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उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना को लेकर एक प्रबल मांग उठाई गई है। इस मांग के पीछे यह दृढ़ विश्वास है कि यदि गैरसैंण में AIIMS का निर्माण होता है, तभी पहाड़ के लोगों का जीवन सुरक्षित रह पाएगा। पोस्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि AIIMS के अभाव में पहाड़ के सभी लोग अपनी जान गंवा देंगे, क्योंकि उनके पास जीने का कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। यह एक ऐसी आवाज़ है जो वर्ष 2027 तक इस स्थिति में परिवर्तन लाने की उम्मीद के साथ उठाई गई है।
पवन नेगी
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना को लेकर एक प्रबल मांग उठाई गई है। इस मांग के पीछे यह दृढ़ विश्वास है कि यदि गैरसैंण में AIIMS का निर्माण होता है, तभी पहाड़ के लोगों का जीवन सुरक्षित रह पाएगा। पोस्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि AIIMS के अभाव में पहाड़ के सभी लोग अपनी जान गंवा देंगे, क्योंकि उनके पास जीने का कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। यह एक ऐसी आवाज़ है जो वर्ष 2027 तक इस स्थिति में परिवर्तन लाने की उम्मीद के साथ उठाई गई है।
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- एक नए संदेश में, जनता से एक अवसर देने का आह्वान किया गया है, जिसके बदले में स्वास्थ्य सुविधाओं की गारंटी दी जा रही है। इस आह्वान के तहत, यह विशेष रूप से गारंटी दी गई है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) स्थापित किया जाएगा। यह घोषणा 'एक पोस्ट एक आवाज' अभियान का हिस्सा लगती है और इसे 'परिवर्तन 2027' के व्यापक उद्देश्य के साथ जोड़ा गया है, जो इस क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत देता है।1
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के संबंध में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार से सीधा जवाब मांगा है। कोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने वाले सरकारी अध्यादेश पर कड़ा रुख अपनाया है। कानून के छात्रों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल किए हैं कि आखिर बिना चुनाव कराए ही ग्राम प्रधानों को प्रशासक क्यों नियुक्त किया गया। इस फैसले के कारण उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति में व्यापक हलचल मच गई है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव क्यों रोके गए और इस मामले में क्या निर्णायक फैसला आता है।1
- भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, नैनीताल जनपद में 2 और 3 जुलाई को कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इस चेतावनी के मद्देनजर, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पूरे जिले में "ऑरेंज अलर्ट" घोषित करते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि भारी वर्षा के कारण भूस्खलन होने और पेड़ों के गिरने से मोटर मार्ग बाधित हो सकते हैं। इससे निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनों और गैंग कार्मिकों के साथ 24 घंटे तैनात रहने को कहा गया है। साथ ही, आपदा प्रबंधन-IRS प्रणाली के सभी नामित अधिकारी और तहसील स्तर की QRT टीमें अपने मुख्यालय पर मुस्तैद रहेंगी। सभी अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन ऑन रखने और हर घंटे की रिपोर्ट जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे 2 और 3 जुलाई के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें और नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास न जाएं। किसी भी आपात स्थिति में जनता दूरभाष नंबर 05942-231178 / 79 / 81, मोबाइल नंबर 8272080884, या टोल फ्री नंबर 1077 पर संपर्क कर सकती है।1
