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चितरपुर प्रखंड से 4 धाम यात्रा के लिए 71वां जत्था रवाना हो गया है। इस दौरान, सांसद मनीष जायसवाल को 'कलयुग के श्रवण कुमार' की उपाधि से नवाजा गया।
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चितरपुर प्रखंड से 4 धाम यात्रा के लिए 71वां जत्था रवाना हो गया है। इस दौरान, सांसद मनीष जायसवाल को 'कलयुग के श्रवण कुमार' की उपाधि से नवाजा गया।
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- चितरपुर प्रखंड से 4 धाम यात्रा के लिए 71वां जत्था रवाना हो गया है। इस दौरान, सांसद मनीष जायसवाल को 'कलयुग के श्रवण कुमार' की उपाधि से नवाजा गया।1
- 12वें वेतन को लागू करने की मांग को लेकर संयुक्त मोर्चा ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन वेतनमान लागू करवाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।1
- झारखंड के रांची जिले के ओरमांझी के कांके प्रखंड स्थित नेवरी में गुरुवार को प्रखंड कांग्रेस कमिटी द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू, खिजरी विधायक और कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, और रांची जिला कांग्रेस अध्यक्ष सोमनाथ मुण्डा सहित कई प्रमुख नेता, बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) और कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य एसआईआर अभियान की रणनीति पर गहन चर्चा करना था, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची में पाई गई त्रुटियों में सुधार करने और घर-घर जाकर लोगों को मतदाता जागरूकता के प्रति सक्रिय करने पर विशेष बल दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने बूथ स्तर पर संगठन को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पूरी सक्रियता और निष्ठा के साथ इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण भी उपस्थित रहे।1
- Doctors Day के अवसर पर Samford Hospital में एक डॉक्टर को सम्मानित किया गया। यह अस्पताल अच्छी व्यवस्थाओं से सुसज्जित है और अपने उच्चतम स्तर के इलाज के लिए जाना जाता है।1
- रांची के राज हॉस्पिटल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल द्वारा कथित तौर पर 17 लाख रुपए का भारी-भरकम बिल वसूलने के बावजूद एक मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद, मरीज के इलाज और अस्पताल की सेवाओं को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं।1
- झारखंड इस्पात में पांच मजदूरों की दर्दनाक मौत हुई है, जिसने गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर पूछा गया है कि आखिर ये मौतें कैसे हुईं, और क्यों बड़े उद्योगपतियों के सामने गरीब मजदूरों की आवाज उठाने के लिए कोई आगे नहीं आता। जन प्रतिनिधियों, जैसे कि सांसद और विधायक, पर सवाल उठाया गया है कि वे मजदूरों के हित में क्यों नहीं बोलते, जबकि वे चुनाव के दौरान इन्हीं मजदूरों को अपने वोट बैंक के रूप में देखते हैं। यह सीधा सवाल पूछा गया है कि क्या इन नेताओं के लिए बड़े उद्योगपति ही असली वोट बैंक हैं, या फिर गरीब मजदूरों की जान की भी कोई कीमत है।1