जैविक खेती विषय पर आधारित आयोजित किया गया प्रशिक्षण शहडोल। कृषि विज्ञान केन्द्र शहडोल के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. मृगेंद्र सिंह की उपस्थिति में शासकीय पंडित शम्भुनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल में जैविक खेती विषय पर आधारित प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रषिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. मृगेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि जैविक खेती की विधि रासायनिक खेती की तुलना में मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। जैविक विधि द्वारा खेती करने से उत्पादन की लागत तो कम होती ही है। इसके साथ ही कृषको को आय अधिक प्राप्त होती हैै। प्रषिक्षण में वैज्ञानिक डॉ. ब्रजकिशोर प्रजापति ने विद्यार्थियों को जानकारी दी कि भारत वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है। बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को (इकोलाजी सिस्टम) प्रभावित करता है। जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है। साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है, तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। प्राचीन काल में, मानव स्वास्थ्य के अनुकुल तथा प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खेती की जाती थी। जिससे जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान का चक्र निरन्तर चलता रहा था, जिसके फलस्वरूप जल, भूमि, वायु तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता था। उन्होंने बताया कि जैविक खेती को इन समस्याओं के लिए बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। जैविक खेती के उपयोग से किसान अथवा उत्पादक को दूरगामी लाभ प्राप्त होने के साथ-साथ इसकी उत्पादन लगत भी 20-25 प्रतिशत तक कम हो जाती है। साथ ही यह भूमि की गुणवत्ता एवं उर्वरता बढ़ाकर, भूमि में कार्बन अवशेष की मात्रा को भी बढ़ाता है। इसके द्वारा फसल की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ने के साथ ही स्वास्थ फसल प्राप्त होती है। कृषक मई-जून के महीने में मिट्टी पलटने वाले हल से खेतों की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करते हैं तो किसानों को इसके अनेक लाभ प्राप्त होंगे। इस प्रकार की जुताई से मृदा का सूर्य की किरणों से सीधा उपचार होता है। इस जुताई से हानिकारक कीट व पौध रोगकारक नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी की जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है जिससे कि जड़ो की अच्छी वृद्धि होती है। ग्रीष्मकालीन जुताई के बाद खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही उपज में लाभ औसतन 10 प्रतिशत तक बढ जाती है। ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई रबी मौसम की फसल कटने के बाद शुरू हो जाती है, जो बरसात प्रारंभ होने तक चलती रहती है। गहरी जोताई का मृदा के भौतिक गुणों पर प्रभाव पड़ता है। इससे हानिकारक कीटों से बचाव तथा खरपतवार नियंत्रित होता है, साथ ही मृदा में वायु संचार में बढ़ोत्तरी होती है तथा मृदा संरक्षण में सहायक होता है।
जैविक खेती विषय पर आधारित आयोजित किया गया प्रशिक्षण शहडोल। कृषि विज्ञान केन्द्र शहडोल के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. मृगेंद्र सिंह की उपस्थिति में शासकीय पंडित शम्भुनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल में जैविक खेती विषय पर आधारित प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रषिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. मृगेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि जैविक खेती की विधि रासायनिक खेती की तुलना में मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। जैविक विधि द्वारा खेती करने से उत्पादन की लागत तो कम होती ही है। इसके साथ ही कृषको को आय अधिक प्राप्त होती हैै। प्रषिक्षण में वैज्ञानिक डॉ. ब्रजकिशोर प्रजापति ने विद्यार्थियों को जानकारी दी कि भारत वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है। बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को (इकोलाजी सिस्टम) प्रभावित करता है। जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है। साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है, तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। प्राचीन काल में, मानव स्वास्थ्य के अनुकुल तथा प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खेती की जाती थी। जिससे जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान का चक्र निरन्तर चलता रहा था, जिसके फलस्वरूप जल, भूमि, वायु तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता था। उन्होंने बताया कि जैविक खेती को इन समस्याओं के लिए बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। जैविक खेती के उपयोग से किसान अथवा उत्पादक को दूरगामी लाभ प्राप्त होने के साथ-साथ इसकी उत्पादन लगत भी 20-25 प्रतिशत तक कम हो जाती है। साथ ही यह भूमि की गुणवत्ता एवं उर्वरता बढ़ाकर, भूमि में कार्बन अवशेष की मात्रा को भी बढ़ाता है। इसके द्वारा फसल की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ने के साथ ही स्वास्थ फसल प्राप्त होती है। कृषक मई-जून के महीने में मिट्टी पलटने वाले हल से खेतों की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करते हैं तो किसानों को इसके अनेक लाभ प्राप्त होंगे। इस प्रकार की जुताई से मृदा का सूर्य की किरणों से सीधा उपचार होता है। इस जुताई से हानिकारक कीट व पौध रोगकारक नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी की जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है जिससे कि जड़ो की अच्छी वृद्धि होती है। ग्रीष्मकालीन जुताई के बाद खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही उपज में लाभ औसतन 10 प्रतिशत तक बढ जाती है। ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई रबी मौसम की फसल कटने के बाद शुरू हो जाती है, जो बरसात प्रारंभ होने तक चलती रहती है। गहरी जोताई का मृदा के भौतिक गुणों पर प्रभाव पड़ता है। इससे हानिकारक कीटों से बचाव तथा खरपतवार नियंत्रित होता है, साथ ही मृदा में वायु संचार में बढ़ोत्तरी होती है तथा मृदा संरक्षण में सहायक होता है।
- भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ दिल्ली की इंदौर जिला कार्यकारिणी घोषित, विनोद शर्मा बने जिलाध्यक्ष इंदौर। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ (नई दिल्ली) की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा शुक्रवार को इंदौर जिला कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा भव्य समारोह के बीच की गई। पिपलियाराव रोड स्थित मधुर मिलन गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में जिले एवं तहसील स्तर के पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर शपथ दिलाई गई। समारोह में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। नवनियुक्त पदाधिकारियों को प्रदेश संगठन मंत्री राहुल सिंह राणा ने शपथ दिलाई। वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ शपथ ग्रहण समारोह कार्यक्रम में महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र गौतम, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण वैष्णव एवं अरविंद द्विवेदी, प्रदेश संगठन मंत्री राहुल सिंह राणा, प्रदेश महासचिव रामगोपाल बंसल तथा प्रदेश सचिव जुनैद खान विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शहडोल जिला इकाई के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी, विदिशा जिलाध्यक्ष हाकिम सिंह रघुवंशी, महासचिव योगेश पंथी सहित एडवोकेट जगदीश जोशी, एडवोकेट विजय कुमावत एवं सुशील श्रीवास्तव की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। पत्रकार हितों की रक्षा और संगठन विस्तार का लिया संकल्प नवनियुक्त पदाधिकारियों ने मंच से पत्रकार हितों की रक्षा, निष्पक्ष पत्रकारिता को मजबूती देने तथा संगठन को जमीनी स्तर तक विस्तार देने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकार समाज का सजग प्रहरी है और उसके अधिकारों, सुरक्षा तथा सम्मान के लिए संगठन निरंतर संघर्ष करता रहेगा। इन पदाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी घोषित कार्यकारिणी में विनोद शर्मा को जिलाध्यक्ष एवं प्रवीण जैन को महासचिव नियुक्त किया गया। वहीं उपाध्यक्ष पद पर अंकित राठौर (महू), यत्नेश सेन (देपालपुर), धर्मेंद्र सोलंकी (सांवेर) एवं पूर्णिमा बीसे (इंदौर) को जिम्मेदारी सौंपी गई। सचिव पद पर जितेश पाठक (इंदौर), उदय सिंह चावड़ा (देपालपुर) एवं कमल चौधरी (सांवेर) नियुक्त किए गए। संयुक्त सचिव के रूप में विनोद शर्मा, महेश शर्मा ‘टोनी’ (महू), संतोष परमार एवं करण मेनारिया को जिम्मेदारी मिली। शिवाजी श्रीवास्तव को संगठन मंत्री तथा अनिल कौशल को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में जितेंद्र सोनी, ललित शर्मा, डॉ. भास्कर तिवारी, विजय जोशी (देपालपुर), गजेंद्र वैष्णव, दीनदयाल डांगी एवं कुंदन करडवाल (सांवेर) को शामिल किया गया। तहसील स्तर पर भी संगठन को मिली मजबूती संगठन को ग्रामीण एवं तहसील स्तर तक मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न ब्लॉकों में भी नियुक्तियां घोषित की गईं। देपालपुर ब्लॉक अध्यक्ष दीपक जाट एवं सचिव जितेंद्र नकुम, सांवेर ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश कटारिया एवं सचिव डॉ. अतुल लाड़ना, महू ब्लॉक अध्यक्ष अमित उपाध्याय एवं सचिव आकाश राठौर नियुक्त किए गए। वहीं हातोद ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी धीरेंद्र व्यास को सौंपी गई। गरिमामय आयोजन में जुटे वरिष्ठ पत्रकार कार्यक्रम का संयोजन आलोक शर्मा ‘अकेला’, डॉ. पंकज विरमाल, नवनीत शुक्ला एवं ऋषिकांत श्रीवास्तव द्वारा किया गया। मंच संचालन डॉ. अंचित स्वर्णकार ने किया। अंत में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष विनोद शर्मा ने सभी अतिथियों, वरिष्ठ पत्रकारों एवं उपस्थित साथियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में शहर एवं जिले के वरिष्ठ पत्रकारों की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम पत्रकार एकता और संगठनात्मक मजबूती का प्रभावशाली उदाहरण बन गया।1
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- मध्य प्रदेश के गोहपारू में बकाया बिजली बिल वसूलने गई टीम पर उपभोक्ताओं ने हमला कर दिया। मलमाथर गांव में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विभागीय कर्मचारी अब आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।2
- मध्य प्रदेश के बिरसिंहपुर रेलवे स्टेशन पर कोयले से लदी एक चलती मालगाड़ी के तीन डिब्बों में अचानक आग लग गई। लोको पायलट और गार्ड की सतर्कता से ट्रेन को समय पर रोका गया, जिससे एक भीषण रेल हादसा टल गया। दमकल टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिसकी जांच रेलवे विभाग कर रहा है।4
- Post by Manoj Gupta Driver4
- मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तेंदूपत्ता इकट्ठा कर रही एक महिला पर भालू ने हमला कर दिया। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए महिला की जान बचाई, जिसे घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वन विभाग ने घटना के बाद गश्त बढ़ा दी है और लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।1
- मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में 'हर घर नल से जल' योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पाली और करकेली विकासखंड के दर्जनों गांवों में ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।1
- बिजली बिल वसूलने गए जूनियर इंजीनियर और कर्मचारियों को गाली-गलौज के साथ मिली धमकी शहडोल। गोहपारू तहसील के ग्राम मलमाथर में बिजली बिल वसूली के दौरान बड़ा हंगामा... बकाया वसूली करने पहुंची बिजली विभाग की टीम के साथ गाली-गलौज और मारपीट का आरोप। मौके पर मौजूद थे गोहपारू जेई ( जूनियर इंजीनियर), घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, इलाके में मचा हड़कंप। बताया जा रहा है कि जिन उपभोक्ताओं पर बकाया था, उन्होंने विरोध करते हुए विवाद किया। बकाया राशि इस प्रकार बताई जा रही है.... प्रेमलाल यादव ₹6,132, मोहनलाल यादव ₹9,918, हरीलाल यादव ₹1,132 मामले को लेकर विभाग द्वारा पुलिस शिकायत की तैयारी।1