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अशोकनगर जिले की शाढ़ौरा तहसील में इस समय महंगाई की भीषण मार पड़ रही है, जिससे आम जनता बुरी तरह परेशान है। सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन सरकार का इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं है। मौजूदा स्थिति यह है कि एक पॉलीथीन में ₹200 तक की सब्जियां आती हैं, जबकि लोगों की आय बहुत कम है। इस महंगाई के कारण आमजन की थाली से सब्जियां लगभग गायब हो चुकी हैं, और सरकार को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देने की सख्त आवश्यकता है।
Devesh Ojha patrakaar
अशोकनगर जिले की शाढ़ौरा तहसील में इस समय महंगाई की भीषण मार पड़ रही है, जिससे आम जनता बुरी तरह परेशान है। सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन सरकार का इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान नहीं है। मौजूदा स्थिति यह है कि एक पॉलीथीन में ₹200 तक की सब्जियां आती हैं, जबकि लोगों की आय बहुत कम है। इस महंगाई के कारण आमजन की थाली से सब्जियां लगभग गायब हो चुकी हैं, और सरकार को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देने की सख्त आवश्यकता है।
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- विदिशा जिले के पीपलखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जब जहरीला पदार्थ खाने के बाद एक युवक को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया और मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। जानकारी के अनुसार, पीपलखेड़ा निवासी सत्यम केवट की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल लाया गया, जहाँ मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालांकि, डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण परिजनों को काफी चिंता का सामना करना पड़ा। परिजनों ने बताया कि मरीज काफी देर तक डॉक्टर का इंतजार करता रहा। बाद में अस्पताल कर्मचारियों ने जानकारी दी कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भोजन के लिए बाहर गई थीं। मरीज की हालत गंभीर होने के कारण उसे 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल विदिशा रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि गंभीर मरीजों के लिए समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे, तो ऐसी स्थितियाँ मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।4
- सुरक्षा के मद्देनजर, यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगाए जाने चाहिए। इस पहल को सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।1
- Shivpuri jile ke khaniyadhana tahsil mein shukrawar ko heart ke doaran lagi bheed jfh hbe h bgd dh1
- बीना में राय गैस एजेंसी के खिलाफ उपभोक्ताओं का गुस्सा अब प्रशासन तक पहुँच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता दशरथ अहिरवार के नेतृत्व में उपभोक्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बीना, जिला सागर के नाम नायब तहसीलदार हेमराज मेहर को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन राय गैस एजेंसी के प्रति उपभोक्ताओं के तीव्र आक्रोश को दर्शाता है।1
- मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित जिला अस्पताल में गुरुवार रात 9:40 बजे एक प्रसूता की डिलीवरी अस्पताल के मुख्य गेट पर ही हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि डिलीवरी के बाद नवजात शिशु लगभग 25 मिनट तक तड़पता रहा। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्चे के जन्म के बाद इतनी देर तक कोई भी डॉक्टर या नर्स उसे देखने नहीं पहुंचा। बाद में गंभीर हालत में नवजात को आईसीयू में भर्ती कराया गया।4
- एसपी श्रीमती हितिका वासल ने सभी कोचिंग संचालकों से अपील की है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षित शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से स्थापित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन और पुलिस विद्यार्थियों की सुरक्षित शिक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।1
- कोलकाता में प्रदेश कांग्रेस के मुख्यालय में शुक्रवार को उस समय चरम तनाव की स्थिति बन गई, जब पूर्व तृणमूल पार्षद और बोरो चेयरमैन रेहाना खातून के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दफ्तर के भीतर ही रेहाना खातून की ओर अंडे फेंके जाने की शिकायत की गई, वहीं प्रदर्शनकारियों और अन्य उपस्थित कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी बढ़कर हाथापाई तक पहुँच गई। जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 44 की पूर्व तृणमूल पार्षद रेहाना खातून औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रदेश कांग्रेस दफ्तर पहुंची थीं। उनके शामिल होने की खबर सामने आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं के एक धड़े ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने रेहाना खातून के शामिल होने के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रेहाना खातून विभिन्न मामलों में गिरफ्तारी से बचने के लिए कांग्रेस में शामिल हो रही हैं। उनका दावा था कि ऐसे नेताओं को पार्टी में शामिल करने से कांग्रेस की छवि खराब होगी, और इसी कारण वे उनके शामिल होने का कड़ा विरोध कर रहे थे। हालांकि, रेहाना खातून के खिलाफ लगे आरोपों या प्रदर्शनकारियों के दावों की कोई आधिकारिक या न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल पर कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की और हाथापाई का माहौल रहा, जिससे पार्टी दफ्तर के अंदर भारी अव्यवस्था फैल गई और कार्यकर्ताओं में तनाव व्याप्त हो गया। बाद में, वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई। इस घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है, जहाँ विपक्षी खेमे के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषक भी इस मामले पर नजर रख रहे हैं। घटना के बाद भी प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में तनाव बना रहा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। राजनीतिक हलकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेहाना खातून के शामिल होने से उत्पन्न यह विवाद आगामी दिनों में राज्य कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को कैसे प्रभावित करेगा।1