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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज के बढ़ौली चौक पर सोनम वांगचुक के समर्थन और पेपर लीक के विरोध में विभिन्न संगठनों और छात्रों ने मिलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने, पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने और छात्रों की मांगों पर संवाद स्थापित करने की मांग उठाई है। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज के बढ़ौली चौक पर सोनम वांगचुक के समर्थन और पेपर लीक के विरोध में विभिन्न संगठनों और छात्रों ने मिलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने, पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने और छात्रों की मांगों पर संवाद स्थापित करने की मांग उठाई है। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में ओबरा-सी तापीय परियोजना की 660-660 मेगावाट क्षमता वाली दोनों इकाइयां बंद होने से कुल 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन पूरी तरह शून्य हो गया है। तकनीकी खराबी के कारण इन दोनों यूनिटों के बंद होने से अब प्रदेश में बिजली की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है और आपातकालीन बिजली कटौती की स्थिति बन गई है। इस गंभीर तकनीकी समस्या के सामने आने के बाद, परियोजना प्रबंधन बिजली उत्पादन को जल्द से जल्द दोबारा बहाल करने के प्रयासों में जुटा हुआ है।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में एक किसान अपनी मक्का की फसल को कोना कर रहा है। इस मक्का की फसल की बुवाई बिना किसी खाद के की गई है।1
- सोनभद्र जिले के मारकुंडी-गुरमा मार्ग पर मानसून की पहली ही तेज बारिश ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तैयारियों की पोल खोल दी है। घाघर नदी पर निर्माणाधीन पुल के दौरान आवागमन चालू रखने के लिए मीनाबाजार के पास बनाया गया अस्थायी वैकल्पिक संपर्क मार्ग पानी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया है। इसके कारण गुरमा स्थित जिला कारागार और आसपास के कई गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 7 से 8 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वैकल्पिक मार्ग बह जाने के कारण अब लोगों को मारकुंडी, तेलाई, चकरिया, पेड़रहवा, कुशहिया और कालापानी होकर लंबा चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ गए हैं। इसका सबसे अधिक प्रतिकूल असर स्कूली बच्चों, मरीजों, दैनिक मजदूरों, व्यापारियों और ग्रामीण महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें बरसात के मौसम में इस लंबे और जोखिम भरे रास्ते से सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही विभाग से एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग लगातार की जा रही थी। इस समस्या को लेकर पूर्व में कई बार ज्ञापन सौंपे गए और प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने और निर्माणाधीन पुल का काम जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है।2
- सोनभद्र जिले की दुद्धी तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलवार के महवरिया टोला में सूईचट्टान के बगल वाली बॉर्डर रोड महीनों से झाड़ियों और कचरे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी है। स्थानीय निवासी प्रेम शंकर यादव ने इस गंभीर समस्या को उठाते हुए बताया कि सड़क पर इतनी झाड़ियां और जंगली घास उग आई है कि रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस बंद रास्ते के कारण रात के समय आपातकालीन स्थिति में कोई एम्बुलेंस भी वहां से नहीं गुजर सकती, जिससे स्थानीय लोगों के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। सड़क की सफाई न होने और सफाईकर्मियों के गायब रहने को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। प्रेम शंकर यादव ने जिला प्रशासन और ग्राम प्रधान से मांग की है कि तुरंत इस रास्ते से झाड़ियों को हटवाकर सफाई करवाई जाए। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि यह जनता के टैक्स का पैसा है और अगर काम नहीं हुआ तो सवाल जरूर उठाए जाएंगे। इस बदहाली को लेकर सोनभद्र के जिलाधिकारी और रॉबर्ट्सगंज के खंड विकास अधिकारी (BDO) से तुरंत संज्ञान लेकर सफाई कराने की मांग की गई है।1
- कनहर सिंचाई परियोजना, जिसे अमवार बांध के नाम से भी जाना जाता है, को बनने में काफी लंबा समय लगा है। इस परियोजना के सफल होने के कारण कुल 21 गांव जलमग्न हो चुके हैं, जिसमें झारखंड के 4 गांव, छत्तीसगढ़ के 6 गांव और सोनभद्र के 11 गांव शामिल हैं। इन जलमग्न हुए गांवों के लोगों को अन्य जगहों पर विस्थापित किया गया है। हालांकि, विस्थापित किए गए इन लोगों को मिलने वाली सुविधाएं अब तक सुचारू रूप से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। विस्थापितों को मिलने वाले भूमि समतलीकरण, पेयजल योजना, स्वास्थ्य चिकित्सा, रोजगार और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से न मिलने के कारण विस्थापितों में भारी नाराजगी का माहौल बना हुआ है। विस्थापितों के इसी दर्द को ईश्वर चंद्र निराला ने बयां किया है।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर विजय थलपति पहुंचे हैं और उनके साथ चंद्रशेखर आजाद जी भी वहां मौजूद हैं।1
- गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में छात्रों के समर्थन में समाजवादी पार्टी ने प्रदर्शन किया है। रॉबर्ट्सगंज के स्वर्ण जयंती चौक पर सपा ने कथित छात्र लाठीचार्ज और पेपर लीक मामलों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। यहां जिला सचिव प्रमोद यादव के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का सीधा आरोप लगाया गया। समाजवादी पार्टी ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों व युवाओं के हित में उनका यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।1