*अब भदनपुर दक्षिण के भट्टा चूना में भी युद्ध स्तर पर खनन हुआ चालू* *हैवी ब्लास्टिंग और दर्जनों ट्रकों की गडगहाहट से दहला वन क्षेत्र* पहाड़ अंचल को मैहर के खनन कारोबारियों ने हब बना डाला, आदिवासियो के जल, जंगल, जमीन और जानवरों पर बेरहमी से खनन के माध्यम से तहस नहस करने में पूरी क्रूरता से आमादा है। जिसमे प्रशासनिक अमला पूरी तरह से इन कारोबारियों के दरवाजों पर मूक दरबान की में नजर आ रहे हैं। क्या वैध क्या अवैध सब इस मौजूदा प्रशासनिक सिस्टम में सब पाक साफ है अभी आदिवासी बहुल इलाके अमगार झिर्राहट केजेएस के खदानों के चलते मिट्टी पानी हवा के जहरीले वातावरण का दंश झेलते हुए गांव से पलायन को मजबुर हो रहा था की तभी दोनो गांव के बीच चूना भट्टा में खुली खदान ने भी हैवी ब्लास्टिंग और युद्ध स्तर पर उतारे दर्जनो ट्रक की गडगहाहट ने आदिवासियो के ऊपर हो रहे अत्याचार पर एक और कील ठोक दी। जहां आदिवासी एक घर बना ले तो फारेस्ट विभाग अपनी ज़मीन बताने पहुंच जाता है लेकिन वही एक खनन कारोबारी जब दर्जनों एकड़ में उत्खनन कार्य करता है तो वही फारेस्ट विभाग नतमस्तक होकर नदारद रहता है। ऐसा ही नजारा चूना भट्टा खदान में भी देखा जा रहा है। आखिर आदिवासियो और उनके जल जंगल जमीन जानवर को सुरक्षित रखने का जिम्मा कौन सी सरकार और प्रशासनीक सिस्टम का है या फिर उन्हे क्षेत्र से पूर्णत बेदखल करके ही दम लिया जाएगा।
*अब भदनपुर दक्षिण के भट्टा चूना में भी युद्ध स्तर पर खनन हुआ चालू* *हैवी ब्लास्टिंग और दर्जनों ट्रकों की गडगहाहट से दहला वन क्षेत्र* पहाड़ अंचल को मैहर के खनन कारोबारियों ने हब बना डाला, आदिवासियो के जल, जंगल, जमीन और जानवरों पर बेरहमी से खनन के माध्यम से तहस नहस करने में पूरी क्रूरता से आमादा है। जिसमे प्रशासनिक अमला पूरी तरह से इन कारोबारियों के दरवाजों पर मूक दरबान की में नजर आ रहे हैं। क्या वैध क्या अवैध सब इस मौजूदा प्रशासनिक सिस्टम में सब पाक साफ है अभी आदिवासी बहुल इलाके अमगार झिर्राहट केजेएस के खदानों के चलते मिट्टी पानी हवा के जहरीले वातावरण का दंश झेलते हुए गांव से पलायन को मजबुर हो रहा था की तभी दोनो गांव के बीच चूना भट्टा में खुली खदान ने भी हैवी ब्लास्टिंग और युद्ध स्तर पर उतारे दर्जनो ट्रक की गडगहाहट ने आदिवासियो के ऊपर हो रहे अत्याचार पर एक और कील ठोक दी। जहां आदिवासी एक घर बना ले तो फारेस्ट विभाग अपनी ज़मीन बताने पहुंच जाता है लेकिन वही एक खनन कारोबारी जब दर्जनों एकड़ में उत्खनन कार्य करता है तो वही फारेस्ट विभाग नतमस्तक होकर नदारद रहता है। ऐसा ही नजारा चूना भट्टा खदान में भी देखा जा रहा है। आखिर आदिवासियो और उनके जल जंगल जमीन जानवर को सुरक्षित रखने का जिम्मा कौन सी सरकार और प्रशासनीक सिस्टम का है या फिर उन्हे क्षेत्र से पूर्णत बेदखल करके ही दम लिया जाएगा।
- *अब भदनपुर दक्षिण के भट्टा चूना में भी युद्ध स्तर पर खनन हुआ चालू* *हैवी ब्लास्टिंग और दर्जनों ट्रकों की गडगहाहट से दहला वन क्षेत्र* पहाड़ अंचल को मैहर के खनन कारोबारियों ने हब बना डाला, आदिवासियो के जल, जंगल, जमीन और जानवरों पर बेरहमी से खनन के माध्यम से तहस नहस करने में पूरी क्रूरता से आमादा है। जिसमे प्रशासनिक अमला पूरी तरह से इन कारोबारियों के दरवाजों पर मूक दरबान की में नजर आ रहे हैं। क्या वैध क्या अवैध सब इस मौजूदा प्रशासनिक सिस्टम में सब पाक साफ है अभी आदिवासी बहुल इलाके अमगार झिर्राहट केजेएस के खदानों के चलते मिट्टी पानी हवा के जहरीले वातावरण का दंश झेलते हुए गांव से पलायन को मजबुर हो रहा था की तभी दोनो गांव के बीच चूना भट्टा में खुली खदान ने भी हैवी ब्लास्टिंग और युद्ध स्तर पर उतारे दर्जनो ट्रक की गडगहाहट ने आदिवासियो के ऊपर हो रहे अत्याचार पर एक और कील ठोक दी। जहां आदिवासी एक घर बना ले तो फारेस्ट विभाग अपनी ज़मीन बताने पहुंच जाता है लेकिन वही एक खनन कारोबारी जब दर्जनों एकड़ में उत्खनन कार्य करता है तो वही फारेस्ट विभाग नतमस्तक होकर नदारद रहता है। ऐसा ही नजारा चूना भट्टा खदान में भी देखा जा रहा है। आखिर आदिवासियो और उनके जल जंगल जमीन जानवर को सुरक्षित रखने का जिम्मा कौन सी सरकार और प्रशासनीक सिस्टम का है या फिर उन्हे क्षेत्र से पूर्णत बेदखल करके ही दम लिया जाएगा।1
