फोटो सपनों के शहर कोटा में लापरवाही का हादसा दौबारा ना हो - बेहद दर्दनाक हादसा, जीवन बेहद अनमोल, खरोच भी दर्द देती है, यहां तो दो मौत हो गई। कोटा. टीम जीवनदाता हर पल लोगों की एक चीख पर दौड पड़ती है, लोगों की मदद करती है, ब्लड, एसडीपी, आरडीपी उपलब्ध कराती है, ये ही नहीं यहां आने वाला हर बच्चा और मेहमान हमारे आतिथ्य को नमन करता है। कोटा की गलियों में, युवाओं के सपने रोजाना कोचिंग की कक्षाओं में जन्म लेते हैं और रातें किताबों के शब्दों को सुनहरा बना देती है, लेकिन शनिवार की रात अचानक एक भयानक सन्नाटा छा गया, बिजली चली गई, तेज धमाका हुआ और चीख निकल गई। तलवंडी, जवाहर नगर इलाके में एक तीन मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई, जिसके निचले हिस्से में मुरादाबादी नॉन-वेज जैसा रेस्टोरेंट चल रहा था वह जमीदोज हो गया, उनके नीचे सपने और आवाजे भी दबकर रह गई, वह तो गनीमत रही की कोटा प्रशासन ने समय रहते कई जिंदगियों को बचा लिया। हमारा शहर चाहता है कि यह हादसा दौबारा नहीं हो, लापरवाही दौबारा नहीं हो, इस हादसे से पहले कुछ छात्र दोस्तों के साथ खाना खा रहे थे, कुछ कर्मचारी व्यस्त थे, और बाहर से गुजरने वाले लोग सामान्य शाम मान रहे थे। फिर एक धमाके जैसी आवाज आई। लोग चीखे, धूल का गुबार उठा, और कुछ ही पलों में सब कुछ मलबे में बदल गया। - हाथ-पैर मलबे से बाहर झाँकते दिखे इस हादसे में हाथ-पैर मलबे से बाहर झाँकते दिखे, किसी की पुकार सुनाई दी, किसी की चुप्पी और भी डरावनी थी, किसी ने पुकारने की आवाज लगाई तो कलेजा मूंह को आ गया, रेस्क्यू टीमों ने रात भर जद्दोजहद की, जिला प्रशासन, निगम, पुलिस, स्थानीय लोग, सबने मिलकर मलबा हटाया। कुल 15 लोग बाहर निकाले गए। लेकिन दो जवान जानें वापस नहीं लौटीं—20 वर्षीय अर्यन (पश्चिम बंगाल का एक कोचिंग छात्र) और 15 वर्षीय लक्ष्मण। 13-15 लोग घायल हुए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई गई। ये सिर्फ ईंट-पत्थर का ढहना नहीं था। ये लापरवाही का, अनियमित निर्माण का, और उन सिस्टम का ढहना था, जो हर साल हजारों बच्चों को सपने बेचने वाला शहर को सुरक्षित रखने का दावा करता है। इमारत निमार्णाधीन बताई जा रही है, अवैध रेस्टोरेंट चल रहा था, पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन किसी ने नहीं सुना। पास में जेसीबी का काम चल रहा था—क्या उसकी वजह से नींव हिल गई? या सिर्फ बिना प्लान, बिना मजबूती के ऊपर-ऊपर चढ़ते गए, कोटा, जहाँ हर साल लाखों परिवार अपने बच्चों की बेहतर जिÞंदगी के लिए सब कुछ दाँव पर लगा देते हैं, वहां इस तरह का हादसा कतई बर्दाश्त योग्य नहीं है। हमारी संवेदनाएँ उन परिवारों के साथ हैं जिनकी दुनिया एक रात में उजड़ गई। लेकिन संवेदना से आगे बढ़कर अब सवाल उठाना जरूरी है—कब तक कोटा के इन हादसों को दुर्घटना कहकर टालते रहेंगे? कब तक अवैध निर्माण, लापरवाह मंजूरियाँ और कमजोर नींव पर खड़े सपनों को बचाने का ढोंग चलेगा, यह अब नहीं चलेगा, यह सपनों का शहर है, यहां जिंदगियां बनाई जाती है, बचाई जाती है, सवांरी जाती है, सजाई जाती है। संस्कारित इस शहर में ऐसा हादसा दुबारा नहीं हो
