उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में एक परिवार की लगभग 30 वर्ष पुरानी दुकान पर हुए कथित संगठित हमले ने गहरी चिंता और दुख पैदा किया है। जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने दुकान के ताले तोड़ दिए और अंदर रखा सारा सामान जबरन बाहर फेंक दिया। जब दुकान के लोग और परिवार के सदस्य अपनी संपत्ति और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पक्ष के साथ कठोर व्यवहार किया। परिवार के सदस्यों को घसीटा गया, उनके साथ मारपीट की गई और पीड़ितों को ही थाने ले जाया गया, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस घटना का सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि दुकान के भीतर रखे देवी-देवताओं के चित्रों और धार्मिक प्रतीकों का भी अपमान किया गया; उन्हें पैरों तले कुचला गया और असम्मानजनक तरीके से फेंक दिया गया। यह कृत्य सिर्फ एक परिवार की भावनाओं को नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, मामले की गंभीरता के अनुरूप कठोर धाराएं नहीं लगाई गईं, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है। उनका मानना है कि यदि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष और समय पर कार्रवाई की होती, तो यह स्थिति शायद उत्पन्न ही न होती। इस मामले में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उत्तर प्रदेश पुलिस, जिला प्रशासन और मानवाधिकार आयोग से निवेदन किया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, दोषियों और गलत पक्ष का समर्थन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय प्रदान करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने तथा प्रदेश में कानून-व्यवस्था एवं जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बनाए रखने के लिए उदाहरणात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। परिवार ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कानून-व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए, न्याय की मांग की है, पक्षपात की नहीं।
उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में एक परिवार की लगभग 30 वर्ष पुरानी दुकान पर हुए कथित संगठित हमले ने गहरी चिंता और दुख पैदा किया है। जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने दुकान के ताले तोड़ दिए और अंदर रखा सारा सामान जबरन बाहर फेंक दिया। जब दुकान के लोग और परिवार के सदस्य अपनी संपत्ति और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पक्ष के साथ कठोर व्यवहार किया। परिवार के सदस्यों को घसीटा गया, उनके साथ मारपीट की गई और पीड़ितों को ही थाने ले जाया गया, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस घटना का सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि दुकान के भीतर रखे देवी-देवताओं के चित्रों और धार्मिक प्रतीकों का भी अपमान किया गया; उन्हें पैरों तले कुचला गया और असम्मानजनक तरीके से फेंक दिया गया। यह कृत्य सिर्फ एक परिवार की भावनाओं को नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, मामले की गंभीरता के अनुरूप कठोर धाराएं नहीं लगाई गईं, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है। उनका मानना है कि यदि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष और समय पर कार्रवाई की होती, तो यह स्थिति शायद उत्पन्न ही न होती। इस मामले में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उत्तर प्रदेश पुलिस, जिला प्रशासन और मानवाधिकार आयोग से निवेदन किया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, दोषियों और गलत पक्ष का समर्थन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय प्रदान करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने तथा प्रदेश में कानून-व्यवस्था एवं जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बनाए रखने के लिए उदाहरणात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। परिवार ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कानून-व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए, न्याय की मांग की है, पक्षपात की नहीं।
- Ujjwal Upadhyayज्ञानपुर, भदोही, उत्तर प्रदेश5 hrs ago
- भदोही के गोपीगंज में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) द्वारा नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सुनील सिंह पटेल के स्वागत में एक भव्य समारोह और संगठनात्मक बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान दो दर्जन से अधिक लोगों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। बैठक में संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान को गति देने और पार्टी की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे, और आयोजकों ने दर्शकों को पूरा वीडियो देखने व चैनल को सब्सक्राइब करने का आह्वान भी किया।1
