हरदोई के शाहाबाद में महिला लेखपाल द्वारा उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर उपजा विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जिसके चलते तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी हुई। अधिवक्ताओं ने एसडीएम के खिलाफ कोतवाली में दी गई तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और उनका स्थानांतरण करने की मांग दोहराई है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और व्यापक बनाते हुए जिले की सभी तहसीलों को जाम कर देंगे और कहीं भी न्यायिक कार्य नहीं होने दिया जाएगा। दूसरी ओर, शाहाबाद के एसडीएम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि संबंधित महिला लेखपाल को केवल शासकीय कार्य और खतौनी फीडिंग के संबंध में पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय उनके कार्यालय में अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे, जिनसे इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की निष्पक्ष जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जिसके जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आने की उम्मीद है। इस जांच के तहत सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और घटना के समय मौजूद लोगों की भूमिका जैसे कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इस विवाद की गूंज अब सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रही है, जहां समाज दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे मंचों पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जिसमें प्रमोद बर्मा जैसे कुछ लोग महिला लेखपाल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने और विभागीय जांच की मांग का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, अधिवक्ता अवनीश पाण्डेय, डॉ. एन.पी. तिवारी, ब्लॉक प्रमुख त्रिपुरेश मिश्रा, अतुल कुमार और एडवोकेट दीपक बाजपेई सहित कई लोगों ने पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए एसडीएम का समर्थन किया है और बार एसोसिएशन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, पत्रकार आनंद शुक्ला और अधिवक्ता चन्द्र किशोर मिश्रा ने दोनों पक्षों को सुनने और निष्पक्ष विधिक जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया है। लगातार चल रहे इस प्रदर्शन और अदालतों के बहिष्कार के कारण तहसील आने वाले आम फरियादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
हरदोई के शाहाबाद में महिला लेखपाल द्वारा उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर उपजा विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जिसके चलते तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी हुई। अधिवक्ताओं ने एसडीएम के खिलाफ कोतवाली में दी गई तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और उनका स्थानांतरण करने की मांग दोहराई है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और व्यापक बनाते हुए जिले की सभी तहसीलों को जाम कर देंगे और कहीं भी न्यायिक कार्य नहीं होने दिया जाएगा। दूसरी ओर, शाहाबाद के एसडीएम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि संबंधित महिला लेखपाल को केवल शासकीय कार्य और खतौनी फीडिंग के संबंध में पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय उनके कार्यालय में अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे, जिनसे इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की निष्पक्ष जांच पर सबकी
निगाहें टिकी हैं, जिसके जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आने की उम्मीद है। इस जांच के तहत सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और घटना के समय मौजूद लोगों की भूमिका जैसे कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इस विवाद की गूंज अब सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रही है, जहां समाज दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे मंचों पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जिसमें प्रमोद बर्मा जैसे कुछ लोग महिला लेखपाल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने और विभागीय जांच की मांग का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, अधिवक्ता अवनीश पाण्डेय, डॉ. एन.पी. तिवारी, ब्लॉक प्रमुख त्रिपुरेश मिश्रा, अतुल कुमार और एडवोकेट दीपक बाजपेई सहित कई लोगों ने पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए एसडीएम का समर्थन किया है और बार एसोसिएशन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, पत्रकार आनंद शुक्ला और अधिवक्ता चन्द्र किशोर मिश्रा ने दोनों पक्षों को सुनने और निष्पक्ष विधिक जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया है। लगातार चल रहे इस प्रदर्शन और अदालतों के बहिष्कार के कारण तहसील आने वाले आम फरियादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
- हरदोई के शाहाबाद में महिला लेखपाल द्वारा उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर उपजा विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जिसके चलते तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी हुई। अधिवक्ताओं ने एसडीएम के खिलाफ कोतवाली में दी गई तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और उनका स्थानांतरण करने की मांग दोहराई है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और व्यापक बनाते हुए जिले की सभी तहसीलों को जाम कर देंगे और कहीं भी न्यायिक कार्य नहीं होने दिया जाएगा। दूसरी ओर, शाहाबाद के एसडीएम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि संबंधित महिला लेखपाल को केवल शासकीय कार्य और खतौनी फीडिंग के संबंध में पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय उनके कार्यालय में अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे, जिनसे इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की निष्पक्ष जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जिसके जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आने की उम्मीद है। इस जांच के तहत सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और घटना के समय मौजूद लोगों की भूमिका जैसे कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इस विवाद की गूंज अब सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रही है, जहां समाज दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे मंचों पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जिसमें प्रमोद बर्मा जैसे कुछ लोग महिला लेखपाल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने और विभागीय जांच की मांग का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, अधिवक्ता अवनीश पाण्डेय, डॉ. एन.