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निरसा में, जिला परिषद सदस्य संजय सिंह पिंटू ने घुरजोड़ा गांव में वीर सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 30 जून 1855 को झारखंड की धरती से सिदो-कान्हू और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश हुकूमत तथा शोषक जमींदारों के खिलाफ शुरू किया गया यह संघर्ष आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है। पिंटू ने बताया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हूल आंदोलन का मूल आधार था। वर्तमान समय में जब वन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा विस्थापन का संकट गहरा रहा है, हूल दिवस हमें जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह विद्रोह केवल अंग्रेजों के खिलाफ ही नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध भी था जहां महाजन, साहूकार और भ्रष्ट जमींदार आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे, और यह आज भी शोषितों, वंचितों व आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान अधिकार दिलाने की आवश्यकता को याद दिलाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस क्रांति के परिणामस्वरूप आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम जैसे कई महत्वपूर्ण कानून बने। हूल दिवस हमें ऐसे संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करने तथा उन्हें मजबूत करने के लिए सचेत करता है। इस क्रांति का मुख्य संदेश 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो' था, और यह दिन आदिवासियों को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान करता है। यह इतिहास का वह अध्याय है जो सिखाता है कि जब अधिकार छीने जाएं, तो एकजुट होकर संघर्ष ही समाधान है, और यह अन्याय तथा दमन के सामने झुकने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से या अपनी रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने का हौसला देता है। इससे पूर्व, आदिवासी समाज के लोगों ने माझी थान में पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा के साथ सिद्धू-कान्हू के प्रतिमा स्थल पाल पहुंचे और पूरे आदिवासी रीति-रिवाज के साथ प्रतिमा का अनावरण किया।

2 hrs ago
user_Moloy Gope
Moloy Gope
Reporter निरसा-कम-चिरकुंडा, धनबाद, झारखंड•
2 hrs ago

निरसा में, जिला परिषद सदस्य संजय सिंह पिंटू ने घुरजोड़ा गांव में वीर सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। उन्होंने इस बात

पर जोर दिया कि 30 जून 1855 को झारखंड की धरती से सिदो-कान्हू और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश हुकूमत तथा शोषक जमींदारों के खिलाफ शुरू किया गया यह संघर्ष आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है। पिंटू ने बताया कि जल, जंगल और जमीन की

रक्षा हूल आंदोलन का मूल आधार था। वर्तमान समय में जब वन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा विस्थापन का संकट गहरा रहा है, हूल दिवस हमें जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह

विद्रोह केवल अंग्रेजों के खिलाफ ही नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध भी था जहां महाजन, साहूकार और भ्रष्ट जमींदार आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे, और यह आज भी शोषितों, वंचितों व आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें

समान अधिकार दिलाने की आवश्यकता को याद दिलाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस क्रांति के परिणामस्वरूप आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम जैसे कई महत्वपूर्ण कानून बने। हूल दिवस हमें ऐसे संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा

करने तथा उन्हें मजबूत करने के लिए सचेत करता है। इस क्रांति का मुख्य संदेश 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो' था, और यह दिन आदिवासियों को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान करता

है। यह इतिहास का वह अध्याय है जो सिखाता है कि जब अधिकार छीने जाएं, तो एकजुट होकर संघर्ष ही समाधान है, और यह अन्याय तथा दमन के सामने झुकने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से या अपनी रक्षा के लिए आवाज बुलंद

करने का हौसला देता है। इससे पूर्व, आदिवासी समाज के लोगों ने माझी थान में पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा के साथ सिद्धू-कान्हू के प्रतिमा स्थल पाल पहुंचे और पूरे आदिवासी रीति-रिवाज के साथ प्रतिमा का अनावरण किया।

