(✍️ सरताज आलम) SIR के तहत जारी “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” (तार्किक विसंगति) नोटिस ने खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिनके पास 13 निर्धारित दस्तावेज़ों में से कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे वे पिता–पुत्री संबंध या आयु अंतर सिद्ध कर सकें। परिणामस्वरूप नोटिस का जवाब देने को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति बन गई है। क्या है समस्या? नोटिस में कई मामलों में यह उल्लेख किया गया है कि महिला और उसके पिता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर दर्शाया गया है, जिसे “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” मानते हुए प्रमाण मांगा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि— अधिकांश प्रभावित महिलाएं 50 वर्ष से अधिक आयु की हैं। उनके माता-पिता का देहांत 10–20 वर्ष पूर्व हो चुका है। मायके के कुटुंब/परिवार रजिस्टर में नाम रहा हो या न रहा हो, उसका रिकॉर्ड अब आसानी से उपलब्ध नहीं है। विवाह को 25–30 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, जिससे भाइयों के परिवार रजिस्टर अलग-अलग हो गए हैं। कई महिलाएं हाईस्कूल (10वीं) पास नहीं हैं, न ही उनके पास जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र या अन्य औपचारिक दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में पिता–पुत्री संबंध या वास्तविक आयु अंतर साबित करने के लिए आवश्यक कागजी साक्ष्य जुटाना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि की चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व दशकों में जन्म पंजीकरण की व्यवस्था उतनी सुदृढ़ नहीं थी। अधिकतर जन्म घर पर हुए और औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। विवाह के बाद महिलाओं का निवास स्थान बदल जाना और मायके के अभिलेखों तक सीमित पहुंच भी एक बड़ी बाधा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि “यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी ढांचे की ऐतिहासिक कमी का है। जिनके पास कागज़ नहीं हैं, वे अपनी पहचान और संबंध कैसे सिद्ध करें?” बढ़ती चिंता, स्पष्ट दिशा की प्रतीक्षा ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है। कई परिवारों में घबराहट का माहौल है, क्योंकि नोटिस का जवाब समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य बताया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यदि स्पष्ट दिशा-निर्देश और सरल प्रक्रिया तय नहीं की गई, तो बड़ी संख्या में महिलाएं तकनीकी कारणों से प्रभावित हो सकती हैं। यह मुद्दा केवल कागजी त्रुटि का नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ और दस्तावेज़ी व्यवस्था की ऐतिहासिक कमियों से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस संवेदनशील विषय पर क्या ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। (रिपोर्ट: सरताज आलम)
(✍️ सरताज आलम) SIR के तहत जारी “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” (तार्किक विसंगति) नोटिस ने खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिनके पास 13 निर्धारित दस्तावेज़ों में से कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे वे पिता–पुत्री संबंध या आयु अंतर सिद्ध कर सकें। परिणामस्वरूप नोटिस का जवाब देने को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति बन गई है। क्या है समस्या? नोटिस में कई मामलों में यह उल्लेख किया गया है कि महिला और उसके पिता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर दर्शाया गया है, जिसे “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” मानते हुए प्रमाण मांगा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि— अधिकांश प्रभावित महिलाएं 50 वर्ष से अधिक आयु की हैं। उनके माता-पिता का देहांत 10–20 वर्ष पूर्व हो चुका है। मायके के कुटुंब/परिवार रजिस्टर में नाम रहा हो या न रहा हो, उसका रिकॉर्ड अब आसानी से उपलब्ध नहीं है। विवाह को 25–30 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, जिससे भाइयों के परिवार रजिस्टर अलग-अलग हो गए हैं। कई महिलाएं हाईस्कूल (10वीं) पास नहीं हैं, न ही उनके पास जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र या अन्य औपचारिक दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में पिता–पुत्री संबंध या वास्तविक आयु अंतर साबित करने के लिए आवश्यक कागजी साक्ष्य जुटाना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि की चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व दशकों में जन्म पंजीकरण की व्यवस्था उतनी सुदृढ़ नहीं थी। अधिकतर जन्म घर पर हुए और औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। विवाह के बाद महिलाओं का निवास स्थान बदल जाना और मायके के अभिलेखों तक सीमित पहुंच भी एक बड़ी बाधा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि “यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी ढांचे की ऐतिहासिक कमी का है। जिनके पास कागज़ नहीं हैं, वे अपनी पहचान और संबंध कैसे सिद्ध करें?” बढ़ती चिंता, स्पष्ट दिशा की प्रतीक्षा ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है। कई परिवारों में घबराहट का माहौल है, क्योंकि नोटिस का जवाब समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य बताया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यदि स्पष्ट दिशा-निर्देश और सरल प्रक्रिया तय नहीं की गई, तो बड़ी संख्या में महिलाएं तकनीकी कारणों से प्रभावित हो सकती हैं। यह मुद्दा केवल कागजी त्रुटि का नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ और दस्तावेज़ी व्यवस्था की ऐतिहासिक कमियों से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस संवेदनशील विषय पर क्या ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। (रिपोर्ट: सरताज आलम)
- सुकरौली | बंदिता श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत हाटा तहसील क्षेत्र के सुकरौली विकासखंड का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विकास कार्यों की हकीकत परखी। उनके अचानक पहुंचने से ब्लॉक कार्यालय में हलचल मच गई और कर्मचारियों में सक्रियता बढ़ गई। निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने सबसे पहले कार्यालय परिसर का भ्रमण कर साफ-सफाई की स्थिति देखी। उन्होंने विभिन्न रजिस्टरों और अभिलेखों की गहन जांच की तथा रिकॉर्ड को अद्यतन रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंच सके। इसके बाद बैठक कक्ष में ग्राम सचिवों, ग्राम विकास अधिकारियों, लेखपालों और अन्य संबंधित कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। सीडीओ ने बताया कि तहसील क्षेत्र में यह अभियान तेजी से चल रहा है और अब तक लगभग 80 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। उन्होंने पंचायत सचिवों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और लेखपालों द्वारा पंचायत भवनों में बैठकर किसानों का पंजीकरण कराने के प्रयासों की सराहना की। सीडीओ ने निर्देश दिया कि शेष पात्र किसानों का पंजीकरण शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि कोई भी किसान सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों के जर्जर आवास का मुद्दा भी सामने आया, जिस पर उन्होंने जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। अंत में उन्होंने समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य निष्पादन पर जोर देते हुए कहा कि सुकरौली विकासखंड में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।1
- कुशीनगर पडरौना प्लास्टिक के गोदाम में लगी भी सड़क हुआ लाखों का नुकसान पूरा मामला वीडियो में देखें ।। #kushinagar #hatakushingar #news #newskushinagar #newsupdate1
- (✍️ सरताज आलम) SIR के तहत जारी “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” (तार्किक विसंगति) नोटिस ने खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिनके पास 13 निर्धारित दस्तावेज़ों में से कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे वे पिता–पुत्री संबंध या आयु अंतर सिद्ध कर सकें। परिणामस्वरूप नोटिस का जवाब देने को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति बन गई है। क्या है समस्या? नोटिस में कई मामलों में यह उल्लेख किया गया है कि महिला और उसके पिता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर दर्शाया गया है, जिसे “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” मानते हुए प्रमाण मांगा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि— अधिकांश प्रभावित महिलाएं 50 वर्ष से अधिक आयु की हैं। उनके माता-पिता का देहांत 10–20 वर्ष पूर्व हो चुका है। मायके के कुटुंब/परिवार रजिस्टर में नाम रहा हो या न रहा हो, उसका रिकॉर्ड अब आसानी से उपलब्ध नहीं है। विवाह को 25–30 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, जिससे भाइयों के परिवार रजिस्टर अलग-अलग हो गए हैं। कई महिलाएं हाईस्कूल (10वीं) पास