सुल्तानपुर जनपद के लम्भुआ स्थित एस.एन. कॉन्वेंट स्कूल पर हाईवे किनारे स्कूल वाहनों को खड़ा करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल पर आरोप है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे करीब 200 मीटर तक अपने वाहनों को पूरे दिन खड़ा रखता है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। इस अव्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और परिवहन विभाग के अधिकारी गुजरते हैं, फिर भी इस पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि विद्यालय के पास पार्किंग की अपनी कोई व्यवस्था नहीं है, तो उसे किस आधार पर मान्यता दी गई? क्या स्कूल प्रशासन राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों और स्थानीय प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा है या फिर प्रशासन खुद कार्रवाई करने से बच रहा है। यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि महज एक सप्ताह पहले इसी स्थान के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में ऑल सेंट्स इंग्लिश स्कूल के ड्राइवर सहित दो लोगों की जान चली गई थी। सड़क किनारे बच्चों को उतारने के लिए सुरक्षित जगह न होने के कारण वाहन को सड़क पर ही रोकना पड़ा था, तभी एक तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी थी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हाईवे किनारे इस अवैध पार्किंग और बच्चों को सड़क पर उतारने जैसी लापरवाह व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं। लोगों की मांग है कि एनएचएआई, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर अवैध पार्किंग बंद करवाए और स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित पिक-अप/ड्रॉप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दे।
सुल्तानपुर जनपद के लम्भुआ स्थित एस.एन. कॉन्वेंट स्कूल पर हाईवे किनारे स्कूल वाहनों को खड़ा करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल पर आरोप है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे करीब 200 मीटर तक अपने वाहनों को पूरे दिन खड़ा रखता है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। इस अव्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और परिवहन विभाग के अधिकारी गुजरते हैं, फिर भी इस पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि विद्यालय के पास पार्किंग की अपनी कोई व्यवस्था नहीं है, तो उसे किस आधार पर मान्यता दी गई? क्या स्कूल प्रशासन राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों और स्थानीय प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा है या फिर प्रशासन खुद कार्रवाई करने से बच रहा है। यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि महज एक सप्ताह पहले इसी स्थान के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में ऑल सेंट्स इंग्लिश स्कूल के ड्राइवर सहित दो लोगों की जान चली गई थी। सड़क किनारे बच्चों को उतारने के लिए सुरक्षित जगह न होने के कारण वाहन को सड़क पर ही रोकना पड़ा था, तभी एक तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी थी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हाईवे किनारे इस अवैध पार्किंग और बच्चों को सड़क पर उतारने जैसी लापरवाह व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं। लोगों की मांग है कि एनएचएआई, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर अवैध पार्किंग बंद करवाए और स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित पिक-अप/ड्रॉप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दे।
- अमेठी में "ऑपरेशन चक्रव्यूह" के तहत पुलिस ने एक शातिर अंतरजनपदीय अपराधी को चोरी की मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 30 वर्षीय श्रीराम विश्वकर्मा (पुत्र पारसनाथ विश्वकर्मा, निवासी कौशाम्बी, हाल पता महमूदपुर जंगलरामनगर, अमेठी) के रूप में हुई है। आरोपी के पास से बरामद टीवीएस XL-100 मोटरसाइकिल के दस्तावेज मांगने पर वह कोई कागज नहीं दिखा सका। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने यह मोटरसाइकिल 13 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अमेठी से चोरी की थी। आरोपी के खिलाफ अमेठी, प्रयागराज, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ में चोरी, एनडीपीएस व आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में कुल 7 मुकदमे दर्ज हैं। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार मिश्रा के नेतृत्व में अमेठी पुलिस द्वारा संदिग्धों की चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर की गई। बरामदगी के आधार पर मामले में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक श्रीराम पाण्डेय, उपनिरीक्षक प्रेमचन्द्र गौतम, हेड कांस्टेबल संदीप मिश्रा और कांस्टेबल सुयश मिश्रा शामिल रहे।1
- अमेठी में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि इथेनॉल के फायदे गिनाकर आम जनता की गाड़ियों का कबाड़ा बनाना तुरंत बंद किया जाना चाहिए। जनता पहले ही महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से बुरी तरह परेशान है, और अब वाहनों के बार-बार खराब होने तथा उनके बढ़ते रखरखाव के खर्च ने लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। मांग की गई है कि यदि इथेनॉल मिश्रित ईंधन वास्तव में फायदेमंद है, तो इसके प्रभावों को लेकर पारदर्शी जानकारी सामने रखी जाए और जनता की चिंताओं का स्पष्ट जवाब दिया जाए। इस स्थिति पर तीखा विरोध दर्ज कराते हुए साफ तौर पर कहा गया है कि आम जनता का खून चूसना बंद किया जाए।1
