महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट की मांग, मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन जरूरी महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट की मांग, मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन जरूरी जबलपुर। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बिना योग्य विशेषज्ञों के संचालित हो रही पैथोलॉजी लैब एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट जबलपुर ने पत्रवार्ता में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। राज्य के विभिन्न जिलों में वर्तमान में हजारों ऐसी लैब सक्रिय हैं जो केवल टेक्नीशियनों के भरोसे चल रही हैं। विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में इन केंद्रों द्वारा जारी की जा रही रिपोर्ट जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की नीतियों में एकरूपता की कमी के कारण यह अवैध जाल लगातार फैल रहा है। -लाइसेंसिंग मानकों में विरोधाभास एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लैब संचालन के लिए निर्धारित लाइसेंसिंग मानक पूरी तरह भिन्न हैं। कहीं पर सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों का पालन हो रहा है, तो कहीं नियमों को ताक पर रखकर मात्र एमबीबीएस डिग्री धारकों को लैब रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनाए जा रहे ये दोहरे मापदंड चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। मानकों में इस प्रकार के अंतर के कारण ग़ैरमानक केंद्रों को संरक्षण मिल रहा है, जो सीधे तौर पर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है। -पैथोलॉजिस्टों की संख्या सीमा पर आपत्ति लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा अक्टूबर 2024 में जारी की गई एक अधिसूचना की विवादित शर्त को लेकर मामला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इस नए नियम के अंतर्गत एक योग्य पैथोलॉजिस्ट को एक जिले में अधिकतम केवल 2 लैब तक ही सीमित कर दिया गया है। याचिकाकर्ता संगठनों ने इस प्रतिबंध को पूरी तरह मनमाना और तर्कहीन करार दिया है। उनका तर्क है कि चिकित्सा जगत के अन्य किसी भी विशेषज्ञ पर कार्यस्थलों की ऐसी कोई संख्यात्मक पाबंदी लागू नहीं है, इसलिए केवल पैथोलॉजी क्षेत्र के लिए यह नियम बनाना भेदभावपूर्ण है। -उच्च न्यायालय ने मांगे सुझाव पत्रवार्ता में जानकारी दी गयी कि माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अवैध पैथोलॉजी लैबों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या माना है। न्यायालय ने व्यवस्था में सुधार लाने और विसंगतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से सभी संबंधित पक्षों और विषय विशेषज्ञों से 2 सप्ताह के भीतर लिखित सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस कानूनी पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पैथोलॉजी सेवाओं का संचालन अनिवार्य रूप से स्नातकोत्तर योग्यता प्राप्त विशेषज्ञों जैसे MD, DNB या DCP की प्रत्यक्ष उपस्थिति और निरंतर पर्यवेक्षण में ही सुनिश्चित हो। -गुणवत्तापूर्ण जांच व प्रमाणीकरण की अनिवार्यता महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट ने आम नागरिकों से जागरूक होने और केवल अधिकृत केंद्रों से ही जांच कराने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के तहत कोई भी टेक्नीशियन स्वतंत्र रूप से लैब चलाने या रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने का पात्र नहीं है। सही उपचार के लिए रिपोर्ट की सटीकता और विशेषज्ञ का प्रमाणीकरण होना अत्यंत आवश्यक है। जनता को यह समझना होगा कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के तैयार की गई रिपोर्ट न केवल अविश्वसनीय होती है, बल्कि गलत उपचार का आधार भी बन सकती है। पत्रवार्ता में डॉ. राजेश महोबिया, डॉ. नीरज सचदेवा, डॉ. नीता भाटिया, डॉ. रितु भनोत वढेरा, डॉ. कुलदीप बजाज, डॉ. दीपाली अडगाँवकर, डॉ. शिशिर चनपुरिया और डॉ. मपरस गुप्ता की उपस्थिति रही पत्रकार वार्ता में जबलपुर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय मिश्रा की भी उपस्थित प्रशंसनीय रही
महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट की मांग, मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन जरूरी महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट की मांग, मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन जरूरी जबलपुर। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बिना योग्य विशेषज्ञों के संचालित हो रही पैथोलॉजी लैब एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट जबलपुर ने पत्रवार्ता में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। राज्य के विभिन्न जिलों में वर्तमान में हजारों ऐसी लैब सक्रिय हैं जो केवल टेक्नीशियनों के भरोसे चल रही हैं। विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में इन केंद्रों द्वारा जारी की जा रही रिपोर्ट जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की नीतियों में एकरूपता की कमी के कारण यह अवैध जाल लगातार फैल रहा है। -लाइसेंसिंग मानकों में विरोधाभास एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लैब संचालन के लिए निर्धारित लाइसेंसिंग मानक पूरी तरह भिन्न हैं। कहीं पर सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों का पालन हो रहा है, तो कहीं नियमों को ताक पर रखकर मात्र एमबीबीएस डिग्री धारकों को लैब रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनाए जा रहे ये दोहरे मापदंड चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। मानकों में इस प्रकार के अंतर के कारण ग़ैरमानक केंद्रों को संरक्षण मिल रहा है, जो सीधे तौर पर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है। -पैथोलॉजिस्टों की संख्या सीमा पर आपत्ति लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा अक्टूबर 2024 में जारी की गई एक अधिसूचना की विवादित शर्त को लेकर मामला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इस नए नियम के अंतर्गत एक योग्य पैथोलॉजिस्ट को एक जिले में अधिकतम केवल 2 लैब तक ही सीमित कर दिया गया है। याचिकाकर्ता संगठनों ने इस प्रतिबंध को पूरी तरह मनमाना और तर्कहीन करार दिया है। उनका तर्क है कि चिकित्सा जगत के अन्य किसी भी विशेषज्ञ पर कार्यस्थलों की ऐसी कोई संख्यात्मक पाबंदी लागू नहीं है, इसलिए केवल पैथोलॉजी क्षेत्र के लिए यह नियम बनाना भेदभावपूर्ण है। -उच्च न्यायालय ने मांगे सुझाव पत्रवार्ता में जानकारी दी गयी कि माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अवैध पैथोलॉजी लैबों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या माना है। न्यायालय ने व्यवस्था में सुधार लाने और विसंगतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से सभी संबंधित पक्षों और विषय विशेषज्ञों से 2 सप्ताह के भीतर लिखित सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस कानूनी पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पैथोलॉजी सेवाओं का संचालन अनिवार्य रूप से स्नातकोत्तर योग्यता प्राप्त विशेषज्ञों जैसे MD, DNB या DCP की प्रत्यक्ष उपस्थिति और निरंतर पर्यवेक्षण में ही सुनिश्चित हो। -गुणवत्तापूर्ण जांच व प्रमाणीकरण की अनिवार्यता महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट ने आम नागरिकों से जागरूक होने और केवल अधिकृत केंद्रों से ही जांच कराने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के तहत कोई भी टेक्नीशियन स्वतंत्र रूप से लैब चलाने या रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने का पात्र नहीं है। सही उपचार के लिए रिपोर्ट की सटीकता और विशेषज्ञ का प्रमाणीकरण होना अत्यंत आवश्यक है। जनता को यह समझना होगा कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के तैयार की गई रिपोर्ट न केवल अविश्वसनीय होती है, बल्कि गलत उपचार का आधार भी बन सकती है। पत्रवार्ता में डॉ. राजेश महोबिया, डॉ. नीरज सचदेवा, डॉ. नीता भाटिया, डॉ. रितु भनोत वढेरा, डॉ. कुलदीप बजाज, डॉ. दीपाली अडगाँवकर, डॉ. शिशिर चनपुरिया और डॉ. मपरस गुप्ता की उपस्थिति रही पत्रकार वार्ता में जबलपुर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय मिश्रा की भी उपस्थित प्रशंसनीय रही