- माँ नंदा देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने नैनीताल नगर और उसकी झील के 'नाश विनाश' को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने हाल ही में झील के चारों ओर बनाए जा रहे छह कंक्रीट हट्स को इस विनाश का एक प्रमुख कारण बताया है। टंडन ने विस्तार से बताया कि ये हट्स न केवल झील से एकदम सटे हुए हैं, बल्कि कुछ तो लगभग झील के ऊपर ही बने हैं। उन्होंने अपनी आँखों से एक लाइब्रेरी के पास वाले हट की तराई होते देखी, जिससे बचा हुआ गाद सीधे ताल में चला गया। उनके अनुसार, निर्माण के दौरान हुई क्षति अलग है। इन छह हट्स में से यह विशिष्ट हट, लाइटहाउस के तर्क पर, काफी ऊँचाई पर स्थित है। माँ नंदा देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने मांग की है कि बोट हाउस क्लब के सामने तोड़े जाने वाले कंक्रीट ढांचे के साथ-साथ इन छह कंक्रीट हट्स को भी ध्वस्त किया जाए। उनका तर्क है कि एक साथ कार्रवाई करने से अधिकारियों को आसानी होगी और उन्हें भी इस मामले को उच्चतम न्यायालय के सामने एक साथ रखने में सहूलियत मिलेगी। पुनीत टंडन ने बल देते हुए कहा कि विभागीय रूप से भले ही ये मामले अलग-अलग हों, लेकिन नैनीताल के अच्छे पर्यटन को बचाने और इसे पूर्ण विनाश से रोकने के लिए ये सभी एक ही दिशा के अलग-अलग रास्ते हैं। उन्होंने 'माँ नंदा सुनंदा के आशीर्वाद' का आह्वान करते हुए कहा कि जो गलत प्रत्यक्ष रूप से सामने दिख रहा है, उसके लिए पुरजोर आवाज उठाई जानी चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश है कि नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता को कंक्रीट से बदसूरत बनाया जा रहा है, और इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।1
- नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में एक होटल में कार्यरत 31 वर्षीय प्रकाश आर्या का शव मंगलवार को नैनीताल झील से बरामद किया गया। यह शव पाषाण देवी मंदिर के समीप मिला। प्रकाश आर्या पिछले तीन दिनों से लापता चल रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और शव को झील से बाहर निकालकर अपने कब्जे में ले लिया। शव को आगे की कार्रवाई के लिए पोस्टमॉर्टम हेतु भेज दिया गया है।1
- मालिकाना हक की अपनी मांग को लेकर टीनशेड के निवासियों ने पुनर्वास विभाग का घेराव किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, टीनशेड वासियों ने विभाग को एक ज्ञापन भी सौंपा।1
- Available for Sale Locality : Pipal Pokhra No 1 Area (dimensions) : 1930 Expected Price : 9200000 Property Type : Independent House / Villa Property Condition : New Bedrooms (BHK) : 2 BHK Furnishing : Unfurnished 🏡 बिक्री हेतु अंडर-कंस्ट्रक्शन स्वतंत्र मकान 🏡 📍 स्थान: फतेहपुर रोड, गांधी आश्रम, पीपल पोखरा नं. 1, हल्द्वानी, एबीएम स्कूल के नजदीक। उत्तराखंड लगभग 1930 वर्गफुट प्लॉट पर निर्मित लगभग 1150 वर्गफुट अंडर-कंस्ट्रक्शन मकान बिक्री बुकिंग हेतु उपलब्ध है। ✅ अच्छी लोकेशन पर स्थित ✅2 बेडरूम अटेच बाथरूम ✅किचन ✅मंदीर ✅लॉबी ✅800/900 sqft ओपन स्पेस ✅उत्तर मुहाना है। ✅डबल साइड रोड ✅ मजबूत एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य ✅ चौड़ी सड़क एवं आसान आवागमन ✅ शांत एवं विकसित आवासीय क्षेत्र ✅ स्कूल, मार्केट, अस्पताल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं नजदीक ✅ खरीदार अपनी पसंद के अनुसार फिनिशिंग करवा सकता है। ✅मकान कार्य कंप्लीट करके मिलेगा। ✅ रहने एवं निवेश दोनों के लिए बेहतरीन अवसर 📐 प्लॉट क्षेत्रफल: 1930 वर्गफुट 🏗️ स्थिति: Under Construction 📞 संपर्क: [9045168091]2
- उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना को लेकर एक प्रबल मांग उठाई गई है। इस मांग के पीछे यह दृढ़ विश्वास है कि यदि गैरसैंण में AIIMS का निर्माण होता है, तभी पहाड़ के लोगों का जीवन सुरक्षित रह पाएगा। पोस्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि AIIMS के अभाव में पहाड़ के सभी लोग अपनी जान गंवा देंगे, क्योंकि उनके पास जीने का कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। यह एक ऐसी आवाज़ है जो वर्ष 2027 तक इस स्थिति में परिवर्तन लाने की उम्मीद के साथ उठाई गई है।1