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थे… वही पिता उन्हें आग में झोंक रहा था।” मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों को जिंदा जलाने की कोशिश कर डाली। 🚨 क्या हुआ उस शाम? शुक्रवार शाम करीब 5 बजे तिवारी मोहल्ले में रहने वाले राघवेंद्र तिवारी ने अपने 8 साल के बेटे जय और 5 साल के बेटे हर्ष मणि को कमरे में बंद कर दिया… और फिर आग लगा दी। उसी समय बच्चों की मां का फोन आया… फोन उठाते ही उसने जो सुना, वो किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना है— “मम्मी… बचाओ… पापा मत जलाओ…” ⚠️ पड़ोसियों ने बचाई जान घर से धुआं उठता देख पड़ोसियों को शक हुआ। उन्होंने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसे। कमरे में धुआं भरा था… दोनों बच्चे कोने में सहमे हुए थे… आग तेजी से फैल रही थी। लोगों ने किसी तरह आग बुझाई और बच्चों को बाहर निकाला। 😡 बचाने से भी रोक रहा था पिता सबसे चौंकाने वाली बात— जब पड़ोसी बच्चों को बचाने पहुंचे, तो आरोपी पिता उन्हें रोकने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह पत्थर लेकर खड़ा था और कह रहा था— “क्यों बचा रहे हो?” 🏥 बच्चे खतरे से बाहर, लेकिन सदमे में इस हादसे में दोनों बच्चों के हाथ-पैर हल्के झुलस गए हैं। उन्हें नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन इतना डर गए हैं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रहे। 🔍 तांत्रिक एंगल की जांच सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पिता किसी तांत्रिक के संपर्क में था। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि कहीं इसी के कहने पर तो उसने यह खौफनाक कदम नहीं उठाया। 💬 अब सवाल आपसे… * क्या अंधविश्वास इंसान को इतना अंधा बना सकता है कि वह अपने ही बच्चों की जान लेने पर उतर आए? * ऐसे मामलों में समाज और परिवार की क्या जिम्मेदारी बनती है? * क्या अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून और जागरूकता जरूरी नहीं है? … क्योंकि ये सिर्फ एक घटना नहीं… इंसानियत पर सवाल है। “जब बच्चे ‘पापा’ कहकर पुकार रहे थे… वही पिता उन्हें आग में झोंक रहा था।” मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों को जिंदा जलाने की कोशिश कर डाली। 🚨 क्या हुआ उस शाम? शुक्रवार शाम करीब 5 बजे तिवारी मोहल्ले में रहने वाले राघवेंद्र तिवारी ने अपने 8 साल के बेटे जय और 5 साल के बेटे हर्ष मणि को कमरे में बंद कर दिया… और फिर आग लगा दी। उसी समय बच्चों की मां का फोन आया… फोन उठाते ही उसने जो सुना, वो किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना है— “मम्मी… बचाओ… पापा मत जलाओ…” ⚠️ पड़ोसियों ने बचाई जान घर से धुआं उठता देख पड़ोसियों को शक हुआ। उन्होंने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसे। कमरे में धुआं भरा था… दोनों बच्चे कोने में सहमे हुए थे… आग तेजी से फैल रही थी। लोगों ने किसी तरह आग बुझाई और बच्चों को बाहर निकाला। 😡 बचाने से भी रोक रहा था पिता सबसे चौंकाने वाली बात— जब पड़ोसी बच्चों को बचाने पहुंचे, तो आरोपी पिता उन्हें रोकने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह पत्थर लेकर खड़ा था और कह रहा था— “क्यों बचा रहे हो?” 🏥 बच्चे खतरे से बाहर, लेकिन सदमे में इस हादसे में दोनों बच्चों के हाथ-पैर हल्के झुलस गए हैं। उन्हें नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन इतना डर गए हैं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रहे। 🔍 तांत्रिक एंगल की जांच सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पिता किसी तांत्रिक के संपर्क में था। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि कहीं इसी के कहने पर तो उसने यह खौफनाक कदम नहीं उठाया। 💬 अब सवाल आपसे… * क्या अंधविश्वास इंसान को इतना अंधा बना सकता है कि वह अपने ही बच्चों की जान लेने पर उतर आए? * ऐसे मामलों में समाज और परिवार की क्या जिम्मेदारी बनती है? * क्या अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून और जागरूकता जरूरी नहीं है? … क्योंकि ये सिर्फ एक घटना नहीं… इंसानियत पर सवाल है।🫢🫢🫣

1 hr ago
user_Dhruv Muskan
Dhruv Muskan
Singer तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago
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थे… वही पिता उन्हें आग में झोंक रहा था।” मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों को जिंदा जलाने की कोशिश कर डाली। 🚨 क्या हुआ उस शाम? शुक्रवार शाम करीब 5 बजे तिवारी मोहल्ले में रहने वाले राघवेंद्र तिवारी ने अपने 8 साल के बेटे जय और 5 साल के बेटे हर्ष मणि को कमरे में बंद कर दिया… और फिर आग लगा दी। उसी समय बच्चों की मां का फोन आया… फोन उठाते ही उसने जो सुना, वो किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना है— “मम्मी… बचाओ… पापा मत जलाओ…” ⚠️ पड़ोसियों ने बचाई जान घर से धुआं उठता देख पड़ोसियों को शक हुआ। उन्होंने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसे। कमरे में धुआं भरा था… दोनों बच्चे कोने में सहमे हुए थे… आग तेजी से फैल रही थी। लोगों ने किसी तरह आग बुझाई और बच्चों को बाहर निकाला। 😡 बचाने से भी रोक रहा था पिता सबसे चौंकाने वाली बात— जब पड़ोसी बच्चों को बचाने पहुंचे, तो आरोपी पिता उन्हें रोकने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह पत्थर लेकर खड़ा था और कह रहा था— “क्यों बचा रहे हो?” 🏥 बच्चे खतरे से बाहर, लेकिन सदमे में इस हादसे में दोनों बच्चों के हाथ-पैर हल्के झुलस गए हैं। उन्हें नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन इतना डर गए हैं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रहे। 🔍 तांत्रिक एंगल की जांच सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पिता किसी तांत्रिक के संपर्क में था। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि कहीं इसी के कहने पर तो उसने यह खौफनाक कदम नहीं उठाया। 💬 अब सवाल आपसे… * क्या अंधविश्वास इंसान को इतना अंधा बना सकता है कि वह अपने ही बच्चों की जान लेने पर उतर आए? * ऐसे मामलों में समाज और परिवार की क्या जिम्मेदारी बनती है? * क्या अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून और जागरूकता जरूरी नहीं है? … क्योंकि ये सिर्फ एक घटना नहीं… इंसानियत पर सवाल है। “जब बच्चे ‘पापा’ कहकर

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पुकार रहे थे… वही पिता उन्हें आग में झोंक रहा था।” मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों को जिंदा जलाने की कोशिश कर डाली। 🚨 क्या हुआ उस शाम? शुक्रवार शाम करीब 5 बजे तिवारी मोहल्ले में रहने वाले राघवेंद्र तिवारी ने अपने 8 साल के बेटे जय और 5 साल के बेटे हर्ष मणि को कमरे में बंद कर दिया… और फिर आग लगा दी। उसी समय बच्चों की मां का फोन आया… फोन उठाते ही उसने जो सुना, वो किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा डरावना सपना है— “मम्मी… बचाओ… पापा मत जलाओ…” ⚠️ पड़ोसियों ने बचाई जान घर से धुआं उठता देख पड़ोसियों को शक हुआ। उन्होंने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसे। कमरे में धुआं भरा था… दोनों बच्चे कोने में सहमे हुए थे… आग तेजी से फैल रही थी। लोगों ने किसी तरह आग बुझाई और बच्चों को बाहर निकाला। 😡 बचाने से भी रोक रहा था पिता सबसे चौंकाने वाली बात— जब पड़ोसी बच्चों को बचाने पहुंचे, तो आरोपी पिता उन्हें रोकने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह पत्थर लेकर खड़ा था और कह रहा था— “क्यों बचा रहे हो?” 🏥 बच्चे खतरे से बाहर, लेकिन सदमे में इस हादसे में दोनों बच्चों के हाथ-पैर हल्के झुलस गए हैं। उन्हें नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन इतना डर गए हैं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रहे। 🔍 तांत्रिक एंगल की जांच सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पिता किसी तांत्रिक के संपर्क में था। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि कहीं इसी के कहने पर तो उसने यह खौफनाक कदम नहीं उठाया। 💬 अब सवाल आपसे… * क्या अंधविश्वास इंसान को इतना अंधा बना सकता है कि वह अपने ही बच्चों की जान लेने पर उतर आए? * ऐसे मामलों में समाज और परिवार की क्या जिम्मेदारी बनती है? * क्या अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून और जागरूकता जरूरी नहीं है? … क्योंकि ये सिर्फ एक घटना नहीं… इंसानियत पर सवाल है।🫢🫢🫣

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    user_News of Kushinagar
    News of Kushinagar
