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मुरैना के अंबाह में हर साल की तरह इस बार भी ताजियों का जुलूस पूरी श्रद्धा और अक़ीदत के साथ निकाला गया। अम्बाह के विभिन्न गली-मुहल्लों में रखे गए सभी ताजिये दोपहर 2 बजे के बाद किला अंबाह में इकट्ठे हुए, जहां से वे 'या हुसैन या हुसैन' के नारों के साथ मुख्य बाजार से होते हुए रात 8 बजे तालाब किनारे स्थित कर्बला में दफ़न किए गए। इस दौरान नगर के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने लंगर, शरबत तथा पानी का इंतज़ाम किया। नगर पालिका और पुलिस प्रशासन की उत्तम व्यवस्था के लिए संपूर्ण मुस्लिम समाज ने आभार व्यक्त किया। यह खबर आदित्य सारवान ने संवाददाता अंबाह से दी है। जिस कर्बला की याद में यह मोहर्रम मनाया जाता है, उसे लेखक शमीम गौरी के विचारों में सिर्फ जंग या युद्ध कहना सही नहीं है। यह एक धर्म युद्ध था, जहां एक ओर हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन थे तो दूसरी ओर निर्दयी शासक यजीद। कर्बला में जहां इमाम हुसैन के साथ केवल 72 लोग थे, जिनमें उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, वहीं दूसरी ओर हज़ारों की संख्या में हथियारों से सुसज्जित सेना थी। एक तरफ धोखा, फ़रेब और लालच जैसी बुराइयाँ थीं, तो दूसरी तरफ हिम्मत, साहस और सच्चाई थी। कर्बला के युद्ध में महिलाओं और बच्चों पर इतने अत्याचार हुए, जो शायद ही किसी अन्य युद्ध में देखने को मिले हों। इमाम हुसैन के साथ वालों को, यहाँ तक कि कुछ महीने के बच्चे को भी तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद किया गया। ज़ुल्म की हद यह भी थी कि इमाम हुसैन के सिर मुबारक को भाले की नोंक पर रखकर और उनके परिवार के बचे हुए लोगों को बेड़ियाँ डालकर घुमाया गया। यह वाकई हर इंसान को रुला देने वाली दास्तान है। कर्बला का सही मकसद दुनिया को इमाम हुसैन के रूप में यह दिखाना था कि बुराई और अत्याचार करने वाला राजा क्यों न हो, इंसानियत और सच्चाई की डोर नहीं छूटनी चाहिए। यह सब्र और सच्चाई का इम्तिहान था, जिसे इमाम हुसैन अलएहिस्सलाम ने अपना सब कुछ लुटाकर भी पास किया। उन्होंने एक अत्याचारी शासक के सामने अपना सर झुकाने के बजाय कटाना मंजूर किया। इसी वजह से दुनिया आज भी उनके बलिदान को मोहर्रम के इन दिनों में पूरी अक़ीदत से याद करती है। लेखक का मानना है कि इमाम हुसैन को चाहने या हुसैनी होने के लिए मुसलमान होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि हर इंसानियत पसंद व्यक्ति हुसैनी हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। यही कारण है कि यह त्यौहार हमेशा आपसी सौहार्द के साथ मनाया जाता है।

2 hrs ago
user_Aditya Sarwan
Aditya Sarwan
Local News Reporter अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

