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नाग पंचमी पर चौरसिया समाज की भव्य शोभायात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत मैहर। नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस के अवसर पर चौरसिया समाज मैहर के तत्वावधान में रविवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, डीजे और धार्मिक भजनों की गूंज के बीच निकली शोभायात्रा ने नगर में भक्तिमय माहौल बना दिया। यात्रा का विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। शोभायात्रा में समाज के बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। पीले साफे और पट्टे पहने समाजजन आकर्षण का केंद्र रहे। सुसज्जित रथ और धार्मिक झांकियों के साथ निकली यात्रा में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल हुए। शोभायात्रा के अलाउद्दीन तिराहे पहुंचने पर ‘माई की रसोई’ के संचालक सौरज पांडे द्वारा समाजजनों और श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान समाज के प्रमुख लोगों का सम्मान भी किया गया। राम मंदिर में महाआरती के साथ समापन नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करते हुए शोभायात्रा राम मंदिर पहुंची, जहां भगवान नागदेव एवं महर्षि चौरसिया जी की महाआरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और धार्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।

6 hrs ago
user_Kamlesh Kumar Manjhi
Kamlesh Kumar Manjhi
Electrician मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
6 hrs ago

नाग पंचमी पर चौरसिया समाज की भव्य शोभायात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत मैहर। नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस के अवसर पर चौरसिया समाज मैहर के तत्वावधान में रविवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, डीजे और धार्मिक भजनों की गूंज के बीच निकली शोभायात्रा ने नगर में भक्तिमय माहौल बना दिया। यात्रा का विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। शोभायात्रा में समाज के बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। पीले साफे और पट्टे पहने समाजजन आकर्षण का केंद्र रहे। सुसज्जित रथ और धार्मिक झांकियों के साथ निकली यात्रा में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल हुए। शोभायात्रा के अलाउद्दीन तिराहे पहुंचने पर ‘माई की रसोई’ के संचालक सौरज पांडे द्वारा समाजजनों और श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान समाज के प्रमुख लोगों का सम्मान भी किया गया। राम मंदिर में महाआरती के साथ समापन नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करते हुए शोभायात्रा राम मंदिर पहुंची, जहां भगवान नागदेव एवं महर्षि चौरसिया जी की महाआरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और धार्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।

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  • भारत में शिक्षा को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह फैलाया गया कि “निजीकरण” यानी गुणवत्ता, और “सरकारी” यानी असफलता। पिछले तीन चार दशकों में उदारीकरण और बाजारवाद ने शिक्षा को धीरे-धीरे अधिकार से हटाकर उत्पाद बना दिया। अब स्कूल ज्ञान के केंद्र कम और ब्रांडेड सर्विस सेंटर ज्यादा दिखाई देते हैं। ऐसे में “प्राइवेट स्कूलों के सरकारीकरण” का सवाल भले आज की राजनीति में असंभव लगे, लेकिन यह सवाल उठना इसलिए जरूरी है क्योंकि शिक्षा केवल बाजार की वस्तु नहीं हो सकती। जब संविधान शिक्षा को मौलिक अधिकार मानता है, तब यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि गुणवत्ता पर केवल अमीरों का कब्जा न हो। आज देश में दो शिक्षा व्यवस्थाएँ साफ दिखाई देती हैं—एक वह जहाँ स्मार्ट क्लास, AC बसें, इंटरनेशनल टैग और लाखों की फीस है; दूसरी वह जहाँ एक या दो शिक्षक पाँच कक्षाएँ संभाल रहा है। यह केवल संस्थागत अंतर नहीं, यह लोकतंत्र के भीतर पैदा हुई शैक्षिक असमानता की खाई है। आखिर सवाल यह क्यों न पूछा जाए कि अगर शिक्षा समाज निर्माण का माध्यम है तो उसे पूरी तरह बाजार के हवाले क्यों कर दिया गया? कोई भी निजी स्कूल चाहे जितनी फीस बढ़ा दे, चाहे बच्चों और अभिभावकों पर कितना भी आर्थिक दबाव डाले, उसका अस्तित्व सुरक्षित रहता है। लेकिन सरकारी स्कूलों के लिए हर साल “विलय”, “समायोजन”, “कम छात्र संख्या” और “अप्रासंगिकता” जैसे शब्द तैयार रहते हैं। यानी जो संस्थान गरीब के बच्चे को पढ़ाता है, वही हमेशा कटघरे में खड़ा किया जाता है। सच यह है कि निजी स्कूलों की सफलता का बड़ा हिस्सा शिक्षा से ज्यादा “इमेज मैनेजमेंट” पर आधारित है। कुछ टॉपर बच्चे, भारी विज्ञापन, अखबारों के पूरे-पूरे परिशिष्ट, चमकदार इमारतें और अंग्रेजी बोलता हुआ वातावरण—इन्हीं के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता मापी जाने लगी। कोई यह नहीं पूछता कि इन स्कूलों में औसत और कमजोर बच्चों के साथ क्या होता है, मानसिक दबाव कितना है, फीस संरचना कितनी पारदर्शी है, और शिक्षकों की वास्तविक स्थिति क्या है। सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि सरकारी स्कूलों पर RTI लागू है, सामाजिक जवाबदेही है, मीडिया की निगरानी है, अदालतों की टिप्पणियाँ हैं, लेकिन निजी स्कूलों के मामले में वही समाज अचानक “स्वायत्तता” और “संस्थान की स्वतंत्रता” की बात करने लगता है। आखिर क्यों? यदि शिक्षा सार्वजनिक महत्व का विषय है, तो हर स्कूल सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में क्यों न आए? क्यों न निजी स्कूलों को भी पारदर्शी भर्ती, फीस नियमन, सामाजिक ऑडिट और कठोर उत्तरदायित्व व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाए? असल में समस्या केवल शिक्षा की नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। क्या आज का राजनीतिक नेतृत्व इतना साहस रखता है कि शिक्षा के मामले में अमीर और गरीब के साथ एक जैसा व्यवहार कर सके? क्या कोई नेता अपने बच्चे को उसी सरकारी स्कूल में भेजने का नैतिक उदाहरण देगा जहाँ गरीब का बच्चा पढ़ता है? जब तक सत्ता, नौकरशाही और प्रभावशाली वर्ग खुद सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों को सुधारने की वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता पैदा ही नहीं होगी। यह भी समझना होगा कि सरकारीकरण का अर्थ केवल भवनों पर सरकारी ताला लगाना नहीं है। इसका अर्थ है—शिक्षा को बाजार के बजाय सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत पर खड़ा करना। दुनिया के कई विकसित देशों में गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा इसलिए मजबूत है क्योंकि वहाँ शिक्षा को “निवेश” नहीं, “समानता का आधार” माना गया। भारत में उल्टा हो रहा है—अच्छी शिक्षा धीरे-धीरे आर्थिक क्षमता की गुलाम बनती जा रही है। यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में शिक्षा केवल वर्ग विभाजन का सबसे बड़ा औजार बन जाएगी। एक