    Classified ads newspaper publisher तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • कुशीनगर के तामकुही राज इलाके में पिछले 10 दिनों से एक बिजली ट्रांसफार्मर गिरा पड़ा है। इसके चलते कई गांवों में बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे स्थानीय निवासियों को भीषण गर्मी और दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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    कुशीनगर के तामकुही राज इलाके में पिछले 10 दिनों से एक बिजली ट्रांसफार्मर गिरा पड़ा है। इसके चलते कई गांवों में बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे स्थानीय निवासियों को भीषण गर्मी और दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
    user_Pradeep Yadav
    Pradeep Yadav
    तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • यह पोस्ट ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई के फायदे-नुकसान पर प्रकाश डालती है। जानिए कौन सा माध्यम आपके लिए सबसे प्रभावी हो सकता है और कैसे सही विकल्प चुनें।
    1
    यह पोस्ट ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई के फायदे-नुकसान पर प्रकाश डालती है। जानिए कौन सा माध्यम आपके लिए सबसे प्रभावी हो सकता है और कैसे सही विकल्प चुनें।
    user_विज्ञान शिक्षण संस्थान मिश्रबत
    विज्ञान शिक्षण संस्थान मिश्रबत
    Teacher फुलवरिया, गोपालगंज, बिहार•
    14 hrs ago
  • आजकल छात्रों के सामने ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई में से चुनने की चुनौती है। दोनों ही माध्यमों के अपने फायदे और नुकसान हैं, जो सीखने के तरीके को प्रभावित करते हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन सा तरीका आपकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है।
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    आजकल छात्रों के सामने ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई में से चुनने की चुनौती है। दोनों ही माध्यमों के अपने फायदे और नुकसान हैं, जो सीखने के तरीके को प्रभावित करते हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन सा तरीका आपकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है।
    user_Rahul Sir
    Rahul Sir
    Teacher फुलवरिया, गोपालगंज, बिहार•
    14 hrs ago
  • तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने शपथ ग्रहण समारोह में अपने मंत्रियों के साथ सेल्फी ली। शपथ लेते वक्त का यह अनोखा पल कैमरे में कैद हो गया, और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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    तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने शपथ ग्रहण समारोह में अपने मंत्रियों के साथ सेल्फी ली। शपथ लेते वक्त का यह अनोखा पल कैमरे में कैद हो गया, और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
    user_Rs News Network
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    Local News Reporter जोगापट्टी, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    8 hrs ago
  • कुशीनगर में बन रहे पुल पर एक ट्रेलर ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई।
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    कुशीनगर में बन रहे पुल पर एक ट्रेलर ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई।
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    Times Update
    Media Consultant कुशी नगर, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • बेतिया के ‘सिंघम’ विवेक दीप अब मुख्यमंत्री सुरक्षा बल में तैनात, युवाओं की धड़कन बने डीएसपी को मिली बड़ी जिम्मेदारी पश्चिम चंपारण के लोगों के दिलों पर अपनी अलग छाप छोड़ने वाले बेतिया सदर डीएसपी विवेक दीप को अब बिहार सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अपराधियों पर नकेल कसने, पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और अपनी ईमानदार कार्यशैली से युवाओं के बीच खास पहचान बनाने वाले विवेक दीप का चयन मुख्यमंत्री के विशेष सुरक्षा बल में पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए किया गया है। उनके चयन की खबर सामने आते ही पूरे पश्चिम चंपारण में खुशी के साथ-साथ मायूसी भी देखने को मिल रही है, क्योंकि जिस अधिकारी ने जनता के दिलों में भरोसा जगाया, अब वह बेतिया से पटना की नई जिम्मेदारी संभालेंगे। बेतिया सदर डीएसपी के रूप में विवेक दीप ने जिस तरह कानून व्यवस्था को मजबूत किया, उससे अपराधियों में हमेशा खौफ बना रहा। अपराध जगत में उनका नाम सुनते ही बदमाश सतर्क हो जाते थे, वहीं आम लोगों और पीड़ित परिवारों