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गुना नानाखेड़ी मंडी में अपनी गेहूं की फसल बेचने आया किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है गुना नाना खेड़ी मंडी में जगह की कमी के चलते गेहूं की नीलामी दशहरा मैदान में की जा रही है तपती धूप में खुले आसमान में दो से तीन दिन रहने को मजबूर किसान
Gopal Kirar पत्रकार बमोरी
गुना नानाखेड़ी मंडी में अपनी गेहूं की फसल बेचने आया किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है गुना नाना खेड़ी मंडी में जगह की कमी के चलते गेहूं की नीलामी दशहरा मैदान में की जा रही है तपती धूप में खुले आसमान में दो से तीन दिन रहने को मजबूर किसान
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- हरनावदाशाहजी.क्षेत्र में पिछले तीन चार दिन से विचरण करके चर्चा का विषय बना कूनो जंगल का केपी 3 चीता गुरुवार को हरनावदाशाहजी क्षेत्र के गांवों में नजर आया। कलमोदिया ग्राम पंचायत के सैकुड गांव में सुबह जल्दी ग्रामीणों को खेतों में होकर गुजरता दिखा। वहां से झामरिया के निकट जंगल में ओझल हो गया। जहां दिनभर छाया में दुबका रहा। गांवो के नजदीक होकर गुजरते चीते को देख कर लोग कौतुहल भरे नजर आए। वहीं विभाग की चेतावनी के चलते लोगों ने वन्यजीव से दूरी बनाए रखी। इससे पहले बुधवार को केपी 3 चीता का क्षेत्र के अमलावदाखरण गांव के नजदीक मूवमेंट बना रहा इस दौरान बकरी का शिकार भी किया। चीता के लगातार मूवमेंट से जगी आस- छीपाबडौद रेंज के वन क्षेत्र में चीता की उपस्थिति से वन्यजीव प्रेमियों की उम्मीदों को पंख लगने की आस जगी है। प्राप्त जानकारी अनुसार परवन नदी क्षेत्र के गांवों से सटे मैदानी क्षेत्र में पंहुचे चीता ने सुबह एक बकरी का शिकार किया। उसके बाद दिनभर झाड़ियों में दुबका रहा जहां से शाम को आगे बढता हुआ हरनावदाशाहजी के नजदीक पंहुचा। जानकारों का कहना है कि कूनों में पल बढ रहे चीतों को बारां जिले के जंगल काफी रास आ रहे हैं। एक सप्ताह से मूवमेंट छीपाबड़ौद रेंज में बना हुआ है क्योंकि यहां की प्राकृतिक एवं भौगोलिक स्थिति काफी हद तक चीते के अनुकूल मानी जा सकती है। पिछले एक दशक के दौरान क्षेत्र में प्लांटेशन तैयार कर जंगल विकसित किए जिनमें कई प्रजातियों के वन्यजीव फल-फूल रहे हैं। वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चीते के लिए जिस प्रकार का मैदानी एवं पहाडी इलाका मुफीद होता है उसके हिसाब से छीपाबड़ौद रेंज का इलाका परफेक्ट है। क्योंकि पहाडी पर चढकर शिकार की तलाश एवं सपाट मैदान शिकार के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही हरनावदाशाहजी, कचनारिया झनझनी समेत अन्य जंगलों में पनप रहे वन्य जीवों के कुनबे चीते के पसंदीदा आहार की श्रेणी में आते है। यहां के जंगलों में जंगली सुअर बहुतायत में हैं जिसका शिकार चीते को प्रिय होता है।ऐसे में चीते को बसाने की कार्ययोजना पर काम हो सकता है। नही करता हमला- जानकारी के अनुसार चीता मानव जाति पर हमला नही करता बल्कि उसको छेडने पर या भोजन के समय हमलावर हो जाता है।ऐसे में लोगों को सावचेत रहकर उसकी छेड़छाड़ नही करने की अपील की। वहीं वन्यजीव प्रेमियों ने क्षेत्र में चीते को बसाने की मांग करते हुए जंगलों को बचाने की दिशा में एक अच्छा कदम बताया। इधर क्षेत्रीय विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने भी वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री को पत्र लिखकर चीता को शेरगढ़अभ्यारण्य में शिफ्ट करने की मांग की है।4
- गुना नानाखेड़ी मंडी में अपनी उपज को बेचने आए किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है किसानों ने जानकारी देते हुए बताया है की पानी की कोई व्यवस्था नहीं टैंकरों में दो-दो तीन-तीन दिन का भरा गर्म पानी पीने को मजबूर गुना जिले के किसान किसनो की तरफ जिला प्रशासन का ध्यान होना चाहिए और मंडी की अव्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए1