बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विगत 17 जून को फुलवारी शरीफ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में पटना का नाम बदलकर 'पाटलिपुत्र' करने की ऐतिहासिक घोषणा की है, जिसका न केवल पटनावासी बल्कि बिहार के सभी सुबुद्ध नागरिक चौतरफा स्वागत कर रहे हैं और बेहद हर्षित हैं। इस मांग को लेकर इस सदी की शुरुआत में 'पाटलिपुत्र जागरण अभियान समिति' के तत्वावधान में एक बड़ा जन-आंदोलन चलाने वाले पुरोधा और समिति के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने अभियान समिति और पटना के नागरिकों की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए इस घोषणा को शीघ्र धरातल पर उतारने का आग्रह किया है। डॉ. सुलभ ने अपने बधाई पत्र में इस आंदोलन के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछली सदी के 9वें दशक में सेना से अवकाश प्राप्त सेनाध्यक्ष मेजर जनरल एस. के. सिन्हा ने इस ऐतिहासिक आंदोलन को आरम्भ किया था, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला था, लेकिन जनरल सिन्हा को राज्यपाल बनाए जाने के कारण यह अपनी तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच सका था। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि इस आंदोलन के बाद देश-दुनिया के कई शहरों के नाम बदले गए, यहाँ तक कि बिहार में 'गया' का नाम 'गयाजी' हुआ, लेकिन पटना 'पाटलिपुत्र' नहीं हो पाया। डॉ. सुलभ ने मुख्यमंत्री को अपने प्रसिद्ध आलेख 'कब आज़ाद होगा पाटलिपुत्र' की प्रति भी संलग्न की है। डॉ. सुलभ की अध्यक्षता में चले इस आंदोलन को हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी धर्मों, प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और राजनेताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला था। इस मुहिम में त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद, बिहार विधान परिषद के तत्कालीन सभापति प्रो. अरुण कुमार, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एन. पी. सिन्हा, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर बलबीर सिंह 'भसीन', बिहार अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष जनाब हारुन रशीद और कैथोलिक ऐसोशिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष श्री अनिल सेसिल साह जैसे दिग्गज शामिल थे। बाद में बिहार के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम श्री आर. एस. गवई ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इस ऐतिहासिक मांग को लेकर बिहार विधान परिषद में माननीय सदस्य श्री आज़ाद गाँधी ने एक संकल्प भी पेश किया था, जिस पर सदन में उपस्थित तत्कालीन मंत्रियों, जिनमें नन्द किशोर यादव (नागालैंड के वर्तमान राज्यपाल), प्रेम कुमार (बिहार विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष), अश्विनी चौबे (पूर्व केंद्रीय मंत्री), और जनार्दन सिंह सिग्रिवाल (वर्तमान सांसद) शामिल थे, ने खड़े होकर यह आश्वासन दिया था कि पटना का विस्तार कर जो महानगर बनाया जा रहा है, उसका नाम 'पाटलिपुत्र' रखा जाएगा। इस आश्वासन के बाद संकल्प वापस ले लिया गया था और तब से समिति इस फैसले की प्रतीक्षा कर रही थी। इस जागृति-आंदोलन के दबाव के कारण ही पहले नूतन परिसीमन में 'पाटलिपुत्र लोक सभा क्षेत्र' अस्तित्व में आया और शहर के एक नव-निर्मित भव्य रेलवे स्टेशन का नाम 'पाटलिपुत्र जंक्शन' रखा गया। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ताजा घोषणा के बाद नागरिकों को उम्मीद है कि इस प्राचीन और महान नगर को उसका वास्तविक और गौरवशाली नाम 'पाटलिपुत्र' वापस मिल जाएगा।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विगत 17 जून को फुलवारी शरीफ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में पटना का नाम बदलकर 'पाटलिपुत्र' करने की ऐतिहासिक घोषणा की है, जिसका न केवल पटनावासी बल्कि बिहार के सभी सुबुद्ध नागरिक चौतरफा स्वागत कर रहे हैं और बेहद हर्षित हैं। इस मांग को लेकर इस सदी की शुरुआत में 'पाटलिपुत्र जागरण अभियान समिति' के तत्वावधान में एक बड़ा जन-आंदोलन चलाने वाले पुरोधा और समिति के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने अभियान समिति और पटना के नागरिकों की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए इस घोषणा को शीघ्र धरातल पर उतारने का आग्रह किया है। डॉ. सुलभ ने अपने बधाई पत्र में इस आंदोलन के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछली सदी के 9वें दशक में सेना से अवकाश प्राप्त सेनाध्यक्ष मेजर जनरल एस. के. सिन्हा ने इस ऐतिहासिक आंदोलन को आरम्भ किया था, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला था, लेकिन जनरल सिन्हा को राज्यपाल बनाए जाने के कारण यह अपनी तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच सका था। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि इस आंदोलन के बाद देश-दुनिया के कई शहरों के नाम बदले गए, यहाँ तक कि बिहार में 'गया' का नाम 'गयाजी' हुआ, लेकिन पटना 'पाटलिपुत्र' नहीं हो पाया। डॉ. सुलभ ने मुख्यमंत्री को अपने प्रसिद्ध आलेख 'कब आज़ाद होगा पाटलिपुत्र' की प्रति भी संलग्न की है। डॉ. सुलभ की अध्यक्षता में चले इस आंदोलन को हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी धर्मों, प्रबुद्ध जनों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और राजनेताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला था। इस मुहिम में त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद, बिहार विधान परिषद के तत्कालीन सभापति प्रो. अरुण कुमार, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एन. पी. सिन्हा, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर बलबीर सिंह 'भसीन', बिहार अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष जनाब हारुन रशीद और कैथोलिक ऐसोशिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष श्री अनिल सेसिल साह जैसे दिग्गज शामिल थे। बाद में बिहार के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम श्री आर. एस. गवई ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इस ऐतिहासिक मांग को लेकर बिहार विधान परिषद में माननीय सदस्य श्री आज़ाद गाँधी ने एक संकल्प भी पेश किया था, जिस पर सदन में उपस्थित तत्कालीन मंत्रियों, जिनमें नन्द किशोर यादव (नागालैंड के वर्तमान राज्यपाल), प्रेम कुमार (बिहार विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष), अश्विनी चौबे (पूर्व केंद्रीय मंत्री), और जनार्दन सिंह सिग्रिवाल (वर्तमान सांसद) शामिल थे, ने खड़े होकर यह आश्वासन दिया था कि पटना का विस्तार कर जो महानगर बनाया जा रहा है, उसका नाम 'पाटलिपुत्र' रखा जाएगा। इस आश्वासन के बाद संकल्प वापस ले लिया गया था और तब से समिति इस फैसले की प्रतीक्षा कर रही थी। इस जागृति-आंदोलन के दबाव के कारण ही पहले नूतन परिसीमन में 'पाटलिपुत्र लोक सभा क्षेत्र' अस्तित्व में आया और शहर के एक नव-निर्मित भव्य रेलवे स्टेशन का नाम 'पाटलिपुत्र जंक्शन' रखा गया। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ताजा घोषणा के बाद नागरिकों को उम्मीद है कि इस प्राचीन और महान नगर को उसका वास्तविक और गौरवशाली नाम 'पाटलिपुत्र' वापस मिल जाएगा।
- राजधानी पटना के बेउर थाना क्षेत्र से बीते 13 जून से दो नाबालिग लड़के, करण कुमार और विशाल कुमार, लापता हैं। दोनों की उम्र 13 वर्ष है। 13 जून की शाम 6 बजे दोनों दोस्त ब्रह्मपुर स्थित आरपीएस स्कूल के निकट खेल मैदान में क्रिकेट खेलने गए थे, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे। परिजनों और सगे-संबंधियों ने लड़कों की काफी खोजबीन की, लेकिन उन्हें ढूंढने में असमर्थ रहे। इसके बाद करण के पिता अखिलेश राय और विशाल के पिता अरुण कुमार ने स्थानीय थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। मामला दर्ज होने के छह दिन बीत जाने के बावजूद, लापता युवकों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। किसी अनहोनी की आशंका से दोनों युवकों के परिजन बेहद चिंतित एवं आशंकित हैं, और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बच्चों का सही पता बताने वाले व्यक्ति को परिजनों ने 20 हजार रुपये का सुनिश्चित इनाम देने की घोषणा की है।1
- राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ ब्रह्मपुर इलाके से एक युवक पिछले 13 वर्षों से लापता है, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। 7 दिनों के बाद भी लापता युवक का कोई अता-पता नहीं चला है, जिससे परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस गंभीर मामले पर प्रशासन की चुप्पी बनी हुई है।1
