5 साल से अधूरा पुल, 15 फीट ऊंची सीढ़ी चढ़कर स्कूल जा रहे बच्चे; खबर के बाद भड़के विधायक जनक ध्रुव गरियाबंद गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड के देहरागुड़ा-खामभाठा में पैरी नदी पर निर्माणाधीन पुल करीब पांच साल से अधूरा पड़ा है। पुल का काम पूरा नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पुल पर लगी सीढ़ियों के सहारे करीब 15 फीट ऊंचाई पर चढ़कर आवागमन करना पड़ रहा है। बच्चों के इस तरह पुल पार करने की तस्वीर और खबर सामने आने के बाद बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने शासन-प्रशासन को घेरा। विधायक ने निर्माण कार्य में देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए वर्तमान शासन-प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। विधायक ने जल्द से जल्द पुल का निर्माण पूरा कर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है। समाधान नहीं होने पर उन्होंने ग्रामीणों के साथ उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। बाइट: 1. जनक ध्रुव, विधायक बिन्द्रानवागढ़
5 साल से अधूरा पुल, 15 फीट ऊंची सीढ़ी चढ़कर स्कूल जा रहे बच्चे; खबर के बाद भड़के विधायक जनक ध्रुव गरियाबंद गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड के देहरागुड़ा-खामभाठा में पैरी नदी पर निर्माणाधीन पुल करीब पांच साल से अधूरा पड़ा है। पुल का काम पूरा नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पुल पर
लगी सीढ़ियों के सहारे करीब 15 फीट ऊंचाई पर चढ़कर आवागमन करना पड़ रहा है। बच्चों के इस तरह पुल पार करने की तस्वीर और खबर सामने आने के बाद बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने शासन-प्रशासन को घेरा। विधायक ने निर्माण कार्य में देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए वर्तमान शासन-प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने
कहा कि बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। विधायक ने जल्द से जल्द पुल का निर्माण पूरा कर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है। समाधान नहीं होने पर उन्होंने ग्रामीणों के साथ उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। बाइट: 1. जनक ध्रुव, विधायक बिन्द्रानवागढ़
- सारागांव-कोसमबुड़ा सड़क पर पुलिया के पास शुरू हुआ मरम्मत कार्य, विधायक समेत प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचे, सारागांव-कोसमबुड़ा सड़क पर पुलिया के पास शुरू हुआ मरम्मत कार्य, विधायक समेत प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचे, गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक मुख्यालय से ओडिशा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पर आखिरकार प्रशासन की नजर पड़ी है। सारागांव से कोसमबुड़ा मार्ग पर पेनका नाला के पास सड़क और पुल की बदहाल स्थिति को लेकर मीडिया में खबर प्रसारित होने के बाद अब मौके पर मरम्मत एवं सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, तहसीलदार, एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर तत्काल आवागमन बहाल करने के लिए आवश्यक व्यवस्था शुरू कराई। दरअसल, बरसात की पहली ही बारिश में कोसमबुड़ा के पास पेनका नाला पर बनी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके चलते क्षेत्र के दर्जनों गांवों का छुरा ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया था। यह मार्ग ओडिशा को भी जोड़ता है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों, स्कूली विद्यार्थियों, व्यापारियों और राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई बार ऐसी स्थिति बनी कि ग्रामीण और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पानी पार करने को मजबूर हुए। ग्रामीणों की परेशानी को लेकर मीडिया में खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया। विधायक रोहित साहू अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मौके पर पहुंचे और सड़क तथा पुल की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद तत्काल जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर मौके पर बुलाए गए और अस्थायी रूप से आवागमन सुचारू करने के लिए मरम्मत एवं सुधार कार्य शुरू कराया गया। बताया