युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी ने 15 वर्षों तक सत्ता और पद की दौड़ से दूर रहकर, मात्र 'सेवा परमो धर्मः' के भाव से जनसेवा की एक अनूठी साधना का उदाहरण पेश किया है। सेमरिया विधानसभा क्षेत्र में उनके धैर्य, समर्पण और निस्वार्थ भाव की इस यात्रा ने लोगों के बीच अपनी जगह बनाई है। उनकी सेवा भावना का ताजा उदाहरण ग्राम देवगाँव में देखने को मिला, जहाँ एक गरीब परिवार का बेटा राजलला कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति महंगी इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थी, ऐसे विकट समय में श्री संजय द्विवेदी ने आगे बढ़कर न केवल परिवार को 20,000 रुपये की नकद आर्थिक सहायता दी, बल्कि व्यक्तिगत रूप से खड़े रहकर इलाज की पूरी व्यवस्था भी सुनिश्चित करवाई। इस दौरान उन्होंने परिवार को टूटते हौसले के बीच हिम्मत बंधाकर यह विश्वास दिलाया कि मुश्किल घड़ी में भी कोई उनके साथ खड़ा है। यह कार्य केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक गहरी सोच का प्रतीक है। पिछले 15 सालों से सेमरिया की माटी से उनका जुड़ाव निरंतर बना हुआ है, चाहे सुख हो या दुख, चुनाव का समय हो या सामान्य दिन, उनके दरवाजे और दिल हमेशा लोगों के लिए खुले रहते हैं। वे किसी फंड या संस्था का इंतजार किए बिना अपनी जेब से और अपनी उपस्थिति से सीधे मदद करते हैं, जो 'फोटो वाली समाजसेवा' से बिल्कुल अलग है। विधायक या मंत्री न होने के बावजूद, वे हर आपदा में पहला चेहरा होते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सेवा के लिए कुर्सी नहीं, बल्कि करुणा की आवश्यकता होती है। श्री संजय द्विवेदी ने यह साबित किया है कि राजनीति का सच्चा अर्थ 'राज' करना नहीं, बल्कि अपनी 'नीति' से लोगों के जीवन को आसान बनाना है। उनकी 15 साल की यह सेवा-यात्रा युवा कार्यकर्ताओं के लिए एक पाठशाला है, जो दिखाती है कि जनता का दिल पद से नहीं, बल्कि प्रेम और निस्वार्थ सेवा से जीता जाता है। उनकी इस सेवा-भावना को नमन है।
युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी ने 15 वर्षों तक सत्ता और पद की दौड़ से दूर रहकर, मात्र 'सेवा परमो धर्मः' के भाव से जनसेवा की एक अनूठी साधना का उदाहरण पेश किया है। सेमरिया विधानसभा क्षेत्र में उनके धैर्य, समर्पण और निस्वार्थ भाव की इस यात्रा ने लोगों के बीच अपनी जगह बनाई है। उनकी सेवा भावना का ताजा उदाहरण ग्राम देवगाँव में देखने को मिला, जहाँ एक गरीब परिवार का बेटा राजलला कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति महंगी इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थी, ऐसे विकट समय में श्री संजय द्विवेदी ने आगे बढ़कर न केवल परिवार को 20,000 रुपये की नकद आर्थिक सहायता दी, बल्कि व्यक्तिगत रूप से खड़े रहकर इलाज की पूरी व्यवस्था भी सुनिश्चित करवाई। इस दौरान उन्होंने परिवार को टूटते हौसले के बीच हिम्मत बंधाकर यह विश्वास दिलाया कि मुश्किल घड़ी में भी कोई उनके साथ खड़ा है। यह कार्य केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक गहरी सोच का प्रतीक है। पिछले 15 सालों से सेमरिया की माटी से उनका जुड़ाव निरंतर बना हुआ है, चाहे सुख हो या दुख, चुनाव का समय हो या सामान्य दिन, उनके दरवाजे और दिल हमेशा लोगों के लिए खुले रहते हैं। वे किसी फंड या संस्था का इंतजार किए बिना अपनी जेब से और अपनी उपस्थिति से सीधे मदद करते हैं, जो 'फोटो वाली समाजसेवा' से बिल्कुल अलग है। विधायक या मंत्री न होने के बावजूद, वे हर आपदा में पहला चेहरा होते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सेवा के लिए कुर्सी नहीं, बल्कि करुणा की आवश्यकता होती है। श्री संजय द्विवेदी ने यह साबित किया है कि राजनीति का सच्चा अर्थ 'राज' करना नहीं, बल्कि अपनी 'नीति' से लोगों के जीवन को आसान बनाना है। उनकी 15 साल की यह सेवा-यात्रा युवा कार्यकर्ताओं के लिए एक पाठशाला है, जो दिखाती है कि जनता का दिल पद से नहीं, बल्कि प्रेम और निस्वार्थ सेवा से जीता जाता है। उनकी इस सेवा-भावना को नमन है।
