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विजय कुमार
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- देवरिया: थाना बरहज पुलिस ने झपटमारी के मामले में 4 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 4 पीली धातु के लॉकेट, 2 कान के टॉप्स, 5000 रुपये नकद और वारदात में प्रयुक्त 2 मोटरसाइकिल बरामद की हैं। यह कार्रवाई बालू छापर रेलवे क्रॉसिंग के पास की गई। मामले में संबंधित धाराओं में बढ़ोत्तरी कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।1
- Post by विजय कुमार1
- (✍️ सरताज आलम) SIR के तहत जारी “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” (तार्किक विसंगति) नोटिस ने खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिनके पास 13 निर्धारित दस्तावेज़ों में से कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे वे पिता–पुत्री संबंध या आयु अंतर सिद्ध कर सकें। परिणामस्वरूप नोटिस का जवाब देने को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति बन गई है। क्या है समस्या? नोटिस में कई मामलों में यह उल्लेख किया गया है कि महिला और उसके पिता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर दर्शाया गया है, जिसे “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” मानते हुए प्रमाण मांगा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि— अधिकांश प्रभावित महिलाएं 50 वर्ष से अधिक आयु की हैं। उनके माता-पिता का देहांत 10–20 वर्ष पूर्व हो चुका है। मायके के कुटुंब/परिवार रजिस्टर में नाम रहा हो या न रहा हो, उसका रिकॉर्ड अब आसानी से उपलब्ध नहीं है। विवाह को 25–30 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, जिससे भाइयों के परिवार रजिस्टर अलग-अलग हो गए हैं। कई महिलाएं हाईस्कूल (10वीं) पास नहीं हैं, न ही उनके पास जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र या अन्य औपचारिक दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में पिता–पुत्री संबंध या वास्तविक आयु अंतर साबित करने के लिए आवश्यक कागजी साक्ष्य जुटाना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि की चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व दशकों में जन्म पंजीकरण की व्यवस्था उतनी सुदृढ़ नहीं थी। अधिकतर जन्म घर पर हुए और औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। विवाह के बाद महिलाओं का निवास स्थान बदल जाना और मायके के अभिलेखों तक सीमित पहुंच भी एक बड़ी बाधा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि “यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी ढांचे की ऐतिहासिक कमी का है। जिनके पास कागज़ नहीं हैं, वे अपनी पहचान और संबंध कैसे सिद्ध करें?” बढ़ती चिंता, स्पष्ट दिशा की प्रतीक्षा ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है। कई परिवारों में घबराहट का माहौल है, क्योंकि नोटिस का जवाब समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य बताया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यदि स्पष्ट दिशा-निर्देश और सरल प्रक्रिया तय नहीं की गई, तो बड़ी संख्या में महिलाएं तकनीकी कारणों से प्रभावित हो सकती हैं। यह मुद्दा केवल कागजी त्रुटि का नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ और दस्तावेज़ी व्यवस्था की ऐतिहासिक कमियों से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस संवेदनशील विषय पर क्या ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। (रिपोर्ट: सरताज आलम)1
- अलीगढ़ के सरकारी विद्यालय में छात्रा के साथ हुआ जातीय भेदभाव बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। शिक्षा संस्थान में ऐसी घटना समाज और संविधान दोनों के मूल्यों के खिलाफ है। दोषियों पर SC/ST Act के तहत तत्काल कड़ी कार्रवाई हो और पीड़िता को न्याय व सुरक्षा मिले। #Justice #StopCasteDiscrimination #SocialJustice #HumanRights #RKsocialist1
- अभी अभी सुबह हमारे पड़ोसियों के भैंस के पड़ा से 6 फुट लम्बा साँप लिपट गया। बढ़ी मुश्किल से छोड़कर भागा है।1
- कुशीनगर: प्लास्टिक के गोदाम में लगी आग लाखों का सामान जलकर राख शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका आग बुझाने में जुटी दमकल की टीम पडरौना नगर क्षेत्र की घटना1
- अकेली लड़की बनी शेरनी! ज्वेलर्स लेकर भाग रहे अपराधी को दबोचा | बिहार पुलिस पर सवाल बिहार में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। ज्वेलर्स लेकर फरार हो रहे अपराधी को एक बहादुर लड़की ने अकेले ही भिड़कर पकड़ लिया। जहां पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं कर सकी, वहीं इस युवती ने साहस दिखाते हुए आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। यह वीडियो दिखाता है कि हिम्मत और सूझबूझ से अपराधियों के हौसले कैसे पस्त किए जा सकते हैं। देखिए पूरी घटना और जानिए कैसे एक लड़की बनी हीरो। 👉 वीडियो को Like 👍 करें 👉 चैनल को Subscribe 🔔 करें 👉 अपनी राय Comment में जरूर दें #Bihar #BraveGirl #CrimeNews #ViralVideo #BiharPolice #HeroGirl #BreakingNews #IndiaNews #Courage1
- Post by Ajay Kumar1
- शराबियों के भय से राहगीरों का रास्ता चलना हुआ मुश्किल, नशे में जहां तहां किसी से भी झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं पियक्कड़। #मॉडल शॉप बरगदवा1