बदायूँ के उझानी नगर पालिका में कूड़ा निस्तारण एक बड़ी समस्या बन गया है, जहाँ सफाई कर्मचारी पूरे नगर का कूड़ा-करकट इकट्ठा तो कर लेते हैं, लेकिन उसे खाली करने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अक्सर सफाई कर्मचारियों को हाईवे पर सड़क किनारे कूड़ा गिराने को लेकर नागरिकों के गुस्से का सामना करना पड़ता है, और यह विरोध अब पालिका प्रशासन के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। रविवार पूर्वाह्न, जब कूड़ा गाड़ी चालक कूड़ा लदे वाहन सड़क किनारे गड्ढों में खाली करने पहुँचे, तो इलाके के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया और उन्हें खदेड़ दिया। इस घटना के बाद परेशान कूड़ा गाड़ी चालक अपने कूड़े से भरे वाहनों को पालिका कार्यालय परिसर में ही खड़ा कर गए। एक कूड़ा वाहन चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले कई दिनों से सड़क किनारे गड्ढों में कूड़ा डाला जा रहा था, लेकिन अब स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। पालिका कर्मचारियों का भी कहना है कि अधिकारी इस स्थिति से वाकिफ हैं, लेकिन वे समस्या का समाधान खोजने की कोई जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी देहात क्षेत्र की सड़कों के किनारे कूड़ा खाली करने पर विरोध हो चुका है, जिसके चलते तब भी कूड़ा लदे वाहन पूरे दिन पालिका कार्यालय के सामने खड़े रहे थे। वितरोई, छतुइया और पटपरागंज जैसे इलाकों में भी वाहन चालकों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा है। इस संबंध में जानकारी लेने पर अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पालिका का डंपिंग ग्राउंड कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पटपरागंज में है, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण वह बंद पड़ा है। उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार, जल्द ही पटपरागंज के ग्रामीणों से बातचीत कर डंपिंग ग्राउंड को फिर से चालू कराया जाएगा, और वे इस समस्या का शीघ्र ही पूर्ण समाधान कराने का आश्वासन दिया।
बदायूँ के उझानी नगर पालिका में कूड़ा निस्तारण एक बड़ी समस्या बन गया है, जहाँ सफाई कर्मचारी पूरे नगर का कूड़ा-करकट इकट्ठा तो कर लेते हैं, लेकिन उसे खाली करने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। अक्सर सफाई कर्मचारियों को हाईवे पर सड़क किनारे कूड़ा गिराने को लेकर नागरिकों के गुस्से का सामना करना पड़ता है, और यह विरोध अब पालिका प्रशासन के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। रविवार पूर्वाह्न, जब कूड़ा गाड़ी चालक कूड़ा लदे वाहन सड़क किनारे गड्ढों में खाली करने पहुँचे, तो इलाके के लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया और उन्हें खदेड़ दिया। इस घटना के बाद परेशान कूड़ा गाड़ी चालक अपने कूड़े से भरे वाहनों को पालिका कार्यालय परिसर में ही खड़ा कर गए। एक कूड़ा वाहन चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले कई दिनों से सड़क किनारे गड्ढों में कूड़ा डाला जा रहा था, लेकिन अब स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। पालिका कर्मचारियों का भी कहना है कि अधिकारी इस स्थिति से वाकिफ हैं, लेकिन वे समस्या का समाधान खोजने की कोई जरूरत महसूस नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी देहात क्षेत्र की सड़कों के किनारे कूड़ा खाली करने पर विरोध हो चुका है, जिसके चलते तब भी कूड़ा लदे वाहन पूरे दिन पालिका कार्यालय के सामने खड़े रहे थे। वितरोई, छतुइया और पटपरागंज जैसे इलाकों में भी वाहन चालकों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा है। इस संबंध में जानकारी लेने पर अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पालिका का डंपिंग ग्राउंड कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पटपरागंज में है, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण वह बंद पड़ा है। उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार, जल्द ही पटपरागंज के ग्रामीणों से बातचीत कर डंपिंग ग्राउंड को फिर से चालू कराया जाएगा, और वे इस समस्या का शीघ्र ही पूर्ण समाधान कराने का आश्वासन दिया।
