बगहा नगर परिषद क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है, जहाँ करोड़ों रुपये की लागत से अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में निर्मित जलमीनार और नल-जल योजना बीते कई वर्षों से बंद पड़ी है। यह महत्वाकांक्षी सरकारी योजना, जिस पर भारी धनराशि खर्च की गई, अब लोगों के लिए राहत के बजाय उपेक्षा और लापरवाही का प्रतीक बन गई है। जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के वार्ड संख्या 28 और 30 में पिछले लगभग चार वर्षों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। इस कारण हजारों लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए प्रतिदिन संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि जलमीनार मौजूद होने के बावजूद पानी घरों तक नहीं पहुँच रहा, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। वार्ड पार्षद संजय यादव ने बताया कि जलमीनार और पाइपलाइन सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, और इस गंभीर समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह योजना समय पर चालू रहती, तो उन्हें पानी के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता। वर्तमान में वार्ड 28 और 30 के निवासी चापाकलों और अन्य सीमित जलस्रोतों पर निर्भर हैं, जिन पर गर्मी बढ़ने के साथ दबाव और बढ़ गया है, जिससे समस्या और विकराल हो गई है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, कई परिवारों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और सुबह से देर शाम तक उनका समय व श्रम बर्बाद हो रहा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत और मांग के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार जलापूर्ति व्यवस्था का बंद पड़े रहना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करता है। अब स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और नगर परिषद से तत्काल नल-जल योजना को चालू करने, जलमीनार और पाइपलाइन सिस्टम की मरम्मत कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लोगों को इस भीषण गर्मी में पेयजल संकट से राहत मिल सके। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
बगहा नगर परिषद क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है, जहाँ करोड़ों रुपये की लागत से अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में निर्मित जलमीनार और नल-जल योजना बीते कई वर्षों से बंद पड़ी है। यह महत्वाकांक्षी सरकारी योजना, जिस पर भारी धनराशि खर्च की गई, अब लोगों के लिए राहत के बजाय उपेक्षा और लापरवाही का प्रतीक बन गई है। जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के वार्ड संख्या 28 और 30 में पिछले लगभग चार वर्षों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। इस कारण हजारों लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए प्रतिदिन संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि जलमीनार मौजूद होने के बावजूद पानी घरों तक नहीं पहुँच रहा, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। वार्ड पार्षद संजय यादव ने बताया कि जलमीनार और पाइपलाइन सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, और इस गंभीर समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह योजना समय पर चालू रहती, तो उन्हें पानी के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता। वर्तमान में वार्ड 28 और 30 के निवासी चापाकलों और अन्य सीमित जलस्रोतों पर निर्भर हैं, जिन पर गर्मी बढ़ने के साथ दबाव और बढ़ गया है, जिससे समस्या और विकराल हो गई है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, कई परिवारों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और सुबह से देर शाम तक उनका समय व श्रम बर्बाद हो रहा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत और मांग के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार जलापूर्ति व्यवस्था का बंद पड़े रहना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करता है। अब स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और नगर परिषद से तत्काल नल-जल योजना को चालू करने, जलमीनार और पाइपलाइन सिस्टम की मरम्मत कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लोगों को इस भीषण गर्मी में पेयजल संकट से राहत मिल सके। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