- अशोक खरात (जिन्हें उनके अनुयायी 'कैप्टन' के नाम से भी पुकारते थे) मार्च 2026 में महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए एक बड़े यौन शोषण और धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपी है। इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक गलियारों में काफी हलचल मचा दी थी। अशोक खरात और उससे जुड़े विवाद की मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं: 1. गंभीर आरोप और गिरफ्तारी अशोक खरात को मार्च 2026 में नासिक पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर एक महिला ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे: • यौन शोषण: पीड़िता का आरोप था कि खरात ने कई वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण किया। • ब्लैकमेलिंग: आरोपी ने कथित तौर पर पीड़िता के आपत्तिजनक वीडियो बनाए थे और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे चुप रखा था। • आर्थिक धोखाधड़ी: खरात पर पीड़िता से करोड़ों रुपये ठगने का भी आरोप लगा। 2. 'आध्यात्मिक गुरु' का चोला खरात खुद को एक आध्यात्मिक गुरु या 'बाबा' के रूप में पेश करता था। उसने नासिक और उसके आसपास के इलाकों में अपना एक बड़ा प्रभाव बना रखा था। वह अक्सर सफेद कपड़ों में दिखता था और खुद को 'कैप्टन' कहलवाना पसंद करता था। 3. हाई-प्रोफाइल संबंध पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि खरात के संबंध कई प्रभावशाली राजनेताओं और अधिकारियों के साथ थे। • रुपाली चाकणकर विवाद: महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्षा रुपाली चाकणकर के साथ उसके पुराने वीडियो वायरल हुए, जिसमें वह उसके पैर धोती नजर आ रही थीं। इसी विवाद के चलते चाकणकर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। • SIT जांच: मामले की गंभीरता और राजनीतिक कनेक्शन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस केस की जांच के लिए एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया है। 4. पुलिस की बरामदगी गिरफ्तारी के बाद खरात के ठिकानों पर की गई छापेमारी में पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं: • कई महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें। • बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति के दस्तावेज। • कुछ ऐसे सबूत जिनसे संकेत मिले कि वह महिलाओं को डरा-धमका कर उनका शोषण करता था। वर्तमान स्थिति अशोक खरात फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और SIT उसके द्वारा किए गए अन्य संभावित अपराधों और उसके 'वित्तीय साम्राज्य' की जांच कर रही है। इस मामले ने महाराष्ट्र में धर्म के नाम पर शोषण करने वाले 'स्वयंभू बाबाओं' के खिलाफ एक नई बहस छेड़ दी है।2
- viral video अशोक खरात (जिन्हें उनके अनुयायी 'कैप्टन' के नाम से भी पुकारते थे) मार्च 2026 में महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए एक बड़े यौन शोषण और धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपी है। इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक गलियारों में काफी हलचल मचा दी थी। अशोक खरात और उससे जुड़े विवाद की मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं: 1. गंभीर आरोप और गिरफ्तारी अशोक खरात को मार्च 2026 में नासिक पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर एक महिला ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे: • यौन शोषण: पीड़िता का आरोप था कि खरात ने कई वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण किया। • ब्लैकमेलिंग: आरोपी ने कथित तौर पर पीड़िता के आपत्तिजनक वीडियो बनाए थे और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे चुप रखा था। • आर्थिक धोखाधड़ी: खरात पर पीड़िता से करोड़ों रुपये ठगने का भी आरोप लगा। 