- बिहार से एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर एक एम्बुलेंस चालक को रोकने, उससे बदसलूकी करने और अवैध रूप से जुर्माना मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के समय एम्बुलेंस में एक मरीज भी मौजूद था, लेकिन इसके बावजूद वाहन को रोका गया और बहस की स्थिति पैदा हो गई। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि एम्बुलेंस चालक बार-बार यह कह रहा है कि उसकी कोई गलती नहीं है, बल्कि गलती पुलिस की तरफ से हुई है। इस पर एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर गुस्सा होकर ड्राइवर को धमकाने और मारपीट करने के लिए उसकी तरफ दौड़ता नजर आता है। आरोप है कि बिना किसी ठोस वजह के जुर्माना वसूलने की कोशिश की जा रही थी। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या अब आपातकालीन सेवाओं को भी इसी तरह रोका जाएगा और क्या हमेशा आम आदमी को ही निशाना बनाया जाएगा। यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है और लोग पुलिस के इस रवैये पर अपनी कड़ी नाराजगी जता रहे हैं। फिलहाल, इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।1
- प्रदेश या देश में किसी भी दुखद घटना के घटित होने पर, एक व्यक्ति को "बहन मायावती जी का शासन और उनकी सरकार" की याद आती है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो को देखकर गहरा सदमा और खामोशी महसूस हुई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी के कार्यकाल के दौरान एक पिता को अपनी बच्ची को गोद में लिए अस्पतालों का चक्कर लगाते देखा गया, जिसका कारण अस्पतालों की कमी बताई गई है। इस घटना के संदर्भ में, देश और प्रदेश की जनता से कई सवाल उठाए गए हैं कि आखिर क्यों वे देश में एक अच्छा शासन लागू करना नहीं चाहते। सवाल है कि क्यों भारत देश की जनता धर्म और जाति के आधार पर वोट करती है। व्यक्ति पूछता है कि क्या देश के इन हालातों को देखकर जनता को दुख नहीं होता और क्या उन्हें यह महसूस नहीं होता कि आज देश में महंगाई चरम सीमा पर है। यह भी पूछा गया है कि क्या सस्ती कीमतों पर कोई भी चीज नहीं खरीदी जा सकती है। विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है, कि वह इन "तानाशाही नेताओं" का मुकाबला करने और उन्हें प्रदेश व देश की सत्ता से दूर करने के लिए मजबूती से आगे क्यों नहीं आ रहा है। अंत में, यह गंभीर प्रश्न उठाया गया है कि जनता देश का नेतृत्व अच्छे हाथों में क्यों नहीं सौंपती, जिससे जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।1
- बदायूं की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बकरीद पर्व को शांतिपूर्वक मनाने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी खुले स्थान पर जानवरों की कुर्बानी न दी जाए और जिन पशुओं पर प्रतिबंध है, उनकी कुर्बानी से बचें। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस को किसी भी जगह पर प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी दिए जाने की जानकारी मिलती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनता से ऐसी कार्रवाई से बचने और त्योहार को शांति व सौहार्द के साथ मनाने का आग्रह किया।1
- बदायूँ जिले में केंद्रीय राज्य मंत्री के अपने ही गाँव में यूरिया खाद खुलेआम ₹400 प्रति बोरी के हिसाब से बेची जा रही है। यह मामला सीधे मंत्री के गाँव से जुड़ा है, जहाँ यूरिया खाद की यह बिक्री ₹400 प्रति बोरी की दर पर खुलेआम हो रही है।1
- बदायूं जिले के मामूरगंज गाँव में एक गली का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण वहाँ गंदा पानी इकट्ठा हो रहा है। ग्रामीण इस स्थिति से परेशान हैं और गली के निर्माण की मांग कर रहे हैं।1