वर्ग नेतृत्व करेगा क्योंकि उसने महंगे संस्थानों से पढ़ाई की होगी, और दूसरा वर्ग केवल श्रम करेगा क्योंकि उसके हिस्से में संसाधनहीन शिक्षा आई होगी। यह केवल शिक्षा का संकट नहीं, लोकतंत्र की जड़ों के लिए खतरा है। इसलिए यह सवाल पूरी गंभीरता से पूछा जाना चाहिए कि क्या देश में शिक्षा का उद्देश्य नागरिक बनाना है या ग्राहक? यदि उद्देश्य नागरिक बनाना है, तो फिर शिक्षा व्यवस्था को समानता, जवाबदेही और सार्वजनिक नियंत्रण की दिशा में ले जाना ही होगा। क्योंकि जिस देश में स्कूल भी वर्ग देखकर अलग-अलग गुणवत्ता देने लगें, वहाँ संविधान की “समान अवसर” वाली आत्मा धीरे-धीरे खोखली होने लगती है।
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    भारत में शिक्षा को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह फैलाया गया कि “निजीकरण” यानी गुणवत्ता, और “सरकारी” यानी असफलता। पिछले तीन चार दशकों में उदारीकरण और बाजारवाद ने शिक्षा को धीरे-धीरे अधिकार से हटाकर उत्पाद बना दिया। अब स्कूल ज्ञान के केंद्र कम और ब्रांडेड सर्विस सेंटर ज्यादा दिखाई देते हैं। ऐसे में “प्राइवेट स्कूलों के सरकारीकरण” का सवाल भले आज की राजनीति में असंभव लगे, लेकिन यह सवाल उठना इसलिए जरूरी है क्योंकि शिक्षा केवल बाजार की वस्तु नहीं हो सकती।
जब संविधान शिक्षा को मौलिक अधिकार मानता है, तब यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि गुणवत्ता पर केवल अमीरों का कब्जा न हो। आज देश में दो शिक्षा व्यवस्थाएँ साफ दिखाई देती हैं—एक वह जहाँ स्मार्ट क्लास, AC बसें, इंटरनेशनल टैग और लाखों की फीस है; दूसरी वह जहाँ एक या दो शिक्षक पाँच कक्षाएँ संभाल रहा है। यह केवल संस्थागत अंतर नहीं, यह लोकतंत्र के भीतर पैदा हुई शैक्षिक असमानता की खाई है।
आखिर सवाल यह क्यों न पूछा जाए कि अगर शिक्षा समाज निर्माण का माध्यम है तो उसे पूरी तरह बाजार के हवाले क्यों कर दिया गया? कोई भी निजी स्कूल चाहे जितनी फीस बढ़ा दे, चाहे बच्चों और अभिभावकों पर कितना भी आर्थिक दबाव डाले, उसका अस्तित्व सुरक्षित रहता है। लेकिन सरकारी स्कूलों के लिए हर साल “विलय”, “समायोजन”, “कम छात्र संख्या” और “अप्रासंगिकता” जैसे शब्द तैयार रहते हैं। यानी जो संस्थान गरीब के बच्चे को पढ़ाता है, वही हमेशा कटघरे में खड़ा किया जाता है।
सच यह है कि निजी स्कूलों की सफलता का बड़ा हिस्सा शिक्षा से ज्यादा “इमेज मैनेजमेंट” पर आधारित है। कुछ टॉपर बच्चे, भारी विज्ञापन, अखबारों के पूरे-पूरे परिशिष्ट, चमकदार इमारतें और अंग्रेजी बोलता हुआ वातावरण—इन्हीं के आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता मापी जाने लगी। कोई यह नहीं पूछता कि इन स्कूलों में औसत और कमजोर बच्चों के साथ क्या होता है, मानसिक दबाव कितना है, फीस संरचना कितनी पारदर्शी है, और शिक्षकों की वास्तविक स्थिति क्या है।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि सरकारी स्कूलों पर RTI लागू है, सामाजिक जवाबदेही है, मीडिया की निगरानी है, अदालतों की टिप्पणियाँ हैं, लेकिन निजी स्कूलों के मामले में वही समाज अचानक “स्वायत्तता” और “संस्थान की स्वतंत्रता” की बात करने लगता है। आखिर क्यों? यदि शिक्षा सार्वजनिक महत्व का विषय है, तो हर स्कूल सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में क्यों न आए? क्यों न निजी स्कूलों को भी पारदर्शी भर्ती, फीस नियमन, सामाजिक ऑडिट और कठोर उत्तरदायित्व व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाए?
