सूरजपुर, छत्तीसगढ़ में 3 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए "वनवासी" शब्द के प्रयोग के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया गया। सूरजपुर के अग्रसेन चौक (पुराना बस स्टैंड) पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के सैकड़ों लोग, जिनमें भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी भी शामिल थे, इकट्ठा हुए। उन्होंने गृह मंत्री का पुतला दहन कर और जोरदार नारेबाजी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। प्रतिकूल मौसम, जिसमें तेज धूप और अचानक हुई बारिश भी शामिल थी, के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर डटे रहे। यह विरोध केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 24 मई 2026 को जनजाति सुरक्षा मंच के एक कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय को "वनवासी" कहकर संबोधित करने के बाद उपजे व्यापक आक्रोश का परिणाम है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग) के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीनतम मूलवासी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी अपनी अनूठी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति है। उन्होंने "आदिवासी" शब्द को उनकी ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि "वनवासी" शब्द इस पहचान को सीमित और विकृत करता है, जो न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से उचित है। पोया ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए बताया कि अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी समुदाय को "अनुसूचित जनजाति" के रूप में मान्यता प्राप्त है, और अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 एवं 46 उन्हें समानता, गरिमा, सांस्कृतिक अधिकार और विकास की संवैधानिक गारंटी प्रदान करते हैं। ऐसे में, भ्रामक शब्दों का प्रयोग संविधान की मूल भावना के विपरीत है। बी.पी.एस. पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी शब्दावली का प्रयोग जारी रहा, तो ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन का समापन महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ। समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए वैधानिक तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है। इस कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक जुनास एक्का, जिला उपाध्यक्ष सुमन टोप्पो, युवा प्रभाग संभाग अध्यक्ष राजा क्षितिज कुमार सिंह उइके सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्षों—शिव प्रताप सिंह आयाम (सूरजपुर), गुलाब सिंह नेताम (रामानुजनगर), विनय पावले (भैयाथान), चंद्रसेन सिंह पोया (ओड़गी), संपलाल सिंह पोया (प्रतापपुर), तथा प्रेमनगर कार्यकारिणी अध्यक्ष सूरज सिंह पोर्ते—के साथ अशोक पैकरा, गीता पंडो, मनीष प्रताप सिंह उर्रे, संदीप कुशवाहा, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी, दीपक मानिकपुरी, अमित कुमार मिंज, अमित कुमार सिंह खैरवार, मीना गौतम, युगेश सोनपाकर, दीपक सिंह धुर्वे जैसे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।
सूरजपुर, छत्तीसगढ़ में 3 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए "वनवासी" शब्द के प्रयोग के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया गया। सूरजपुर के अग्रसेन चौक (पुराना बस स्टैंड) पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के सैकड़ों लोग, जिनमें भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी भी शामिल थे, इकट्ठा हुए। उन्होंने गृह मंत्री का पुतला दहन कर और जोरदार नारेबाजी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। प्रतिकूल मौसम, जिसमें तेज धूप और अचानक हुई बारिश भी शामिल थी, के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर डटे रहे। यह विरोध केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 24 मई 2026 को जनजाति सुरक्षा मंच के एक
कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय को "वनवासी" कहकर संबोधित करने के बाद उपजे व्यापक आक्रोश का परिणाम है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग) के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीनतम मूलवासी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी अपनी अनूठी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति है। उन्होंने "आदिवासी" शब्द को उनकी ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि "वनवासी" शब्द इस पहचान को सीमित और विकृत करता है, जो न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से उचित है। पोया ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए बताया कि अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी समुदाय को "अनुसूचित जनजाति" के
रूप में मान्यता प्राप्त है, और अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 एवं 46 उन्हें समानता, गरिमा, सांस्कृतिक अधिकार और विकास की संवैधानिक गारंटी प्रदान करते हैं। ऐसे में, भ्रामक शब्दों का प्रयोग संविधान की मूल भावना के विपरीत है। बी.पी.एस. पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी शब्दावली का प्रयोग जारी रहा, तो ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन का समापन महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ। समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि
अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए वैधानिक तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है। इस कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक जुनास एक्का, जिला उपाध्यक्ष सुमन टोप्पो, युवा प्रभाग संभाग अध्यक्ष राजा क्षितिज कुमार सिंह उइके सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्षों—शिव प्रताप सिंह आयाम (सूरजपुर), गुलाब सिंह नेताम (रामानुजनगर), विनय पावले (भैयाथान), चंद्रसेन सिंह पोया (ओड़गी), संपलाल सिंह पोया (प्रतापपुर), तथा प्रेमनगर कार्यकारिणी अध्यक्ष सूरज सिंह पोर्ते—के साथ अशोक पैकरा, गीता पंडो, मनीष प्रताप सिंह उर्रे, संदीप कुशवाहा, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी, दीपक मानिकपुरी, अमित कुमार मिंज, अमित कुमार सिंह खैरवार, मीना गौतम, युगेश सोनपाकर, दीपक सिंह धुर्वे जैसे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।
- सूरजपुर, छत्तीसगढ़ में 3 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए "वनवासी" शब्द के प्रयोग के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया गया। सूरजपुर के अग्रसेन चौक (पुराना बस स्टैंड) पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आदिवासी एवं मूलवासी समाज के सैकड़ों लोग, जिनमें भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी भी शामिल थे, इकट्ठा हुए। उन्होंने गृह मंत्री का पुतला दहन कर और जोरदार नारेबाजी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। प्रतिकूल मौसम, जिसमें तेज धूप और अचानक हुई बारिश भी शामिल थी, के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर डटे रहे। यह विरोध केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 24 मई 2026 को जनजाति सुरक्षा मंच के एक कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय को "वनवासी" कहकर संबोधित करने के बाद उपजे व्यापक आक्रोश का परिणाम है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग) के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीनतम मूलवासी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी अपनी अनूठी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति है। उन्होंने "आदिवासी" शब्द को उनकी ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि "वनवासी" शब्द इस पहचान को सीमित और विकृत करता है, जो न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से उचित है। पोया ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए बताया कि अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी समुदाय को "अनुसूचित जनजाति" के रूप में मान्यता प्राप्त है, और अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 एवं 46 उन्हें समानता, गरिमा, सांस्कृतिक अधिकार और विकास की संवैधानिक गारंटी प्रदान करते हैं। ऐसे में, भ्रामक शब्दों का प्रयोग संविधान की मूल भावना के विपरीत है। बी.पी.एस. पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी शब्दावली का प्रयोग जारी रहा, तो ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन का समापन महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ। समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए वैधानिक तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है। इस कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक जुनास एक्का, जिला उपाध्यक्ष सुमन टोप्पो, युवा प्रभाग संभाग अध्यक्ष राजा क्षितिज कुमार सिंह उइके सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्षों—शिव प्रताप सिंह आयाम (सूरजपुर), गुलाब सिंह नेताम (रामानुजनगर), विनय पावले (भैयाथान), चंद्रसेन सिंह पोया (ओड़गी), संपलाल सिंह पोया (प्रतापपुर), तथा प्रेमनगर कार्यकारिणी अध्यक्ष सूरज सिंह पोर्ते—के साथ अशोक पैकरा, गीता पंडो, मनीष प्रताप सिंह उर्रे, संदीप कुशवाहा, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष चिंटू सोनवानी, दीपक मानिकपुरी, अमित कुमार मिंज, अमित कुमार सिंह खैरवार, मीना गौतम, युगेश सोनपाकर, दीपक सिंह धुर्वे जैसे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।4
- सूरजपुर जिले में गृह मंत्री अमित शाह के कथित बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन युवा प्रभाग और सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित किया गया था।4
- छत्तीसगढ़ में 40 साल बाद एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जिसके परिणामस्वरूप 56 गाँव पूरी तरह से जलमग्न हो जाएँगे।1