मुरैना के अंबाह में हर साल की तरह इस बार भी ताजियों का जुलूस पूरी श्रद्धा और अक़ीदत के साथ निकाला गया। अम्बाह के विभिन्न गली-मुहल्लों में रखे गए सभी ताजिये दोपहर 2 बजे के बाद किला अंबाह में इकट्ठे हुए, जहां से वे 'या हुसैन या हुसैन' के नारों के साथ मुख्य बाजार से होते हुए रात 8 बजे तालाब किनारे स्थित कर्बला में दफ़न किए गए। इस दौरान नगर के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने लंगर, शरबत तथा पानी का इंतज़ाम किया। नगर पालिका और पुलिस प्रशासन की उत्तम व्यवस्था के लिए संपूर्ण मुस्लिम समाज ने आभार व्यक्त किया। यह खबर आदित्य सारवान ने संवाददाता अंबाह से दी है। जिस कर्बला की याद में यह मोहर्रम मनाया जाता है, उसे लेखक शमीम गौरी के विचारों में सिर्फ जंग या युद्ध कहना सही नहीं है। यह एक धर्म युद्ध था, जहां एक ओर हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन थे तो दूसरी ओर निर्दयी शासक यजीद। कर्बला में जहां इमाम हुसैन के साथ केवल 72 लोग थे, जिनमें उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, वहीं दूसरी ओर हज़ारों की संख्या में हथियारों से सुसज्जित सेना थी। एक तरफ धोखा, फ़रेब और लालच जैसी बुराइयाँ थीं, तो दूसरी तरफ हिम्मत, साहस और सच्चाई थी। कर्बला के युद्ध में महिलाओं और बच्चों पर इतने अत्याचार हुए, जो शायद ही किसी अन्य युद्ध में देखने को मिले हों। इमाम हुसैन के साथ वालों को, यहाँ तक कि कुछ महीने के बच्चे को भी तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद किया गया। ज़ुल्म की हद यह भी थी कि इमाम हुसैन के सिर मुबारक को भाले की नोंक पर रखकर और उनके परिवार के बचे हुए लोगों को बेड़ियाँ डालकर घुमाया गया। यह वाकई हर इंसान को रुला देने वाली दास्तान है। कर्बला का सही मकसद दुनिया को इमाम हुसैन के रूप में यह दिखाना था कि बुराई और अत्याचार करने वाला राजा क्यों न हो, इंसानियत और सच्चाई की डोर नहीं छूटनी चाहिए। यह सब्र और सच्चाई का इम्तिहान था, जिसे इमाम हुसैन अलएहिस्सलाम ने अपना सब कुछ लुटाकर भी पास किया। उन्होंने एक अत्याचारी शासक के सामने अपना सर झुकाने के बजाय कटाना मंजूर किया। इसी वजह से दुनिया आज भी उनके बलिदान को मोहर्रम के इन दिनों में पूरी अक़ीदत से याद करती है। लेखक का मानना है कि इमाम हुसैन को चाहने या हुसैनी होने के लिए मुसलमान होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि हर इंसानियत पसंद व्यक्ति हुसैनी हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। यही कारण है कि यह त्यौहार हमेशा आपसी सौहार्द के साथ मनाया जाता है।

