बहोरीबंद तहसील क्षेत्र में भीषण गर्मी में तपती ज़िंदगी: ईंट भट्टों पर मजदूरों का संघर्ष भीषण गर्मी ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित कर रखा है, वहीं दूसरी ओर ईंट भट्टों पर काम करने वाले कारीगरों की जिंदगी आग के दरिया से गुजर रही है। तपते सूरज और झुलसा देने वाली लू के बीच ईंट बनाने वाले मजदूर अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ खेतों में झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक ये मजदूर मिट्टी गूंथने, ईंट तैयार करने और उन्हें पकाने के काम में जुटे रहते हैं। 45 डिग्री के करीब पहुंच चुके तापमान में भी उनके हौसले और मेहनत कम नहीं हो रही है। सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आती है, जब मजदूरों के छोटे बच्चे भी इसी तपती जमीन पर खेलते और अपने माता-पिता के साथ समय बिताते दिखाई देते हैं। ना तेज गर्मी से बचने का कोई पक्का इंतजाम और ना ही पर्याप्त सुविधाएं — फिर भी परिवार दो वक्त की रोटी के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। ईंट भट्टों पर काम करने वाले इन कारीगरों का कहना है कि मेहनत ही उनके परिवार का सहारा है। गर्मी चाहे कितनी भी बढ़ जाए, काम बंद करने का मतलब भूखे पेट सोना है। यह तस्वीर केवल मजदूरी की नहीं, बल्कि संघर्ष, मजबूरी और मेहनतकश लोगों की जीवटता की कहानी भी बयां करती है। ज़रूरत है कि प्रशासन और समाज ऐसे श्रमिक परिवारों की मूलभूत सुविधाओं और बच्चों की सुरक्षा की ओर गंभीर ध्यान दे ईट का काम कर रहे कारीगरों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यही समय होता है जब ईंटों को बनाने का काम तेजी से किया जा सकता है
बहोरीबंद तहसील क्षेत्र में भीषण गर्मी में तपती ज़िंदगी: ईंट भट्टों पर मजदूरों का संघर्ष भीषण गर्मी ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित कर रखा है, वहीं दूसरी ओर ईंट भट्टों पर काम करने वाले कारीगरों की जिंदगी आग के दरिया से गुजर रही है। तपते सूरज और झुलसा देने वाली लू के बीच ईंट बनाने वाले मजदूर अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ खेतों में झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक ये मजदूर मिट्टी गूंथने, ईंट तैयार करने और उन्हें पकाने के काम में जुटे रहते हैं। 45 डिग्री के करीब पहुंच चुके तापमान में भी उनके हौसले और मेहनत कम नहीं हो रही है। सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आती है, जब मजदूरों के छोटे बच्चे भी इसी तपती जमीन पर खेलते और अपने माता-पिता के साथ समय बिताते दिखाई देते हैं। ना तेज गर्मी से बचने का कोई पक्का इंतजाम और ना ही पर्याप्त सुविधाएं — फिर भी परिवार दो वक्त की रोटी के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। ईंट भट्टों पर काम करने वाले इन कारीगरों का कहना है कि मेहनत ही उनके परिवार का सहारा है। गर्मी चाहे कितनी भी बढ़ जाए, काम बंद करने का मतलब भूखे पेट सोना है। यह तस्वीर केवल मजदूरी की नहीं, बल्कि संघर्ष, मजबूरी और मेहनतकश लोगों की जीवटता की कहानी भी बयां करती है। ज़रूरत है कि प्रशासन और समाज ऐसे श्रमिक परिवारों की मूलभूत सुविधाओं और बच्चों की सुरक्षा की ओर गंभीर ध्यान दे ईट का काम कर रहे कारीगरों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यही समय होता है जब ईंटों को बनाने का काम तेजी से किया जा सकता है
- दक्षिण अंडमान के फेरागंज क्षेत्र में कई घरों तक पहुँचने के लिए कोई उचित सड़क नहीं है। इससे स्थानीय निवासियों को आवागमन और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
