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सोनभद्र जिले के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, जहाँ मारकुंडी घाटी के पास जिले का पहला संगठित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह महत्वपूर्ण परियोजना 50 से 80 एकड़ भूमि पर बनाई जाएगी। इस पहल से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और जिले में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
सोनभद्र जिले के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, जहाँ मारकुंडी घाटी के पास जिले का पहला संगठित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह महत्वपूर्ण परियोजना 50 से 80 एकड़ भूमि पर बनाई जाएगी। इस पहल से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और जिले में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
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- सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने एक अंतर्राज्यीय नकली शराब नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश करते हुए महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस ने लगभग 25 लाख रुपये मूल्य की अवैध शराब निर्माण सामग्री, जिसमें 600 लीटर रेक्टिफाइड स्पिरिट, 36 हजार कांच की शराब की शीशियां, कैरेमल, फ्लेवरिंग एसेंस और ब्रांडेड पैकिंग टेप शामिल थे, के साथ एक ट्रेलर वाहन भी बरामद किया है। इस कार्रवाई में हरियाणा के दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर मामा ढाबा परिसर में खड़े ट्रेलर की तलाशी के दौरान यह भारी मात्रा में नकली शराब बनाने का सामान जब्त किया गया। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि यह सामग्री पंजाब से बिहार-झारखंड सीमा तक ले जाई जा रही थी, जहाँ नकली शराब तैयार कर प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर बाजार में बेची जानी थी। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह फर्जी बिल्टी का उपयोग करता था, एक ही वाहन नंबर का कई गाड़ियों में इस्तेमाल करता था और पूरे नेटवर्क का संचालन व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से करता था। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी है।4
- सोनभद्र जिले के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है, जहाँ मारकुंडी घाटी के पास जिले का पहला संगठित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह महत्वपूर्ण परियोजना 50 से 80 एकड़ भूमि पर बनाई जाएगी। इस पहल से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और जिले में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।1
- न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि पीड़ित पक्ष को सज़ा नहीं मिल रही है, बल्कि उन्हें सिर्फ़ सुरक्षा प्रदान की जा रही है।1
- बताया गया है कि अब मोदी जी का एक नया 'खेल' सामने आया है, जिसे अपने लिए दिक्कतों को कम करने के उद्देश्य से रखना है। इस 'खेल' के तहत अब इसे 'इनको' देना है।1
- सोनभद्र जिले के डाला तेलगुड़वा क्षेत्र में वाराणसी-शक्तिनगर राजमार्ग पर एक सड़क हादसा हो गया। यहाँ एक मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पड़े राखड़ से टकरा गए। इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप, दोनों व्यक्ति सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।1
- ग्राम पंचायत बगही में पिछले 15 से 20 वर्षों से सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस अवधि में सड़क को कभी बनाया ही नहीं गया।4
- सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज-घोरावल मार्ग पर रविवार रात लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की घोर तकनीकी लापरवाही के कारण एक भीषण सड़क हादसा हो गया। मार्ग चौड़ीकरण के भारी-भरकम प्रोजेक्ट में निर्माण एजेंसी ने मुड़िलाडीह और ओदार गांव के पास मुख्य सड़क पर बिना किसी रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के एक 5 फीट गहरा जानलेवा गड्ढा खुला छोड़ दिया था। आधी रात के अंधेरे में समतल सड़क के भरोसे चल रहे यात्रियों को इस खतरे का आभास नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप एक तेज रफ्तार मालवाहक पिकअप ने सवारी ऑटो और मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो पिकअप में फंसकर सड़क पर लगभग 50 मीटर तक घिसटती चली गई, जिससे महिलाओं और बच्चों सहित कुल 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस प्रशासनिक लापरवाही से उग्र हुए स्थानीय ग्रामीणों ने मौके पर भारी हंगामा करते हुए चक्काजाम कर दिया, जिससे मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की इस घोर अनदेखी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता देख घोरावल कोतवाली पुलिस बल ने तत्काल मोर्चा संभाला। पुलिस प्रशासन द्वारा उत्तेजित ग्रामीणों को संबंधित ठेकेदार और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन दिया गया, जिसके बाद लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद विवाद शांत हुआ और यातायात दोबारा बहाल कराया जा सका। करोड़ों के बजट, कागजी 'सेफ्टी ऑडिट' और धरातल पर मौत के गड्ढे के बीच अब यह बड़ा नीतिगत और वैधानिक सवाल खड़ा हो गया है कि क्या हर बार की तरह इस बार भी महज आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा, या फिर लोक सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इस तंत्र पर वास्तविक कानूनी हंटर चलेगा?1