- बदायूं में भारत स्काउट गाइड संस्था के तत्वावधान में, गांधी चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर भीषण गर्मी और गर्म हवाओं के बीच पिछले 24 दिनों से राहगीरों और यात्रियों को शीतल जल पिलाकर उनकी प्यास बुझाई जा रही है। इस सेवा कार्य की प्रादेशिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिला मुख्यायुक्त महेश चंद्र सक्सेना, मुकेश बाबू शर्मा और नंदराम शाक्य ने सराहना की है। पूर्व जिला ट्रेनिंग कमिश्नर संजीव कुमार शर्मा ने भीषण गर्मी के कारण मनुष्य और वन्य जीव जंतुओं की बेचैनी पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अपने घरों की छतों या आसपास पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी रखने का आग्रह किया। जिला संगठन कमिश्नर मु. असरार ने जल को अमृत बताते हुए उसे व्यर्थ न बहाने और उसके संग्रह से भविष्य के संकटों को टालने की बात कही। इस शिविर में फरदीन अहमद, हिमांशु कश्यप, सचिन यादव, शिवम यादव, रोशनी, आशिया और रुबिया सहित कई स्काउट गाइड ने शीतल जल पिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इस सेवा के क्रम में, आगामी 25 और 26 मई को ज्येष्ठ के दशहरा के अवसर पर सुबह 10 बजे गांधी चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर शरबत वितरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 27 मई को स्काउट भवन प्रशिक्षण केंद्र में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर निशुल्क जल सेवा शिविर में कार्यरत विभिन्न विद्यालयों के स्काउट गाइड को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया जाएगा। यह जानकारी डीओसी मुहम्मद असरार ने दी है।1
- बदायूं जिले के जरीफनगर थाना क्षेत्र में पुलिस की प्रताड़ना और उसके निर्दोष बेटे को अवैध रूप से तमंचा लगाकर जेल भेजने के आरोप के बाद एक ग्रामीण, जिसे गैंगस्टर का आरोपी बनाया गया था, ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। इस घटना से आसपास के ग्रामीण इलाकों में पुलिस के खिलाफ गहरा आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए गांव में कई थानों का पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने रसूलपुरकलां निवासी करू उर्फ कल्याण पुत्र यादराम और सहसवान थाना क्षेत्र के कुछ अन्य लोगों के खिलाफ थानाध्यक्ष सुमित शर्मा की शिकायत पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। जब पुलिस करू के घर दबिश देने गई और वह नहीं मिला, तो उसके बेटे संजय को हिरासत में ले लिया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने निर्दोष संजय पर तमंचा लगाकर उसे जेल भेज दिया। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने करू के रिश्तेदारों के यहां भी दबिशें दीं, कुछ लोगों को पकड़ा और फिर मोटी रकम लेकर छोड़ दिया। पुलिस की इसी प्रताड़ना, बेटे संजय को जेल भेजने और रिश्तेदारों को परेशान करने से मानसिक दबाव में आकर करू ने शनिवार को जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। करू की मौत के बाद परिजनों और पूरे गांव में शोक के साथ-साथ पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों ने मृतक का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया। करू की मौत की सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस पर करू के परिवार और रिश्तेदारों पर गैरकानूनी तरीके से दबाव बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि करू निर्दोष था, फिर भी उसके खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा लगाया गया और उसके निर्दोष बेटे संजय को अपराधी बनाने के लिए तमंचा लगाकर जेल भेज दिया गया। फिलहाल, पुलिस परिजनों को समझाने का प्रयास कर रही है। नागरिकों का कहना है कि पुलिस हर घटना को अपने तरीके से भुनाती है और अपने फायदे में लगी रहती है। उन्होंने योगी सरकार से अपील की है कि पुलिस की इन काली करतूतों की जांच कराई जाए, ताकि किसी अन्य संजय जैसे युवक को निर्दोष होते हुए भी जेल न जाना पड़े।1
- बदायूं में ईद के त्योहार के मद्देनजर एसएसपी ने एक कड़ी चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी के अनुसार, अगर कोई भी व्यक्ति गाय या बकरा काटते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1