- जनसुराज पार्टी के जिला महासचिव और लौरिया विधानसभा संयोजक अजय ठाकुर ने शुक्रवार को लौरिया प्रखंड के ठाकुर टोला स्थित अपने कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने रोजगार, पलायन, किसानों की समस्याओं और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सरकार की आलोचना की। ठाकुर ने आरोप लगाया कि चुनाव पूर्व किए गए कई वादे आज भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पाँच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का सरकार का वादा पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि राज्य में सीमित लोगों को ही रोजगार मिल रहा है। बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं और छात्रों को रोजगार के नाम पर बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन सरकार गठन के महीनों बाद भी कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को दो लाख रुपये देने के वादे, बढ़ते कर्ज और परिवारवाद के मुद्दे भी उठाए। किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हर साल यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान रहते हैं और आंदोलन करने को विवश होते हैं, लेकिन समाधान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाता है। अजय ठाकुर ने जोर देकर कहा कि बिहार में रोजगार की कमी, युवाओं का पलायन, किसानों की खाद समस्या और अधूरे चुनावी वादे आज सबसे बड़े जनसरोकार के मुद्दे हैं। उन्होंने घोषणा की कि जनसुराज पार्टी इन सवालों को लेकर जनता के बीच जाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि 20 जून से जनसुराज पार्टी बिहार नवनिर्माण अभियान के एक नए चरण की शुरुआत करेगी, जिसके तहत जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहटा स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहकर लोगों के बीच कार्य करेंगे और संगठन को गाँव-गाँव तक मजबूत बनाने का अभियान चलाएंगे। इस प्रेस वार्ता में पिंटू ठाकुर, अनमोल कुमार, विनय माझी, कौशल्या देवी, नितेश राणा, अबीता ठाकुर, अरविंद राम, जय सिंधु, हैप्पी कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- कई वर्षों से कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी सेब की पहचान अब बदल रही है, क्योंकि बिहार की धरती पर भी लाल सेबों की बंपर पैदावार हो रही है। पश्चिम चम्पारण के किसान इस बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहे हैं, जिससे बिहार अब सेब उत्पादन की दिशा में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पश्चिम चम्पारण के साथ-साथ गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों में किसान अब व्यावसायिक स्तर पर सेब की खेती कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड स्थित बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे ने दो साल पहले करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब फलों से लदे हुए हैं। प्रत्येक पेड़ से 8 से 10 किलो तक सेब का उत्पादन हो रहा है, जिनकी गुणवत्ता, मिठास, रंग और आकार किसी भी पहाड़ी प्रदेश में उगने वाले सेब से कम नहीं है। शिशिर दूबे के अनुसार, शुरुआत में बिहार की गर्म जलवायु में सेब की खेती की सफलता पर लोगों को विश्वास नहीं था, लेकिन अब दूर-दूर से लोग उनके बगीचे को देखने और खेती की तकनीक जानने आ रहे हैं। इस अभियान में बेतिया शहर के व्यवसायी मेराजुल हक भी शामिल हुए हैं, जिन्होंने पर्यावरण प्रेम के चलते अपने आवास और परिसर में सेब के कई पौधे लगाए, जो अब फल दे रहे हैं। उनका मानना है कि फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है। पश्चिम चम्पारण में मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के विजय गिरी जैसे अन्य किसान भी सेब की खेती में सफलता हासिल कर रहे हैं, जिनके बागानों में दर्जनों पौधे लगातार फल दे रहे हैं। बिहार में उगाए जा रहे सेब की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय से पहले उपलब्धता है। जहां हिमाचल और कश्मीर में सेब की कटाई सितंबर और अक्टूबर में होती है, वहीं बिहार में जून और जुलाई तक इसकी तुड़ाई पूरी हो जाती है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिलता है क्योंकि उनका उत्पाद बाजार में दो महीने पहले पहुंच जाता है और उन्हें बेहतर कीमतें मिलती हैं। वर्तमान में पश्चिम चम्पारण में ये सेब ₹200 प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि कई जगहों पर इसकी कीमत ₹250 प्रति किलो तक पहुंच रही है। यह सेब बेहद मीठा, रसीला और आकर्षक लाल रंग का होता है, जो पकने पर पूरी तरह लाल हो जाता है। किसानों द्वारा उगाई जा रही सेब की यह विशेष किस्म HRMN-99 (हरमन-99) है, जिसे विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किस्म 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी आसानी से विकसित होती है और पौधारोपण के एक से दो वर्ष के भीतर ही फल देना शुरू कर देती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म बिहार के किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर लाभ देने की क्षमता रखती है। यदि सरकारी स्तर पर तकनीकी सहायता और बाजार की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो, तो बिहार भविष्य में सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। पश्चिम चम्पारण में सेब के पौधे खेती में नवाचार और नई सोच से असंभव को संभव बनाने का प्रमाण हैं, जो बिहार में सेब उत्पादन की एक नई कहानी लिख रहे हैं। कभी पहाड़ों की पहचान माना जाने वाला सेब अब बिहार की मिट्टी में भी सफलता की नई फसल बन चुका है और यह बिहार का लाल सेब अब देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।1
