व्यंग्य : राशन का एटीएम और सेल्समैन का भविष्य सुनील गुप्ता केसला रोड सीतापुर सरकार का सपना बड़ा है—अब राशन की दुकान पर लाइन नहीं लगेगी। राशन भी एटीएम से निकलेगा। मशीन में कार्ड लगाइए, बटन दबाइए और उम्मीद रखिए कि चावल, शक्कर और चना नीचे से निकल आएगा। विचार सुनने में आधुनिक है। आखिर जब पैसा एटीएम से निकल सकता है तो राशन क्यों नहीं? लेकिन इस महान आधुनिकता के रास्ते में कुछ छोटे-छोटे सवाल खड़े हैं। पहला सवाल उन राशन दुकान संचालकों का है, जो आज भी अपने कमीशन और मेहनत के हिसाब से संतुष्ट नहीं हैं। दुकान चलाने से लेकर हितग्राहियों को राशन देने तक की जिम्मेदारी उठाने वाले इन लोगों का भविष्य राशन एटीएम आने के बाद क्या होगा? सरकार कह सकती है—“चिंता मत करो, तकनीक रोजगार छीनती नहीं, रोजगार बदलती है।” लेकिन यह समझाने के लिए शायद उस दुकानदार को पहले बताया जाए कि वह बदले हुए रोजगार में क्या करेगा! अभी तक राशन दुकान संचालक को लोग जानते हैं। राशन लेने के लिए उसके पास आते हैं। कभी अंगूठा नहीं लगता तो वह देखता है, मशीन नहीं चलती तो वह परेशान होता है, सर्वर डाउन होता है तो वह लोगों को समझाता है। कल को एटीएम लग जाएगा। हितग्राही आएगा, कार्ड लगाएगा। मशीन बोलेगी—“सर्वर व्यस्त है।” हितग्राही बोलेगा—“राशन?” मशीन बोलेगी—“कृपया कुछ देर बाद प्रयास करें।” और अगर उस दिन चावल ही उपलब्ध नहीं हुआ तो? मशीन शायद बड़े प्यार से कहेगी— “आपका राशन स्वीकृत है, लेकिन स्टॉक उपलब्ध नहीं है। कृपया अगले महीने पुनः प्रयास करें।” यहीं से दूसरा बड़ा सवाल पैदा होता है। जब कभी शक्कर नहीं होती, कभी चना घट जाता है और कभी चावल का स्टॉक ही कम पड़ जाता है, तब राशन का एटीएम कितना सफल होगा? एटीएम लगाने से राशन पैदा तो नहीं होगा! जिस तरह बैंक के एटीएम में पैसा खत्म होने पर मशीन नोट नहीं छापती, उसी तरह राशन एटीएम में चावल खत्म होने पर मशीन शायद खेत में जाकर धान नहीं काटेगी। सरकार तकनीक ला रही है, यह अच्छी बात है। पारदर्शिता होनी चाहिए, भ्रष्टाचार कम होना चाहिए और हितग्राही को उसका पूरा राशन मिलना चाहिए। लेकिन तकनीक के साथ राशन की नियमित उपलब्धता और उससे जुड़े लोगों के भविष्य की गारंटी भी जरूरी है। क्योंकि सवाल सिर्फ मशीन का नहीं है। सवाल उस व्यक्ति का भी है जो आज राशन दुकान के भरोसे अपने परिवार का खर्च चला रहा है। अगर कल मशीन राशन बांटेगी तो दुकानदार क्या बांटेगा? अपना बायोडाटा? और सबसे बड़ा सवाल— सरकार राशन को एटीएम बनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि कुछ दिनों बाद गरीब आदमी एटीएम के सामने खड़ा होकर मशीन से पूछे— “मैडम, चावल तो नहीं मिला… कम से कम रोजगार ही निकाल दीजिए!” मशीन शायद जवाब दे— “क्षमा कीजिए, यह सुविधा आपके कार्ड में उपलब्ध नहीं है।” तकनीक जरूरी है, लेकिन तकनीक के नाम पर इंसान को बेकार कर देना विकास नहीं कहलाता। राशन का एटीएम जरूर लगाइए, लेकिन उससे पहले यह तय कीजिए कि मशीन के पीछे खड़े इंसान का भविष्य कौन चलाएगा। — सुनील गुप्ता
व्यंग्य : राशन का एटीएम और सेल्समैन का भविष्य सुनील गुप्ता केसला रोड सीतापुर सरकार का सपना बड़ा है—अब राशन की दुकान पर लाइन नहीं लगेगी। राशन भी एटीएम से निकलेगा। मशीन में कार्ड लगाइए, बटन दबाइए और उम्मीद रखिए कि चावल, शक्कर और चना नीचे से निकल आएगा। विचार सुनने में आधुनिक है। आखिर जब पैसा एटीएम से निकल सकता है तो राशन क्यों नहीं? लेकिन इस महान आधुनिकता के रास्ते में कुछ छोटे-छोटे सवाल खड़े हैं। पहला सवाल उन राशन दुकान संचालकों का है, जो आज भी अपने कमीशन और मेहनत के हिसाब से संतुष्ट नहीं हैं। दुकान चलाने से लेकर हितग्राहियों को राशन देने तक की जिम्मेदारी उठाने वाले इन लोगों का भविष्य राशन एटीएम आने के बाद क्या होगा? सरकार कह सकती है—“चिंता मत करो, तकनीक रोजगार छीनती नहीं, रोजगार बदलती है।” लेकिन यह समझाने के लिए