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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान कानून और राष्ट्रीय एकता को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की एकता, अखंडता और सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकारों की भावना को मजबूत करने के लिए "एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान और एक कानून" का सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि जब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था होगी, तो इससे न्याय और समानता की भावना को और भी बल मिलेगा। अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए डॉ. यादव ने कहा, "देश एक है। ‘एक समान कानून’ से किसी को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान और एक कानून’ में कुछ गलत नहीं है।"
रिपोर्टर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान कानून और राष्ट्रीय एकता को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की एकता, अखंडता और सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकारों की भावना को मजबूत करने के लिए "एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान और एक कानून" का सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि जब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था होगी, तो इससे न्याय और समानता की भावना को और भी बल मिलेगा। अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए डॉ. यादव ने कहा, "देश एक है। ‘एक समान कानून’ से किसी को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान और एक कानून’ में कुछ गलत नहीं है।"
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- छात्र-युवाओं ने दृढ़ता से घोषणा की है कि वे भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था में फैली अनियमितताओं के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज़ को किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जा सकता, और जो लोग छात्र-युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने में लिप्त हैं, उनके विरुद्ध उनका संघर्ष निरंतर चलता रहेगा। संघर्षरत युवाओं ने वाटर कैनन, लाठियों और FIR जैसी बाधाओं का सामना करने के बावजूद अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि ये दमनकारी तरीके उन्हें उनके पथ से विचलित नहीं कर सकते। उनका अडिग नारा है कि 'संघर्ष हमारा अधिकार है, और न्याय हमारी मांग।'1
- प्रार्थी नवीन चंद्रवंशी ने थाना आमानाका में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 26 मई 2026 को थाना आमानाका क्षेत्रांतर्गत सरोना स्थित शराब दुकान के पास खड़ी उनकी एक्टिवा वाहन क्रमांक सीजी 04 केजे 4471 को किसी अज्ञात चोर ने चुरा लिया था। प्रार्थी की शिकायत पर, अज्ञात आरोपी के विरुद्ध थाना आमानाका में अपराध क्रमांक 178/26, धारा 305 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार, एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना आमानाका पुलिस की संयुक्त टीम ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू की। टीम ने प्रार्थी से गहन पूछताछ की और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेजों का अवलोकन किया। इसके साथ ही, अज्ञात आरोपी की तलाश के लिए मुखबिरों की भी मदद ली जा रही थी। इसी दौरान, एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट की टीम को चोरी हुई वाहन और आरोपी के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इस जानकारी के आधार पर, टीम के सदस्यों ने लक्की देवार को पकड़ा और पूछताछ करने पर उसने एक्टिवा वाहन चोरी करने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने जुगनू देवार के पुत्र, 22 वर्षीय लक्की देवार, जो ब्लॉक नंबर 14, मकान नंबर 09, बीएसयूपी कॉलोनी, सरोना, थाना डी डी नगर, रायपुर का निवासी है, को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की एक्टिवा वाहन क्रमांक सीजी 04 केजे 4471 बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 40,000/- रुपये है। आरोपी के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की गई।1
- मनेन्द्रगढ़ नगरपालिका के मौहारपारा स्थित वार्ड क्रमांक 4 में इन दिनों भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। वार्डवासी कई महीनों से पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते अब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए भी पानी जुटाने में भारी कठिनाई हो रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उन्होंने वार्ड में व्याप्त जलसंकट की जानकारी कई बार वार्ड पार्षद को दी है, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। भीषण गर्मी के कारण पानी की समस्या ने आम जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को दूर-दूर से पानी लाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। वार्डवासियों का कहना है कि नगर पालिका भले ही शहर के विकास और मूलभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों से बिलकुल अलग है, क्योंकि एक शहरी वार्ड में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। नागरिकों ने प्रशासन और नगर पालिका से इस समस्या का तत्काल और स्थायी समाधान करने, साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त कर लोगों को राहत पहुँचाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे जनआंदोलन करने पर मजबूर होंगे। वार्ड नंबर 4 का यह जलसंकट अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।4
- छत्तीसगढ़ में 40 साल बाद एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जिसके परिणामस्वरूप 56 गाँव पूरी तरह से जलमग्न हो जाएँगे।1