- भदोही जनपद के डीघ विकासखंड अंतर्गत कलनुआ गांव में वर्षों पहले लगाई गई सौर ऊर्जा लाइट खराब होने से ग्रामीणों को रात के समय अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है। गांव निवासी श्यामा चरण पांडेय ने बताया कि उन्हें लगभग आठ वर्ष पूर्व यह सौर ऊर्जा लाइट उपलब्ध कराई गई थी, जो अब पूरी तरह खराब हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण उन्हें रात में आने-जाने में भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करते हुए जल्द से जल्द नई सौर ऊर्जा लाइट उपलब्ध कराने और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने की मांग की है।1
- कल, भारत की अंडर-18 हॉकी टीम ने जापान को 4-1 के अंतर से हराकर नौ साल बाद एक बड़ी जीत हासिल की है। यह पूरे भारत के लिए बेहद गर्व का क्षण है, जिसने देश को खुशी से भर दिया है। इस शानदार प्रदर्शन और टीम की ऐतिहासिक जीत के लिए सेमराधनाथ धाम पालकी सेवा समिति की ओर से सभी खिलाड़ियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई हैं।1
- एक 90 साल पुराने स्कूल को बंद किए जाने के विरोध में छात्र और अध्यापक दोनों धरने पर बैठ गए हैं। यह विरोध प्रदर्शन स्कूल के बंद होने के फैसले के खिलाफ किया जा रहा है।1
- मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र में अवैध बालू खनन का खेल बेरोकटोक जारी है, जहाँ ओवरलोड ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के ही हाईवे पर तेज रफ्तार से दौड़ते नजर आ रहे हैं। ये वाहन दिनदहाड़े कई पुलिस चौकियों और चेकिंग पॉइंट से गुजरते हैं, फिर भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। मां विंध्यवासिनी धाम, जो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है, उसकी सड़कों से अवैध बालू की कालाबाजारी हो रही है। इस राजस्व की खुली लूट में कौन-कौन शामिल है, यह सवाल उठ रहा है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत के बिना यह अवैध धंधा संभव नहीं है। वे सवाल करते हैं कि क्या जिला प्रशासन ने बालू माफियाओं को खुली छूट दे रखी है? लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इन ओवरलोड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से न केवल सड़कें खराब हो रही हैं, बल्कि हादसों का खतरा भी काफी बढ़ गया है, और अभी तक कोई भी इसकी जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है। जनता अब जानना चाहती है कि अवैध बालू खनन के इस खेल पर आखिर कब कार्रवाई होगी और राजस्व को लग रहे चूने पर कब रोक लगेगी।1
- मिर्ज़ापुर में समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन की एक बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस बैठक के बाद यह जानकारी दी गई कि आगामी 10 जून को एक ब्लड कैंप का आयोजन किया जाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में एक परिवार की लगभग 30 वर्ष पुरानी दुकान पर हुए कथित संगठित हमले ने गहरी चिंता और दुख पैदा किया है। जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने दुकान के ताले तोड़ दिए और अंदर रखा सारा सामान जबरन बाहर फेंक दिया। जब दुकान के लोग और परिवार के सदस्य अपनी संपत्ति और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पक्ष के साथ कठोर व्यवहार किया। परिवार के सदस्यों को घसीटा गया, उनके साथ मारपीट की गई और पीड़ितों को ही थाने ले जाया गया, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस घटना का सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि दुकान के भीतर रखे देवी-देवताओं के चित्रों और धार्मिक प्रतीकों का भी अपमान किया गया; उन्हें पैरों तले कुचला गया और असम्मानजनक तरीके से फेंक दिया गया। यह कृत्य सिर्फ एक परिवार की भावनाओं को नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, मामले की गंभीरता के अनुरूप कठोर धाराएं नहीं लगाई गईं, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है। उनका मानना है कि यदि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष और समय पर कार्रवाई की होती, तो यह स्थिति शायद उत्पन्न ही न होती। इस मामले में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उत्तर प्रदेश पुलिस, जिला प्रशासन और मानवाधिकार आयोग से निवेदन किया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, दोषियों और गलत पक्ष का समर्थन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय प्रदान करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने तथा प्रदेश में कानून-व्यवस्था एवं जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बनाए रखने के लिए उदाहरणात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। परिवार ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कानून-व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए, न्याय की मांग की है, पक्षपात की नहीं।1