असल में समस्या केवल शिक्षा की नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। क्या आज का राजनीतिक नेतृत्व इतना साहस रखता है कि शिक्षा के मामले में अमीर और गरीब के साथ एक जैसा व्यवहार कर सके? क्या कोई नेता अपने बच्चे को उसी सरकारी स्कूल में भेजने का नैतिक उदाहरण देगा जहाँ गरीब का बच्चा पढ़ता है? जब तक सत्ता, नौकरशाही और प्रभावशाली वर्ग खुद सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों को सुधारने की वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता पैदा ही नहीं होगी।
यह भी समझना होगा कि सरकारीकरण का अर्थ केवल भवनों पर सरकारी ताला लगाना नहीं है। इसका अर्थ है—शिक्षा को बाजार के बजाय सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत पर खड़ा करना। दुनिया के कई विकसित देशों में गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा इसलिए मजबूत है क्योंकि वहाँ शिक्षा को “निवेश” नहीं, “समानता का आधार” माना गया। भारत में उल्टा हो रहा है—अच्छी शिक्षा धीरे-धीरे आर्थिक क्षमता की गुलाम बनती जा रही है।
यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में शिक्षा केवल वर्ग विभाजन का सबसे बड़ा औजार बन जाएगी। एक वर्ग नेतृत्व करेगा क्योंकि उसने महंगे संस्थानों से पढ़ाई की होगी, और दूसरा वर्ग केवल श्रम करेगा क्योंकि उसके हिस्से में संसाधनहीन शिक्षा आई होगी। यह केवल शिक्षा का संकट नहीं, लोकतंत्र की जड़ों के लिए खतरा है।
इसलिए यह सवाल पूरी गंभीरता से पूछा जाना चाहिए कि क्या देश में शिक्षा का उद्देश्य नागरिक बनाना है या ग्राहक? यदि उद्देश्य नागरिक बनाना है, तो फिर शिक्षा व्यवस्था को समानता, जवाबदेही और सार्वजनिक नियंत्रण की दिशा में ले जाना ही होगा। क्योंकि जिस देश में स्कूल भी वर्ग देखकर अलग-अलग गुणवत्ता देने लगें, वहाँ संविधान की “समान अवसर” वाली आत्मा धीरे-धीरे खोखली होने लगती है।
    user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • चौरसिया समाज मैहर द्वारा नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा चौरसिया समाज मैहर द्वारा नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा मैहर। नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस के पावन अवसर पर चौरसिया समाज मैहर द्वारा भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं सामाजिक उत्साह से ओत-प्रोत इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में समाज के लोगों ने शामिल होकर अपनी आस्था और एकता का परिचय दिया। शोभायात्रा में आकर्षक रथ, घोड़े, पालकी, डीजे, बैंड-बाजा सहित विभिन्न झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। गाजे-बाजे के साथ निकली इस यात्रा का जगह-जगह श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों द्वारा स्वागत किया गया। चौरसिया समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर कार्यक्रम की भव्यता बढ़ाई। पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस का यह आयोजन समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रतीक है। शोभायात्रा शांतिपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। आयोजन को सफल बनाने में चौरसिया समाज के सभी सदस्यों एवं युवाओं का विशेष योगदान रहा। शोभायात्रा में शामिल रहे विनोद चौरसिया, मनोज चौरसिया, सूर्य प्रकाश चौरसिया , विष्णु चौरसिया, अरुण चौरसिया, दीपू चौरसिया , सुनील चौरसिया, संतोष चौरसिया, अमित चौरसिया,शनि चौरसिया सहित सैकड़ों समाजिक कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि सामिल रहें।
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    चौरसिया समाज मैहर द्वारा नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा
चौरसिया समाज मैहर द्वारा नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा
मैहर। नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस के पावन अवसर पर चौरसिया समाज मैहर द्वारा भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं सामाजिक उत्साह से ओत-प्रोत इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में समाज के लोगों ने शामिल होकर अपनी आस्था और एकता का परिचय दिया। शोभायात्रा में आकर्षक रथ, घोड़े, पालकी, डीजे, बैंड-बाजा सहित विभिन्न झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। गाजे-बाजे के साथ निकली इस यात्रा का जगह-जगह श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों द्वारा स्वागत किया गया। चौरसिया समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर कार्यक्रम की भव्यता बढ़ाई। पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि नाग पंचमी एवं चौरसिया दिवस का यह आयोजन समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रतीक है। शोभायात्रा शांतिपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। आयोजन को सफल बनाने में चौरसिया समाज के सभी सदस्यों एवं युवाओं का विशेष योगदान रहा। शोभायात्रा में शामिल रहे विनोद चौरसिया, मनोज चौरसिया, सूर्य प्रकाश चौरसिया , विष्णु चौरसिया, अरुण चौरसिया, दीपू चौरसिया , सुनील चौरसिया, संतोष चौरसिया, अमित चौरसिया,शनि चौरसिया सहित सैकड़ों समाजिक कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि सामिल रहें।
    user_Satyaprakash Media Maihar
    Satyaprakash Media Maihar
    Photographer मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • आखिर कौन से हादसे के बाद जागेगा मैहर का माइनिंग विभाग? ➡️#sntnewspinch आखिर कौन से हादसे के बाद जागेगा मैहर का माइनिंग विभाग? ➡️#sntnewspinch
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    आखिर कौन से हादसे के बाद जागेगा मैहर का माइनिंग विभाग? ➡️#sntnewspinch
आखिर कौन से हादसे के बाद जागेगा मैहर का माइनिंग विभाग? ➡️#sntnewspinch
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    11 hrs ago
  • *इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री* *इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री* दरअसल कल रात गोविंदगढ़ तालाब के रिसाव होने के बाद आज तालाब का निरीक्षण करने पूर्व मंत्री व विधायक डॉक्टर राजेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे इस दौरान जब उन्होंने इंजीनियर से रूपरेखा की जानकारी चाही तो जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने साझा नहीं कि इसके बाद नाराज विधायक ने इंजीनियर को अपनी डिग्री गिना डाली दरअसल विधायक ने कहा कि हम आपसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और इंजीनियर भी हैं विदेश से पीएचडी की है इसके साथ ही संविधान की परिभाषा बताई उन्होंने कहा हो सकता है मैं आपसे ज्यादा जानता हूं तो मुझे बताएं कि तालाब को बचाने के लिए आपके पास क्या तरीका है इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग विधायक की सराहना करते हैं नहीं थक रहे हैं।
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    *इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री*
*इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री*
दरअसल कल रात गोविंदगढ़ तालाब के रिसाव होने के बाद आज तालाब का निरीक्षण करने पूर्व मंत्री व विधायक डॉक्टर राजेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे इस दौरान जब उन्होंने इंजीनियर से रूपरेखा की जानकारी चाही तो जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने साझा नहीं कि इसके बाद नाराज विधायक ने इंजीनियर को अपनी डिग्री गिना डाली दरअसल विधायक ने कहा कि हम आपसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और इंजीनियर भी हैं विदेश से पीएचडी की है इसके साथ ही संविधान की परिभाषा बताई उन्होंने कहा हो सकता है मैं आपसे ज्यादा जानता हूं तो मुझे बताएं कि तालाब को बचाने के लिए आपके पास क्या तरीका है इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग विधायक की सराहना करते हैं नहीं थक रहे हैं।
    user_रोहित कुमार पाठक
    रोहित कुमार पाठक
    Lawyer अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • खबर अमरपाटन/गोबिंदगढ़ तालाब रिसाव की खबर के बाद मौके पर पहुंचे बिधायक डा.राजेन्द्र कुमार सिंह इंजीनियर से पूछे जाने पर नहीं मिला सही जबाब तो इंजीनियर की लगा दी क्लास खबर अमरपाटन/गोबिंदगढ़ तालाब रिसाव की खबर के बाद मौके पर पहुंचे बिधायक डा.राजेन्द्र कुमार सिंह इंजीनियर से पूछे जाने पर नहीं मिला सही जबाब तो इंजीनियर की लगा दी क्लास
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    खबर अमरपाटन/गोबिंदगढ़ तालाब रिसाव की खबर के बाद मौके पर पहुंचे बिधायक डा.राजेन्द्र कुमार सिंह इंजीनियर से पूछे जाने पर नहीं मिला सही जबाब तो इंजीनियर की लगा दी क्लास 
खबर अमरपाटन/गोबिंदगढ़ तालाब रिसाव की खबर के बाद मौके पर पहुंचे बिधायक डा.राजेन्द्र कुमार सिंह इंजीनियर से पूछे जाने पर नहीं मिला सही जबाब तो इंजीनियर की लगा दी क्लास
    user_वशीम शाह
