Shuru
Apke Nagar Ki App…
उत्तर प्रदेश में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लखनऊ में हुए एक हादसे के बाद अब आगरा के एक कोचिंग सेंटर में भी आग लगने की घटना सामने आई है। इस ताजा घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यह एक बड़ी लापरवाही का नतीजा है या महज एक इत्तेफाक कि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
Mohammad Afzal
उत्तर प्रदेश में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लखनऊ में हुए एक हादसे के बाद अब आगरा के एक कोचिंग सेंटर में भी आग लगने की घटना सामने आई है। इस ताजा घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यह एक बड़ी लापरवाही का नतीजा है या महज एक इत्तेफाक कि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- उत्तर प्रदेश में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लखनऊ में हुए एक हादसे के बाद अब आगरा के एक कोचिंग सेंटर में भी आग लगने की घटना सामने आई है। इस ताजा घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यह एक बड़ी लापरवाही का नतीजा है या महज एक इत्तेफाक कि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।1
- सरायइनायत थाना क्षेत्र के कोटवा चौराहे पर लीलापुर निवासी धर्मेंद्र कुमार के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार को जातिसूचक गालियाँ देते हुए उनके साथ मारपीट की गई। इस पूरी वारदात का वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है, जिसमें मारपीट करने के बाद एक युवक भागता हुआ दिखाई दे रहा है।1
- माहे मोहर्रम की सातवीं तारीख को उत्तर प्रदेश के शाहगंज स्थित पान दरीबा के इमामबाड़ा मिर्ज़ा सफदर अली बेग से एक ऐतिहासिक गश्ती दुलदुल जुलूस निकाला गया। सन् 1836 में स्थापित, यह जुलूस लगभग 191 साल से लगातार अपनी परंपरा का निर्वहन कर रहा है। यह भोर में शुरू होकर पूरे दिन और रात विभिन्न इलाक़ों में गश्त करने के बाद अगले दिन प्रातः छह बजे अपने क़दीमी इमामबाड़े पर वापस पहुँचकर संपन्न हुआ। जुलूस ने शाहगंज, पत्थर गली, बरनतला, मिन्हाजपूर नखास कोहना, अहमदगंज, क़ाज़ी गंज, बख्शी बाज़ार, ताराबाबू की गली, अकबरपुर, रौशनबाग़, सियाहमुर्ग़, बुड्ढा ताज़िया, पुराना गुड़िया तालाब, दायरा शाह अजमल, बैदन टोला, कोलहन टोला, हसन मंज़िल, रानीमंडी, धोबी गली, यादगार हुसैनी गली, बच्चा जी धर्मशाला, डॉ काटजू रोड़, कोतवाली, लोकनाथ चौराहा, गुड़ मंडी, बहादुरगंज, अग्रसेन चौराहा, इमामबाड़ा वज़ीर हुसैन छोटी चक, घंटाघर, और सब्ज़ी मण्डी जैसे कई क्षेत्रों में घर-घर अपनी गश्त पूरी की। इस दौरान अक़ीदतमंदों ने इमाम हुसैन के वफ़ादार घोड़े ज़ुलजनाह (दुलदुल) को घरों में दूध-जलेबी और भीगी चने की दाल खिलाकर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। दुलदुल को सफ़ेद चादर पर खूनी रंग के छींटे और गुलाब व चमेली के फूलों से सजाकर घर-घर ज़ियारत करवाई गई। सुन्नी समुदाय की महिलाएँ भी सदियों पुरानी परम्परा का पालन करते हुए गलियों में कटोरे और बर्तनों में दूध-जलेबी भिगोकर खड़ी थीं, और जैसे ही दुलदुल उनके पास पहुंचा, उन्होंने भीगी आँखों से बोसा लेकर उसका स्वागत किया और दूध-जलेबी खिलाई। दुलदुल जुलूस के आयोजकों में मिर्ज़ा चंगेज़, सुहैल, शमशाद, जहांगीर, सलीम, मुन्ना, माहे आलम, छोटे बाबू, मुर्तु़ज़ा अली बेग, मुज्तबा अली बेग, रिज़वान और सादिक़ जैसे लोग चौबीस घंटे के इस गश्ती जुलूस में घरों तक दुलदुल ले जाने में सहयोग करते रहे। एक अनूठा और प्रेरणादायक नज़ारा डॉ. चड्ढा रोड, लोकनाथ और गुड़ मंडी में देखने को मिला, जहाँ हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले पुरुष व महिलाओं ने भी अपने पुरखों की परम्परा को निभाते हुए दुलदुल का सम्मान किया। ये हिंदू औरतें और मर्द नंगे पांव, महिलाएँ सर पर पल्लू डाल कर अपने छोटे-छोटे बच्चों को दुलदुल से मस्स कराने और बोसा लेने को आतुर दिखीं। कई लोगों ने अपने बच्चों को दुलदुल घोड़े के नीचे से निकालकर मन्नतें व मुरादें मांगीं, जो सांप्रदायिक सद्भाव और साझा आस्था का प्रतीक बना। इसी के साथ, दादा-परदादा के समय से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए, मुरादाबाद से खास सातवीं मोहर्रम के जुलूस में शामिल होने आए इंतेज़ार मेंहदी, सैय्यद हामिद मज़हर ज़ैदी और जाफर मेंहदी ने दो दर्जन से अधिक अलम के साथ नौहा पढ़ते हुए डॉ. मुस्तफा के इमामबाड़े से जुलूस में शिरकत की। यह जुलूस इमामबाड़ा अली नक़ी जाफरी दायरा शाह अजमल पहुंचा और फिर दायरा शाह अजमल तिराहे पर कुछ देर रुकने के बाद मातमी जुलूस डॉ. मुस्तफा तक गया। यहाँ दुलदुल घोड़े को कुछ देर आराम देने के बाद एक दूसरा घोड़ा सजाया गया, जिसे रानीमंडी और बाकी घरों में ले जाया गया। इस अलम और दुलदुल जुलूस में सैय्यद मोहम्मद अस्करी, बाक़र मेंहदी, ज़हीर हाशिम, शौकत, मुज्तबा हैदर क़दर, शबीह अब्बास जाफरी, शजीह अब्बास और आमिर आब्दी सहित कई लोग शामिल रहे।1
- लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में हुए अग्निकांड के बाद, प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने शुक्रवार को कड़ी कार्रवाई करते हुए कटरा स्थित खान ग्लोबल कोचिंग को सील कर दिया। PDA की टीम ने दोपहर में अचानक छापेमारी की, जिसमें पाया गया कि यह कोचिंग संस्थान मानक के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था। जांच में खुलासा हुआ कि खान ग्लोबल कोचिंग तीन मंजिला भवन में चल रहा था, जहाँ फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और पार्किंग जैसी कई आवश्यक सुविधाएँ नदारद थीं। इन गंभीर कमियों को देखते हुए PDA ने तत्काल प्रभाव से भवन को सीज कर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और बिना नक्शा पास कराए तथा फायर NOC के चल रहे सभी कोचिंग संस्थानों पर ऐसी ही कार्रवाई की जाएगी। खान ग्लोबल कोचिंग को भी नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है। गौरतलब है कि हाल ही में लखनऊ में हुई आग लगने की घटना के बाद से पूरे प्रदेश में फायर विभाग और विकास प्राधिकरण अलर्ट पर हैं। प्रयागराज में भी फायर विभाग ने कई अन्य कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों छात्र, जो यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, उनमें हड़कंप मच गया है। अभी तक कोचिंग प्रबंधन का कोई पक्ष सामने नहीं आया है।1
- प्रयागराज में खान ग्लोबल क्लासेज नामक एक कोचिंग संस्थान को सील कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद संस्थान के बाहर एक नोटिस भी चस्पा किया गया है, जिसमें संबंधित संचालकों के लिए स्पष्ट चेतावनी जारी की गई है। जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि जिस भवन में कोचिंग का संचालन हो रहा था, उसका नक्शा व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वीकृत था। हालांकि, कोचिंग संस्थान का संचालन 'सामुदायिक सुविधा' की श्रेणी में आता है, और भवन के लिए 'सामुदायिक सुविधा भू-उपयोग' की स्वीकृति नहीं ली गई थी, जिसके कारण यह कार्रवाई आवश्यक हो गई। चस्पा किए गए नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि बिना अनुमति सील तोड़ी जाती है या दोबारा कोचिंग का संचालन शुरू किया जाता है, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य श्री रमाकान्त उपाध्याय की अध्यक्षता में, प्रयागराज के विकास भवन स्थित यमुना सभागार में 23 जून, 2026 को मंगलवार को गो संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति के अधिकारियों-पदाधिकारियों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गौवंश संरक्षण और अनुश्रवण के विषय पर चर्चा हुई, जहाँ सदस्य ने गौशालाओं में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा गौवंशों की उचित देखभाल के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। सदस्य ने गौआश्रय स्थलों में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था बनाए रखने और गौवंशों की शत-प्रतिशत ईयर टैगिंग कराने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि निराश्रित गौवंश आश्रय स्थलों पर गौवंशों के लिए भूसा-चारा, प्रकाश और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था हो। सभी गौशालाओं में गौवंशों की संख्या के अनुसार बड़े क्षेत्रफल में हरे चारे की बुआई सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक गौवंश को हरा चारा उपलब्ध कराने को कहा गया। हरे चारे की अनुपलब्धता की स्थिति में चोकर की मात्रा बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया, साथ ही पशुआहार के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानक पूर्ण