शायद उस दुकानदार को पहले बताया जाए कि वह बदले हुए रोजगार में क्या करेगा! अभी तक राशन दुकान संचालक को लोग जानते हैं। राशन लेने के लिए उसके पास आते हैं। कभी अंगूठा नहीं लगता तो वह देखता है, मशीन नहीं चलती तो वह परेशान होता है, सर्वर डाउन होता है तो वह लोगों को समझाता है। कल को एटीएम लग जाएगा। हितग्राही आएगा, कार्ड लगाएगा। मशीन बोलेगी—“सर्वर व्यस्त है।” हितग्राही बोलेगा—“राशन?” मशीन बोलेगी—“कृपया कुछ देर बाद प्रयास करें।” और अगर उस दिन चावल ही उपलब्ध नहीं हुआ तो? मशीन शायद बड़े प्यार से कहेगी— “आपका राशन स्वीकृत है, लेकिन स्टॉक उपलब्ध नहीं है। कृपया अगले महीने पुनः प्रयास करें।” यहीं से दूसरा बड़ा सवाल पैदा होता है। जब कभी शक्कर नहीं होती, कभी चना घट जाता है और कभी चावल का स्टॉक ही कम पड़ जाता है, तब राशन का एटीएम कितना सफल होगा? एटीएम लगाने से राशन पैदा तो नहीं होगा! जिस तरह बैंक के एटीएम में पैसा खत्म होने पर मशीन नोट नहीं छापती, उसी तरह राशन एटीएम में चावल खत्म होने पर मशीन शायद खेत में जाकर धान नहीं काटेगी। सरकार तकनीक ला रही है, यह अच्छी बात है। पारदर्शिता होनी चाहिए, भ्रष्टाचार कम होना चाहिए और हितग्राही को उसका पूरा राशन मिलना चाहिए। लेकिन तकनीक के साथ राशन की नियमित उपलब्धता और उससे जुड़े लोगों के भविष्य की गारंटी भी जरूरी है। क्योंकि सवाल सिर्फ मशीन का नहीं है। सवाल उस व्यक्ति का भी है जो आज राशन दुकान के भरोसे अपने परिवार का खर्च चला रहा है। अगर कल मशीन राशन बांटेगी तो दुकानदार क्या बांटेगा? अपना बायोडाटा? और सबसे बड़ा सवाल— सरकार राशन को एटीएम बनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि कुछ दिनों बाद गरीब आदमी एटीएम के सामने खड़ा होकर मशीन से पूछे— “मैडम, चावल तो नहीं मिला… कम से कम रोजगार ही निकाल दीजिए!” मशीन शायद जवाब दे— “क्षमा कीजिए, यह सुविधा आपके कार्ड में उपलब्ध नहीं है।” तकनीक जरूरी है, लेकिन तकनीक के नाम पर इंसान को बेकार कर देना विकास नहीं कहलाता। राशन का एटीएम जरूर लगाइए, लेकिन उससे पहले यह तय कीजिए कि मशीन के पीछे खड़े इंसान का भविष्य कौन चलाएगा। — सुनील गुप्ता
- उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में मंगलवार को समाहरणालय में साप्ताहिक जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे आमजनों ने उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन सौंपे। उपायुक्त ने बारी-बारी से लोगों की समस्याओं को सुना तथा संबंधित पदाधिकारियों को मामलों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। गुमला। उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में मंगलवार को समाहरणालय में साप्ताहिक जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे आमजनों ने उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन सौंपे। उपायुक्त ने बारी-बारी से लोगों की समस्याओं को सुना तथा संबंधित पदाधिकारियों को मामलों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। जन शिकायत निवारण दिवस में प्राप्त आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों के समाधान में अनावश्यक विलंब न हो तथा पात्र मामलों में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की जाए। जन शिकायत निवारण दिवस में राशन, पेंशन, भूमि विवाद, पारिवारिक एवं आपसी विवाद, रोजगार तथा शिक्षा से संबंधित विभिन्न मामले सामने आए। रायडीह प्रखंड से सेवानिवृत्त अंचल अधिकारी श्रीकान्त लाल माँझी ने पेंशन से संबंधित समस्या को लेकर आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति के उपरांत आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए जाने के बावजूद पेंशन संबंधी मामला लंबित है। उन्होंने संबंधित कार्यालय से आवश्यक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने हेतु कार्रवाई का