फोटो सपनों के शहर कोटा में लापरवाही का हादसा दौबारा ना हो - बेहद दर्दनाक हादसा, जीवन बेहद अनमोल, खरोच भी दर्द देती है, यहां तो दो मौत हो गई। कोटा. टीम जीवनदाता हर पल लोगों की एक चीख पर दौड पड़ती है, लोगों की मदद करती है, ब्लड, एसडीपी, आरडीपी उपलब्ध कराती है, ये ही नहीं यहां आने वाला हर बच्चा और मेहमान हमारे आतिथ्य को नमन करता है। कोटा की गलियों में, युवाओं के सपने रोजाना कोचिंग की कक्षाओं में जन्म लेते हैं और रातें किताबों के शब्दों को सुनहरा बना देती है, लेकिन शनिवार की रात अचानक एक भयानक सन्नाटा छा गया, बिजली चली गई, तेज धमाका हुआ और चीख निकल गई। तलवंडी, जवाहर नगर इलाके में एक तीन मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई, जिसके निचले हिस्से में मुरादाबादी नॉन-वेज जैसा रेस्टोरेंट चल रहा था वह जमीदोज हो गया, उनके नीचे सपने और आवाजे भी दबकर रह गई, वह तो गनीमत रही की कोटा प्रशासन ने समय रहते कई जिंदगियों को बचा लिया। हमारा शहर चाहता है कि यह हादसा दौबारा नहीं हो, लापरवाही दौबारा नहीं हो, इस हादसे से पहले कुछ छात्र दोस्तों के साथ खाना खा रहे थे, कुछ कर्मचारी व्यस्त थे, और बाहर से गुजरने वाले लोग सामान्य शाम मान रहे थे। फिर एक धमाके जैसी आवाज आई। लोग चीखे, धूल का गुबार उठा, और कुछ ही पलों में सब कुछ मलबे में बदल गया। - हाथ-पैर मलबे से बाहर झाँकते दिखे इस हादसे में हाथ-पैर मलबे से बाहर झाँकते दिखे, किसी की पुकार सुनाई दी, किसी की चुप्पी और भी डरावनी थी, किसी ने पुकारने की आवाज लगाई तो कलेजा मूंह को आ गया, रेस्क्यू टीमों ने रात भर जद्दोजहद की, जिला प्रशासन, निगम, पुलिस, स्थानीय लोग, सबने मिलकर मलबा हटाया। कुल 15 लोग बाहर निकाले गए। लेकिन दो जवान जानें वापस नहीं लौटीं—20 वर्षीय अर्यन (पश्चिम बंगाल का एक कोचिंग छात्र) और 15 वर्षीय लक्ष्मण। 13-15 लोग घायल हुए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई गई। ये सिर्फ ईंट-पत्थर का ढहना नहीं था। ये लापरवाही का, अनियमित निर्माण का, और उन सिस्टम का ढहना था, जो हर साल हजारों बच्चों को सपने बेचने वाला शहर को सुरक्षित रखने का दावा करता है। इमारत निमार्णाधीन बताई जा रही है, अवैध रेस्टोरेंट चल रहा था, पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन किसी ने नहीं सुना। पास में जेसीबी का काम चल रहा था—क्या उसकी वजह से नींव हिल गई? या सिर्फ बिना प्लान, बिना मजबूती के ऊपर-ऊपर चढ़ते गए, कोटा, जहाँ हर साल लाखों परिवार अपने बच्चों की बेहतर जिÞंदगी के लिए सब कुछ दाँव पर लगा देते हैं, वहां इस तरह का हादसा कतई बर्दाश्त योग्य नहीं है। हमारी संवेदनाएँ उन परिवारों के साथ हैं जिनकी दुनिया एक रात में उजड़ गई। लेकिन संवेदना से आगे बढ़कर अब सवाल उठाना जरूरी है—कब तक कोटा के इन हादसों को दुर्घटना कहकर टालते रहेंगे? कब तक अवैध निर्माण, लापरवाह मंजूरियाँ और कमजोर नींव पर खड़े सपनों को बचाने का ढोंग चलेगा, यह अब नहीं चलेगा, यह सपनों का शहर है, यहां जिंदगियां बनाई जाती है, बचाई जाती है, सवांरी जाती है, सजाई जाती है। संस्कारित इस शहर में ऐसा हादसा दुबारा नहीं हो
