थाने से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक ठोकरें खाता न्याय! मैहर के लटागांव पीड़ित की पुकार—क्या अब कप्तान भी रहेंगे खामोश? थाने से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक ठोकरें खाता न्याय! मैहर के लटागांव पीड़ित की पुकार—क्या अब कप्तान भी रहेंगे खामोश? मैहर । न्याय की तलाश में महीनों से भटक रहा बदेरा थाना क्षेत्र के ग्राम लटागांव का एक पीड़ित व्यक्ति आज भी इंसाफ की बाट जोह रहा है। हैरानी की बात यह है कि लिखित शिकायत देने के बावजूद न बदेरा थाने से नियमानुसार पावती मिली, न ही शिकायत पर कोई जांच बिठाई गई।पीड़ित का आरोप है कि उसने कई बार थाना बदेरा में लिखित आवेदन दिया, लेकिन हर बार उसे टालमटोल और अनदेखी का सामना करना पड़ा। जब थाने से न्याय की उम्मीद टूटी तो पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया, मगर वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं।सूत्रों के मुताबिक शिकायत गंभीर प्रकृति की है, इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।क्या कानून सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है?क्या आम आदमी की शिकायतों की कोई कीमत नहीं? अब पीड़ित की आखिरी उम्मीद मैहर जिले के पुलिस कप्तान से जुड़ी है। पीड़ित और उसके परिजनों को भरोसा है कि यदि कप्तान स्वयं मामले में हस्तक्षेप करें, तो शायद न्याय की बंद पड़ी फाइलें खुल सकें। सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या कप्तान के दरवाज़े पर भी पीड़ित को इंतज़ार ही मिलेगा? या फिर बदेरा थाने की कार्यप्रणाली पर गिरेगा जवाबदेही का डंडा? यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता की परीक्षा है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर एक और शिकायत फाइलों में दफन होकर रह जाती है।
थाने से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक ठोकरें खाता न्याय! मैहर के लटागांव पीड़ित की पुकार—क्या अब कप्तान भी रहेंगे खामोश? थाने से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक ठोकरें खाता न्याय! मैहर के लटागांव पीड़ित की पुकार—क्या अब कप्तान भी रहेंगे खामोश? मैहर । न्याय की तलाश में महीनों से भटक रहा बदेरा थाना क्षेत्र के ग्राम लटागांव का एक पीड़ित व्यक्ति आज भी इंसाफ की बाट जोह रहा है। हैरानी की बात यह है कि लिखित शिकायत देने के बावजूद न बदेरा थाने से नियमानुसार पावती मिली, न ही शिकायत पर कोई जांच बिठाई गई।पीड़ित का आरोप है कि उसने कई बार थाना बदेरा में लिखित आवेदन दिया, लेकिन हर बार उसे टालमटोल और अनदेखी का सामना करना पड़ा। जब थाने से न्याय की उम्मीद टूटी तो पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया, मगर वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं।सूत्रों के मुताबिक शिकायत गंभीर प्रकृति की है, इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।क्या कानून सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है?क्या आम आदमी की शिकायतों की कोई कीमत नहीं? अब पीड़ित की आखिरी उम्मीद मैहर जिले के पुलिस कप्तान से जुड़ी है। पीड़ित और उसके परिजनों को भरोसा है कि यदि कप्तान स्वयं मामले में हस्तक्षेप करें, तो शायद न्याय की बंद पड़ी फाइलें खुल सकें। सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या कप्तान के दरवाज़े पर भी पीड़ित को इंतज़ार ही मिलेगा? या फिर बदेरा थाने की कार्यप्रणाली पर गिरेगा जवाबदेही का डंडा? यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता की परीक्षा है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर एक और शिकायत फाइलों में दफन होकर रह जाती है।
- बड़ी खबर आवारा सांडों के तांडव से मची अफरा तफरी, कई गाड़ियां टूटी, दुकानों के गिरे शटर सतना शहर के बिहारी चौक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक सांड ने दूसरे को उठाकर पास की दुकान के फुटपाथ पर पटक दिया। इस मंजर को देखकर आसपास के दुकानदारों ने तुरंत अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। सांडों की लड़ाई में कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है, जिससे आए दिन ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती है।1
- थाने से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक ठोकरें खाता न्याय! मैहर के लटागांव पीड़ित की पुकार—क्या अब कप्तान भी रहेंगे खामोश? मैहर । न्याय की तलाश में महीनों से भटक रहा बदेरा थाना क्षेत्र के ग्राम लटागांव का एक पीड़ित व्यक्ति आज भी इंसाफ की बाट जोह रहा है। हैरानी की बात यह है कि लिखित शिकायत देने के बावजूद न बदेरा थाने से नियमानुसार पावती मिली, न ही शिकायत पर कोई जांच बिठाई गई।पीड़ित का आरोप है कि उसने कई बार थाना बदेरा में लिखित आवेदन दिया, लेकिन हर बार उसे टालमटोल और अनदेखी का सामना करना पड़ा। जब थाने से न्याय की उम्मीद टूटी तो पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया, मगर वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं।सूत्रों के मुताबिक शिकायत गंभीर प्रकृति की है, इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।क्या कानून सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है?क्या आम आदमी की शिकायतों की कोई कीमत नहीं? अब पीड़ित की आखिरी उम्मीद मैहर जिले के पुलिस कप्तान से जुड़ी है। पीड़ित और उसके परिजनों को भरोसा है कि यदि कप्तान स्वयं मामले में हस्तक्षेप करें, तो शायद न्याय की बंद पड़ी फाइलें खुल सकें। सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या कप्तान के दरवाज़े पर भी पीड़ित को इंतज़ार ही मिलेगा? या फिर बदेरा थाने की कार्यप्रणाली पर गिरेगा जवाबदेही का डंडा? यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता की परीक्षा है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर एक और शिकायत फाइलों में दफन होकर रह जाती है।1
- स्थानी निवासियों ने देवी जी पुलिस को सूचना दी मौके पर पुलिस जांच पर जुटी2
- सतना में जन्म के बाद ही छोड़ा, नाड़ा भी नहीं कटा था; डॉक्टर बोले-बच्चा स्वस्थ है सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक के विश्व विख्यात भरहुत गांव में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जन्म के महज डेढ़ से दो घंटे बाद एक नवजात शिशु (बालक) को जंगल क्षेत्र में पुरातत्व विभाग की बाउंड्रीवाल के भीतर बोरी में बंद कर छोड़ दिया गया। ठंड, भूख और अकेलेपन से जूझ रहे इस मासूम की जान समय पर ग्रामीणों, सरपंच और पुलिस की तत्परता से बच सकी।1
- Post by Ramnarayan Yadav1
- Post by Balu Mafiya1
- Post by Lavkush yadav1
- *मां बाप के आरोप को साबित करती ये वीडियो ,जिसमें आरोपी प्रमोद कुशवाहा को मझगवां पुलिस द्वारा लें जाते समय साफ़ देखा जा सकता है कि आरोपी द्वारा पैरों से चलते नहीं बन रहा, पहले ही मां बाप ने गंभीर मारपीट का आरोप लगाया था...अब कहां हुई मारपीट, क्यों ठीक से नहीं चल पा रहा आरोपी पुलिस कस्टडी में , बड़ा सवाल जो न्यायिक जांच का विषय है...!*1