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जौनपुर बिल्ली अपने बच्चों को मुंह में दबाकर कैसे ले जा रही है जौनपुर गांव में इस समय बिल्ली बच्चा देते हैं और अपने बच्चों को कैसे मुंह में दबा कर ले जा रहे हैं इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं
Jitendra bahadur Dubey
जौनपुर बिल्ली अपने बच्चों को मुंह में दबाकर कैसे ले जा रही है जौनपुर गांव में इस समय बिल्ली बच्चा देते हैं और अपने बच्चों को कैसे मुंह में दबा कर ले जा रहे हैं इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं
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- कलम की तेज धार से अयोध्या जिला अस्पताल में मानवता शर्मसार: मौत के बाद भी नहीं मिला शव वाहन, ठेले पर शव ले जाने को मजबूर हुए परिजन अयोध्या। कहते हैं सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों खर्च कर रही है, बड़े-बड़े दावे हैं। लेकिन अयोध्या जिला चिकित्सालय की हकीकत ने इन दावों की पोल खोल दी। यहां एक मरीज की मौत के बाद सिस्टम इतना लाचार निकला कि उसके परिजनों को शव को कंधा तो दूर, ठेले पर लादकर ले जाना पड़ा। घंटों तड़पते रहे परिजन, स्टाफ बोला - ड्राइवर का नंबर ही नहीं है! इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया। टूटे हुए परिजनों ने अस्पताल स्टाफ से हाथ जोड़कर एक शव वाहन की मांग की। आरोप है कि उन्हें घंटों इधर से उधर दौड़ाया गया। जब थक-हारकर वार्ड की महिला स्टाफ से पूछा तो गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला - "ड्राइवर का नंबर उपलब्ध नहीं है।" सोचिए, जिला अस्पताल जैसा बड़ा संस्थान, जहां हर रोज मौतें होती हैं, वहां शव वाहन के ड्राइवर का नंबर तक मौजूद नहीं! यह लापरवाही नहीं तो और क्या है? सवाल तो बनता है साहब... 1. प्राइवेट एंबुलेंस का धंधा परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल में शव वाहन होते हुए भी नहीं दिया जाता ताकि बाहर खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस वालों का धंधा चलता रहे। क्या अस्पताल परिसर में शुल्क लेकर चल रही निजी एंबुलेंस सेवा और स्टाफ की मिलीभगत है? 2. कहां गई संवेदनशीलता? क्या जिला अस्पताल प्रशासन इतना संवेदनहीन हो गया है कि एक लाश को भी सम्मान नहीं दे सकता? 3. जांच कौन करेगा? अगर जिला अस्पताल में ही यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों की क्या दुर्दशा होगी? यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर तमाचा है। जब शासन-प्रशासन बड़े-बड़े आयोजन और वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त है, तब आम आदमी को ठेले पर अपने अपनों की लाश ढोनी पड़ रही है। कलम की धार मांग करती है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषी स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई हो और शव वाहन की व्यवस्था को 24x7 सुनिश्चित किया जाए। वरना यह मान लिया जाए कि अयोध्या का जिला अस्पताल सिर्फ बिल्डिंग है, व्यवस्था नहीं।3
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