- युवा समाजसेवी संजय द्विवेदी ने 15 वर्षों तक सत्ता और पद की दौड़ से दूर रहकर, मात्र 'सेवा परमो धर्मः' के भाव से जनसेवा की एक अनूठी साधना का उदाहरण पेश किया है। सेमरिया विधानसभा क्षेत्र में उनके धैर्य, समर्पण और निस्वार्थ भाव की इस यात्रा ने लोगों के बीच अपनी जगह बनाई है। उनकी सेवा भावना का ताजा उदाहरण ग्राम देवगाँव में देखने को मिला, जहाँ एक गरीब परिवार का बेटा राजलला कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति महंगी इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थी, ऐसे विकट समय में श्री संजय द्विवेदी ने आगे बढ़कर न केवल परिवार को 20,000 रुपये की नकद आर्थिक सहायता दी, बल्कि व्यक्तिगत रूप से खड़े रहकर इलाज की पूरी व्यवस्था भी सुनिश्चित करवाई। इस दौरान उन्होंने परिवार को टूटते हौसले के बीच हिम्मत बंधाकर यह विश्वास दिलाया कि मुश्किल घड़ी में भी कोई उनके साथ खड़ा है। यह कार्य केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक गहरी सोच का प्रतीक है। पिछले 15 सालों से सेमरिया की माटी से उनका जुड़ाव निरंतर बना हुआ है, चाहे सुख हो या दुख, चुनाव का समय हो या सामान्य दिन, उनके दरवाजे और दिल हमेशा लोगों के लिए खुले रहते हैं। वे किसी फंड या संस्था का इंतजार किए बिना अपनी जेब से और अपनी उपस्थिति से सीधे मदद करते हैं, जो 'फोटो वाली समाजसेवा' से बिल्कुल अलग है। विधायक या मंत्री न होने के बावजूद, वे हर आपदा में पहला चेहरा होते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सेवा के लिए कुर्सी नहीं, बल्कि करुणा की आवश्यकता होती है। श्री संजय द्विवेदी ने यह साबित किया है कि राजनीति का सच्चा अर्थ 'राज' करना नहीं, बल्कि अपनी 'नीति' से लोगों के जीवन को आसान बनाना है। उनकी 15 साल की यह सेवा-यात्रा युवा कार्यकर्ताओं के लिए एक पाठशाला है, जो दिखाती है कि जनता का दिल पद से नहीं, बल्कि प्रेम और निस्वार्थ सेवा से जीता जाता है। उनकी इस सेवा-भावना को नमन है।1
- Post by Prakash Pathak Satna1
- मैहर जिले के रामपुर बघेलान विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मौहारी कटरा के निवासी शैलेश रजक का भारतीय सेना में अग्निवीर जीडी पद पर चयन हुआ है, जिससे उन्होंने अपने पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। गरीबी को अपनी मेहनत से मात देकर शैलेश ने यह उपलब्धि हासिल की है। बेला बस स्टैंड पहुंचने पर ग्रामीणों ने भारत माता की जय के नारों, फूल-मालाओं और नारेबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया। शैलेश के साथ उनके साथी आशीष साहू का भी चयन हुआ है, जिससे मौहारी कटरा और आसपास के सभी गांवों में खुशी की लहर दौड़ गई है। शैलेश और आशीष, दोनों एक ही गांव और एक ही स्कूल में साथ पढ़े हैं। शैलेश के पिता आज भी बकरी पालन कर परिवार का गुजारा करते हैं, जबकि आशीष एक किसान परिवार से आते हैं। दोनों युवकों ने बचपन से ही देश सेवा का जज्बा पाला और दिन-रात कड़ी मेहनत करते हुए शारीरिक अभ्यास तथा तकनीकी विषयों की तैयारी की। इस अवसर पर शैलेश ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि, “भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सीमा की रक्षा करना मेरा सबसे बड़ा सपना था, जो आज पूरा हो रहा है। मैं देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हूँ।” जैसे ही उनके चयन की सूचना मिली, जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, सभापति राम प्रसाद साहू पत्रकार, युवा समाजसेवी संदीप वर्मा, ध्रुव सिंह, सौरभ वर्मा, रज्जन यादव, अरुण सेन, राज वर्मा, गोलू खटीक, उपेंद्र वर्मा, शिवम गुप्ता और आकाश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर बधाई देने पहुंचे। ग्रामीणों ने शैलेश को शाल, श्रीफल और पुष्प भेंट कर सम्मानित किया। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है, और पूरे गांव में जश्न का माहौल है, जहां ग्रामीण मिठाई बांटकर दोनों युवकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।4
- यूट्यूबर मनीष पटेल ने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस ने उन्हें रिमांड पर ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।1