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  • निरसा में, जिला परिषद सदस्य संजय सिंह पिंटू ने घुरजोड़ा गांव में वीर सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 30 जून 1855 को झारखंड की धरती से सिदो-कान्हू और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश हुकूमत तथा शोषक जमींदारों के खिलाफ शुरू किया गया यह संघर्ष आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है। पिंटू ने बताया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हूल आंदोलन का मूल आधार था। वर्तमान समय में जब वन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा विस्थापन का संकट गहरा रहा है, हूल दिवस हमें जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह विद्रोह केवल अंग्रेजों के खिलाफ ही नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध भी था जहां महाजन, साहूकार और भ्रष्ट जमींदार आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे, और यह आज भी शोषितों, वंचितों व आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान अधिकार दिलाने की आवश्यकता को याद दिलाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस क्रांति के परिणामस्वरूप आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम जैसे कई महत्वपूर्ण कानून बने। हूल दिवस हमें ऐसे संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करने तथा उन्हें मजबूत करने के लिए सचेत करता है। इस क्रांति का मुख्य संदेश 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो' था, और यह दिन आदिवासियों को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान करता है। यह इतिहास का वह अध्याय है जो सिखाता है कि जब अधिकार छीने जाएं, तो एकजुट होकर संघर्ष ही समाधान है, और यह अन्याय तथा दमन के सामने झुकने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से या अपनी रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने का हौसला देता है। इससे पूर्व, आदिवासी समाज के लोगों ने माझी थान में पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा के साथ सिद्धू-कान्हू के प्रतिमा स्थल पाल पहुंचे और पूरे आदिवासी रीति-रिवाज के साथ प्रतिमा का अनावरण किया।
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    निरसा में, जिला परिषद सदस्य संजय सिंह पिंटू ने घुरजोड़ा गांव में वीर सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 30 जून 1855 को झारखंड की धरती से सिदो-कान्हू और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश हुकूमत तथा शोषक जमींदारों के खिलाफ शुरू किया गया यह संघर्ष आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है।

पिंटू ने बताया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हूल आंदोलन का मूल आधार था। वर्तमान समय में जब वन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा विस्थापन का संकट गहरा रहा है, हूल दिवस हमें जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह विद्रोह केवल अंग्रेजों के खिलाफ ही नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध भी था जहां महाजन, साहूकार और भ्रष्ट जमींदार आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे, और यह आज भी शोषितों, वंचितों व आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान अधिकार दिलाने की आवश्यकता को याद दिलाता है।

उन्होंने उल्लेख किया कि इस क्रांति के परिणामस्वरूप आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम जैसे कई महत्वपूर्ण कानून बने। हूल दिवस हमें ऐसे संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करने तथा उन्हें मजबूत करने के लिए सचेत करता है। इस क्रांति का मुख्य संदेश 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो' था, और यह दिन आदिवासियों को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान करता है। यह इतिहास का वह अध्याय है जो सिखाता है कि जब अधिकार छीने जाएं, तो एकजुट होकर संघर्ष ही समाधान है, और यह अन्याय तथा दमन के सामने झुकने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से या अपनी रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने का हौसला देता है।