नहीं हैं, न ही उनके पास जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक प्रमाणपत्र या अन्य औपचारिक दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में पिता–पुत्री संबंध या वास्तविक आयु अंतर साबित करने के लिए आवश्यक कागजी साक्ष्य जुटाना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि की चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व दशकों में जन्म पंजीकरण की व्यवस्था उतनी सुदृढ़ नहीं थी। अधिकतर जन्म घर पर हुए और औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। विवाह के बाद महिलाओं का निवास स्थान बदल जाना और मायके के अभिलेखों तक सीमित पहुंच भी एक बड़ी बाधा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि “यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी ढांचे की ऐतिहासिक कमी का है। जिनके पास कागज़ नहीं हैं, वे अपनी पहचान और संबंध कैसे सिद्ध करें?” बढ़ती चिंता, स्पष्ट दिशा की प्रतीक्षा ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है। कई परिवारों में घबराहट का माहौल है, क्योंकि नोटिस का जवाब समय सीमा के भीतर देना अनिवार्य बताया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यदि स्पष्ट दिशा-निर्देश और सरल प्रक्रिया तय नहीं की गई, तो बड़ी संख्या में महिलाएं तकनीकी कारणों से प्रभावित हो सकती हैं। यह मुद्दा केवल कागजी त्रुटि का नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ और दस्तावेज़ी व्यवस्था की ऐतिहासिक कमियों से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस संवेदनशील विषय पर क्या ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। (रिपोर्ट: सरताज आलम)1
- कुशीनगर: प्लास्टिक के गोदाम में लगी आग लाखों का सामान जलकर राख शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका आग बुझाने में जुटी दमकल की टीम पडरौना नगर क्षेत्र की घटना1
- अभी अभी सुबह हमारे पड़ोसियों के भैंस के पड़ा से 6 फुट लम्बा साँप लिपट गया। बढ़ी मुश्किल से छोड़कर भागा है।1
- जिला देवरिया दिव्या मित्तल, आईएएस, डीएम देवरिया ने बच्चों के लिए अंग्रेज़ी सीखना सरल और रोचक बनाने हेतु Kiki English Mobile App विकसित की है। यह app बच्चों को अंग्रेज़ी सुनने, समझने और दोहराने के माध्यम से आत्मविश्वास के साथ बोलना सिखाती है। इससे वे सहज रूप से अंग्रेज़ी में संवाद करना सीख सकते हैं आज ही Google Playstore से free डाउनलोड करें और अपने बच्चे को आत्मविश्वास के साथ अंग्रेज़ी बोलना सिखाएँ: https://play.google.com/store/apps/details?id=in.kikienglish.app1
- खड्डा कस्बे में भव्य श्याम महोत्सव, निकली विशाल निशान यात्रा** खड्डा कस्बे में मारवाड़ी युवा मंच एवं राधा महिला मंडल के तत्वाधान में भव्य श्याम महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव के दौरान श्रद्धा और उत्साह के साथ विशाल निशान यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर बाबा श्याम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। निशान यात्रा में भक्तगण बाबा श्याम के जयकारों के साथ नगर भ्रमण करते हुए शामिल हुए। पूरे कस्बे का वातावरण भक्ति संगीत और भजनों से भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर अध्यक्ष संगीता वर्मा, सभासद प्रतिनिधि प्रदीप गुप्ता, व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष संतोष जायसवाल, पूर्व अध्यक्ष राजू तुलस्यान, अभिषेक शाही एवं अनूप मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने बाबा श्याम का आशीर्वाद प्राप्त कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। श्रद्धालुओं में महोत्सव को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।2
- अकेली लड़की बनी शेरनी! ज्वेलर्स लेकर भाग रहे अपराधी को दबोचा | बिहार पुलिस पर सवाल बिहार में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। ज्वेलर्स लेकर फरार हो रहे अपराधी को एक बहादुर लड़की ने अकेले ही भिड़कर पकड़ लिया। जहां पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं कर सकी, वहीं इस युवती ने साहस दिखाते हुए आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। यह वीडियो दिखाता है कि हिम्मत और सूझबूझ से अपराधियों के हौसले कैसे पस्त किए जा सकते हैं। देखिए पूरी घटना और जानिए कैसे एक लड़की बनी हीरो। 👉 वीडियो को Like 👍 करें 👉 चैनल को Subscribe 🔔 करें 👉 अपनी राय Comment में जरूर दें #Bihar #BraveGirl #CrimeNews #ViralVideo #BiharPolice #HeroGirl #BreakingNews #IndiaNews #Courage1