- पश्चिम चंपारण जिले के योगपट्टी ब्लॉक के तहत ढढवा ग्राम पंचायत के दूधियवा गांव में सड़क की हालत बेहद खराब है। गांव के लोगों ने संबंधित अधिकारियों से भावुक अपील की है कि कृपया इस सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें खराब सड़क के कारण हो रही परेशानियों से निजात मिल सके। यह गांव नवलपुर थाना क्षेत्र में आता है।1
- पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली में जिलाधिकारी के आदेश पर खंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के नेतृत्व में एक टीम ने स्टेशन रोड स्थित फैजुल ओलूम लाल मदरसा का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान, टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर आवश्यक जानकारी जुटाई।1
- गोपालगंज प्रशासन को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ उचकागाँव पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रक को जब्त किया है। यह कार्रवाई संत मोड़ नामक स्थान पर की गई, जिसे पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।1
- गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र स्थित सुंदर पट्टी गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहाँ एक अनियंत्रित बाइक की टक्कर से 55 वर्षीय साइकिल सवार मजदूर बैजनाथ यादव की मौत हो गई। बैजनाथ यादव, जो नगर थाना क्षेत्र के कोन्हवा गांव के निवासी थे, रोज़ की तरह थावे के वृंदावन गांव से मजदूरी कर साइकिल से अपने घर लौट रहे थे। सुंदर पट्टी गांव के पास पहुँचते ही उन्हें एक तेज़ रफ़्तार बाइक ने टक्कर मार दी। इस टक्कर में बैजनाथ यादव के साथ-साथ बाइक पर सवार दोनों युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान मजदूर बैजनाथ यादव ने दम तोड़ दिया। घायल बाइक सवारों की पहचान नगर थाना क्षेत्र के बसडिला निवासी 16 वर्षीय रेयाज अली और छपरा निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद इब्राहम के रूप में हुई है, जो अपने मामा के घर आया था। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने घटना स्थल से ही दोनों बाइक सवारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।1
- कुशीनगर में नारायणी नदी में नहाने गए दो किशोर शुक्रवार को लापता हो गए थे, जिनमें से एक 10 वर्षीय पवन का शव शनिवार को लगभग 24 घंटे के कठिन बचाव अभियान के बाद बरामद कर लिया गया है। दूसरे 11 वर्षीय किशोर शिवम की तलाश अभी भी जारी है। शुक्रवार को स्थानीय गोताखोरों ने घंटों तक लापता बच्चों की खोजबीन की, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मौके पर एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को बुलाया। शनिवार को टीम ने करीब 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पवन का शव नदी से बरामद कर लिया, जिसके बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही बरवापट्टी थाना प्रभारी दिनेश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं। पुलिस ने पवन के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया है कि एक बच्चे का शव मिल गया है, और एसडीआरएफ की टीम, स्थानीय मल्लाह व ग्रामीण मिलकर दूसरे लापता बच्चे शिवम की तलाश में जुटे हैं। उन्होंने जल्द ही शिवम को भी ढूंढ लेने की उम्मीद जताई है।1
- बेतिया व्यवहार न्यायालय ने जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को पश्चिम चंपारण के भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। प्रशांत किशोर पर आरोप है कि उन्होंने सितंबर 2025 में एक जनसभा के दौरान सांसद डॉ. संजय जायसवाल पर "तेल चोर" सहित अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2025 में बेतिया फ्लाईओवर ब्रिज के कथित गलत अलाइनमेंट के संदर्भ में भी उन्होंने सांसद पर निजी लाभ के लिए कार्य करने तथा "टूटपुंजिया नेता" जैसे शब्दों का प्रयोग किया था। इन बयानों को मानहानिकारक बताते हुए सांसद एवं लोकसभा सचेतक डॉ. संजय जायसवाल ने बेतिया व्यवहार न्यायालय में एक परिवाद दायर किया था। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया और प्रशांत किशोर को अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है। सांसद के अधिवक्ता चंद्रिका कुशवाहा ने मीडिया को जानकारी दी कि दायर परिवाद में यह आरोप लगाया गया है कि इन टिप्पणियों से सांसद की व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि के साथ-साथ उनके पूरे परिवार की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचा है, जिसके लिए मानहानि का दावा किया गया है।1