अनुरोध किया। उपायुक्त ने मामले में संबंधित पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। शिक्षा एवं विद्यार्थी विकास के क्षेत्र में कार्यरत संस्था हर्बियोनेक्सिस फाउंडेशन द्वारा जिले के विभिन्न विद्यालयों में शैक्षणिक ओलंपियाड परीक्षा एवं छात्रवृत्ति कार्यक्रम आयोजित करने के संबंध में आवेदन दिया गया। संस्था द्वारा प्रतिभावान एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने तथा विज्ञान, गणित एवं सामान्य ज्ञान के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। उपायुक्त ने संबंधित विभाग को आवेदन का नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। गुमला प्रखंड के राजस्व ग्राम पुगू के ग्रामीणों द्वारा करमडीपा क्षेत्र में संचालित एक फैक्ट्री से संबंधित शिकायत उपायुक्त के समक्ष रखी गई। ग्रामीणों ने फैक्ट्री से निकलने वाले रसायन के कारण आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण एवं जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताते हुए मामले की जांच की मांग की। साथ ही फैक्ट्री के समीप स्थित पारंपरिक एवं धार्मिक महत्व के करम वृक्ष के संरक्षण का भी अनुरोध किया गया। उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को स्थल जांच एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। टोटो प्रखंड के छोटा खटंगा निवासी लेदा उराँव द्वारा पारिवारिक भूमि से संबंधित समस्या को लेकर आवेदन दिया गया। वहीं, गुमला प्रखंड के छोटालोरो निवासी सोना देवी ने अपने हिस्से की भूमि पर निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न किए जाने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि भूमि के बंटवारे के बावजूद निर्माण कार्य में आपत्ति की जा रही है। उपायुक्त ने दोनों मामलों में संबंधित पदाधिकारियों को अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान प्राप्त अन्य आवेदनों को भी संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया। जिला प्रशासन द्वारा आमजनों से अपील की गई कि वे अपनी समस्याओं एवं शिकायतों को जन शिकायत निवारण दिवस के माध्यम से प्रशासन के समक्ष रखें, ताकि मामलों का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जा सके।4
- गर्लफ्रेंड ने सफेद कार पर किया था 3400 बार किस! पुलिस ने लगवाया पोछा एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे देखकर पुलिस भी चौंक गई है. दरअसल एक युवक की कार पर 3400 किसिंग के निशान मिले. इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने 5500 रुपये का चालान काट दिया है.1
- शराबी शिक्षकों के शराब पीकर स्कूल पहुंचने का सिलसिला जारी वीडियो हो रहा वायरल #LatestNews #trendingreelsvideo1
- धर्मजयगढ़ सहित जिले में ईद-ए-मिलाद पर्व को लेकर शांति समिति की बैठक,पर्व को एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील।1
- वायरल वीडियो के बाद नेतरहाट में शराब बिक्री मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई, जांच तेज* रामप्रवेश गुप्ता *प्रतिबंध के बावजूद शराब उपलब्धता और मनमानी कीमत वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप, कुछ दिन पहले भी हो चुकी है प्रशासनिक कार्रवाई* महुआडांड़। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नेतरहाट में प्रतिबंध के बावजूद कथित रूप से शराब उपलब्ध कराने और पर्यटकों से मनमानी कीमत वसूलने का मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, इस मामले को लेकर कुछ दिन पहले ही प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद शराब की कथित उपलब्धता से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वायरल वीडियो में नेतरहाट बाजार की एक दुकान में शराब के विभिन्न ब्रांड उपलब्ध होने और उनकी कीमत निर्धारित दर से अधिक बताए जाने की बातचीत