उमेडंडा ठाकुरबाड़ी में ऐतिहासिक अबीर-गुलाल होली, 250 वर्ष पुरानी परंपरा ने बांधा समा बुढ़मू प्रखंड के उमेडंडा ठाकुरबाड़ी में 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा के साथ ग्रामीणों ने अबीर का चढ़ावा चढ़ाकर गुलाल-अबीर की होली उत्साहपूर्वक खेली। गांव के युवा, बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और युवतियां एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।ठाकुरबाड़ी परिसर में गांव की गीत-संगीत मंडली ने होली के पारंपरिक गीत गाकर माहौल को और रंगीन बना दिया। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए बुढ़मू थाना के एसआई संजीव कुमार अपने पुलिस बल के साथ तैनात रहे। उन्होंने भी ग्रामीणों संग होली खेली और सुख-समृद्धि की कामना की।इस अवसर पर ठाकुरबाड़ी के पुजारी रविंद्र मिश्रा ने बताया कि यह परंपरा 250 साल पुरानी है, जिसमें अबीर का विशेष चढ़ावा चढ़ाया जाता है। ग्रामीणों ने पुजारी जी के प्रति कृतज्ञता जताई और आगामी वर्षों में भी इस परंपरा को निभाने का संकल्प लिया।
उमेडंडा ठाकुरबाड़ी में ऐतिहासिक अबीर-गुलाल होली, 250 वर्ष पुरानी परंपरा ने बांधा समा बुढ़मू प्रखंड के उमेडंडा ठाकुरबाड़ी में 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा के साथ ग्रामीणों ने अबीर का चढ़ावा चढ़ाकर गुलाल-अबीर की होली उत्साहपूर्वक खेली। गांव के युवा, बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और युवतियां एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।ठाकुरबाड़ी परिसर में गांव की गीत-संगीत मंडली ने होली के पारंपरिक गीत गाकर माहौल को और रंगीन बना दिया। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए बुढ़मू थाना के एसआई संजीव कुमार अपने पुलिस बल के साथ तैनात रहे। उन्होंने भी ग्रामीणों संग होली खेली और सुख-समृद्धि की कामना की।इस अवसर पर ठाकुरबाड़ी के पुजारी रविंद्र मिश्रा ने बताया कि यह परंपरा 250 साल पुरानी है, जिसमें अबीर का विशेष चढ़ावा चढ़ाया जाता है। ग्रामीणों ने पुजारी जी के प्रति कृतज्ञता जताई और आगामी वर्षों में भी इस परंपरा को निभाने का संकल्प लिया।
- बुढ़मू प्रखंड के उमेडंडा ठाकुरबाड़ी में 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा के साथ ग्रामीणों ने अबीर का चढ़ावा चढ़ाकर गुलाल-अबीर की होली उत्साहपूर्वक खेली। गांव के युवा, बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और युवतियां एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।ठाकुरबाड़ी परिसर में गांव की गीत-संगीत मंडली ने होली के पारंपरिक गीत गाकर माहौल को और रंगीन बना दिया। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए बुढ़मू थाना के एसआई संजीव कुमार अपने पुलिस बल के साथ तैनात रहे। उन्होंने भी ग्रामीणों संग होली खेली और सुख-समृद्धि की कामना की।इस अवसर पर ठाकुरबाड़ी के पुजारी रविंद्र मिश्रा ने बताया कि यह परंपरा 250 साल पुरानी है, जिसमें अबीर का विशेष चढ़ावा चढ़ाया जाता है। ग्रामीणों ने पुजारी जी के प्रति कृतज्ञता जताई और आगामी वर्षों में भी इस परंपरा को निभाने का संकल्प लिया।1
- नगड़ी प्रखंड क्षेत्र में होली पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है क्षेत्र के सभी गावों युवाओं की टोली जोरदार उत्साह के बीच एक दूसरे को रंग लगाकर एवं गला लगाकर होली की बधाई दे रहे है । इधर नगड़ी थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में थाना क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं नगड़ी प्रखंड आस-पास खबर- समाचार ग्रुप के सभी सदस्य से आग्रह है कि आप अपने गांव में होली मनाते हुए 01 मिनट का विडियो और फोटो 9279338054 पर पोस्ट किजीए1
- होली पर्व को लेकर रांची की सड़कों पर रांची पुलिस का फ्लैग मार्च Hemant Soren Hafizul Hassan BBC News हिन्दी Jharkhand Police DC Ranchi Ranchi Police @topfans Naya Bharat Tv 241
- झारखंड के देवघर में, बाबा भोलेनाथ को होली के शुभ अवसर पर गुलाब अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया भक्तों ने।1
- Post by Mohd Sameer Khan aimim1
- Post by M.Haque Bharti1
- हजारीबाग (इचाक प्रखंड)। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी होली पारंपरिक उत्साह और सामूहिक सहभागिता के साथ मनाई जाती है। इचाक प्रखंड के जोगीडीह-जगड़ा गांव में इस बार भी सदियों पुरानी परंपरा जीवंत दिखी। गांव के देवी मंडप के समीप बच्चे, युवा और बुजुर्ग एकत्रित हुए और घंटों तक भजन-कीर्तन कर फगुआ की शुरुआत की। इसके बाद ग्रामीण होलियाना अंदाज में कीर्तन करते हुए पूरे गांव का भ्रमण करते हुए दरिया स्थित शिव मंदिर पहुंचे। वहां पुनः भजन-कीर्तन और सामूहिक आशीर्वाद ली गई। पूरे माहौल में भक्तिमय रंग और आपसी भाईचारे की झलक साफ दिखी। ग्रामीणों का कहना है कि सामूहिक रूप से होली मनाने की यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है, जो आज भी गांव की पहचान बनी हुई है।1
- चंद्रग्रहण के ठीक बाद बुधवार को पारंपारिक पूजा के साथ उमेडंडा, बुढ़मू, ठाकुरगांव सहित प्रखंड क्षेत्र में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। रंग-बिरंगे रंगों, गुलाल और ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग झूम उठे। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने विशेष उत्साह दिखाया, जबकि युवाओं ने होलिका दहन के बाद अबीर-गुलाल की होली खेली। स्थानीय लोगों ने बताया कि चंद्रग्रहण के बाद मौसम सुहावना होने से उत्सव और भी रोमांचक रहा। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए विशेष टीम तैनात की थी।1