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जेनी विवाद में किसने रचा पूरा राजनीतिक खेल? हरक सिंह ने उठाए सवाल, सियासी साजिश के पीछे किसका हाथ? जेनी विवाद एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने इस मामले को लेकर कई सवाल उठाते हुए इसके पीछे राजनीतिक साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस पूरे विवाद को किसने हवा दी और इसके पीछे किसका राजनीतिक स्वार्थ छिपा है? हरक सिंह के बयानों के बाद प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने के आसार हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जेनी प्रकरण में आगे क्या नए खुलासे सामने आते हैं।
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जेनी विवाद में किसने रचा पूरा राजनीतिक खेल? हरक सिंह ने उठाए सवाल, सियासी साजिश के पीछे किसका हाथ? जेनी विवाद एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने इस मामले को लेकर कई सवाल उठाते हुए इसके पीछे राजनीतिक साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस पूरे विवाद को किसने हवा दी और इसके पीछे किसका राजनीतिक स्वार्थ छिपा है? हरक सिंह के बयानों के बाद प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने के आसार हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जेनी प्रकरण में आगे क्या नए खुलासे सामने आते हैं।
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- जैनी प्रकरण में हरक सिंह रावत का बड़ा पलटवार, बोले– “धामी की भी DNA जांच कराओ ना!”, सियासत में मचा घमासान जैनी प्रकरण को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कथित DNA जांच में गड़बड़ी का सवाल उठाते हुए दोनों नेताओं का भी DNA टेस्ट कराने की मांग की। हरक सिंह ने कहा कि यदि जांच में कोई हेराफेरी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने SIT जांच में पूरा सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर न्यायालय जाने की बात भी कही। उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में जैनी प्रकरण को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।1
- रेणुका जी (ददाहू): उच्च न्यायालय के निर्देशों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां सिरमौर जिला के रेणुका जी के ददाहू बाजार में पटाखा विक्रेताओं द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम करीब 5:30 बजे भी बाजार में भारी मात्रा में सरेआम पटाखे बेचे जा रहे थे, जबकि मौके पर पुलिस प्रशासन का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। लोगों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर भेजे और इस अवैध बिक्री की खबर चलाने की मांग की। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पटाखे बेचने की अनुमति संबंधित अधिकारी / तहसीलदार द्वारा दी गई थी, वहां पटाखे नहीं बेचे जा रहे। बल्कि राशन की दुकान में पटाखे बेचे जा रहे हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। लोगों का सबसे बड़ा सवाल - कार्रवाई कब होगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुलिस प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही है। लोगों के मन में बार-बार यही सवाल उठ रहा है कि - • इन दुकानदारों के चालान क्यों नहीं किए गए? • इनके ऊपर मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया? • इनके पटाखों को जब्त कर पुलिस थाने में क्यों नहीं रखा गया? लोगों का आरोप है कि जैसे ही पुलिस बाजार से निकलती है, वैसे ही फिर से पटाखा बेचने वाले बाजार में आ जाते हैं। पुलिस का पक्ष वहीं इस मामले में पुलिस कर्मचारी से बात करने पर उनका कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन लोगों का कहना है कि जमीन पर कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। लोगों के अनुसार ददाहू में तीन से चार दुकानदार सरेआम पटाखे बेच रहे हैं और खुलेआम कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। अब सवाल यही है कि कार्रवाई कब होगी? पुलिस थाना रेणुका जी के कर्मचारी कहां हैं? और कब तक लोग कार्रवाई का इंतजार करते रहेंगे? रेणुका जी से राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट रेणुका जी (ददाहू): उच्च न्यायालय के निर्देशों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां सिरमौर जिला के रेणुका जी के ददाहू बाजार में पटाखा विक्रेताओं द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम करीब 5:30 बजे भी बाजार में भारी मात्रा में सरेआम पटाखे बेचे जा रहे थे, जबकि मौके पर पुलिस प्रशासन का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। लोगों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर भेजे और इस अवैध बिक्री की खबर चलाने की मांग की। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पटाखे बेचने की अनुमति संबंधित अधिकारी / तहसीलदार द्वारा दी गई थी, वहां पटाखे नहीं बेचे जा रहे। बल्कि राशन की दुकान में पटाखे बेचे जा रहे हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। लोगों का सबसे बड़ा सवाल - कार्रवाई कब होगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुलिस प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही है। लोगों के मन में बार-बार यही सवाल उठ रहा है कि - • इन दुकानदारों के चालान क्यों नहीं किए गए? • इनके ऊपर मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया? • इनके पटाखों को जब्त कर पुलिस थाने में क्यों नहीं रखा गया? लोगों का आरोप है कि जैसे ही पुलिस बाजार से निकलती है, वैसे ही फिर से पटाखा बेचने वाले बाजार में आ जाते हैं। पुलिस का पक्ष वहीं इस मामले में पुलिस कर्मचारी से बात करने पर उनका कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन लोगों का कहना है कि जमीन पर कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। लोगों के अनुसार ददाहू में तीन से चार दुकानदार सरेआम पटाखे बेच रहे हैं और खुलेआम कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। अब सवाल यही है कि कार्रवाई कब होगी? पुलिस थाना रेणुका जी के कर्मचारी कहां हैं? और कब तक लोग कार्रवाई का इंतजार करते रहेंगे? रेणुका जी से राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट1
- एक्यूआई 382 होने के कारण दिल्ली गाजियाबाद सोनीपत फरीदाबाद नोएडा में bs3 और bs4 गाड़ियों पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। 1
- अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका, धामी ने बताया दीपावली का तोहफा The Aman Times | देहरादून अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका, धामी ने बताया दीपावली का तोहफा अग्निपथ योजना में प्रस्तावित बदलाव का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को चार साल के बजाय छह साल तक सेवा का अवसर मिलने का फैसला युवाओं और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुरुआती 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट के आधार पर नियमित किया जाएगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत को दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका मिलेगा। धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए इसे युवाओं के लिए दीपावली का तोहफा बताया।1
- हिंदू मुस्लिम भाईचारा जिंदाबाद एकता ✅💯😎🤝🇮🇳🫂 हैप्पी दिवाली 🪔🎆🎊🍫🎇 राजेंद्र भाई उर्फ राजू आज दीपावली के शुभ अवसर पर मेरे घर आए और दिवाली का तोहफा नफरत 🎇🎆🪔🤝1
- दरोगा बनने की खुशी पर 8 लाख का झटका! 1700 पुलिसकर्मियों की जॉइनिंग में फंसा पेच लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही से दरोगा बने करीब 1700 पुलिसकर्मियों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। भर्ती परीक्षा पास कर नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद उनकी जॉइनिंग का रास्ता आसान नहीं है। विभाग की ओर से पुरानी सिपाही भर्ती की ट्रेनिंग और प्रोबेशन अवधि में मिले वेतन-भत्तों की रकम लौटाने की शर्त रखी गई है। वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए सवाल खड़े किए हैं। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक चयनित पुलिसकर्मी से करीब 7.34 लाख रुपये की वसूली मांगी जा रही है, जो लगभग 8 लाख रुपये तक बताई जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पुलिस विभाग छोड़कर कहीं दूसरी जगह नहीं जा रहे, बल्कि इसी विभाग में उच्च पद पर सेवाएं देना चाहते हैं। ऐसे में नियुक्ति पत्र हाथ में होने के बावजूद आर्थिक परेशानी के चलते जॉइनिंग अटकना उनके लिए बड़ी चिंता बन गया है।1
- आप सभी को हैप्पी दीपावली................................ आप सभी को हैप्पी दीपावली...........1
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