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- गया के नूतन नगर में एक प्रोफेसर परिवार पर हथियारबंद अपराधियों ने जानलेवा हमला किया, जिसमें परिवार के सदस्यों को पीटा और जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि सिविल लाइंस पुलिस ने शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। इस घटना ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसपर प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की जा रही है।3
- हाल ही में राष्ट्रपति की उपस्थिति को शुभ शगुन बताया जा रहा है। कई लोग उनके दिखने के तरीके में अच्छे भविष्य का संकेत देख रहे हैं।1
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- स्लीमनाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों बिजली जाने से हो रही बेहद परेशानी कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में बिजली जाने से आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है स्थानीय रहवासियों ने आज रविवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यहां पर विगत कई दिनों से सुबह बिजली कटौती से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह परेशानी इन दिनों बंधी, मटवारा सहित अन्य स्थानों में बन रही है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कब बिजली जाए कहा नहीं जा सकता है। इस वजह से लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है। बिजली जाने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। बिजली की ट्रिपिंग के से लोग बेहद परेशान हो रहे हैं। इससे कई कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। कई बार ऐसा होता कि कोई फेस गुल हो जाता है। इससे कई नागरिकों के घरों की बिजली भी बंद हो जाती है। घंटों के इंतजार करते रह जाते हैं। नागरिकों ने सुधार की मांग की है। लोगों ने बताया कि मोबाइल चार्जिंग, आटा पिसवाई सहित अन्य काम बिजली के भरोसे ही चलते हैं लेकिन बिजली जाने से इन पर असर हो रहा है।1
- नया बांग्ला सीरियल 'सफिओराफी' का दूसरा एपिसोड अब टीवी पर उपलब्ध है। दर्शक इस ताज़ा कड़ी को तुरंत देख सकते हैं।1
- *🚨 BIG BREAKING FROM CHAIBASA: सब्जी बेचने निकले ग्रामीण पर 20 तीरों से हमला, हालत नाजुक* *झींकपानी, पश्चिमी सिंहभूम | 10 मई 2026* | ** पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी थाना क्षेत्र में खौफनाक वारदात। बेटेया गांव के 45 वर्षीय चोया बिरूली पर चिड़ियापहाड़ी निवासी दोपे बिरूली ने घात लगाकर ताबड़तोड़ *20 तीर चलाए*। 3 तीर शरीर में धंसे। हालत गंभीर। *वारदात कैसे हुई?* 📍 *कहां*: झींकपानी थाना क्षेत्र, जोड़ापोखर हाट का रास्ता 📍 *कब*: शनिवार सुबह, सब्जी बेचने जाते वक्त 📍 *क्यों*: शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश की आशंका चोया बिरूली रोज की तरह सब्जी लेकर हाट जा रहे थे। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे आरोपी दोपे बिरूली ने अचानक हमला बोल दिया। एक के बाद एक करीब 20 तीर चलाए। *अभी क्या हाल है?* ⚠️ *3 तीर* कंधे, पीठ और पैर में लगे 🏥 *चाईबासा सदर अस्पताल* में चल रहा इलाज 🩺 डॉक्टरों के मुताबिक हालत *गंभीर लेकिन स्थिर* 🚔 आरोपी मौके से फरार, पुलिस कर रही तलाश *पुलिस एक्शन मोड में* झींकपानी थाना प्रभारी ने बताया: _"आरोपी की पहचान हो गई है। पुरानी रंजिश का मामला लग रहा है। स्पेशल टीम गठित कर दी गई है। तीर-कमान जैसे हथियार का इस्तेमाल चिंताजनक है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार करेंगे।"_ *इलाके में दहशत* इस वारदात के बाद बेटेया और चिड़ियापहाड़ी गांव में तनाव। ग्रामीणों ने हाट जाना बंद किया। पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। *#JharkhandCrime #ChaibasaNews #WestSinghbhum #BreakingNews #TribalArea* Highlights:*3