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  • अंबाह में हर साल की तरह इस बार भी पूरी श्रद्धा और अक़ीदत के साथ ताजियों का भव्य जुलूस निकाला गया। नगर के विभिन्न गली-मुहल्लों में रखे गए सभी ताजिये दोपहर 2 बजे के बाद किला अंबाह में एक साथ इकट्ठा हुए। इसके बाद यह जुलूस अंबाह के मुख्य बाजार से होते हुए, 'या हुसैन, या हुसैन' के नारों के साथ, रात 8 बजे तालाब किनारे स्थित कर्बला में दफ़न किया गया। इस दौरान नगर के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने बड़ी संख्या में लंगर, शरबत और पानी का इंतज़ाम किया, जिसकी उत्तम व्यवस्था के लिए नगर पालिका और पुलिस प्रशासन का मुस्लिम समाज ने आभार व्यक्त किया। यह मोहर्रम कर्बला में हुए धर्म युद्ध की याद में मनाया जाता है, जिसमें हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उस वक्त के निर्दयी शासक यजीद आमने-सामने थे। इसे केवल जंग या युद्ध कहना सही नहीं है, क्योंकि कर्बला में एक तरफ इमाम हुसैन के साथ केवल 72 लोग थे, जबकि दूसरी ओर हजारों की तादाद में हथियारबंद सेना थी। इमाम हुसैन के साथ उनके घर-परिवार के लोग, बच्चे और महिलाएं भी थीं, वहीं दूसरी ओर पूरी तरह से सक्षम सैनिक मौजूद थे। जहां यजीद के पक्ष में धोखा, फरेब और लालच जैसी बुराइयां थीं, वहीं इमाम हुसैन के साथ हिम्मत, साहस और सच्चाई थी। कर्बला में महिलाओं और बच्चों पर भी अत्यधिक अत्याचार देखा गया, जिसमें कुछ महीने के बच्चे को भी तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया गया। जुल्म की हद यह थी कि इमाम हुसैन के पवित्र सिर को भाले की नोंक पर रखकर और उनके परिवार के बचे हुए सदस्यों को बेड़ियाँ डालकर घुमाया गया, यह दास्तां हर इंसान को रुला देने वाली है। कर्बला का सही मकसद दुनिया को यह दिखाना था कि बुराई और अत्याचार करने वाला भले ही कोई राजा ही क्यों न हो, इंसानियत और सच्चाई की डोर कभी नहीं छूटनी चाहिए। कर्बला सब्र और सच्चाई की परीक्षा का पैगाम है, जिसे इमाम हुसैन ने अपना सब कुछ लुटाकर भी पास किया था। उन्होंने एक अत्याचारी शासक के सामने सर झुकाने के बजाय उसे कटाना मंजूर किया। यही वजह है कि दुनिया आज भी मोहर्रम के इन दिनों में उनके बलिदान को पूरी अक़ीदत से याद करती है। इमाम हुसैन को चाहने या 'हुसैनी' होने के लिए मुसलमान होना जरूरी नहीं है, बल्कि हर इंसानियत पसंद व्यक्ति हुसैनी हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। इसीलिए यह त्यौहार हमेशा आपसी सौहार्द के साथ मनाया जाता है।
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    अंबाह में हर साल की तरह इस बार भी पूरी श्रद्धा और अक़ीदत के साथ ताजियों का भव्य जुलूस निकाला गया। नगर के विभिन्न गली-मुहल्लों में रखे गए सभी ताजिये दोपहर 2 बजे के बाद किला अंबाह में एक साथ इकट्ठा हुए। इसके बाद यह जुलूस अंबाह के मुख्य बाजार से होते हुए, 'या हुसैन, या हुसैन' के नारों के साथ, रात 8 बजे तालाब किनारे स्थित कर्बला में दफ़न किया गया। इस दौरान नगर के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने बड़ी संख्या में लंगर, शरबत और पानी का इंतज़ाम किया, जिसकी उत्तम व्यवस्था के लिए नगर पालिका और पुलिस प्रशासन का मुस्लिम समाज ने आभार व्यक्त किया।

यह मोहर्रम कर्बला में हुए धर्म युद्ध की याद में मनाया जाता है, जिसमें हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उस वक्त के निर्दयी शासक यजीद आमने-सामने थे। इसे केवल जंग या युद्ध कहना सही नहीं है, क्योंकि कर्बला में एक तरफ इमाम हुसैन के साथ केवल 72 लोग थे, जबकि दूसरी ओर हजारों की तादाद में हथियारबंद सेना थी। इमाम हुसैन के साथ उनके घर-परिवार के लोग, बच्चे और महिलाएं भी थीं, वहीं दूसरी ओर पूरी तरह से सक्षम सैनिक मौजूद थे। जहां यजीद के पक्ष में धोखा, फरेब और लालच जैसी बुराइयां थीं, वहीं इमाम हुसैन के साथ हिम्मत, साहस और सच्चाई थी। कर्बला में महिलाओं और बच्चों पर भी अत्यधिक अत्याचार देखा गया, जिसमें कुछ महीने के बच्चे को भी तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया गया। जुल्म की हद यह थी कि इमाम हुसैन के पवित्र सिर को भाले की नोंक पर रखकर और उनके परिवार के बचे हुए सदस्यों को बेड़ियाँ डालकर घुमाया गया, यह दास्तां हर इंसान को रुला देने वाली है।