- बांदीकुई : समाजसेवियों द्वारा गुल्लाना स्कूल में बच्चों को बैग वितरित किए। बच्चों द्वारा बैग प्राप्त करने पर चेहरों पर खुशी नजर आई ।1
- बधाई हो बधाई हो बधाई हो। आज का शुभ दिन हमारे लिए खुशियों की बाहर लेकर आया है। आज के दिन ही इस धरा पर हमारे अगज डॉक्टर के सी श्रीमाल ने जन्म लिया था। उनको जन्मदिन की बधाई देने वालों का सुबह से ही ताता लगा हुआ है। इस शुभ दिन के लिए हम सभी लोग इंतजार करते हैं। और उस महान व्यक्तित्व के धनी। जो सदैव दीन हीन दरिद्र नारायण लोगों की अपने डॉक्टरी के पैसे से सेवा करते हैं। और अंतिम छोर पर बैठे हुए गरीब व्यक्ति की इमदाद करते हैं। आओ हम सब मिलकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दें। और परमात्मा से प्रार्थना करें कि वह सदैव स्वस्थ रहें। तंदुरुस्त रहें और प्रगति की उड़ान पर उड़ते रहे सतायु हो। गांधी परिवार की ओर से भी हमारे अगज डॉक्टर के सी श्रीमाल एवं उनकी अर्धांगिनी श्रीमती आशा श्रीमाल को जन्मदिन की लाख-लाख बधाई।1
- Post by सुरेसधोजक धोजक1
- रिया बड़ी के निकट ग्राम चावड़िया कला में हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान साधु-संतों के सानिध्य में कलश यात्रा निकाली गई, जो गांव के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा के बाद प्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।1
- Post by Prithvi Singh Rajput4
- नागौर,, दिनांक 07फरवरी2026 को दौराने नाकाबंदी सरहद रोटू से आरोपी की कब्जेशुदा वाहन स्काॅर्पियो में से एक अवैध हथियार धारदार तलवार बरामद कर स्काॅर्पियो गाड़ी को जब्त किया गया। थाना जायल पुलिस टीम की रही कार्यवाही1
- पुष्कर सब्जी मंडी रोड़ का काम आज वापस चालू होना था पर पहले अतिक्रमण कारी दुकान वाले दुकान हटाने कों तैयार नहीं थे फिर दुकाने हटाई अतिक्रमण हटाया तो सड़क बेनना चालू हुआ तो पुष्कर सब्जी मंडी के आढ़तीय न ऑब्जेक्शन उठाया और ठेकेदार को बोला कि सड़क जहाँ से दुकाने अतिक्रमण हटाया पहले वहाँ से मलबा (कचरा ) हटाओ और सड़क पूरी बनाओ फिर ठेकेदार कों आढ़तीय न फोन किया तो ठेकेदार ने बोला कि बाद में उठा लेंगे सड़क बनने के बाद मेरे इसको हटावूंगा तो घाटा लगेगा जब फिर आढ़तीय न बोला की हम जेसीबी बुलाते हैं जेसीबी का खर्चा हम देंगे जब सड़क पूरी बेनने के आदेश हैं तो आढ़तीय जेब से जेसीबी के पैसे क्यों देंगे खैर सड़क बननी चाहिए पर जब सड़क का करोड़ों रूपये पास होते हैं वो पैसा कहा जाता हैं सवाल यहीं हैं बस सड़क बनेगी तो दोनों तरफ से मलबा हटा के ही बनेगी ठेकेदार कों पैसे नहीं मिलते क्या जब पैसे पुरे तो काम अधूरा क्यों!1
- Post by Ramesh Gandhi1