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मजदूरों ने अपनी कम मजदूरी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है, जहाँ दो मजदूर मिलकर 90 फुट की एक ट्रॉली भरने के लिए मात्र ₹200 लेते हैं। उनका कहना है कि यह मजदूरी इतनी कम है कि ₹200 में गुजारा करना बेहद मुश्किल है और इतने कम पैसों में जीवनयापन कैसे होगा। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
Jay Mahakal Mahakal
मजदूरों ने अपनी कम मजदूरी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है, जहाँ दो मजदूर मिलकर 90 फुट की एक ट्रॉली भरने के लिए मात्र ₹200 लेते हैं। उनका कहना है कि यह मजदूरी इतनी कम है कि ₹200 में गुजारा करना बेहद मुश्किल है और इतने कम पैसों में जीवनयापन कैसे होगा। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
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- भरतपुर जिले के डीग से, वार्ड नंबर 14 के एक निवासी ने शिकायत की है कि उनकी गली से संबंधित एक मुद्दे पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि न तो कलेक्टर उनकी बात सुन रहे हैं, न ही नगर पालिका और न ही चेयरमैन ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई की है। इसी अनदेखी के चलते उन्होंने अपनी शिकायत का एक वीडियो भेजा है।1
- राधे श्याम कॉलोनी के निवासी गौरव राजपूत ने प्रशासन से तत्काल सहायता की अपील की है, आरोप है कि तपन पंडित और उसके कुछ अज्ञात साथी कॉलोनी के तिराहे पर सरकारी लाइट बंद करके खुलेआम गांजा और अफीम बेचते हैं। गौरव राजपूत के अनुसार, ये लोग रात में तिराहे पर नंगे होकर घूमते हैं और वहाँ के निवासियों को गाली-गलौच करते हैं, कई बार मना करने पर भी वे नहीं मानते हैं। गौरव राजपूत ने बताया कि उनकी फास्ट फूड कैंटीन है, जहाँ से आरोपी उनके लगभग 17 वर्षीय भतीजे को जान से मारने की धमकी देकर जबरन पैसे ले जाते हैं और मुफ्त में खाना खाते हैं। दिनांक 16-06-2026 को भी ऐसी ही घटना हुई, जब गौरव राजपूत ने उनसे लाइट बंद करने से रोका तो उन्हें गाली दी गई। इसके बाद आरोपियों ने उनसे गाली-गलौच और मारपीट की। मारपीट के तुरंत बाद, तपन पंडित ने खुद ही अपना सिर दीवार में मारकर फोड़ लिया और गौरव राजपूत को धमकी दी कि वह पुलिस केस बनवाकर उसे जेल भिजवा देगा। गौरव राजपूत ने स्पष्ट किया है कि उन्हें तपन पंडित और उसके साथियों से जान का बहुत खतरा है, जिसके कारण उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।1
- गोवर्धन, मथुरा में आज ब्रज प्रांत अध्यक्ष कुंवर एन पी सिंह राणा के नेतृत्व में करणी सेना और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने गोवर्धन थाने पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर गिर्राज महाराज के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करने और 'लैट्रिन करने जैसी घृणित हरकत' की धमकी देने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए तहरीर सौंपी। इस घटना से क्षेत्र के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। कुंवर एन पी सिंह राणा ने इस मामले पर कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि गिर्राज महाराज ब्रजवासियों की आस्था का केंद्र हैं और इस प्रकार की कोई भी टिप्पणी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। थाना प्रभारी ने कार्यकर्ताओं से तहरीर प्राप्त की और मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत की गहन जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। तहरीर सौंपने के बाद कार्यकर्ता शांतिपूर्वक वापस लौट गए, जिसके बाद गोवर्धन में स्थिति सामान्य बनी हुई है।4
