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बिहार की राजनीति में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद, मुकेश साहनी अब उत्तर प्रदेश में अपनी नई सियासी पारी शुरू करने की जुगत में हैं। बिहार में मिली हार के बाद, साहनी अब यूपी के सहारे अपना राजनीतिक किनारा तलाश रहे हैं, खासकर निषाद वोट बैंक पर अपनी उम्मीदें लगाए हुए हैं। यह कदम आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। मूल सवाल यह है कि क्या निषाद समुदाय का वोट बैंक मुकेश साहनी के लिए उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सियासी सहारा बन पाएगा, और क्या उनकी यह रणनीति निषाद राजनीति में उन्हें अपेक्षित परिणाम दिला पाएगी।
Hind News
बिहार की राजनीति में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद, मुकेश साहनी अब उत्तर प्रदेश में अपनी नई सियासी पारी शुरू करने की जुगत में हैं। बिहार में मिली हार के बाद, साहनी अब यूपी के सहारे अपना राजनीतिक किनारा तलाश रहे हैं, खासकर निषाद वोट बैंक पर अपनी उम्मीदें लगाए हुए हैं। यह कदम आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। मूल सवाल यह है कि क्या निषाद समुदाय का वोट बैंक मुकेश साहनी के लिए उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सियासी सहारा बन पाएगा, और क्या उनकी यह रणनीति निषाद राजनीति में उन्हें अपेक्षित परिणाम दिला पाएगी।
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- बिहार की राजनीति में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद, मुकेश साहनी अब उत्तर प्रदेश में अपनी नई सियासी पारी शुरू करने की जुगत में हैं। बिहार में मिली हार के बाद, साहनी अब यूपी के सहारे अपना राजनीतिक किनारा तलाश रहे हैं, खासकर निषाद वोट बैंक पर अपनी उम्मीदें लगाए हुए हैं। यह कदम आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। मूल सवाल यह है कि क्या निषाद समुदाय का वोट बैंक मुकेश साहनी के लिए उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सियासी सहारा बन पाएगा, और क्या उनकी यह रणनीति निषाद राजनीति में उन्हें अपेक्षित परिणाम दिला पाएगी।1
- आज दिनांक 21.06.2026 को मैनपुरी जनपद में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक मैनपुरी, अपर पुलिस अधीक्षक नगर/यातायात श्री अरुण कुमार सिंह, पुलिस उपाधीक्षक यातायात सुश्री दीपशिखा सिंह और यातायात प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने यातायात पुलिस के साथ मिलकर किया। अभियान के दौरान यातायात पुलिस ने लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया। इसके साथ ही, मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। इस निरोधात्मक कार्रवाई के तहत कुल 198 चालान किए गए और शराब के नशे में पाए गए 5 वाहनों को जब्त (सीज) किया गया। पुलिस ने मौके पर ही ₹10,000 का नकद समन शुल्क वसूला, जबकि कुल ₹5,50,000 का जुर्माना लगाया गया।2
- कुर्रा के रेपुरा में हुई फायरिंग की घटना में एक नया मोड़ आया है। इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद ढाई सौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है।1
- मैनपुरी के कुसमरा में बेवर रोड स्थित भगवानु की मठिया के सामने एक बड़ी दुर्घटना सामने आई है, जहाँ नशे में धुत एक पिकअप ड्राइवर ने कुसुम मैरेज हॉल के मालिक की खड़ी स्कॉर्पियो कार (UP 84 Q 3132) को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। पिकअप का नंबर UP 75 M 3850 बताया गया है। यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इसने 11 हजार वोल्ट के बिजली के खंभे को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे तार टूट गए और स्कॉर्पियो कार सीधी टकराकर पलट गई। इस हादसे के बाद पिकअप ड्राइवर को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। गनीमत यह रही कि इस भीषण टक्कर में कोई भी राह चलता व्यक्ति हादसे का शिकार नहीं हुआ। हालांकि, यह घटना चिंताजनक है क्योंकि यह इसी जगह पर एक हफ्ते के भीतर हुआ दूसरा बड़ा हादसा है।1
- कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नीट की परीक्षा प्रारंभ हो गई है, जिसमें चप्पा-चप्पा पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी देखने को मिली। इस बार यह परीक्षा काफी सख्त तरीके से कराई जा रही है ताकि किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ी या लापरवाही न हो। इसी क्रम में, सीओ सिटी अशोक कुमार ने सभी परीक्षा केंद्रों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया और वहां ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारियों को निर्देशित किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कड़ी धूप के बावजूद, सीओ सिटी अशोक कुमार परीक्षा केंद्रों के बाहर पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सक्रिय नजर आए।1
- 8वें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार के कर्मचारियों की रिटायरमेंट व्यवस्था में एक 'बहुत बड़ा बदलाव' होने जा रहा है। इस नए नियम के तहत, अब कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उनके जन्म महीने के आधार पर नहीं होगी, बल्कि साल में केवल दो निश्चित तारीखों पर ही उनका रिटायरमेंट हो पाएगा। यह प्रस्तावित बदलाव कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर महत्वपूर्ण असर डालेगा। जानकारी के अनुसार, नए फॉर्मूले से कर्मचारियों को अतिरिक्त महीनों के वेतन और पेंशन में लाभ मिल सकता है। इन संभावित बदलावों को लेकर वर्तमान नियमों, साल में सिर्फ दो बार रिटायरमेंट के नए फॉर्मूले, और कर्मचारियों को होने वाले अतिरिक्त फायदों को पूरी तरह से समझाया गया है।1
- मैनपुरी के कुर्रा थाना क्षेत्र में कन्नौज जनपद से आए 250 से अधिक लोगों ने हंगामा किया था। इस घटना के बाद, पीड़ित ने न्यायालय में शरण ली है और सभी संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य सतीश यादव ने पीड़ित का पक्ष रखा है।1
- उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। यह घटना मैनपुरी के किशनी विकास खंड की ग्राम पंचायत कुम्हौल की है, जहाँ ग्रामीणों की सुविधा के लिए स्वीकृत एक सीसी सड़क का निर्माण कागजों पर तो पूरा हो गया, लेकिन धरातल पर उसका कोई नामोनिशान नहीं है। आरोप है कि ग्राम पंचायत के प्रधान और किशनी विकास खंड के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) की कथित मिलीभगत से पद का दुरुपयोग किया गया। इन अधिकारियों ने पूरी योजना को केवल फाइलों और दस्तावेजों में मुकम्मल दिखाकर फर्जी मस्टर रोल, फर्जी तकनीकी रिपोर्ट और झूठे प्रशासनिक दस्तावेज तैयार किए। इन जाली कागजातों के सहारे प्रशासन की आँखों में धूल झोंकते हुए, सीसी सड़क निर्माण के लिए आवंटित पूरी सरकारी धनराशि को खाते से आहरित कर लिया गया, जिससे जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा सीधे तौर पर हड़प लिया गया। मौके पर जाँच करने पर पता चला कि जहाँ चमचमाती कंक्रीट की सड़क होनी चाहिए थी, वहाँ आज भी कच्चा रास्ता और धूल उड़ती है; एक ईंट भी नहीं रखी गई। जब इस गंभीर अनियमितता और वित्तीय गबन के बारे में खंड विकास अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी न होने का दावा करते हुए मामले से इनकार कर दिया, जबकि जमीनी हकीकत उनके बयानों के बिल्कुल विपरीत है। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मौके पर काम का अभाव इस बात का खुला प्रमाण है कि कुम्हौल ग्राम पंचायत में मनरेगा के बजट का बड़े पैमाने पर बंदरबांट और गबन हुआ है। जैसा कि जीडी न्यूज नेटवर्क की एंकर अनुष्का शुक्ला ने बताया, इस तरह कागजों पर सड़कें बन जाती हैं और उनका पैसा भी निकल जाता है, लेकिन जनता को केवल बदहाली मिलती है। अब देखना यह होगा कि मैनपुरी का जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे गठजोड़ का संज्ञान लेकर कब तक कार्रवाई करते हैं।3