- प्रार्थी नवीन चंद्रवंशी ने थाना आमानाका में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 26 मई 2026 को थाना आमानाका क्षेत्रांतर्गत सरोना स्थित शराब दुकान के पास खड़ी उनकी एक्टिवा वाहन क्रमांक सीजी 04 केजे 4471 को किसी अज्ञात चोर ने चुरा लिया था। प्रार्थी की शिकायत पर, अज्ञात आरोपी के विरुद्ध थाना आमानाका में अपराध क्रमांक 178/26, धारा 305 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार, एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट और थाना आमानाका पुलिस की संयुक्त टीम ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू की। टीम ने प्रार्थी से गहन पूछताछ की और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेजों का अवलोकन किया। इसके साथ ही, अज्ञात आरोपी की तलाश के लिए मुखबिरों की भी मदद ली जा रही थी। इसी दौरान, एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट की टीम को चोरी हुई वाहन और आरोपी के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इस जानकारी के आधार पर, टीम के सदस्यों ने लक्की देवार को पकड़ा और पूछताछ करने पर उसने एक्टिवा वाहन चोरी करने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने जुगनू देवार के पुत्र, 22 वर्षीय लक्की देवार, जो ब्लॉक नंबर 14, मकान नंबर 09, बीएसयूपी कॉलोनी, सरोना, थाना डी डी नगर, रायपुर का निवासी है, को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की एक्टिवा वाहन क्रमांक सीजी 04 केजे 4471 बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 40,000/- रुपये है। आरोपी के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की गई।1
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान कानून और राष्ट्रीय एकता को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की एकता, अखंडता और सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक अधिकारों की भावना को मजबूत करने के लिए "एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान और एक कानून" का सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि जब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था होगी, तो इससे न्याय और समानता की भावना को और भी बल मिलेगा। अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए डॉ. यादव ने कहा, "देश एक है। ‘एक समान कानून’ से किसी को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान और एक कानून’ में कुछ गलत नहीं है।"1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में ध्याण मंदिर का लोकार्पण किया। वह ध्याण मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए।1
- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मनपट क्षेत्र से संबंधित दो जुड़वा भाइयों के बारे में एक जानकारी साझा की गई है। इस जानकारी के अनुसार, ये जुड़वा भाई वर्ष 2026 तक काफी प्रसिद्ध हो जाएंगे। पोस्ट में इन जुड़वा भाइयों को देखने का उल्लेख करते हुए, लोगों से एक 'लाइक' देने का आग्रह भी किया गया है।1
- पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित 'ऑपरेशन निश्चय' के तहत, रायपुर ज़िले के तिल्दा नेवरा पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के क्रम में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने सासाहोली ओवरब्रिज के नीचे से दो व्यक्तियों को 5 किलो 770 ग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹2,75,000/- है। इस कार्रवाई में कुल ₹3,46,000/- मूल्य की संपत्ति जब्त की गई, जिसमें गांजे के साथ एक होंडा साइन मोटरसाइकिल (क्रमांक CG-22- AF-6686) और एक कार्बन कंपनी का कीपैड मोबाइल फोन भी शामिल है। पुलिस को मुखबिर से विश्वसनीय सूचना मिली थी कि मोटरसाइकिल क्रमांक CG-22- AF-6686 से दो व्यक्ति एक लाल-पीले रंग के थैले में गांजा रखकर बिक्री के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए, थाना तिल्दा नेवरा पुलिस ने तत्काल कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए रेड कार्रवाई की। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया और तलाशी के दौरान उनके कब्जे से तीन सफेद पॉलीथीन पैकेट में रखा गांजा बरामद किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय हिमालय वर्मा उर्फ प्रिंस, पिता खिलावन वर्मा, निवासी इंदिरा कॉलोनी, बलौदाबाजार; और 20 वर्षीय शिव वर्मा, पिता रूपसिंह वर्मा, निवासी दशरभा रोड, बलौदाबाजार के रूप में हुई है। तिल्दा नेवरा थाने में इन आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 238/2026, धारा 20(बी) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से माननीय न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल रायपुर भेज दिया गया है। यह सराहनीय पुलिस कार्रवाई पुलिस अधीक्षक ग्रामीण रायपुर श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री प्रशांत शुक्ला तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी श्री वीरेंद्र चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में की गई। थाना प्रभारी तिल्दा नेवरा निरीक्षक रमाकांत तिवारी के नेतृत्व में उप निरीक्षक विकास देशमुख, आरक्षक महेन्द्र वर्मा, आरक्षक संदीप सिंह और किशोर शर्मा की विशेष टीम ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा 'ऑपरेशन निश्चय' के तहत अवैध नशे के कारोबार के विरुद्ध यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और ऐसे अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।1