- महेन्द्र बुद्ध बिहार को राज्य स्तरीय बुद्ध बिहार का दर्जा दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस विषय पर विस्तृत जानकारी को ITS पर अशोक सम्राट के साथ देखा जा सकता है।1
- आज 20 जून 2024 को नगर परिषद, बरबीघा के सभाकक्ष में माननीय सभापति शोनू कुमार और उपसभापति निधि कुमारी की अध्यक्षता में बोर्ड की सामान्य बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में पूर्व सभापति-सह-वार्ड पार्षद श्री रौशन कुमार, माननीय वार्ड पार्षद श्री प्रसून्न कुमार, श्री सुनील सिंह, श्री रामजी सिंह, विकास कुमार, श्रीमती अंजू देवी, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी सहित अन्य सभी माननीय वार्ड पार्षद, कार्यपालक पदाधिकारी श्री रमण कुमार और सिटि मैनेजर श्री राजीव आनन्द समेत नगर परिषद के सभी कर्मी उपस्थित थे। बैठक में शहर की साफ-सफाई और विकास की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि बरसात से पहले शहरी क्षेत्र के अंतर्गत सभी गलियों और नालों की सफाई कराई जाए, और सभी लंबित योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके अतिरिक्त, शहर में बिजली की समस्या को लेकर बिजली विभाग के सहायक अभियंता को अवगत कराया गया। उन्होंने शहरी क्षेत्र में बिजली की समस्या को शीघ्र दूर करने का आश्वासन दिया। नल-जल पाइप में मोटर लगाकर पानी चोरी किए जाने के मामले पर भी गंभीरता से विचार किया गया, जिस पर समिति ने नगर परिषद को जल्द से जल्द एक छापामारी टीम गठित कर ऐसे मोटरों पर कार्रवाई करने और जुर्माना वसूलने का निर्देश दिया।3
- गयाजी जिला परिषद सभागार में शनिवार को 16वें वित्त आयोग के तहत त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए एक दिवसीय ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों के विकास कार्यों को गति देना और केंद्र व राज्य सरकार की नई गाइडलाइंस के अनुसार योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारना है। कार्यक्रम की शुरुआत जिला परिषद अध्यक्षा नैना देवी, जिला उपाध्यक्ष डॉ. शीतल प्रसाद और जिला पंचायती राज अधिकारी आदित्य कुमार ने संयुक्त रूप से की, जिसमें विभिन्न प्रखंडों से आए प्रमुख, उप-प्रमुख, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्षा नैना देवी ने बताया कि 16वें वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायतों के विकास के लिए कई नए दिशा-निर्देश जारी हुए हैं, जिनके आलोक में जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्यों में तेजी आएगी। अध्यक्षा ने स्पष्ट किया कि नई गाइडलाइंस के तहत अब जनसंख्या के आधार पर योजनाओं का चयन होगा और पारदर्शी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए सभी योजनाओं को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। वहीं, जिला उपाध्यक्ष डॉ. शीतल प्रसाद ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य केंद्र बिंदु पंचायतों का सर्वांगीण विकास और उनकी प्रगति के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करना है, जिसके लिए उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। जिला पंचायती राज अधिकारी आदित्य कुमार ने प्रशिक्षण के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि अब पंचायतों की विकास योजनाएं संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप तैयार की जाएंगी। उन्होंने जोर दिया कि गरीबी मुक्त पंचायत और बाल हितैषी पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विषयों को ध्यान में रखकर योजनाओं का चयन किया जाना है। इस दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को यह भी सिखाया गया कि इन योजनाओं को सरकारी पोर्टल पर कैसे अपलोड किया जाए और जनसंख्या के आंकड़ों को किस प्रकार अद्यतन रखा जाए।1
- अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। यह टीम आज अयोध्या से लखनऊ लौटकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस पूरे विवाद को देखते हुए, ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर कार्रवाई होना लगभग तय माना जा रहा है, और उन्हें उनके पद से हटाया भी जा सकता है।1
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए तारापुर पहुंचे।1
- एक विवाह समारोह पंजाबी रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। इस अवसर पर BLCP ITS टीम कार्यक्रम में पहुंची, जहाँ ITS अशोक सम्राट भी टीम के साथ मौजूद थे।1