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गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
SatSahib Ashish Ramdas ji
गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
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- गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।1
- धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ जय श्री राम और जय श्री कृष्ण का उद्घोष करते हुए शुभरात्रि की शुभकामनाएं साझा की गई हैं।1
- सोनभद्र जिले की दुद्धी तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलवार के महवरिया टोला में सूईचट्टान के बगल वाली बॉर्डर रोड महीनों से झाड़ियों और कचरे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी है। स्थानीय निवासी प्रेम शंकर यादव ने इस गंभीर समस्या को उठाते हुए बताया कि सड़क पर इतनी झाड़ियां और जंगली घास उग आई है कि रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस बंद रास्ते के कारण रात के समय आपातकालीन स्थिति में कोई एम्बुलेंस भी वहां से नहीं गुजर सकती, जिससे स्थानीय लोगों के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। सड़क की सफाई न होने और सफाईकर्मियों के गायब रहने को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। प्रेम शंकर यादव ने जिला प्रशासन और ग्राम प्रधान से मांग की है कि तुरंत इस रास्ते से झाड़ियों को हटवाकर सफाई करवाई जाए। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि यह जनता के टैक्स का पैसा है और अगर काम नहीं हुआ तो सवाल जरूर उठाए जाएंगे। इस बदहाली को लेकर सोनभद्र के जिलाधिकारी और रॉबर्ट्सगंज के खंड विकास अधिकारी (BDO) से तुरंत संज्ञान लेकर सफाई कराने की मांग की गई है।1
- कनहर सिंचाई परियोजना, जिसे अमवार बांध के नाम से भी जाना जाता है, को बनने में काफी लंबा समय लगा है। इस परियोजना के सफल होने के कारण कुल 21 गांव जलमग्न हो चुके हैं, जिसमें झारखंड के 4 गांव, छत्तीसगढ़ के 6 गांव और सोनभद्र के 11 गांव शामिल हैं। इन जलमग्न हुए गांवों के लोगों को अन्य जगहों पर विस्थापित किया गया है। हालांकि, विस्थापित किए गए इन लोगों को मिलने वाली सुविधाएं अब तक सुचारू रूप से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। विस्थापितों को मिलने वाले भूमि समतलीकरण, पेयजल योजना, स्वास्थ्य चिकित्सा, रोजगार और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से न मिलने के कारण विस्थापितों में भारी नाराजगी का माहौल बना हुआ है। विस्थापितों के इसी दर्द को ईश्वर चंद्र निराला ने बयां किया है।1
- सोनभद्र जिले के मारकुंडी-गुरमा मार्ग पर मानसून की पहली ही तेज बारिश ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तैयारियों की पोल खोल दी है। घाघर नदी पर निर्माणाधीन पुल के दौरान आवागमन चालू रखने के लिए मीनाबाजार के पास बनाया गया अस्थायी वैकल्पिक संपर्क मार्ग पानी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया है। इसके कारण गुरमा स्थित जिला कारागार और आसपास के कई गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 7 से 8 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। वैकल्पिक मार्ग बह जाने के कारण अब लोगों को मारकुंडी, तेलाई, चकरिया, पेड़रहवा, कुशहिया और कालापानी होकर लंबा चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ गए हैं। इसका सबसे अधिक प्रतिकूल असर स्कूली बच्चों, मरीजों, दैनिक मजदूरों, व्यापारियों और ग्रामीण महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें बरसात के मौसम में इस लंबे और जोखिम भरे रास्ते से सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही विभाग से एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग लगातार की जा रही थी। इस समस्या को लेकर पूर्व में कई बार ज्ञापन सौंपे गए और प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने और निर्माणाधीन पुल का काम जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है।2
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में ओबरा-सी तापीय परियोजना की 660-660 मेगावाट क्षमता वाली दोनों इकाइयां बंद होने से कुल 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन पूरी तरह शून्य हो गया है। तकनीकी खराबी के कारण इन दोनों यूनिटों के बंद होने से अब प्रदेश में बिजली की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है और आपातकालीन बिजली कटौती की स्थिति बन गई है। इस गंभीर तकनीकी समस्या के सामने आने के बाद, परियोजना प्रबंधन बिजली उत्पादन को जल्द से जल्द दोबारा बहाल करने के प्रयासों में जुटा हुआ है।1
- आप सभी लोगों से निवेदन1
- परीक्षा में पेपर लीक का विरोध कर रहे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे लोगों का माथा फोड़ दिया गया है। शाबाश मोदी सरकार, जिसने लोगों का कपार फोड़कर लाल कर दिया है। आपातकाल की भरपेट निंदा करने वाली इस मोदी सरकार ने अंग्रेजों को भी पानी पिला दिया है।1