2. 'आध्यात्मिक गुरु' का चोला खरात खुद को एक आध्यात्मिक गुरु या 'बाबा' के रूप में पेश करता था। उसने नासिक और उसके आसपास के इलाकों में अपना एक बड़ा प्रभाव बना रखा था। वह अक्सर सफेद कपड़ों में दिखता था और खुद को 'कैप्टन' कहलवाना पसंद करता था। 3. हाई-प्रोफाइल संबंध पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि खरात के संबंध कई प्रभावशाली राजनेताओं और अधिकारियों के साथ थे। • रुपाली चाकणकर विवाद: महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्षा रुपाली चाकणकर के साथ उसके पुराने वीडियो वायरल हुए, जिसमें वह उसके पैर धोती नजर आ रही थीं। इसी विवाद के चलते चाकणकर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। • SIT जांच: मामले की गंभीरता और राजनीतिक कनेक्शन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस केस की जांच के लिए एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया है। 4. पुलिस की बरामदगी गिरफ्तारी के बाद खरात के ठिकानों पर की गई छापेमारी में पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं: • कई महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें। • बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति के दस्तावेज। • कुछ ऐसे सबूत जिनसे संकेत मिले कि वह महिलाओं को डरा-धमका कर उनका शोषण करता था। वर्तमान स्थिति अशोक खरात फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और SIT उसके द्वारा किए गए अन्य संभावित अपराधों और उसके 'वित्तीय साम्राज्य' की जांच कर रही है। इस मामले ने महाराष्ट्र में धर्म के नाम पर शोषण करने वाले 'स्वयंभू बाबाओं' के खिलाफ एक नई बहस छेड़ दी है।1
- रायपुर से हुई मास्टरमाइंड की गिरफ्तारीजमीन धोखाधड़ी मामले में ढीमरखेडा पुलिस को मिली सफलता1
- kayangi jabalpur madhya pradesh katangi chaupati me gandi naliyo se bahut kharab smell ati hai or kuch kha bhi nahi pate hai esliye esko jaldi se clen kro1
- जबलपुर में लूट की वारदात के बाद फरार हो रहे बदमाशों में से एक की बाइक का पेट्रोल खत्म हो गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। --- 📍 घटना कैसे हुई ▪ कलेक्शन एजेंट से नकदी और सामान लूटा गया ▪ वारदात को 5 आरोपियों ने मिलकर अंजाम दिया ▪ तीन अलग-अलग बाइक से पहुंचे थे आरोपी --- ⚠ पकड़ा कैसे गया ▪ भागते समय एक आरोपी की बाइक बंद हो गई ▪ ग्रामीणों ने पीछा कर घेराबंदी की ▪ मौके पर ही पकड़कर रोका गया --- 👊 ग्रामीणों की भूमिका ▪ आरोपी को भागने नहीं दिया ▪ हाथ-पैर बांधकर रोके रखा ▪ तुरंत पुलिस को सूचना दी --- 🚔 पुलिस की कार्रवाई ▪ पूछताछ में गैंग का खुलासा ▪ सभी आरोपी हिरासत में ▪ लूटा गया सामान बरामद --- ⚠ जांच में खुलासा ▪ वारदात से पहले साथ बैठकर प्लान बनाया ▪ शराब पीने के बाद किया अपराध ▪ अन्य मामलों की भी जांच जारी --- 📍 स्थान: जबलपुर, मध्यप्रदेश 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा1
- जबलपुर में कलेक्शन एजेंट से लूट कर भाग रहे एक आरोपी की बाइक का पेट्रोल खत्म हो गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और हाथ-पैर बांधकर पुलिस के हवाले कर दिया। --- 📍 क्या है पूरा मामला ▪ 5 लुटेरों ने कलेक्शन एजेंट को निशाना बनाया ▪ नकदी, लैपटॉप और दस्तावेज लूटकर फरार ▪ 3 बाइक से आए थे सभी आरोपी --- ⚠ कैसे हुआ खुलासा ▪ भागते समय एक आरोपी की बाइक का पेट्रोल खत्म ▪ ग्रामीणों ने पीछा कर दबोचा ▪ मौके पर ही पकड़कर पुलिस को सौंपा --- 👊 ग्रामीणों की कार्रवाई ▪ आरोपी को बांधकर रोके रखा ▪ मौके पर ही पकड़ लिया गया ▪ बाद में पुलिस के हवाले किया गया --- 🚔 पुलिस कार्रवाई ▪ पूछताछ में आरोपी ने साथियों के नाम बताए ▪ सभी 5 आरोपी गिरफ्तार ▪ लूट का सामान बरामद --- ⚠ क्या था प्लान ▪ पहले साथ बैठकर शराब पी ▪ फिर लूट की योजना बनाई ▪ सुनसान जगह पर वारदात को अंजाम दिया --- 📍 स्थान: जबलपुर (मध्यप्रदेश) 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा1