    वशीम शाह
    Court reporter अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री* दरअसल कल रात गोविंदगढ़ तालाब के रिसाव होने के बाद आज तालाब का निरीक्षण करने पूर्व मंत्री व विधायक डॉक्टर राजेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे इस दौरान जब उन्होंने इंजीनियर से रूपरेखा की जानकारी चाही तो जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने साझा नहीं कि इसके बाद नाराज विधायक ने इंजीनियर को अपनी डिग्री गिना डाली दरअसल विधायक ने कहा कि हम आपसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और इंजीनियर भी हैं विदेश से पीएचडी की है इसके साथ ही संविधान की परिभाषा बताई उन्होंने कहा हो सकता है मैं आपसे ज्यादा जानता हूं तो मुझे बताएं कि तालाब को बचाने के लिए आपके पास क्या तरीका है इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग विधायक की सराहना करते हैं नहीं थक रहे हैं। *इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री* दरअसल कल रात गोविंदगढ़ तालाब के रिसाव होने के बाद आज तालाब का निरीक्षण करने पूर्व मंत्री व विधायक डॉक्टर राजेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे इस दौरान जब उन्होंने इंजीनियर से रूपरेखा की जानकारी चाही तो जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने साझा नहीं कि इसके बाद नाराज विधायक ने इंजीनियर को अपनी डिग्री गिना डाली दरअसल विधायक ने कहा कि हम आपसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और इंजीनियर भी हैं विदेश से पीएचडी की है इसके साथ ही संविधान की परिभाषा बताई उन्होंने कहा हो सकता है मैं आपसे ज्यादा जानता हूं तो मुझे बताएं कि तालाब को बचाने के लिए आपके पास क्या तरीका है इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग विधायक की सराहना करते हैं नहीं थक रहे हैं।
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    *इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री*
दरअसल कल रात गोविंदगढ़ तालाब के रिसाव होने के बाद आज तालाब का निरीक्षण करने पूर्व मंत्री व विधायक डॉक्टर राजेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे इस दौरान जब उन्होंने इंजीनियर से रूपरेखा की जानकारी चाही तो जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने साझा नहीं कि इसके बाद नाराज विधायक ने इंजीनियर को अपनी डिग्री गिना डाली दरअसल विधायक ने कहा कि हम आपसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और इंजीनियर भी हैं विदेश से पीएचडी की है इसके साथ ही संविधान की परिभाषा बताई उन्होंने कहा हो सकता है मैं आपसे ज्यादा जानता हूं तो मुझे बताएं कि तालाब को बचाने के लिए आपके पास क्या तरीका है इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग विधायक की सराहना करते हैं नहीं थक रहे हैं।
*इंजीनियर ओर विधायक के बीच बहस, फिर माननीय ने गिनाई अपनी डिग्री*
दरअसल कल रात गोविंदगढ़ तालाब के रिसाव होने के बाद आज तालाब का निरीक्षण करने पूर्व मंत्री व विधायक डॉक्टर राजेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे इस दौरान जब उन्होंने इंजीनियर से रूपरेखा की जानकारी चाही तो जल संसाधन विभाग के इंजीनियर ने साझा नहीं कि इसके बाद नाराज विधायक ने इंजीनियर को अपनी डिग्री गिना डाली दरअसल विधायक ने कहा कि हम आपसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं और इंजीनियर भी हैं विदेश से पीएचडी की है इसके साथ ही संविधान की परिभाषा बताई उन्होंने कहा हो सकता है मैं आपसे ज्यादा जानता हूं तो मुझे बताएं कि तालाब को बचाने के लिए आपके पास क्या तरीका है इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग विधायक की सराहना करते हैं नहीं थक रहे हैं।
    user_Shiv Singh rajput dahiya journ
    Shiv Singh rajput dahiya journ
    Court reporter Amarpatan, Satna•
    7 hrs ago
  • आदिवासी नृत्य का शानदार प्रदर्शन ➡️🇨🇮15 अगस्त मैहर 📍
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    आदिवासी नृत्य का शानदार प्रदर्शन ➡️🇨🇮15 अगस्त मैहर 📍
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    14 hrs ago
  • सागर जिले में इंस्टाग्राम रील पर बंदूक लहरा रहे थे...पुलिस तलाशने गई...पेशे से ड्राइवर के घर में मिला 3 करोड़ कैश...गिनने के लिये मशीन मंगवाई गई...परिजनों का दावा है कि...भोपाल में बैठे उनके PWD इंजीनियर रिश्तेदार ने अलमारी रखी थी...जिसमें रकम से भरे बैग मिले...