- *संकल्प से समाधान अभियान अंतर्गत भिण्ड जिले खण्ड स्तरीय शिविरों का हुआ आयोजन* *शिविरों में योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी, पात्र हितग्राहियों को किया गया हितलाभ वितरण*1
- संकल्प से समाधान अभियान अंतर्गत भिण्ड जिले खण्ड स्तरीय शिविरों का हुआ आयोजन शिविरों में योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी, पात्र हितग्राहियों को किया गया हितलाभ वितरण1
- तीन बच्चों की मां पड़ोसी प्रेमी संग फरार, पति ने लगाई कलेक्टर से गुहार1
- भिंड: डॉ गोविंद सिंह के समर्थन में बोले करणी सेना प्रदेश अध्यक्ष संतोष भदौरिया!! वर्तमान लहार विधायक अंबरीश शर्मा से जाताया आक्रोश....1
- अम्बाह नगर के समींप गांव जालौनी, खजूरी, थरा, नावली के मध्य क्षेत्र मां नंगपुरा वाली माता मंदिर बहुत प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है जहां क्षेत्रीय लोगों का आस्था का केंद्र है माता मंदिर में भक्तों का जमावड़ा नवरात्रि पर लगा रहता है प्रांगण मां भगवती और भैरौं बाबा का मुख्य स्थान है साथ ही हनुमान जी, शिव जी आदि देव विराजमान हैं ऐसा कहा जाता है कि मां नंगपुरा के दरवार में भक्तों की जो मनत होती है वह पूरी करती है यहां पहुंच मार्ग अम्बाह से गांव खजूरी होकर, गांव जालौनी होकर अम्बाह- पोरसा रोड ग्राम पंचायत -थरा होकर , नावली गांव होकर भी पहुंच सकते हैं, इसीलिए यह क्षेत्र का प्रसिद्ध प्राचीन मध्य स्थल है1
- ग्वालियर में अल सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. हादसे में पांच लोगो की मौके पर ही मौत हो गई.हादसा थाठीपुर क्षेत्र के परशुराम चौराहे की हैँ, सभी लोग ऑटो में सवार होकर शीतला माता के दर्शन कर लौट रहे थे. तभी तेज रफ्तार स्कार्पियो ने फोटो को अपनी चपेट में ले लिया ऑटो के पड़खच्चे उड़ गए.ऑटो में चालक सहित नो लोग सवार थे.सभी लोग एक ही परिवार के बताये जा रहे हैँ.मरने वालो में दो महिला तीन पुरुष शामिल हैं.वही घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं.4
- *अब भदनपुर दक्षिण के भट्टा चूना में भी युद्ध स्तर पर खनन हुआ चालू* *हैवी ब्लास्टिंग और दर्जनों ट्रकों की गडगहाहट से दहला वन क्षेत्र* पहाड़ अंचल को मैहर के खनन कारोबारियों ने हब बना डाला, आदिवासियो के जल, जंगल, जमीन और जानवरों पर बेरहमी से खनन के माध्यम से तहस नहस करने में पूरी क्रूरता से आमादा है। जिसमे प्रशासनिक अमला पूरी तरह से इन कारोबारियों के दरवाजों पर मूक दरबान की में नजर आ रहे हैं। क्या वैध क्या अवैध सब इस मौजूदा प्रशासनिक सिस्टम में सब पाक साफ है अभी आदिवासी बहुल इलाके अमगार झिर्राहट केजेएस के खदानों के चलते मिट्टी पानी हवा के जहरीले वातावरण का दंश झेलते हुए गांव से पलायन को मजबुर हो रहा था की तभी दोनो गांव के बीच चूना भट्टा में खुली खदान ने भी हैवी ब्लास्टिंग और युद्ध स्तर पर उतारे दर्जनो ट्रक की गडगहाहट ने आदिवासियो के ऊपर हो रहे अत्याचार पर एक और कील ठोक दी। जहां आदिवासी एक घर बना ले तो फारेस्ट विभाग अपनी ज़मीन बताने पहुंच जाता है लेकिन वही एक खनन कारोबारी जब दर्जनों एकड़ में उत्खनन कार्य करता है तो वही फारेस्ट विभाग नतमस्तक होकर नदारद रहता है। ऐसा ही नजारा चूना भट्टा खदान में भी देखा जा रहा है। आखिर आदिवासियो और उनके जल जंगल जमीन जानवर को सुरक्षित रखने का जिम्मा कौन सी सरकार और प्रशासनीक सिस्टम का है या फिर उन्हे क्षेत्र से पूर्णत बेदखल करके ही दम लिया जाएगा।1