- सूरजपुर, छत्तीसगढ़ में 3 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए "वनवासी" शब्द के प्रयोग के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया गया। सूरजपुर के अग्रसेन चौक (पुराना बस स्टैंड) पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के सैकड़ों लोग, जिनमें भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी भी शामिल थे, इकट्ठा हुए। उन्होंने गृह मंत्री का पुतला दहन कर और जोरदार नारेबाजी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। प्रतिकूल मौसम, जिसमें तेज धूप और अचानक हुई बारिश भी शामिल थी, के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर डटे रहे। यह विरोध केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 24 मई 2026 को जनजाति सुरक्षा मंच के एक कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय को "वनवासी" कहकर संबोधित करने के बाद उपजे व्यापक आक्रोश का परिणाम है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग) के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीनतम मूलवासी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी अपनी अनूठी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति है। उन्होंने "आदिवासी" शब्द को उनकी ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि "वनवासी" शब्द इस पहचान को सीमित और विकृत करता है, जो न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से उचित है। पोया ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए बताया कि अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी समुदाय को "अनुसूचित जनजाति" के रूप में मान्यता प्राप्त है, और अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 एवं 46 उन्हें समानता, गरिमा, सांस्कृतिक अधिकार और विकास की संवैधानिक गारंटी प्रदान करते हैं। ऐसे में, भ्रामक शब्दों का प्रयोग संविधान की मूल भावना के विपरीत है। बी.पी.एस. पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी शब्दावली का प्रयोग जारी रहा, तो ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन का समापन महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ। समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए वैधानिक तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है। इस कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक जुनास एक्का, जिला उपाध्यक्ष सुमन टोप्पो, युवा प्रभाग संभाग अध्यक्ष राजा क्षितिज कुमार सिंह उइके सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्षों—शिव प्रताप सिंह आयाम (सूरजपुर), गुलाब सिंह नेताम (रामानुजनगर), विनय पावले (भैयाथान), चंद्रसेन सिंह पोया (ओड़गी), संपलाल सिंह पोया (प्रतापपुर), तथा प्रेमनगर कार्यकारिणी अध्यक्ष सूरज सिंह पोर्ते—के साथ अशोक पैकरा, गीता पंडो, मनीष प्रताप सिंह उर्रे, संदीप कुशवाहा, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी, दीपक मानिकपुरी, अमित कुमार मिंज, अमित कुमार सिंह खैरवार, मीना गौतम, युगेश सोनपाकर, दीपक सिंह धुर्वे जैसे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।4
- पूज्य शदाणी दरबार द्वारा 17वें 'ज्ञानवर्धक संस्कार शिविर' का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 200 बच्चों ने विभिन्न कलाओं, नैतिक मूल्यों और अध्यात्म का ज्ञान प्राप्त किया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों द्वारा किए गए मंत्रोच्चार से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। शिविर के दौरान बच्चों को जीवन की चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करने की प्रेरणा दी गई। उन्हें संकल्प और विकल्प के उदाहरण के माध्यम से समझाया गया कि कठिन परिस्थितियों में जो व्यक्ति अपने संकल्प पर अडिग रहता है, वही सफलता प्राप्त करता है, जबकि विकल्पों के पीछे भागने वाला अक्सर अपने लक्ष्य से भटक जाता है। बच्चों को विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास, धैर्य और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। ऐसे संस्कार शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनमें नैतिकता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को भी सशक्त करने का कार्य करते हैं, क्योंकि संस्कारों और संकल्प से ही एक सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण होता है।1
- मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड के ग्राम चरखर में मंगलवार को मनरेगा कार्य के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। बोल्डर चेक डैम निर्माण के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पाँच अन्य महिलाएँ गंभीर रूप से झुलस गईं। यह घटना मनरेगा कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। घायल महिलाओं का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर में जारी है, जहाँ दो की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यस्थल पर करीब 58 मजदूर मौजूद थे, तभी अचानक मौसम बिगड़ा, तेज आंधी चली, आसमान में गर्जना होने लगी और हल्की बारिश शुरू हो गई। मजदूर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि एक तेज चमक के साथ बिजली गिरी और छह महिलाएँ उसकी चपेट में आ गईं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए होते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। ग्राम चरखर के मेट विवेक कुमार सिंह और घायल मजदूर रामकली ने भी मौसम खराब होने और मजदूरों के कार्यस्थल पर होने की पुष्टि की है। हादसे के बाद पूरे गाँव में मातम छा गया है, और ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासी अमित केवट ने बताया कि सूचना के काफी देर बाद भी जनपद या प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा। चिकित्सक डॉ. पवन गुप्ता ने छह महिलाओं में से एक को मृत घोषित करने और पाँच के उपचार जारी होने की जानकारी दी। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों द्वारा लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब मौसम विभाग लगातार खराब मौसम और आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी कर रहा था, तब भी मजदूरों को कार्यस्थल पर क्यों रोका गया और उनकी सुरक्षा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों की मांग है कि मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, घायलों का बेहतर उपचार हो और इस पूरे मामले की जाँच कर दोषी अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना बन गया है।3