सामने आती है। वीडियो में एक शराब ब्रांड की कीमत 800 रुपये और दूसरे ब्रांड की कीमत 600 रुपये बताई जा रही है। वहीं, कुछ अन्य ब्रांड उपलब्ध होने की बात भी बातचीत में सामने आती है। स्थानीय स्तर पर पर्यटकों की ओर से शिकायत किए जाने की बात सामने आई है कि नेतरहाट में शराब उपलब्ध कराने के नाम पर निर्धारित कीमत से काफी अधिक राशि वसूली जाती है। आरोप है कि करीब 550 रुपये मूल्य की शराब की बोतल के लिए 800 रुपये तक लिए जाते हैं। यानी एक बोतल पर करीब 250 रुपये अधिक वसूले जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो में सामने आए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। *कुछ दिन पहले हो चुकी है प्रशासनिक कार्रवाई* गौरतलब है कि शराब की अवैध बिक्री से संबंधित शिकायतों के बाद कुछ दिन पहले प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने नेतरहाट में छापेमारी कर कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान अवैध शराब बरामद होने की बात सामने आई थी और संबंधित मामले में कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।पूर्व में कार्रवाई होने के बावजूद अब सोशल मीडिया पर शराब की कथित उपलब्धता और अधिक कीमत वसूली से संबंधित वीडियो वायरल होने से सवाल उठ रहे हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में शराब आखिर पहुंच कैसे रही है। *प्रशासन की नजर, जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट* वायरल वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच के दौरान यह पता लगाने की जरूरत होगी कि वीडियो में लगाए गए आरोप कितने सही हैं, शराब की कथित आपूर्ति कहां से हो रही है और पर्यटकों से निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायत में कितनी सच्चाई है।स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नेतरहाट एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहां ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना जरूरी है, ताकि पर्यटकों के बीच गलत संदेश न जाए।1
- 🚨 आदिवासी छात्राओं ने सड़क पर बैठकर किया विरोध-प्रदर्शन खराब व मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं देने का लगाया आरोप। सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लाक अंतर्गत प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास भुनेश्वरपुर की आदिवासी छात्राओं को अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें मेन्यू अनुसार भोजन नहीं दिया जाता है। #Surajpur #Chhattisgarh #AdivasiGirls #TribalStudents #JusticeForStudents1
- तब कांग्रेस सरकार को कोसा, आज भाजपा की सरकार में भी कोरबा की सड़कों का वही हाल—जनता पूछ रही, अब जवाब कौन देगा? कोरबा। कभी कोरबा की बदहाल सड़कों को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी दौरान सड़क निर्माण के लिए नगरवासियों से भीख मांगने का अनोखा प्रदर्शन भी किया गया था। उस समय भाजपा नेताओं ने शहर की सड़कों की बदहाली को लेकर कांग्रेस सरकार पर जमकर सवाल उठाए थे। लेकिन समय बदला, सत्ता बदली और सरकार भी बदल गई। आज केंद्र में भाजपा की सरकार है, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और नगर निगम में भी भाजपा का नेतृत्व है। यानी कोरबा में ट्रिपल इंजन की सरकार होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद शहर की कई सड़कों की हालत में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आने से अब वही सवाल जनता भाजपा से पूछ रही है। तब सवाल था कांग्रेस सरकार से, आज सवाल भाजपा सरकार से!1
- पिकनिक बनी मुसीबत, भूखे-प्यासे टापू पर गुजारी रात, देवपहरी में फंसे तीनों युवक अब सुरक्षित1
- कोरबा : देवपहरी वाटर फॉल में फंसे 3 युवकों का सफल रेस्क्यू, 2 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला गया1