इससे पूर्व, आदिवासी समाज के लोगों ने माझी थान में पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा के साथ सिद्धू-कान्हू के प्रतिमा स्थल पाल पहुंचे और पूरे आदिवासी रीति-रिवाज के साथ प्रतिमा का अनावरण किया।
    user_Moloy Gope
    Moloy Gope
    Reporter निरसा-कम-चिरकुंडा, धनबाद, झारखंड•
    2 hrs ago
  • धनबाद जिले के निरसा में स्थित एक पीजी लॉज में देह व्यापार का गोरखधंधा उजागर हुआ है। निरसा पुलिस ने इस पीजी लॉज में चल रहे अवैध व्यापार का खुलासा किया है, जिसके बाद पीजी लॉज का मालिक इकबाल अहमद फरार हो गया है। जानकारी के अनुसार, इस पीजी लॉज में पिछले छह महीने से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। पुलिस ने पीजी लॉज को सील कर दिया है।
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    धनबाद जिले के निरसा में स्थित एक पीजी लॉज में देह व्यापार का गोरखधंधा उजागर हुआ है। निरसा पुलिस ने इस पीजी लॉज में चल रहे अवैध व्यापार का खुलासा किया है, जिसके बाद पीजी लॉज का मालिक इकबाल अहमद फरार हो गया है। जानकारी के अनुसार, इस पीजी लॉज में पिछले छह महीने से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। पुलिस ने पीजी लॉज को सील कर दिया है।
    user_Manoj Kumar
    Manoj Kumar
    Photographer निरसा-कम-चिरकुंडा, धनबाद, झारखंड•
    12 hrs ago
  • निरसा में कथित देह व्यापार के एक बड़े खुलासे के बाद एक लॉज में ज़बरदस्त हंगामा हुआ। इस घटना के दौरान कथित तौर पर दो जोड़े मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।
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    निरसा में कथित देह व्यापार के एक बड़े खुलासे के बाद एक लॉज में ज़बरदस्त हंगामा हुआ। इस घटना के दौरान कथित तौर पर दो जोड़े मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।
    user_मो० फारुख (पत्रकार)
    मो० फारुख (पत्रकार)
    Newspaper publisher गोविंदपुर, धनबाद, झारखंड•
    11 hrs ago
  • जामताड़ा के मिहिजाम स्थित कुर्मीपाड़ा में मंगलवार को अमर शहीद डीएसपी प्रमोद कुमार की 18वीं पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा और सादगी के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके पैतृक आवास पर परिवारजनों और गणमान्य लोगों ने पूजा-अर्चना कर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, डाकबंगला स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर भी स्थानीय लोगों ने शहीद को नमन किया। प्रमोद कुमार झारखंड पुलिस सेवा के एक जांबाज अधिकारी थे, जो वर्ष 2008 में रांची जिले के बुंडू अनुमंडल में एसडीपीओ के पद पर तैनात थे। 30 जून 2008 को हूल दिवस के दिन, एक लूटकांड की जांच के दौरान, जंगल के रास्ते से गुजरते समय नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग के विस्फोट का शिकार उनकी सरकारी गाड़ी हो गई थी। इस भीषण हमले में डीएसपी प्रमोद कुमार सहित कई पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस पुण्यतिथि के अवसर पर शहीद की भाभी मंजू देवी ने भावुक होकर कहा कि प्रमोद कुमार की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि परिवार आज भी उन्हें याद करके भावुक हो जाता है, लेकिन इस बात का गर्व है कि उन्होंने देश और राज्य की सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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    जामताड़ा के मिहिजाम स्थित कुर्मीपाड़ा में मंगलवार को अमर शहीद डीएसपी प्रमोद कुमार की 18वीं पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा और सादगी के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके पैतृक आवास पर परिवारजनों और गणमान्य लोगों ने पूजा-अर्चना कर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, डाकबंगला स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर भी स्थानीय लोगों ने शहीद को नमन किया।

प्रमोद कुमार झारखंड पुलिस सेवा के एक जांबाज अधिकारी थे, जो वर्ष 2008 में रांची जिले के बुंडू अनुमंडल में एसडीपीओ के पद पर तैनात थे। 30 जून 2008 को हूल दिवस के दिन, एक लूटकांड की जांच के दौरान, जंगल के रास्ते से गुजरते समय नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग के विस्फोट का शिकार उनकी सरकारी गाड़ी हो गई थी। इस भीषण हमले में डीएसपी प्रमोद कुमार सहित कई पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे।