कर्बला का सही मकसद दुनिया को यह दिखाना था कि बुराई और अत्याचार करने वाला भले ही कोई राजा ही क्यों न हो, इंसानियत और सच्चाई की डोर कभी नहीं छूटनी चाहिए। कर्बला सब्र और सच्चाई की परीक्षा का पैगाम है, जिसे इमाम हुसैन ने अपना सब कुछ लुटाकर भी पास किया था। उन्होंने एक अत्याचारी शासक के सामने सर झुकाने के बजाय उसे कटाना मंजूर किया। यही वजह है कि दुनिया आज भी मोहर्रम के इन दिनों में उनके बलिदान को पूरी अक़ीदत से याद करती है। इमाम हुसैन को चाहने या 'हुसैनी' होने के लिए मुसलमान होना जरूरी नहीं है, बल्कि हर इंसानियत पसंद व्यक्ति हुसैनी हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। इसीलिए यह त्यौहार हमेशा आपसी सौहार्द के साथ मनाया जाता है।
    user_User7480
    User7480
    Ambah, Morena•
    1 hr ago
  • मुरैना के अंबाह में हर साल की तरह इस बार भी ताजियों का जुलूस पूरी श्रद्धा और अक़ीदत के साथ निकाला गया। अम्बाह के विभिन्न गली-मुहल्लों में रखे गए सभी ताजिये दोपहर 2 बजे के बाद किला अंबाह में इकट्ठे हुए, जहां से वे 'या हुसैन या हुसैन' के नारों के साथ मुख्य बाजार से होते हुए रात 8 बजे तालाब किनारे स्थित कर्बला में दफ़न किए गए। इस दौरान नगर के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने लंगर, शरबत तथा पानी का इंतज़ाम किया। नगर पालिका और पुलिस प्रशासन की उत्तम व्यवस्था के लिए संपूर्ण मुस्लिम समाज ने आभार व्यक्त किया। यह खबर आदित्य सारवान ने संवाददाता अंबाह से दी है। जिस कर्बला की याद में यह मोहर्रम मनाया जाता है, उसे लेखक शमीम गौरी के विचारों में सिर्फ जंग या युद्ध कहना सही नहीं है। यह एक धर्म युद्ध था, जहां एक ओर हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन थे तो दूसरी ओर निर्दयी शासक यजीद। कर्बला में जहां इमाम हुसैन के साथ केवल 72 लोग थे, जिनमें उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, वहीं दूसरी ओर हज़ारों की संख्या में हथियारों से सुसज्जित सेना थी। एक तरफ धोखा, फ़रेब और लालच जैसी बुराइयाँ थीं, तो दूसरी तरफ हिम्मत, साहस और सच्चाई थी। कर्बला के युद्ध में महिलाओं और बच्चों पर इतने अत्याचार हुए, जो शायद ही किसी अन्य युद्ध में देखने को मिले हों। इमाम हुसैन के साथ वालों को, यहाँ तक कि कुछ महीने के बच्चे को भी तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद किया गया। ज़ुल्म की हद यह भी थी कि इमाम हुसैन के सिर मुबारक को भाले की नोंक पर रखकर और उनके परिवार के बचे हुए लोगों को बेड़ियाँ डालकर घुमाया गया। यह वाकई हर इंसान को रुला देने वाली दास्तान है। कर्बला का सही मकसद दुनिया को इमाम हुसैन के रूप में यह दिखाना था कि बुराई और अत्याचार करने वाला राजा क्यों न हो, इंसानियत और सच्चाई की डोर नहीं छूटनी चाहिए। यह सब्र और सच्चाई का इम्तिहान था, जिसे इमाम हुसैन अलएहिस्सलाम ने अपना सब कुछ लुटाकर भी पास किया। उन्होंने एक अत्याचारी शासक के सामने अपना सर झुकाने के बजाय कटाना मंजूर किया। इसी वजह से दुनिया आज भी उनके बलिदान को मोहर्रम के इन दिनों में पूरी अक़ीदत से याद करती है। लेखक का मानना है कि इमाम हुसैन को चाहने या हुसैनी होने के लिए मुसलमान होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि हर इंसानियत पसंद व्यक्ति हुसैनी हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। यही कारण है कि यह त्यौहार हमेशा आपसी सौहार्द के साथ मनाया जाता है।
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    मुरैना के अंबाह में हर साल की तरह इस बार भी ताजियों का जुलूस पूरी श्रद्धा और अक़ीदत के साथ निकाला गया। अम्बाह के विभिन्न गली-मुहल्लों में रखे गए सभी ताजिये दोपहर 2 बजे के बाद किला अंबाह में इकट्ठे हुए, जहां से वे 'या हुसैन या हुसैन' के नारों के साथ मुख्य बाजार से होते हुए रात 8 बजे तालाब किनारे स्थित कर्बला में दफ़न किए गए। इस दौरान नगर के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने लंगर, शरबत तथा पानी का इंतज़ाम किया। नगर पालिका और पुलिस प्रशासन की उत्तम व्यवस्था के लिए संपूर्ण मुस्लिम समाज ने आभार व्यक्त किया। यह खबर आदित्य सारवान ने संवाददाता अंबाह से दी है।