- अमेठी कोतवाली के अंतर्गत रायपुर फुलवारी ककवा रोड में रास्ते के विवाद को लेकर एक सेवानिवृत्त फौजी समेत पांच परिवारों को परेशान करने का मामला सामने आया है। इस समस्या से तंग आकर सभी पीड़ितों की सहमति से पूर्व सैनिक ने अमेठी तहसील में अधिकारियों से मुलाकात की। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के मौजूद न होने पर पीड़ित ने तहसीलदार नम्रता मिश्रा और अमेठी एसएचओ कोतवाली प्रभारी को शिकायती पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक वीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने साल 2015 में रायपुर फुलवारी में एक आवासीय प्लॉट खरीदा था और तभी से वहां मकान बनाकर रह रहे हैं। जमीन लेते समय भोलानाथ यादव नामक व्यक्ति ने उन्हें 20 फीट का रास्ता दिया था। लेकिन अब दबंगई के बल पर उस रास्ते को जबरन छोटा करके केवल 10 फीट का कर दिया गया है, जिससे वहां रह रहे परिवारों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूटने की कगार पर है। इस रास्ते से कुल पांच परिवार जुड़े हुए हैं जो पिछले कई सालों से यहां निवास कर रहे हैं। रास्ता छोटा होने से इन सभी परिवारों के सामने भारी समस्या खड़ी हो गई है। शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि जब इस बात का विरोध किया गया, तो आरोपी पक्ष द्वारा उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पूर्व सैनिक ने अंदेशा जताया है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी भोलानाथ यादव की होगी। पीड़ित फौजी का कहना है कि वे अनुशासित जीवन जीते हैं, इसलिए कानून पर भरोसा रखकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। पीड़ितों ने तहसीलदार नम्रता मिश्रा और स्थानीय पुलिस से मौके की जांच करवाकर पुराना 20 फीट का रास्ता बहाल कराने और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।2
- रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा दुकानदारों को नोटिस जारी किए जाने के बाद व्यापारियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। नाराज दुकानदारों ने आरडीए परिसर में एकत्रित होकर धरना-प्रदर्शन किया और प्राधिकरण की कार्यशैली सहित सचिव के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का आरोप है कि बिना किसी बातचीत और व्यावहारिक समाधान निकाले ही उन्हें नोटिस जारी कर दिए गए, जिससे दुकानदारों में भारी असंतोष फैल गया है। इसके अलावा, व्यापारियों ने आरडीए परिसर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और फायर सर्विस जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो वे उच्च अधिकारियों से मामले की शिकायत कर आंदोलन को और तेज करेंगे। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में दुकानदार मौजूद रहे और उन्होंने प्रशासन से न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग की है।1
- अमेठी थाना क्षेत्र के पूरे गणेश लाल मजरे भरेथा गांव में मारपीट और अभद्रता के मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से नाराज एक महिला और उसका परिवार पिछले तीन दिनों से न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद से वे लगातार अमेठी थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस की इस निष्क्रियता से निराश होकर सोमवार को पीड़ित परिवार जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचा। जिलाधिकारी को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में पीड़ित महिला ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और अपना मेडिकल परीक्षण कराने की मांग की है। जिला प्रशासन ने पीड़िता का प्रार्थना पत्र प्राप्त कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।2
- सुल्तानपुर जनपद के लम्भुआ स्थित एस.एन. कॉन्वेंट स्कूल पर हाईवे किनारे स्कूल वाहनों को खड़ा करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल पर आरोप है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे करीब 200 मीटर तक अपने वाहनों को पूरे दिन खड़ा रखता है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। इस अव्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और परिवहन विभाग के अधिकारी गुजरते हैं, फिर भी इस पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि विद्यालय के पास पार्किंग की अपनी कोई व्यवस्था नहीं है, तो उसे किस आधार पर मान्यता दी गई? क्या स्कूल प्रशासन राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों और स्थानीय प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा है या फिर प्रशासन खुद कार्रवाई करने से बच रहा है। यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि महज एक सप्ताह पहले इसी स्थान के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में ऑल सेंट्स इंग्लिश स्कूल के ड्राइवर सहित दो लोगों की जान चली गई थी। सड़क किनारे बच्चों को उतारने के लिए सुरक्षित जगह न होने के कारण वाहन को सड़क पर ही रोकना पड़ा था, तभी एक तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी थी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हाईवे किनारे इस अवैध पार्किंग और बच्चों को सड़क पर उतारने जैसी लापरवाह व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं। लोगों की मांग है कि एनएचएआई, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर अवैध पार्किंग बंद करवाए और स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित पिक-अप/ड्रॉप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दे।1