- मथुरा जनपद में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर 17 मई से 15 जून तक चले धार्मिक अनुष्ठान के दौरान, मथुरा पुलिस द्वारा देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के लिए कुशल सुरक्षा व्यवस्था और सुगमता के विशेष प्रबंध किए गए। इन व्यापक व्यवस्थाओं के चलते लगभग 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने सुगमतापूर्वक दर्शन लाभ प्राप्त किया। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि इस अवधि में अकेले पावन गोवर्धन क्षेत्र में लगभग 2.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने गिरिराज महाराज की परिक्रमा कर दर्शन किए। इसके अतिरिक्त, लगभग 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने 84 कोसी परिक्रमा को अत्यंत सुगम और सुखद अनुभूति के साथ पूर्ण किया। वहीं, बरसाना में भी लगभग 1 करोड़ श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर लाडली जी मंदिर में दर्शन किए। इन सभी श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए मथुरा पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया, जिसमें लगभग 25 इंस्पेक्टर, 60 उपनिरीक्षक और 350 से अधिक पुलिसकर्मी परिक्रमा मार्गों पर तैनात थे। सुचारू यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में 88 बैरियर और पर्याप्त पार्किंग स्थल भी बनाए गए थे। भविष्य में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए, पुलिस प्रशासन परिक्रमा मार्गों पर नई पुलिस चौकियां और 'पुलिस सहायता केंद्र' स्थापित करने की योजना पर भी विचार कर रहा है।1
- वृंदावन में करंट लगने से एक युवक की दुःखद मौत हो गई है, जिसका एक लाइव वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में श्रद्धालुओं की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि इन हादसों की ज़िम्मेदारी किसकी है और कौन इसका जवाब देगा। इस तरह की घटनाएँ लगातार हो रही हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। सामने आ रहे बयानों के अनुसार, कभी गाड़ियाँ लोगों को रौंद देती हैं, कभी करंट लगने से जान चली जाती है, तो कभी भीड़ में श्रद्धालु दम तोड़ देते हैं। इसके अतिरिक्त, भगदड़ जैसी घटनाओं के साथ-साथ मकान ढहने के मामले भी सामने आते रहे हैं। इन सभी घटनाओं को देखते हुए, हर तरफ एक ही सवाल गूँज रहा है कि आखिर यह सब क्या हो रहा है।1
- गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में आए तेज आंधी-तूफान के कारण श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इस घटना ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की कमी को उजागर कर दिया, क्योंकि मौके पर पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से यात्रियों के लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। तेज आंधी से हुई परेशानियों ने गोवर्धन में बुनियादी और आपातकालीन सुविधाओं के अभाव को स्पष्ट कर दिया।1
- मजदूरों ने अपनी कम मजदूरी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है, जहाँ दो मजदूर मिलकर 90 फुट की एक ट्रॉली भरने के लिए मात्र ₹200 लेते हैं। उनका कहना है कि यह मजदूरी इतनी कम है कि ₹200 में गुजारा करना बेहद मुश्किल है और इतने कम पैसों में जीवनयापन कैसे होगा। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।1
- राजस्थान के पाली जिले में स्थित रोहट के भाकरीवाला गांव में व्याप्त गंभीर पेयजल संकट की भयावह तस्वीर सामने आई है, जहां पानी लेने गया एक ट्रैक्टर बेकाबू होकर एक बेरी (कुएं या जलाशय) में जा गिरा। इस घटना में ट्रैक्टर चालक मुकेश बावरी ने कूदकर अपनी जान बचाई। बाद में, हाइड्रो मशीन की सहायता से ट्रैक्टर को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया, जिससे कोई बड़ी जनहानि होने से बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया। दरअसल, भाकरीवाला गांव के ग्रामीण पिछले कई महीनों से पेयजल की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। यहां के लोग अपनी पानी की जरूरतों के लिए केवल बेरी और नाड़ी (तालाब) के पानी पर निर्भर हैं, जो अक्सर खारा और असुरक्षित होता है। दशकों पहले मिली आजादी के बावजूद, भाकरीवाला गांव के निवासी आज भी पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं।1