जा रहा है कि करीब एक माह पूर्व भी विधायक रोहित साहू ने इसी पुल का निरीक्षण किया था और संबंधित विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराते हुए सुधार के निर्देश दिए थे। हालांकि इसके बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अब जब मामला मीडिया की सुर्खियों में आया तो विधायक ने दोबारा संज्ञान लेते हुए तत्काल अस्थायी मरम्मत कार्य शुरू कराया है, ताकि बारिश के बीच ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिल सके। सारागांव-कोसमबुड़ा मार्ग छुरा क्षेत्र को ओडिशा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में सड़क और पुल की स्थिति में सुधार होने से क्षेत्र के ग्रामीणों, स्कूली विद्यार्थियों, व्यापारियों और अन्य राहगीरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मौके पर मरम्मत का काम शुरू हो चुका है। हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी बताई जा रही है। ऐसे में अब देखना होगा कि पुल और सड़क की स्थायी समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।3
- jay johar jay chhattisghar 😊 सिख लो सब्जी बनाने आलू बरबट्टी और बीजा क्यों कुछ दिन बाद सब की बीवी जाएगी तीजा 😁 #tija #तीजा जय जोहर-जय छत्तीसगढ़ 😊 सिख लो सब्जी बनाने आलू बरबट्टी और बीजा क्यों कुछ दिन बाद सब की बीवी जाएगी तीजा 😁1
- आखिर छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री युवाओं को नौकरी क्यों नहीं दे पा रहे है? छत्तीसगढ़ में जो पुलिस अभ्यर्थी है आखिर उनकी बात सरकार क्यों नहीं सुन रहा है। सरकार आखिर कब तक युवाओं को बस गुमराह करता रहेगा1
- छत्तीसगढ़ में पहली बार रायपुर आ रहे हैं श्री इंद्रेश उपाध्याय जी! 🙏🚩 छत्तीसगढ़ में पहली बार रायपुर आ रहे हैं श्री इंद्रेश उपाध्याय जी! 🙏🚩 रायपुर में होने जा रहा है 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन। 📅 21 से 27 सितंबर 📍 मंडी ग्राउंड, देवेंद्र नगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिकता से सराबोर इस भव्य आयोजन में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का अवसर मिलेगा। जय श्री राधे कृष्ण 🙏🚩1
- सीतानदी-उदंती के ग्रामीणों की समस्याएं वन मंत्री के सामने, जल्द क्षेत्र का दौरा करेंगे केदार कश्यप धमतरी। सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी और वनाधिकार से जुड़े मामलों को लेकर जंगल-जमीन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराते हुए मांगों से संबंधित आवेदन सौंपा। स्थानीय आदिवासी स्वास्थ्य परम्परा एवं पादप औषधीय बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम और जिला पंचायत धमतरी अध्यक्ष अरुण सार्वा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से सड़क, पुल-पुलिया और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। वनाधिकार से जुड़े मामलों तथा विस्थापन की चिंताओं को भी मंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा गया। मंत्री केदार कश्यप ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि “नियमानुसार जो भी बेहतर होगा, उन कार्यों को अवश्य करेंगे।” उन्होंने जल्द नगरी-सिहावा क्षेत्र में पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याओं को स्वयं देखने और उनके निराकरण के लिए उचित पहल करने का आश्वासन दिया। विकास मरकाम ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। मंत्री के आश्वासन से समाधान की उम्मीद जगी है। अरुण सार्वा ने कहा कि वन संरक्षण के नियमों का पालन करते हुए ग्रामीणों की जरूरत के अनुसार विकास कार्य होना जरूरी है। विकास के साथ ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में चन्द्रकुमार अग्रवानी, रेवाप्रसाद देवदास, ईश्वरी नेताम, श्रीधन सोम, दैनिक राम मंडावी, उदय सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। समिति ने मंत्री की पहल को सकारात्मक बताते हुए ठोस कार्रवाई की उम्मीद जताई।1