जिस कर्बला की याद में यह मोहर्रम मनाया जाता है, उसे लेखक शमीम गौरी के विचारों में सिर्फ जंग या युद्ध कहना सही नहीं है। यह एक धर्म युद्ध था, जहां एक ओर हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन थे तो दूसरी ओर निर्दयी शासक यजीद। कर्बला में जहां इमाम हुसैन के साथ केवल 72 लोग थे, जिनमें उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, वहीं दूसरी ओर हज़ारों की संख्या में हथियारों से सुसज्जित सेना थी। एक तरफ धोखा, फ़रेब और लालच जैसी बुराइयाँ थीं, तो दूसरी तरफ हिम्मत, साहस और सच्चाई थी। कर्बला के युद्ध में महिलाओं और बच्चों पर इतने अत्याचार हुए, जो शायद ही किसी अन्य युद्ध में देखने को मिले हों। इमाम हुसैन के साथ वालों को, यहाँ तक कि कुछ महीने के बच्चे को भी तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद किया गया। ज़ुल्म की हद यह भी थी कि इमाम हुसैन के सिर मुबारक को भाले की नोंक पर रखकर और उनके परिवार के बचे हुए लोगों को बेड़ियाँ डालकर घुमाया गया। यह वाकई हर इंसान को रुला देने वाली दास्तान है।

कर्बला का सही मकसद दुनिया को इमाम हुसैन के रूप में यह दिखाना था कि बुराई और अत्याचार करने वाला राजा क्यों न हो, इंसानियत और सच्चाई की डोर नहीं छूटनी चाहिए। यह सब्र और सच्चाई का इम्तिहान था, जिसे इमाम हुसैन अलएहिस्सलाम ने अपना सब कुछ लुटाकर भी पास किया। उन्होंने एक अत्याचारी शासक के सामने अपना सर झुकाने के बजाय कटाना मंजूर किया। इसी वजह से दुनिया आज भी उनके बलिदान को मोहर्रम के इन दिनों में पूरी अक़ीदत से याद करती है। लेखक का मानना है कि इमाम हुसैन को चाहने या हुसैनी होने के लिए मुसलमान होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि हर इंसानियत पसंद व्यक्ति हुसैनी हो सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। यही कारण है कि यह त्यौहार हमेशा आपसी सौहार्द के साथ मनाया जाता है।
    user_Aditya Sarwan
    Aditya Sarwan
    Local News Reporter अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मोहर्रम के पावन अवसर पर अंबाह नगर में मुस्लिम समाज द्वारा पारंपरिक श्रद्धा, अनुशासन और धार्मिक आस्था के साथ ताजिया जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लिया, जिन्होंने पूरे नगर में आपसी भाईचारे, शांति और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश दिया। ताजिया जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों, जिनमें किला स्कूल, जैन गली, परेश चौराहा और गज क्षेत्र शामिल हैं, से होता हुआ कर्बला पहुँचा। वहाँ धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार ताजियों का सुपुर्द-ए-खाक (समापन) किया गया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा "या हुसैन" की सदाओं के बीच श्रद्धा और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। जुलूस के दौरान, विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और समाजसेवियों ने जगह-जगह ठंडे पानी, शरबत, सब्जी-पूड़ी, बिस्कुट, पेप्सी, टिक्की, चाउमीन और वेज पुलाव सहित अन्य खाद्य सामग्री की निःशुल्क व्यवस्था की, जिसका लाभ नगरवासियों और राहगीरों ने उठाया तथा आयोजकों की सराहना की। इस अवसर पर नगरवासियों ने आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की मिसाल पेश की। पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा, जहाँ अधिकारियों और पुलिस बल ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था संभाली, यातायात को सुचारु बनाए रखा और जुलूस को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मुस्लिम समाज ने सभी नगरवासियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन के दौरान शांति, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द का वातावरण बना रहा, जिससे अंबाह नगर ने एक बार फिर सांप्रदायिक सद्भाव और एकता की मिसाल प्रस्तुत की।
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    मोहर्रम के पावन अवसर पर अंबाह नगर में मुस्लिम समाज द्वारा पारंपरिक श्रद्धा, अनुशासन और धार्मिक आस्था के साथ ताजिया जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लिया, जिन्होंने पूरे नगर में आपसी भाईचारे, शांति और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश दिया।