के लिए विवेक दीप उम्मीद और न्याय का दूसरा नाम बन चुके थे। उनके कार्यालय में पहुंचने वाले लोगों को सिर्फ आश्वासन नहीं मिलता था, बल्कि त्वरित कार्रवाई और न्याय भी देखने को मिलता था। यही वजह रही कि कम समय में ही वे युवाओं की धड़कन बन गए। विवेक दीप की सबसे बड़ी खासियत रही उनकी तेज जांच क्षमता और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति। लौरिया थाना क्षेत्र में जब एक 6 वर्षीय मासूम का अपहरण हुआ था, तब पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। उस कठिन समय में विवेक दीप के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई और लगातार अभियान चलाया गया। उनकी सूझबूझ और रणनीति का ही परिणाम था कि मासूम बच्चे को गोरखपुर से सकुशल बरामद कर लिया गया। इस घटना के बाद बेतिया और पूरे चंपारण में लोग उन्हें ‘सिंघम’ के नाम से बुलाने लगे थे। इतना ही नहीं, कुमारबाग थाना क्षेत्र से पांच नाबालिग बच्चियों के लापता होने का मामला भी काफी चर्चाओं में रहा था। परिवारों की चिंता और पूरे जिले में बढ़ते दबाव के बीच विवेक दीप ने अपने नेतृत्व में टीम को सक्रिय किया और लगातार जांच अभियान चलाया। आखिरकार उनकी रणनीति सफल हुई और दिल्ली से पांचों बच्चियों को सकुशल बरामद कर लिया गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विवेक दीप सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का नाम हैं। उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली और ईमानदार छवि को देखते हुए पश्चिम चंपारण के पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुमन ने कई बार उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं चंपारण रेंज के डीआईजी हरकिशोर राय ने भी विवेक दीप के कार्यों की सराहना करते हुए सम्मानित किया था। इतना ही नहीं, बिहार के डीजीपी स्तर से भी उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि विवेक दीप ने अपने कार्यकाल में पुलिसिंग की एक अलग मिसाल कायम की। बेतिया सदर डीएसपी के रूप में उन्होंने जिस तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और साफ-सुथरी कार्यशैली अपनाई, उसने युवाओं के बीच उन्हें एक प्रेरणा बना दिया। जिले के छात्र, नौजवान और युवा आज विवेक दीप को अपना आदर्श मानते हैं। युवाओं का कहना है कि जिस तरह विवेक दीप ने ईमानदारी और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, उसी रास्ते पर चलना आज उनकी भी प्रेरणा बन चुका है। आज जब विवेक दीप को मुख्यमंत्री के विशेष सुरक्षा बल में पुलिस उपाधीक्षक पद की जिम्मेदारी मिली है, तो यह सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे पश्चिम चंपारण के लिए गर्व की बात है। हालांकि, जिले के लोग इस बात से भी भावुक हैं कि उनका पसंदीदा अधिकारी अब बेतिया से विदा ले रहा है। लेकिन लोगों को विश्वास है कि जिस तरह उन्होंने चंपारण में अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई, उसी तरह नई जिम्मेदारी में भी बिहार पुलिस का नाम और गौरवान्वित करेंगे। बेतिया के ‘सिंघम’ विवेक दीप… एक ऐसा नाम जिसने अपराधियों में डर और आम लोगों में भरोसा पैदा किया। ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने विवेक दीप अब मुख्यमंत्री सुरक्षा बल की नई जिम्मेदारी संभालेंगे, लेकिन चंपारण की जनता उन्हें हमेशा अपने दिलों में याद रखेगी।
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    बेतिया के ‘सिंघम’ विवेक दीप अब मुख्यमंत्री सुरक्षा बल में तैनात, युवाओं की धड़कन बने डीएसपी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पश्चिम चंपारण के लोगों के दिलों पर अपनी अलग छाप छोड़ने वाले बेतिया सदर डीएसपी विवेक दीप को अब बिहार सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अपराधियों पर नकेल कसने, पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और अपनी ईमानदार कार्यशैली से युवाओं के बीच खास पहचान बनाने वाले विवेक दीप का चयन मुख्यमंत्री के विशेष सुरक्षा बल में पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए किया गया है। उनके चयन की खबर सामने आते ही पूरे पश्चिम चंपारण में खुशी के साथ-साथ मायूसी भी देखने को मिल रही है, क्योंकि जिस अधिकारी ने जनता के दिलों में भरोसा जगाया, अब वह बेतिया से पटना की नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