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    सागर जिले में इंस्टाग्राम रील पर बंदूक लहरा रहे थे...पुलिस तलाशने गई...पेशे से ड्राइवर के घर में मिला 3 करोड़ कैश...गिनने के लिये मशीन मंगवाई गई...परिजनों का दावा है कि...भोपाल में बैठे उनके PWD इंजीनियर रिश्तेदार ने अलमारी रखी थी...जिसमें रकम से भरे बैग मिले...
    user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • शिक्षा की ओर एक सार्थक पहल — निःशुल्क स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम शिक्षा की ओर एक सार्थक पहल — निःशुल्क स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम राम आधारे तपोवन चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आवश्यक एवं चिन्हित जरूरतमंद छोटे बच्चों को निःशुल्क स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया !! यह कार्यक्रम 16 अगस्त 2026 को ग्राम भड़रा पोस्ट ताला, जिला मैहर में आयोजित हुआ कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना तथा उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास को मजबूती प्रदान करना है। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. केशव मिश्रा जी आयोजन रचनाकार समित कुशवाहा जी - जिला मंत्री (विहिप )लक्ष्मी कांत द्विवेदी जी,संभाग संयोजक (विहिप ) राकेश प्रताप सिंह जी ट्रस्ट सदस्य संदीप मिश्र जी, वरिष्ठ समाजसेवी श्यामलाल चतुर्वेदी जी इस अवसर उपस्थित रहे व शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही! राम आधारे तपोवन चैरिटेबल फाउंडेशन का यह प्रयास केवल स्कूल बैग वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन नन्हे बच्चों के सपनों को संबल देने की एक सकारात्मक पहल है, जिनके लिए शिक्षा बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी है। “शिक्षा ही भविष्य है… आइए, इन नन्हें बच्चों के सपनों को नई उड़ान दें।” समाज के सभी वर्गों से इस पुनीत कार्य में सहभागी बनने एवं बच्चों का उत्साहवर्धन करने की अपील की जाती है। सेवा ही साधना, शिक्षा ही आराधना।
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    शिक्षा की ओर एक सार्थक पहल — निःशुल्क स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम
शिक्षा की ओर एक सार्थक पहल — निःशुल्क स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम
राम आधारे तपोवन चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आवश्यक एवं चिन्हित जरूरतमंद छोटे बच्चों को निःशुल्क स्कूल बैग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया  !!
यह कार्यक्रम 16 अगस्त 2026 को ग्राम भड़रा पोस्ट ताला, जिला मैहर में आयोजित हुआ कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना तथा उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास को मजबूती प्रदान करना है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. केशव मिश्रा जी आयोजन रचनाकार समित कुशवाहा जी - जिला मंत्री (विहिप )लक्ष्मी कांत द्विवेदी जी,संभाग संयोजक (विहिप ) राकेश प्रताप सिंह जी ट्रस्ट सदस्य संदीप मिश्र जी, वरिष्ठ समाजसेवी श्यामलाल चतुर्वेदी जी इस अवसर उपस्थित रहे व शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही! 
राम आधारे तपोवन चैरिटेबल फाउंडेशन का यह प्रयास केवल स्कूल बैग वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन नन्हे बच्चों के सपनों को संबल देने की एक सकारात्मक पहल है, जिनके लिए शिक्षा बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी है।
“शिक्षा ही भविष्य है… आइए, इन नन्हें बच्चों के सपनों को नई उड़ान दें।”
समाज के सभी वर्गों से इस पुनीत कार्य में सहभागी बनने एवं बच्चों का उत्साहवर्धन करने की अपील की जाती है।
सेवा ही साधना, शिक्षा ही आराधना।
    user_रोहित कुमार पाठक
    रोहित कुमार पाठक
    Lawyer अमरपाटन, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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