ताजिया जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों, जिनमें किला स्कूल, जैन गली, परेश चौराहा और गज क्षेत्र शामिल हैं, से होता हुआ कर्बला पहुँचा। वहाँ धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार ताजियों का सुपुर्द-ए-खाक (समापन) किया गया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा "या हुसैन" की सदाओं के बीच श्रद्धा और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। जुलूस के दौरान, विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और समाजसेवियों ने जगह-जगह ठंडे पानी, शरबत, सब्जी-पूड़ी, बिस्कुट, पेप्सी, टिक्की, चाउमीन और वेज पुलाव सहित अन्य खाद्य सामग्री की निःशुल्क व्यवस्था की, जिसका लाभ नगरवासियों और राहगीरों ने उठाया तथा आयोजकों की सराहना की।

इस अवसर पर नगरवासियों ने आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की मिसाल पेश की। पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा, जहाँ अधिकारियों और पुलिस बल ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था संभाली, यातायात को सुचारु बनाए रखा और जुलूस को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मुस्लिम समाज ने सभी नगरवासियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन के दौरान शांति, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द का वातावरण बना रहा, जिससे अंबाह नगर ने एक बार फिर सांप्रदायिक सद्भाव और एकता की मिसाल प्रस्तुत की।
    user_Bunty shrivas
    Bunty shrivas
    अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • एक संगठन ने एक अनूठी पेशकश की है, जिसके तहत यह घोषणा की गई है कि जो भी व्यक्ति यह स्पष्ट रूप से बता पाएगा कि 'यह रोड है या नाला', उसे संगठन की ओर से ₹2100 की राशि प्रदान की जाएगी।
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    एक संगठन ने एक अनूठी पेशकश की है, जिसके तहत यह घोषणा की गई है कि जो भी व्यक्ति यह स्पष्ट रूप से बता पाएगा कि 'यह रोड है या नाला', उसे संगठन की ओर से ₹2100 की राशि प्रदान की जाएगी।
    user_Patrakar वंदे भारत न्यूज़
    Patrakar वंदे भारत न्यूज़
    अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री, श्री लाल सिंह आर्य, शनिवार को पोरसा क्षेत्र के ग्राम पियनी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे। उन्होंने हाल ही में अपनी चाचा जी की पुत्री के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान, श्री आर्य ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और सांत्वना दी। इस अवसर पर, श्री आर्य ने स्पष्ट किया कि वे पारिवारिक शोक के कारण ही ग्राम पियनी आए हैं, और परिवार के दुःख में सहभागी होना अपना कर्तव्य मानते हैं। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। श्री आर्य ने यह भी जानकारी दी कि श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद वे क्षेत्र के अन्य स्थानों का दौरा भी करेंगे।
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    अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री, श्री लाल सिंह आर्य, शनिवार को पोरसा क्षेत्र के ग्राम पियनी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे। उन्होंने हाल ही में अपनी चाचा जी की पुत्री के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान, श्री आर्य ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और सांत्वना दी।

