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मध्य प्रदेश के सतना जिले की उचेहरा तहसील के पहाड़ी ग्राम पोस्ट परसमनिया गाँव में पानी की गंभीर समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ के ग्रामीण प्रतिदिन जल संकट से बुरी तरह परेशान हैं, क्योंकि गाँव में लगे नल पिछले दो साल से बंद पड़े हैं। इस स्थिति पर न तो कोई सरपंच ध्यान दे रहा है और न ही कोई सरकारी कर्मचारी। ग्रामीणों का कहना है कि चूँकि यह पूरा गाँव आदिवासी समाज का है, इसलिए कोई भी उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। लोग बताते हैं कि चुनावों के समय तो सभी नेता गाँव में आते हैं, लेकिन अब कोई उनकी सुध नहीं ले रहा। इस गंभीर पेयजल संकट के कारण गरीब लोग प्रतिदिन परेशान हो रहे हैं। इसके अलावा, बंद पड़े नलों के पास एक बड़ा गड्ढा बन गया है, जिसमें किसी भी व्यक्ति या बच्चे के गिरने का खतरा है, जिससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
MADAN RAWAT
मध्य प्रदेश के सतना जिले की उचेहरा तहसील के पहाड़ी ग्राम पोस्ट परसमनिया गाँव में पानी की गंभीर समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ के ग्रामीण प्रतिदिन जल संकट से बुरी तरह परेशान हैं, क्योंकि गाँव में लगे नल पिछले दो साल से बंद पड़े हैं। इस स्थिति पर न तो कोई सरपंच ध्यान दे रहा है और न ही कोई सरकारी कर्मचारी। ग्रामीणों का कहना है कि चूँकि यह पूरा गाँव आदिवासी समाज का है, इसलिए कोई भी उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। लोग बताते हैं कि चुनावों के समय तो सभी नेता गाँव में आते हैं, लेकिन अब कोई उनकी सुध नहीं ले रहा। इस गंभीर पेयजल संकट के कारण गरीब लोग प्रतिदिन परेशान हो रहे हैं। इसके अलावा, बंद पड़े नलों के पास एक बड़ा गड्ढा बन गया है, जिसमें किसी भी व्यक्ति या बच्चे के गिरने का खतरा है, जिससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
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- मध्य प्रदेश के सतना जिले की उचेहरा तहसील के पहाड़ी ग्राम पोस्ट परसमनिया गाँव में पानी की गंभीर समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ के ग्रामीण प्रतिदिन जल संकट से बुरी तरह परेशान हैं, क्योंकि गाँव में लगे नल पिछले दो साल से बंद पड़े हैं। इस स्थिति पर न तो कोई सरपंच ध्यान दे रहा है और न ही कोई सरकारी कर्मचारी। ग्रामीणों का कहना है कि चूँकि यह पूरा गाँव आदिवासी समाज का है, इसलिए कोई भी उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। लोग बताते हैं कि चुनावों के समय तो सभी नेता गाँव में आते हैं, लेकिन अब कोई उनकी सुध नहीं ले रहा। इस गंभीर पेयजल संकट के कारण गरीब लोग प्रतिदिन परेशान हो रहे हैं। इसके अलावा, बंद पड़े नलों के पास एक बड़ा गड्ढा बन गया है, जिसमें किसी भी व्यक्ति या बच्चे के गिरने का खतरा है, जिससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।4
- नागौद के जसो रोड स्थित रावना गेट और पटपर नाथ मंदिर के दाहिने छोर के बीच बने पार्क में 'फकीर टोली' ने एक विशेष सफाई अभियान चलाया। रविवार को निर्धारित श्रमदान दिवस के तहत सुबह 7:30 बजे जब टीम के सदस्य पार्क पहुंचे, तो उन्होंने वहां कचरे और गंदगी का अंबार देखा। पार्क में कई समस्याएँ सामने आईं, जिनमें सबसे प्रमुख था विगत मेले के दौरान खुला छोड़ा गया गेट जो आज तक बंद नहीं हुआ। बताया गया कि कुछ साल पहले नगर परिषद के कर्मचारी सुदामा ने इसी पार्क में आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद से यह पार्क उपेक्षित पड़ा है। लोग इस पार्क का उपयोग पीपल की पूजा और एकादशाह जैसे धार्मिक व संस्कारिक कार्यक्रमों के लिए करते हैं। पूर्व में नगर परिषद द्वारा रखवाई गई पानी की टंकी भी पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त होकर गायब हो चुकी है। चिंता का विषय यह भी है कि अब इस पार्क का उपयोग कुछ 'मनचले लड़के-लड़कियां' घंटों बैठकर करते हैं, और 'आवारा युवा' पटपरनाथ के पवित्र मंदिर परिसर में भी जोड़ों के साथ देखे जा रहे हैं। 'फकीर टोली' ने पार्क की सफाई के साथ-साथ मुख्य गेट को सुधारने और किनारे से लगे राउंडिंग गेट को खोलने का भी प्रयास किया। इस अभियान में नगर परिषद की कर्मचारी शकुंतला ने सहयोग दिया। टीम ने बताया कि पार्क में पीपल के पेड़ के नीचे बने क्षतिग्रस्त चबूतरे की मरम्मत और पानी की समुचित व्यवस्था की तत्काल आवश्यकता है। 'फकीर टोली' ने यह संकल्प लिया है कि वे समय-समय पर इस पार्क को व्यवस्थित, साफ-स्वच्छ और सुंदर बनाने का प्रयास करते रहेंगे। आज के श्रमदान कार्यक्रम में इंजी. प्रमोद कुमार द्विवेदी, एड. सत्यराज लोधी, अरुण कुमार सिंह, नरेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता, कालिका प्रसाद त्रिपाठी, कृष्णकांत गर्ग, बबलू दाहिया, शारदा प्रसाद मिश्रा, और मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र रजक हिलौंधा सहित कई सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। 'फकीर टोली' ने सार्वजनिक उपयोग के स्थानों की सफाई, स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने का आह्वान किया है।2