इस पुण्यतिथि के अवसर पर शहीद की भाभी मंजू देवी ने भावुक होकर कहा कि प्रमोद कुमार की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि परिवार आज भी उन्हें याद करके भावुक हो जाता है, लेकिन इस बात का गर्व है कि उन्होंने देश और राज्य की सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
    user_यूके जामताड़ा लाइव
    यूके जामताड़ा लाइव
    जामताड़ा, जामताड़ा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • वरिष्ठ पत्रकार जहीरूद्दीन खान ने छात्रों के बलिदान और सरकार द्वारा दी गई छुट्टी के विषय पर एक विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालती है।
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    वरिष्ठ पत्रकार जहीरूद्दीन खान ने छात्रों के बलिदान और सरकार द्वारा दी गई छुट्टी के विषय पर एक विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डालती है।
    user_JH Media Dhn Zahir Khan Kcn Tv
    JH Media Dhn Zahir Khan Kcn Tv
    Doctor धनबाद-कम-केंदुआडीह-कम-जागता, धनबाद, झारखंड•
    14 min ago
  • हेट करमाटांड़ गाँव में वार्षिक काली पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के माहौल से गूँज उठा।
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    हेट करमाटांड़ गाँव में वार्षिक काली पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के माहौल से गूँज उठा।
    user_PRESS R K PRESS R K
    PRESS R K PRESS R K
    पत्रकार Karma Tanr Vidyasagar*, Jamtara•
    4 hrs ago
  • झारखंड के धनबाद जिले में कथित देह व्यापार के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है।
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    झारखंड के धनबाद जिले में कथित देह व्यापार के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है।
    user_Niraj Kumar
    Niraj Kumar
    Local News Reporter धनबाद-कम-केंदुआडीह-कम-जागता, धनबाद, झारखंड•
    7 hrs ago
  • निरसा के पुराने थाना क्षेत्र के समीप स्थित एक पीजी लॉज में कथित तौर पर देह व्यापार संचालित होने के आरोपों के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब एक वर्ष से इस लॉज में संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने लॉज में मौजूद दो युवक-युवतियों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन धक्का-मुक्की के दौरान वे दोनों जोड़े मौके से फरार हो गए। यह पूरी घटना पास के एक मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह लॉज इकबाल अहमद का है, जहाँ पहले एक रेस्टोरेंट भी संचालित होता था। सूचना मिलते ही एसडीपीओ लीलेश्वर महतो, थाना प्रभारी अजीत कुमार भारती और पुलिस बल मौके पर पहुँचे। पुलिस ने तुरंत लॉज को सील कर मुख्य द्वार और कमरों में ताला लगा दिया और अपनी जाँच शुरू की। पुलिस की तलाशी के दौरान लॉज से कुछ आपत्तिजनक सामग्री और सजने-संवरने से संबंधित सामान भी बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने लॉज मालिक के आवास पर भी छापेमारी की, लेकिन वह वहाँ नहीं मिला। फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहनता से जाँच कर रही है, और इस जाँच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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    निरसा के पुराने थाना क्षेत्र के समीप स्थित एक पीजी लॉज में कथित तौर पर देह व्यापार संचालित होने के आरोपों के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब एक वर्ष से इस लॉज में संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने लॉज में मौजूद दो युवक-युवतियों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन धक्का-मुक्की के दौरान वे दोनों जोड़े मौके से फरार हो गए। यह पूरी घटना पास के एक मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह लॉज इकबाल अहमद का है, जहाँ पहले एक रेस्टोरेंट भी संचालित होता था। सूचना मिलते ही एसडीपीओ लीलेश्वर महतो, थाना प्रभारी अजीत कुमार भारती और पुलिस बल मौके पर पहुँचे। पुलिस ने तुरंत लॉज को सील कर मुख्य द्वार और कमरों में ताला लगा दिया और अपनी जाँच शुरू की।

पुलिस की तलाशी के दौरान लॉज से कुछ आपत्तिजनक सामग्री और सजने-संवरने से संबंधित सामान भी बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने लॉज मालिक के आवास पर भी छापेमारी की, लेकिन वह वहाँ नहीं मिला। फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहनता से जाँच कर रही है, और इस जाँच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    user_Moloy Gope
    Moloy Gope
    Reporter निरसा-कम-चिरकुंडा, धनबाद, झारखंड•
    12 hrs ago
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