इस अवसर पर, श्री आर्य ने स्पष्ट किया कि वे पारिवारिक शोक के कारण ही ग्राम पियनी आए हैं, और परिवार के दुःख में सहभागी होना अपना कर्तव्य मानते हैं। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। श्री आर्य ने यह भी जानकारी दी कि श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद वे क्षेत्र के अन्य स्थानों का दौरा भी करेंगे।
    user_Mahaveer Jain
    Mahaveer Jain
    Mechanic पोरसा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मुरैना पुलिस को चोरी के एक मामले में बड़ी सफलता मिली है, जहाँ सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 45 हजार रुपये का चोरी हुआ माल बरामद कर लिया है। यह मामला 30 मई 2026 की रात का है, जब फरियादी के घर का दरवाजा गर्मी के कारण खुला रह गया था। इसी का फायदा उठाकर अज्ञात चोर घर में घुस गए और वहाँ से 7 रजिस्ट्रियां, 8 पासबुक, 3 चेक बुक, 1000 रुपये नकद और एक रेडमी मोबाइल फोन चुरा ले गए। पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना के निर्देशन में गठित एक टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मुखबिर की सूचना पर शिकारपुर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर की खाली प्लॉटिंग में दबिश दी। इस कार्रवाई में दो संदिग्धों को पकड़ा गया, जिन्होंने पूछताछ के दौरान चोरी करना स्वीकार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी का पूरा सामान बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है।
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    मुरैना पुलिस को चोरी के एक मामले में बड़ी सफलता मिली है, जहाँ सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 45 हजार रुपये का चोरी हुआ माल बरामद कर लिया है।

यह मामला 30 मई 2026 की रात का है, जब फरियादी के घर का दरवाजा गर्मी के कारण खुला रह गया था। इसी का फायदा उठाकर अज्ञात चोर घर में घुस गए और वहाँ से 7 रजिस्ट्रियां, 8 पासबुक, 3 चेक बुक, 1000 रुपये नकद और एक रेडमी मोबाइल फोन चुरा ले गए।

पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना के निर्देशन में गठित एक टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मुखबिर की सूचना पर शिकारपुर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर की खाली प्लॉटिंग में दबिश दी। इस कार्रवाई में दो संदिग्धों को पकड़ा गया, जिन्होंने पूछताछ के दौरान चोरी करना स्वीकार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी का पूरा सामान बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है।
    user_नीरज धर्मवीर पचौरी पत्रकार
    नीरज धर्मवीर पचौरी पत्रकार
    Advertising agency पोरसा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मुरैना जिले के थाना सराय छोला क्षेत्र के ग्राम कैमरा में अनुसूचित जाति के एक दुकानदार ने गांव के कुछ लोगों पर लूट, मारपीट, जातिसूचक अपमान, जान से मारने की धमकी देने और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने इस संबंध में 27 जून को पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। यह घटना 26 जून की रात करीब 8:30 बजे हुई थी। शिकायतकर्ता गजराज सिंह पुत्र रामवीर सिंह के अनुसार, 26 जून की रात देबू गुर्जर उसकी दुकान पर उधार राजश्री की पुड़िया लेने आया था। उधार देने से मना करने पर देबू नाराज होकर चला गया और थोड़ी देर बाद अपने साथ नागेंद्र गुर्जर, सौरव गुर्जर, मनोज और अन्य लोगों को कट्टे व बंदूक जैसे हथियारों के साथ लेकर लौटा। आरोप है कि इन सभी आरोपियों ने गजराज सिंह को दुकान से बाहर खींचकर मारपीट की, जातिसूचक गालियां दीं और दुकान में रखी राजश्री तथा गोल्ड मोहर की पुड़ियां व करीब एक हजार रुपये नकद लूट लिए। इस दौरान गजराज की मां भी मौके पर मौजूद थीं। जाते समय, आरोपियों ने पुलिस में शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मारने और गांव से बेदखल करने की धमकी भी दी। गजराज सिंह ने बताया कि घटना के बाद उसने डायल-112 की मदद से थाना सराय छोला पहुंचकर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। आरोप है कि पुलिस ने सिर्फ एक आवेदन टाइप कर उसे बिना किसी प्राप्ति रसीद के वापस कर दिया। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी नागेंद्र गुर्जर के विरुद्ध पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और जिला बदर की कार्रवाई होने के बावजूद वह गांव में रहकर अवैध गतिविधियां चला रहा है। भय के कारण पीड़ित परिवार गांव छोड़कर मुरैना आ गया है और उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा उन्हें गांव में पुनः सुरक्षित रूप से बसाने की मांग की है।
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    मुरैना जिले के थाना सराय छोला क्षेत्र के ग्राम कैमरा में अनुसूचित जाति के एक दुकानदार ने गांव के कुछ लोगों पर लूट, मारपीट, जातिसूचक अपमान, जान से मारने की धमकी देने और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने इस संबंध में 27 जून को पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। यह घटना 26 जून की रात करीब 8:30 बजे हुई थी।