- ट्रांस संशोधन बिल के विरोध में उतरा किन्नर समाज जबलपुर के करमचंद चौक स्थित विजन पैलेस होटल में अरमान फाउंडेशन के द्वारा किन्नर समाज का एक सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें संसद में मार्च महीने में पारित ट्रांस संशोधन विधेयक का किन्नर समाज द्वारा पुरजोर विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई,सभी किन्नर समाज ने हाथों में तख्तियां लेकर एक स्वर में इस विधेयक को वापस लेने की मांग की, इस मौके पर आए हुए किन्नर गुरुओं ने अपने-अपने विचार सभी के सामने व्यक्त किये एवं कार्यक्रम में किन्नर समाज द्वारा प्रस्तुतियां दी गई,इस सभा में किन्नर समुदाय से गुरु संजना हाजी, गुरु मनीषा दास ,गुरु दिया नायक, सुरैया जी,सनम नायक, सयाना,सुहाना जी, अरमान फाउंडेशन की वरिष्ठ संरक्षक प्रो. भारती शुक्ला जी, चंद, निज्जो जी उपस्थित रहे ।4
- #अशोक खरात (जिन्हें उनके अनुयायी 'कैप्टन' के नाम से भी पुकारते थे) मार्च 2026 में महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए एक बड़े यौन शोषण और धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपी है। इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक गलियारों में काफी हलचल मचा दी थी। अशोक खरात और उससे जुड़े विवाद की मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं: 1. गंभीर आरोप और गिरफ्तारी अशोक खरात को मार्च 2026 में नासिक पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर एक महिला ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे: • यौन शोषण: पीड़िता का आरोप था कि खरात ने कई वर्षों तक उसका शारीरिक शोषण किया। • ब्लैकमेलिंग: आरोपी ने कथित तौर पर पीड़िता के आपत्तिजनक वीडियो बनाए थे और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे चुप रखा था। • आर्थिक धोखाधड़ी: खरात पर पीड़िता से करोड़ों रुपये ठगने का भी आरोप लगा। 2. 'आध्यात्मिक गुरु' का चोला खरात खुद को एक आध्यात्मिक गुरु या 'बाबा' के रूप में पेश करता था। उसने नासिक और उसके आसपास के इलाकों में अपना एक बड़ा प्रभाव बना रखा था। वह अक्सर सफेद कपड़ों में दिखता था और खुद को 'कैप्टन' कहलवाना पसंद करता था। 3. हाई-प्रोफाइल संबंध पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि खरात के संबंध कई प्रभावशाली राजनेताओं और अधिकारियों के साथ थे। • रुपाली चाकणकर विवाद: महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्षा रुपाली चाकणकर के साथ उसके पुराने वीडियो वायरल हुए, जिसमें वह उसके पैर धोती नजर आ रही थीं। इसी विवाद के चलते चाकणकर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। • SIT जांच: मामले की गंभीरता और राजनीतिक कनेक्शन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस केस की जांच के लिए एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया है। 4. पुलिस की बरामदगी गिरफ्तारी के बाद खरात के ठिकानों पर की गई छापेमारी में पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं: • कई महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें। • बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति के दस्तावेज। • कुछ ऐसे सबूत जिनसे संकेत मिले कि वह महिलाओं को डरा-धमका कर उनका शोषण करता था। वर्तमान स्थिति अशोक खरात फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और SIT उसके द्वारा किए गए अन्य संभावित अपराधों और उसके 'वित्तीय साम्राज्य' की जांच कर रही है। इस मामले ने महाराष्ट्र में धर्म के नाम पर शोषण करने वाले 'स्वयंभू बाबाओं' के खिलाफ एक नई बहस छेड़ दी है।1