- सतना के मैहर में धीरज पांडे पिछले सात साल से लगातार 'माई की रसोई' के माध्यम से मानवता की सेवा कर रहे हैं, जहाँ वह रोजाना सैकड़ों जरूरतमंदों को भरपेट भोजन और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराकर भूख और प्यास पर मरहम लगा रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ कार्य ने हजारों लोगों को राहत पहुँचाई है और पूरे क्षेत्र में इंसानियत की एक नई मिसाल कायम की है। इसी सेवा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से, धीरज पांडे के बेटे सौरज पांडे अब सामने आए हैं। एक वायरल वीडियो में सौरज ने मैहरवासियों से भावुक अपील की है कि वे जरूरतमंदों के लिए अपने दिल खोलें और इस सेवा कार्य में उनका साथ दें। सौरज का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है और इसे लोगों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। 'माई की रसोई' अब मैहर में केवल एक रसोई नहीं, बल्कि उम्मीद का ठिकाना बन चुकी है।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले में, ब्राह्मण लड़कियों के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मनीष पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है।1
- ब्राह्मण समाज के खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में महीनों से फरार चल रहे चर्चित यूट्यूबर मनीष पटेल ने रीवा में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। हाई कोर्ट द्वारा उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने और पुलिस के लगातार बढ़ते दबाव के बाद उसने सिविल लाइन थाने में यह सरेंडर किया। कोर्ट में पेशी के बाद पुलिस ने आरोपी मनीष पटेल को रिमांड पर ले लिया है। इस विवाद की शुरुआत 29 जनवरी को हुई थी, जब मनीष ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ब्राह्मण समाज को लेकर एक आपत्तिजनक पोस्ट साझा की थी। यह पोस्ट वायरल होने के बाद समाज में भारी आक्रोश फैल गया था, जिसके बाद उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस रिकॉर्ड में 'फरार' होने के बावजूद मनीष, जिसके फेसबुक पर करीब 40 लाख फॉलोअर्स हैं, लगातार नए वीडियो पोस्ट कर रहा था और सार्वजनिक समारोहों में बेखौफ शामिल हो रहा था। साइबर सेल की घेराबंदी और उसकी सभी जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद आरोपी के पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और रिमांड के दौरान उससे गहन पूछताछ की जा रही है। उसके लैपटॉप और अन्य डिजिटल गैजेट्स की बरामदगी के लिए छापेमारी भी की जा रही है। इसके साथ ही, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस विवादित पोस्ट को तैयार करने और उसे वायरल कराने में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।1
- मैहर जिले के रामपुर बघेलान विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मौहारी कटरा के शैलेश रजक का भारतीय सेना में अग्निवीर GD पद पर चयन होने के बाद बेला बस स्टैंड पर ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। गरीबी को कड़ी मेहनत से मात देकर शैलेश ने यह मुकाम हासिल किया है, जिससे पूरे क्षेत्र का मान बढ़ा है। उनके साथ उनके साथी आशीष साहू का भी अग्निवीर के पद पर चयन हुआ है, जिसके बाद मौहारी कटरा और आसपास के गांवों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने "भारत माता की जय" के जयघोष और फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन किया। शैलेश और आशीष एक ही गांव और एक ही स्कूल से पढ़े हैं, और बचपन से ही उनमें देश सेवा का जज्बा रहा है। शैलेश के पिता आज भी बकरी पालकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि आशीष एक किसान परिवार से आते हैं। दोनों युवकों ने शारीरिक अभ्यास और तकनीकी विषयों की तैयारी के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की। शैलेश ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सीमा की रक्षा करना उनका सबसे बड़ा सपना था, जो आज पूरा हो रहा है, और वे देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हैं। चयन की खबर मिलते ही जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, सभापति राम प्रसाद साहू, युवा समाजसेवी संदीप वर्मा, ध्रुव सिंह, सौरभ वर्मा, रज्जन यादव, अरुण सेन, राज वर्मा, गोलू खटीक, उपेंद्र वर्मा, शिवम गुप्ता, आकाश गुप्ता और दुर्गा पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण बेला बस स्टैंड पहुंचे। उन्होंने शाल, श्रीफल और पुष्प देकर दोनों अग्निवीरों का सम्मान किया। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और ग्रामीण मिठाई बांटकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।4