करने वाले ब्रांड का ही क्रय करने पर बल दिया गया। स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों में गौवंशों का टीकाकरण कराने और पशुचिकित्साधिकारियों द्वारा नियमित अंतराल पर निराश्रित गौवंश आश्रय स्थलों का भ्रमण करने की बात कही गई। बीमार या कमजोर गौवंशों के लिए अलग व्यवस्था कर उनका उचित उपचार और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। सहभागिता योजना के तहत अधिक से अधिक गौवंशों को गोद लिए जाने का भी आह्वान किया गया। ग्राम प्रधानों और सचिवों को समय पर फंड रिक्वेस्ट भेजने तथा सभी भुगतानों को समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि गौशालाओं की 60 हेक्टेयर भूमि पर हरे चारे की बुआई की गई है और 72 हेक्टेयर में और बुआई कराई जाएगी, जिस पर नेपियर घास की बुआई कराने का सुझाव दिया गया। नंदियों के लिए गौशालाओं में अलग व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। सदस्य ने गौवंश संरक्षण में अच्छा कार्य करने वाले संगठनों को गौशालाओं में संरक्षित गौवंशों के लिए कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने गौशालाओं में क्षमता के अनुरूप गौवंशों को रखने तथा चाका ब्लॉक में भी एक नया गौआश्रय स्थल बनाने के लिए जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए। सभी गौवंशों का समय-समय पर चिकित्सकीय परीक्षण करने और दवाएं उपलब्ध कराने तथा पीने के पानी के टैंकों की दीवारों पर चूने की पुताई कराने का भी निर्देश दिया गया। मानसून के मद्देनजर, आंधी से क्षतिग्रस्त हुए टीन शेडों को जल्द से जल्द ठीक कराने और गौशालाओं में कीचड़ से बचाव के लिए पक्की ईंटें बिछाने या ऊंचे स्थान की व्यवस्था करने के निर्देश भी जारी किए गए, ताकि कोई गौवंश कीचड़ में न रहे। अंत में, सदस्य ने गौशालाओं से निकलने वाले गोबर और गौमूत्र की उपयोगिता बढ़ाने तथा नवाचारों का प्रयोग करते हुए स्वयं सहायता समूहों और अन्य संगठनों के माध्यम से गौशालाओं की आय बढ़ाने की योजना बनाने को कहा। इस बैठक में अपर निदेशक ग्रेड-2 पशुपालन विभाग श्री अनिल कुमार, जिला विकास अधिकारी श्री जी0पी0 कुशवाहा, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ0 शिवनाथ यादव और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।2
- मुहर्रम के जुलूस के दौरान कथित तौर पर विवादित नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस घटना में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के आरोप में दो हिंदू व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इस मामले की जांच जारी होने की जानकारी दी है और बताया है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।1
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ के अलीगंज में एक भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि नौ गंभीर रूप से घायल हैं। ये बच्चे कोचिंग और एनीमेशन कोर्स करने वाले छात्र थे, जो आग की लपटों में घिर गए। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के कारण गेट लॉक हो गया और वे बाहर नहीं निकल सके, जिसके चलते कई बच्चों ने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगा दी। इस हृदयविदारक घटना के बाद एक खौफनाक सच सामने आया है कि जिस इमारत में यह त्रासदी हुई, वह पूरी तरह अवैध थी। हैरानी की बात यह है कि 2016 में इस अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन महज दो महीने के भीतर ही उस आदेश को निरस्त कर दिया गया। इस छूट का फायदा उठाते हुए भवन मालिकों ने बिना फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) और बिना आपातकालीन निकासी की व्यवस्था किए ही उसमें कोचिंग सेंटर और अवैध दुकानें खोल लीं। प्रशासन इस दौरान गहरी नींद में सोता रहा, और अब हादसे के बाद सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। यदि समय रहते अवैध भवन को तोड़ दिया जाता तो आज 15 मासूम बच्चे जीवित होते। यह घटना अधिकारियों और भवन मालिकों की कथित मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसने इन बच्चों की जान ले ली। सवाल यह भी उठता है कि यूपी में नियमों को ताक पर रखकर खड़ी ऐसी कितनी और इमारतें हैं, और कार्रवाई हमेशा हादसे के बाद ही क्यों होती है। आज इन्हीं अनुत्तरित सवालों के जवाब तलाशने का प्रयास किया जाएगा।1