पी. तिवारी, ब्लॉक प्रमुख त्रिपुरेश मिश्रा, अतुल कुमार और एडवोकेट दीपक बाजपेई सहित कई लोगों ने पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए एसडीएम का समर्थन किया है और बार एसोसिएशन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, पत्रकार आनंद शुक्ला और अधिवक्ता चन्द्र किशोर मिश्रा ने दोनों पक्षों को सुनने और निष्पक्ष विधिक जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया है। लगातार चल रहे इस प्रदर्शन और अदालतों के बहिष्कार के कारण तहसील आने वाले आम फरियादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।2
- हरदोई में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने कांग्रेस पर बड़ा सियासी हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि हरदोई में कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं है। मंत्री ने दो टूक शब्दों में अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि उनकी जवाबदेही किसी गठबंधन या पार्टी के प्रति नहीं, बल्कि सीधे हरदोई की जनता के प्रति है।1
- हरदोई के सांडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत खुटाना गांव के पास शारदा नहर में एक शव मिला है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची सांडी पुलिस ने शव की पहचान ब्रजेश द्विवेदी के रूप में की है। ब्रजेश द्विवेदी, कोतवाली शहर जनपद हरदोई के मोहल्ला हरदेवगंज के निवासी स्वर्गीय अनंत राम के पुत्र थे। पुलिस ने शव का नियमानुसार पंचायतनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है। इस संबंध में मृतक की पत्नी बबीता ने 09.07.2026 को लोनार थाने में तहरीर दी थी कि उनके पति ब्रजेश द्विवेदी 08.07.2026 से लापता हैं। उनकी बाइक 09.07.2026 की सुबह सोहरा पुल के पास खड़ी मिली थी। इस मामले में लोनार थाने में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही है। क्षेत्राधिकारी हरपालपुर श्री प्रवीण कुमार यादव ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।1
- हरदोई के माधौगंज में चोरों ने दस्तक देते हुए रूदामऊ के ग्राम प्रधान अनुज कुमार के नए घर को अपना निशाना बनाया है। चोर इस घर से कीमती सामान समेट ले गए, जिसमें एक जोड़ी पायल, एक मंगलसूत्र, कमर की एक हाफपेटी, एक जोड़ी झाला, पीतल के बर्तन और पैतालीस हजार रुपये की नगदी शामिल है। दूसरी तरफ, पटेल नगर पश्चिमी में सरस्वती ज्ञान मंदिर के पास भी चोर देखे गए हैं, जिसकी जानकारी सीसीटीवी फुटेज के जरिए सामने आई है। जब इस घटना को लेकर एसएचओ विजय कुमार से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। चोरों के इस तरह बेखौफ प्रवेश से स्पष्ट हो रहा है कि रात के समय पुलिस निष्क्रियता बरत रही है और माधौगंज की जनता को अपनी सुस्ती का अहसास करा रही है। अब देखना यह है कि पुलिस ग्राम प्रधान के यहां हुई इस चोरी का खुलासा कब तक कर पाती है।1
- हरदोई के अतरौली थाना पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में वांछित ₹25 हजार के इनामी अभियुक्त को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर अंजाम दिया है। पुलिस के अनुसार, पकड़ा गया आरोपी मुकदमा अपराध संख्या 189/2026 में गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (गैंगस्टर) अधिनियम के तहत वांछित चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर ₹25 हजार का इनाम घोषित था। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि अपराधियों के विरुद्ध उनका यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।1
- हरदोई के हुसियापुर सुरसा में 160 मीटर की सड़क बनाने की मांग की गई है। यह रास्ता बेहद कष्टमई है और यहाँ जलभराव भी रहता है। पिछले 5 दशकों से इस 160 मीटर की सड़क का यही हाल बना हुआ है। इस समस्या को लेकर जल्द से जल्द सुनवाई किए जाने की गुहार लगाई गई है।2
- कन्नौज के विकास भवन स्थित हर्षवर्धन सभागार में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई। 11 जुलाई को हुई इस सुनवाई में अध्यक्ष ने महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में पीड़ितों को तुरंत न्याय दिलाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों का निष्पक्ष और समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इस जनसुनवाई में कुल 35 पंजीकृत शिकायतों पर सुनवाई की गई, जिनमें कन्नौज की 7 और कानपुर देहात की 28 शिकायतें शामिल थीं। इसके अतिरिक्त 20 अपंजीकृत शिकायतों को भी सुना गया। सुनवाई के दौरान ही त्वरित कार्रवाई करते हुए कन्नौज की एक महिला को विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना का लाभ दिलाया गया, तथा उसे बाल सेवा योजना से जोड़ने के भी निर्देश दिए गए। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्यगण, जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री तथा पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।1
- हरदोई के संडीला क्षेत्र में स्थित लायंस स्कूल प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिससे मासूम बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह से दांव पर लगी हुई है। छुट्टी होने और स्कूल आने के समय यहाँ पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बिना किसी सुरक्षा के ही बेहद व्यस्त हाईवे पार करना पड़ता है। इस हाईवे पर चौबीसों घंटे तेज रफ्तार में भारी वाहनों की लगातार आवाजाही बनी रहती है, जिससे बच्चों की जान को हर वक्त खतरा बना रहता है। हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद स्कूल प्रशासन ने बच्चों को सड़क पार कराने के लिए किसी भी गार्ड या सुरक्षाकर्मी की तैनाती नहीं की है। बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। स्कूल के इस अड़ियल रवैये से नाराज परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने अब जिला प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। वे चाहते हैं कि लापरवाह स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाए और बच्चों की सुरक्षा के लिए हाईवे पर स्पीड ब्रेकर तथा सुरक्षाकर्मी की तैनाती जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए।1