- भगवान राजीव लोचन के दर्शन कर लौट रहे दर्शनार्थियों की अर्टिगा हाईवा से टकराई. कार सवार हुए घायल श्यामाचरण शुक्ल चौक के पास हुआ हादसा राजिम। भगवान राजीव लोचन के दर्शन कर रायपुर लौट रहे दर्शनार्थियों की अर्टिगा कार और हाईवा वाहन के बीच जोरदार टक्कर हो गई। हादसा राजिम के श्यामा चरण चौक के पास हुआ, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर निवासी दर्शनार्थी अर्टिगा वाहन में सवार होकर भगवान राजीव लोचन मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। दर्शन के बाद सभी वापस रायपुर लौट रहे थे। इसी दौरान श्यामा चरण चौक के पास उनकी अर्टिगा कार की हाईवा वाहन से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि अर्टिगा वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य में जुट गए। घटना की सूचना मिलते ही राजिम पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच शुरू कर दी। दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। घटना के बाद कुछ समय के लिए क्षेत्र में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस द्वारा हादसे से संबंधित आगे की कार्रवाई की जा रही है।2
- 14 वीं बटालियन धनोरा के पास जंगली सूअर का आतंक जारी, ट्रक की चपेट में आने से बाल-बाल बचे जंगली सूअर NH 930 मे स्थित 14 वी बटालियन धनोरा के पास भी विगत एक माह से जंगली सूअर का झुंड देखा जा रहा है। ग्राम धनोरा में धान खरीदी केंद्र के अलावा अब नेशनल हाईवे से लगे दुकानो के पास भी 20 से 25 की संख्या मे जंगली सूअर पहुंच रहे है। बीती रात्रि मे बटालियन के सामने स्थित एक दुकान के पास जंगली सुवर का झुंड देखा गया, जहां मुख्य मार्ग से गुजरने वाले ट्रक की चपेट मे आने से दर्जनो जंगली सूअर बाल बाल बचे। यह पूरा घटनाक्रम सिन्हा किराना दुकान मे लगाए गए सीसीटीवी कैमरे मे भी कैप्चर हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह 20 से 25 की संख्या मे जंगली सूअर के पहुंचने से ग्रामीणो मे दहशत का माहौल बना हुआ है।1
- ममता, आस्था और परंपरा का भव्य संगम… गरियाबंद में कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। ममता, आस्था और परंपरा का भव्य संगम… गरियाबंद में कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। पुराना मंगल बाजार चौक पर वार्ड क्रमांक 14 और 15 की सैकड़ों महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर अपनी संतानों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची महिलाओं ने विधि-विधान से षष्ठी माता की पूजा की। गरियाबंद के पुराना मंगल बाजार चौक पर बुधवार को सुबह से ही आस्था का माहौल देखने को मिला। वार्ड क्रमांक 14 और 15 की सैकड़ों महिलाएं कमरछठ पर्व की सामूहिक पूजा में शामिल होने पहुंचीं। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सगरी बनाकर पूजन सामग्री अर्पित की और षष्ठी माता से अपनी संतानों के स्वस्थ, सुखी और दीर्घ जीवन की कामना की। कमरछठ या हलषष्ठी छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और मातृत्व की आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं। पूजा के दौरान भैंस के दूध, दही और घी के साथ लाई, महुआ, तिल और अन्य पारंपरिक सामग्री का भोग लगाया गया। भारती सिन्हा “कमरछठ मां और संतान के अटूट रिश्ते और ममता का पर्व है। आज सैकड़ों महिलाओं ने एक साथ श्रद्धा के साथ पूजा कर अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। हमारी परंपराएं समाज को जोड़ने और संस्कृति को जीवित रखने का काम करती हैं।” इस पर्व की खास परंपरा यह भी है कि हल से जोते गए खेतों में उपजे अनाज का सेवन नहीं किया जाता। पूजा के बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार पसहर चावल और विभिन्न प्रकार की भाजियों से तैयार प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया। सामूहिक पूजा के दौरान पुराना मंगल बाजार चौक पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। लोकमान्ययताओं के अनुसार हलषष्ठी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम से भी माना जाता है, जिनका प्रमुख अस्त्र हल था। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे हलछठ, हरछठ और ललही छठ के नाम से जाना जाता है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह पर्व कमरछठ या खमरछठ के रूप में विशेष आस्था के साथ मनाया जाता है। गरियाबंद में सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी ने कमरछठ पर्व को और भी भव्य बना दिया। सामूहिक पूजा, परंपरा और मातृत्व की आस्था के इस अनूठे संगम ने पुराना मंगल बाजार चौक को श्रद्धा के केंद्र में बदल दिया।1