- सतना में एक अस्पताल के निरीक्षण के दौरान, फिजियोथेरेपी सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ गए हैं, जो स्वास्थ्य सेवा में एक संभावित संकट और व्यवस्थागत विफलता की ओर इशारा करते हैं। एक मरीज ने शिकायत की कि दोपहर 1:30 बजे तक उसे फिजियोथेरेपी नहीं मिली थी। हालांकि, अस्पताल प्रभारी ने बताया कि फिजियोथेरेपी का निर्धारित समय सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक है, जिससे तय समय के भीतर भी मरीज को सेवा न मिल पाने को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं।1
- मैहर जिले में नौतपा की शुरुआत होते ही भीषण गर्मी और तपिश ने लोगों को बेहाल करना शुरू कर दिया है। नौतपा के पहले ही दिन सोमवार को मैहर जिले में तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। तेज धूप और गर्म हवाओं (लू) के कारण दोपहर होते ही सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसर गया, जिससे लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम विभाग और स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को मैहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह से ही सूरज के कड़े तेवर दिखने शुरू हो गए थे, और दोपहर तक आते-आते तीखी धूप व गर्म हवाओं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। इस भीषण गर्मी और लू के चलते मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है; जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के मरीजों की संख्या में अचानक तेजी आई है। स्थानीय डॉक्टरों ने आम जनता से अपील की है कि वे इस जानलेवा गर्मी और लू से अपना बचाव करें। डॉक्टरों ने स्वास्थ्य को लेकर कई जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है, जिनमें दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बिना वजह बाहर न निकलना, थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ओआरएस घोल, नींबू पानी या छाछ का सेवन करके हाइड्रेटेड रहना, खाली पेट धूप में न निकलना, और बाहर जाते समय सूती व हल्के रंग के कपड़े पहनकर सिर को टोपी, अंगोछे या छाते से ढकना शामिल है। उन्होंने यह भी सलाह दी है कि यदि चक्कर आना, तेज सिरदर्द, उल्टी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में नौतपा के चलते तापमान में और भी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसके मद्देनजर प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। मध्य भारत न्यूज़ भी सभी नागरिकों से अपील करता है कि इस भीषण गर्मी में अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें, पक्षियों के लिए छत पर पानी रखें और सुरक्षित रहें।1
- मैहर सिविल अस्पताल में उस समय अव्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब कुछ पत्रकार अस्पताल की व्यवस्थाओं की कवरेज के लिए वहाँ पहुँचे। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ नर्सों ने पत्रकारों से न केवल ठीक ढंग से बात नहीं की, बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और वीडियो बंद करने की धमकी भी दी। पत्रकारों का कहना है कि यदि मीडिया कर्मियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, तो आम मरीजों और उनके परिजनों के साथ किस तरह का बर्ताव होता होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोग पहले से ही परेशान होते हैं, और ऐसे में कर्मचारियों का रूखा व्यवहार उनकी समस्याओं को और बढ़ा देता है। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल प्रशासन से कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार लाने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल सेवा का स्थान होता है, जहाँ मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशीलता और सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। अब यह देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कर्मचारियों को अनुशासन तथा बेहतर व्यवहार के लिए क्या निर्देश देता है।1
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- उत्तराखंड के चमोली में कंचनगंगा के ऊपर एक ग्लेशियर टूट गया है, जिससे बद्रीनाथ धाम से ठीक ऊपर पहाड़ों से बड़ी-बड़ी चट्टानें टूटकर हवा में उड़ती हुई दिखाई दीं, जिसे 'बर्फ का तूफान' बताया जा रहा है। इस घटना की वजह तेजी से बढ़ती गर्मी को बताया गया है, जिसके कारण ग्लेशियर बड़ी मात्रा में टूट रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस घटना से किसी तरह के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।1
- एक तीखे सवाल में पूछा गया है कि आखिर जनता अपने हक की लड़ाई कब तक लड़ती रहेगी, और क्या देश के नेताओं का कोई दायित्व नहीं बनता। यह सवाल सीधे तौर पर नेताओं की जवाबदेही पर उठाया गया है, जो जनता की समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़ा है, और लोकतंत्र में उनकी आवाज को उजागर करता है।1