बेतिया सदर डीएसपी के रूप में विवेक दीप ने जिस तरह कानून व्यवस्था को मजबूत किया, उससे अपराधियों में हमेशा खौफ बना रहा। अपराध जगत में उनका नाम सुनते ही बदमाश सतर्क हो जाते थे, वहीं आम लोगों और पीड़ित परिवारों के लिए विवेक दीप उम्मीद और न्याय का दूसरा नाम बन चुके थे। उनके कार्यालय में पहुंचने वाले लोगों को सिर्फ आश्वासन नहीं मिलता था, बल्कि त्वरित कार्रवाई और न्याय भी देखने को मिलता था। यही वजह रही कि कम समय में ही वे युवाओं की धड़कन बन गए।
विवेक दीप की सबसे बड़ी खासियत रही उनकी तेज जांच क्षमता और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति। लौरिया थाना क्षेत्र में जब एक 6 वर्षीय मासूम का अपहरण हुआ था, तब पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। उस कठिन समय में विवेक दीप के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई और लगातार अभियान चलाया गया। उनकी सूझबूझ और रणनीति का ही परिणाम था कि मासूम बच्चे को गोरखपुर से सकुशल बरामद कर लिया गया। इस घटना के बाद बेतिया और पूरे चंपारण में लोग उन्हें ‘सिंघम’ के नाम से बुलाने लगे थे।
इतना ही नहीं, कुमारबाग थाना क्षेत्र से पांच नाबालिग बच्चियों के लापता होने का मामला भी काफी चर्चाओं में रहा था। परिवारों की चिंता और पूरे जिले में बढ़ते दबाव के बीच विवेक दीप ने अपने नेतृत्व में टीम को सक्रिय किया और लगातार जांच अभियान चलाया। आखिरकार उनकी रणनीति सफल हुई और दिल्ली से पांचों बच्चियों को सकुशल बरामद कर लिया गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विवेक दीप सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का नाम हैं।
उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली और ईमानदार छवि को देखते हुए पश्चिम चंपारण के पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुमन ने कई बार उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं चंपारण रेंज के डीआईजी हरकिशोर राय ने भी विवेक दीप के कार्यों की सराहना करते हुए सम्मानित किया था। इतना ही नहीं, बिहार के डीजीपी स्तर से भी उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि विवेक दीप ने अपने कार्यकाल में पुलिसिंग की एक अलग मिसाल कायम की।
बेतिया सदर डीएसपी के रूप में उन्होंने जिस तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और साफ-सुथरी कार्यशैली अपनाई, उसने युवाओं के बीच उन्हें एक प्रेरणा बना दिया। जिले के छात्र, नौजवान और युवा आज विवेक दीप को अपना आदर्श मानते हैं। युवाओं का कहना है कि जिस तरह विवेक दीप ने ईमानदारी और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, उसी रास्ते पर चलना आज उनकी भी प्रेरणा बन चुका है।
आज जब विवेक दीप को मुख्यमंत्री के विशेष सुरक्षा बल में पुलिस उपाधीक्षक पद की जिम्मेदारी मिली है, तो यह सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे पश्चिम चंपारण के लिए गर्व की बात है। हालांकि, जिले के लोग इस बात से भी भावुक हैं कि उनका पसंदीदा अधिकारी अब बेतिया से विदा ले रहा है। लेकिन लोगों को विश्वास है कि जिस तरह उन्होंने चंपारण में अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई, उसी तरह नई जिम्मेदारी में भी बिहार पुलिस का नाम और गौरवान्वित करेंगे।
बेतिया के ‘सिंघम’ विवेक दीप… एक ऐसा नाम जिसने अपराधियों में डर और आम लोगों में भरोसा पैदा किया। ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने विवेक दीप अब मुख्यमंत्री सुरक्षा बल की नई जिम्मेदारी संभालेंगे, लेकिन चंपारण की जनता उन्हें हमेशा अपने दिलों में याद रखेगी।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक युवक की लाश मिलने पर पुलिस और परिजनों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। शराब के ठेकों को लेकर ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं और ऐसी घटनाएं प्रदेश में पुलिस-जनता के टकराव को बढ़ा रही हैं।
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    उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक युवक की लाश मिलने पर पुलिस और परिजनों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। शराब के ठेकों को लेकर ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं और ऐसी घटनाएं प्रदेश में पुलिस-जनता के टकराव को बढ़ा रही हैं।
    user_News of Kushinagar
    News of Kushinagar
    Classified ads newspaper publisher तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
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