आयुर्वेदिक औषधियों और स्ट्रॉबेरी की खेती से जिले का मान बढ़ा रहे जलालगढ़ के किसान जितेंद्र पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड अंतर्गत दनसार पंचायत के प्रगतिशील किसान जितेंद्र कुशवाहा आज अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। जहां एक ओर किसान पारंपरिक खेती में लगे रहते हैं, वहीं जितेंद्र ने नई राह अपनाते हुए आयुर्वेदिक औषधीय पौधों और स्ट्रॉबेरी की खेती कर एक मिसाल पेश की है। जितेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2008 में भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित कृषि मेले से प्रेरणा लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस खेती को अपनाया और आज इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी के पौधे मुख्य रूप से पुणे और हिमाचल प्रदेश से मंगाए जाते हैं। वर्तमान में वे खुद खेती करने के साथ-साथ बिहार के छपरा, अररिया और पूर्णिया के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कई किसान इस लाभकारी खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। जितेंद्र के अनुसार, स्ट्रॉबेरी के सीजन में वे प्रतिदिन लगभग पांच क्विंटल तक उत्पादन करते हैं, जिसे पूर्णिया जिले के विभिन्न बाजारों में बेचा जाता है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है। इसके साथ ही वे आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की खेती में भी लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती और भी लाभकारी बनती जा रही है। जितेंद्र कुशवाहा की यह पहल न सिर्फ किसानों को नई दिशा दिखा रही है, बल्कि जिले में कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही है। आयुर्वेदिक औषधियों और स्ट्रॉबेरी की खेती से जिले का मान बढ़ा रहे जलालगढ़ के किसान जितेंद्र पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड अंतर्गत दनसार पंचायत के प्रगतिशील किसान जितेंद्र कुशवाहा आज अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। जहां एक ओर किसान पारंपरिक खेती में लगे रहते हैं, वहीं जितेंद्र ने नई राह अपनाते हुए आयुर्वेदिक औषधीय पौधों और स्ट्रॉबेरी की खेती कर एक मिसाल पेश की है। जितेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2008 में भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित कृषि मेले से प्रेरणा लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस खेती को अपनाया और आज इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी के पौधे मुख्य रूप से पुणे और हिमाचल प्रदेश से मंगाए जाते हैं। वर्तमान में वे खुद खेती करने के साथ-साथ बिहार के छपरा, अररिया और पूर्णिया के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कई किसान इस लाभकारी खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। जितेंद्र के अनुसार, स्ट्रॉबेरी के सीजन में वे प्रतिदिन लगभग पांच क्विंटल तक उत्पादन करते हैं, जिसे पूर्णिया जिले के विभिन्न बाजारों में बेचा जाता है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है। इसके साथ ही वे आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की खेती में भी लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती और भी लाभकारी बनती जा रही है। जितेंद्र कुशवाहा की यह पहल न सिर्फ किसानों को नई दिशा दिखा रही है, बल्कि जिले में कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही है।
आयुर्वेदिक औषधियों और स्ट्रॉबेरी की खेती से जिले का मान बढ़ा रहे जलालगढ़ के किसान जितेंद्र पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड अंतर्गत दनसार पंचायत के प्रगतिशील किसान जितेंद्र कुशवाहा आज अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। जहां एक ओर किसान पारंपरिक खेती में लगे रहते हैं, वहीं जितेंद्र ने नई राह अपनाते हुए आयुर्वेदिक औषधीय पौधों और स्ट्रॉबेरी की खेती कर एक मिसाल पेश की है। जितेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2008 में भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित कृषि मेले से प्रेरणा लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस खेती को अपनाया और आज इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी के पौधे मुख्य रूप से पुणे और हिमाचल प्रदेश से मंगाए जाते हैं। वर्तमान में वे खुद खेती करने के साथ-साथ बिहार के छपरा, अररिया और पूर्णिया के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कई किसान इस लाभकारी खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। जितेंद्र के अनुसार, स्ट्रॉबेरी के सीजन में वे प्रतिदिन लगभग पांच क्विंटल तक उत्पादन करते हैं, जिसे पूर्णिया जिले के विभिन्न बाजारों में बेचा जाता है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है। इसके साथ ही वे आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की खेती में भी लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती और भी लाभकारी बनती जा रही है। जितेंद्र कुशवाहा की यह पहल न सिर्फ किसानों को नई दिशा दिखा रही है, बल्कि जिले में कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही है। आयुर्वेदिक औषधियों और स्ट्रॉबेरी की खेती से जिले का मान बढ़ा रहे जलालगढ़ के किसान जितेंद्र पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड अंतर्गत दनसार पंचायत के प्रगतिशील किसान जितेंद्र कुशवाहा आज अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। जहां एक ओर किसान पारंपरिक खेती में लगे रहते हैं, वहीं जितेंद्र ने नई राह अपनाते हुए आयुर्वेदिक औषधीय पौधों और स्ट्रॉबेरी की खेती कर एक मिसाल पेश की है। जितेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2008 में भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित कृषि मेले से प्रेरणा लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस खेती को अपनाया और आज इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी के पौधे मुख्य रूप से पुणे और हिमाचल प्रदेश से मंगाए जाते हैं। वर्तमान में वे खुद खेती करने के साथ-साथ बिहार के छपरा, अररिया और पूर्णिया के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कई किसान इस लाभकारी खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। जितेंद्र के अनुसार, स्ट्रॉबेरी के सीजन में वे प्रतिदिन लगभग पांच क्विंटल तक उत्पादन करते हैं, जिसे पूर्णिया जिले के विभिन्न बाजारों में बेचा जाता है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है। इसके साथ ही वे आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की खेती में भी लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती और भी लाभकारी बनती जा रही है। जितेंद्र कुशवाहा की यह पहल न सिर्फ किसानों को नई दिशा दिखा रही है, बल्कि जिले में कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही है।
- कसबा से इस वक्त की एक बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां दो अलग-अलग जगहों पर हुई निर्मम हत्याओं ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। पहली घटना नगर परिषद कसबा के राधानगर वार्ड संख्या 9 की है, जहां जवाहर सिंह के पुत्र उमेश सिंह की अमौर थाना क्षेत्र में पत्नी एवं सहयोगी द्वारा हत्या कर दी गई। वहीं दूसरी घटना में कसबा के ही वार्ड संख्या 10, फुलवरिया निवासी जीवन यादव की पुत्री की नगर थाना क्षेत्र के बाघमारा के समीप अपराधियों ने निर्मम हत्या कर शव को सड़क किनारे फेंक दिया। दोनों घटनाओं के बाद इलाके में दहशत और गम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि पोस्टमार्टम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी। वहीं जनप्रतिनिधि ने प्रशासन से मांग करते हैं कि अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए…” फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है, लेकिन अब तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।1
- कटिहार के समेली से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का शराब के नशे में वीडियो वायरल। #hairstyleideas #northindianfood #Diabetes #fltnesschallenge #ambaniwedding #GlamorousModel #famousfood #yogawithwall1
- BR1
- पूर्णिया जिला के नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष अफरोज आलम ने कहां की इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्णिया सांसद पप्पू यादव जी का आभार जताते हैं जिस उम्मीद से पार्टी ने इस जिम्मेदारी सौंपी है हर संभव निभाने का प्रयास करूंगा ।1
- Post by Araria News1
- एक हंसता खिलता परिवार वालो का उजड़ा आशियाना एक 33 वर्षीय युवक सोनू मुनि बाइक और मवेशी की आमने सामने टक्कर होने से अस्पताल मैं तोड़ा दम1
- पाली 01 अप्रैल। पाली जिला कलेक्टर लक्ष्मी नारयण मंत्री के तबादला होने से पाली विधायक भीमराज भाटी, शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हकीम भाई पुर्व शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मेहबूब टी, मदनसिह जागरवाल छगनलाल भारद्वाज (पत्रकार) जीवराज चौहान सीताराम टाँक, पीराराम गहलोत महेंद्र कुमार चौहान इंदुराम टाँक राजेंद्र कुमार शर्मा, आदि ने खुशी जाहिर की। इस अवसर पर पाली विधायक भीमराज भाटी व हकीम भाई, मदन सिह जागरवाल पूरी टीम ने जिला कलेक्टर लक्ष्मी नारयण मंत्री को उनके कार्यालय मे साफा व माला पहना कर हार्दिक अभिनंदन एवं विदाई दी। इस अवसर पाली विधायक भीमराज भाटी के साथ मे पटेल समाज की गैर ने जिला कलेक्टर के समक्ष कार्यालय के परिसर मे गैर नृत्य किया गया। तथा इस अवसर पर पाली उपखंड अधिकारी वीमलेंद्र राणावत ने जिला कलेक्टर लक्ष्मी नारयण मंत्री का हार्दिक अभिनंदन करते पैसे की ढाणी कर ढोली को दिये। इस पर शहर अध्यक्ष हकीम भाई ने पेसो की ढाणी की और ढोली को दिये। अंत पाली जिला कलेक्टर लक्ष्मी नारयण मंत्री ने सभी का हाथ जोडकर आभार प्रकट किया। तथा पाली विधायक भीमराज भाटी, व पुरी टीम तथा गैर नृत्यो के ग्रुप भी खिचाव में हुये खुशी जाहिर की। (छगनलाल भारद्वाज प्रधान सम्पादक)4
- आयुर्वेदिक औषधियों और स्ट्रॉबेरी की खेती से जिले का मान बढ़ा रहे जलालगढ़ के किसान जितेंद्र पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड अंतर्गत दनसार पंचायत के प्रगतिशील किसान जितेंद्र कुशवाहा आज अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। जहां एक ओर किसान पारंपरिक खेती में लगे रहते हैं, वहीं जितेंद्र ने नई राह अपनाते हुए आयुर्वेदिक औषधीय पौधों और स्ट्रॉबेरी की खेती कर एक मिसाल पेश की है। जितेंद्र कुशवाहा ने वर्ष 2008 में भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित कृषि मेले से प्रेरणा लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस खेती को अपनाया और आज इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी के पौधे मुख्य रूप से पुणे और हिमाचल प्रदेश से मंगाए जाते हैं। वर्तमान में वे खुद खेती करने के साथ-साथ बिहार के छपरा, अररिया और पूर्णिया के किसानों को भी पौधे उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कई किसान इस लाभकारी खेती से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। जितेंद्र के अनुसार, स्ट्रॉबेरी के सीजन में वे प्रतिदिन लगभग पांच क्विंटल तक उत्पादन करते हैं, जिसे पूर्णिया जिले के विभिन्न बाजारों में बेचा जाता है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है। इसके साथ ही वे आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की खेती में भी लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती और भी लाभकारी बनती जा रही है। जितेंद्र कुशवाहा की यह पहल न सिर्फ किसानों को नई दिशा दिखा रही है, बल्कि जिले में कृषि के क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही है।1