन कार्यक्रम में उस समय एक अद्भुत और मनमोहक दृश्य देखने को मिला, जब वन विभाग द्वारा बैजनाथ मंदिर परिसर में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। जैसे ही शाम ढली, पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा और वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इस दीपोत्सव में जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा, दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा, बागेश्वर विधायक पार्वती दास सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने दीप प्रज्वलित कर इस आयोजन की गरिमा को बढ़ाया और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। वन विभाग की ओर से बन क्षेत्राधिकारी महेंद्र सिंह गुसाईं के नेतृत्व में यह आयोजन किया गया, जिसमें विभाग की सभी रेंजों के वन दरोगा और कर्मचारी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उनके समन्वय और मेहनत से यह दीपोत्सव एक भव्य और सुव्यवस्थित रूप में सफल हुआ। दीपोत्सव के दौरान हजारों दीपों की कतारों ने मंदिर परिसर को एक अलौकिक स्वरूप दे दिया। श्रद्धालुओं और उपस्थित जनसमूह ने इस दिव्य दृश्य का आनंद लिया और पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि कत्यूर महोत्सव की भव्यता को भी एक नई पहचान दे गया। दीपों की यह जगमगाहट लंबे समय तक लोगों के मन में यादगार बनी रहेगी। #KatyurMahotsav #Deepotsav #BaijnathDham #UttarakhandCulture #SpiritualEvent #TrendingNews #MeraHaqNews1
- अल्मोड़ा। कचहरी बाजार स्थित स्व. जनरल बीसी जोशी सभागार में रेड क्रॉस सोसाइटी अल्मोड़ा की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनहित से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। शुक्रवार को आयोजित बैठक की शुरुआत पूर्व में जिलाधिकारी अंशुल सिंह के साथ हुई बैठक की समीक्षा से हुई और उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। बैठक में रेड क्रॉस की गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने और टैक्सी चालकों को सीपीआर प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया। साथ ही 15 स्ट्रेचर, दो व्हीलचेयर और सीपीआर प्रशिक्षण के लिए एक डमी खरीदने पर सहमति बनी। नगर में शव वाहन की कमी को देखते हुए रेड क्रॉस द्वारा शव वाहन खरीदने और इसके लिए बैंक व दानदाताओं से संपर्क करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा स्कूलों में रेड क्रॉस गतिविधियों को बढ़ाने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी से मिलने की बात कही गई। प्रत्येक विकासखंड में रेड क्रॉस स्वयंसेवकों की आपदा टीम गठित करने का निर्णय लिया गया, जो आपदा प्रबंधन टीम के साथ समन्वय कर कार्य करेगी। मेडिकल कॉलेज में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट से मरीजों को सहायता पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में भविष्य में रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया गया। साथ ही दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले सहायता प्रस्तावों पर प्रभावी तरीके से कार्य करने की रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक में जिला रेड क्रॉस चेयरमैन आशीष वर्मा, राज्य उपाध्यक्ष मनोज सनवाल, कोषाध्यक्ष दीप जोशी, पार्षद अमित साह मोनू, मनोज भंडारी, अर्जुन सिंह बिष्ट, अभिषेक जोशी, डॉ. जेसी दुर्गापाल, ललित मोहन जोशी, मोहन चंद्र कांडपाल, आनंद सिंह बगड़वाल, कृष्ण बहादुर सिंह और अनूप साह सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।1
- Post by पवन नेगी1
- विडियो देखें- रामपुर (उत्तरप्रदेश) सुहागरात पर खूनी मंजर ..,दुल्हन ने की दूल्हे के साथ मारपीट ।1
- *हल्द्वानी- जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने हरिपुरा तुलाराम राजस्व गांव में की रबी फसल की क्रॉप कटिंग* *क्रॉप कटिंग के प्रयोग के आधार पर ही जिले में फसलों की औसत उपज, उत्पादन, उत्पादकता के आंकड़े किए जाते हैं तैयार-जिलाधिकारी* हल्द्वानी 4 अप्रैल 2026 सूवि। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने शनिवार को हल्द्वानी तहसील के ग्राम हरिपुरा तुलाराम राजस्व गांव में रबी की फसल में क्रॉप कटिंग प्रयोग कराया संपन्न जिलाधिकारी द्वारा किसान नागेंद्र सिंह पुत्र गोपाल सिंह के खेत में 43.3 वर्ग मीटर के प्लाट पर जाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत रबी पर फसल कटाई प्रयोग किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने किसानों द्वारा उत्पादित की जा रही फसलों के बारे में जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने स्थानीय कृषकों को फसल क्षति से होने वाली हानि से बचने के लिए फसल बीमा कराने हेतु परामर्श दिया। *मौके पर जिलाधिकारी द्वारा फसल कटाई की प्रक्रिया का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि क्रॉप कटिंग कार्य पूर्ण पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संपादित किया जाए, जिससे फसल उत्पादन का सही आकलन सुनिश्चित हो सके।* जिलाधिकारी ने कहा कि क्रॉप कटिंग कृषि क्षेत्र में फसल उत्पादन के वैज्ञानिक एवं वास्तविक आकलन का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से प्रति हेक्टेयर उपज का सटीक आंकलन प्राप्त होता है, जो शासन द्वारा समर्थन मूल्य निर्धारण, खाद्यान्न खरीद एवं विभिन्न कृषि योजनाओं के संचालन में सहायक होता है। साथ ही, यह प्रक्रिया Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana के अंतर्गत किसानों को क्षतिपूर्ति (बीमा दावा) प्रदान करने का आधार भी बनती है। इस दौरान तहसीलदार कुलदीप पाण्डे, कानूनगो बृजेश कुमार, राजस्व उप निरीक्षक अरुण वर्मा, अपर सांख्यिकी अधिकारी महेन्द्र सिंह डांगी एवं मीना नेगी तथा बीमा कंपनी एजेंट हेम सिंह नेगी सहित अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- Post by Surendra Kumar1
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