शिकायतकर्ता गजराज सिंह पुत्र रामवीर सिंह के अनुसार, 26 जून की रात देबू गुर्जर उसकी दुकान पर उधार राजश्री की पुड़िया लेने आया था। उधार देने से मना करने पर देबू नाराज होकर चला गया और थोड़ी देर बाद अपने साथ नागेंद्र गुर्जर, सौरव गुर्जर, मनोज और अन्य लोगों को कट्टे व बंदूक जैसे हथियारों के साथ लेकर लौटा। आरोप है कि इन सभी आरोपियों ने गजराज सिंह को दुकान से बाहर खींचकर मारपीट की, जातिसूचक गालियां दीं और दुकान में रखी राजश्री तथा गोल्ड मोहर की पुड़ियां व करीब एक हजार रुपये नकद लूट लिए। इस दौरान गजराज की मां भी मौके पर मौजूद थीं। जाते समय, आरोपियों ने पुलिस में शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मारने और गांव से बेदखल करने की धमकी भी दी।

गजराज सिंह ने बताया कि घटना के बाद उसने डायल-112 की मदद से थाना सराय छोला पहुंचकर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। आरोप है कि पुलिस ने सिर्फ एक आवेदन टाइप कर उसे बिना किसी प्राप्ति रसीद के वापस कर दिया। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी नागेंद्र गुर्जर के विरुद्ध पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और जिला बदर की कार्रवाई होने के बावजूद वह गांव में रहकर अवैध गतिविधियां चला रहा है।

भय के कारण पीड़ित परिवार गांव छोड़कर मुरैना आ गया है और उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा उन्हें गांव में पुनः सुरक्षित रूप से बसाने की मांग की है।
    user_JP NEWS झोलाछाप पत्रकार /Rohit bajouriya
    JP NEWS झोलाछाप पत्रकार /Rohit bajouriya
    मीडिया Morena, Madhya Pradesh•
    1 hr ago
  • अंबाह के विद्युत वितरण केंद्र थरा के सामने शनिवार शाम करीब 4:00 बजे एक बड़ा हादसा टल गया। एक अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे खड़ी दूसरी कार को टक्कर मार दी, जिसके बाद वह खाई में जा गिरी। गनीमत रही कि इस घटना में दोनों गाड़ियों के सवार पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, हिंगावली के सरपंच सत्यनारायण शर्मा सेंथरा जा रहे थे और रास्ते में बिजली बिल संबंधी पूछताछ के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी बिजली कार्यालय के सामने एक तरफ खड़ी की थी। इसी दौरान, पोरसा की ओर से आ रही परीक्षितपुरा निवासी एक गाड़ी संख्या एमपी 06 सीए 8128 अनियंत्रित हो गई और सरपंच की खड़ी गाड़ी से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, लेकिन सौभाग्य से जिस गाड़ी में टक्कर लगी, उसमें कोई सवार नहीं था। सभी सवार सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को जानकारी दी गई।
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    अंबाह के विद्युत वितरण केंद्र थरा के सामने शनिवार शाम करीब 4:00 बजे एक बड़ा हादसा टल गया। एक अनियंत्रित कार ने सड़क किनारे खड़ी दूसरी कार को टक्कर मार दी, जिसके बाद वह खाई में जा गिरी। गनीमत रही कि इस घटना में दोनों गाड़ियों के सवार पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, हिंगावली के सरपंच सत्यनारायण शर्मा सेंथरा जा रहे थे और रास्ते में बिजली बिल संबंधी पूछताछ के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी बिजली कार्यालय के सामने एक तरफ खड़ी की थी। इसी दौरान, पोरसा की ओर से आ रही परीक्षितपुरा निवासी एक गाड़ी संख्या एमपी 06 सीए 8128 अनियंत्रित हो गई और सरपंच की खड़ी गाड़ी से जा टकराई।

टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, लेकिन सौभाग्य से जिस गाड़ी में टक्कर लगी, उसमें कोई सवार नहीं था। सभी सवार सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को जानकारी दी गई।
    user_भीमसेन सिंह तोमर पत्रकार थरा
    भीमसेन सिंह तोमर पत्रकार थरा
    अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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