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आप सभी लोगों से निवेदन
संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
आप सभी लोगों से निवेदन
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- सोनभद्र जिले की दुद्धी तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलवार के महवरिया टोला में सूईचट्टान के बगल वाली बॉर्डर रोड महीनों से झाड़ियों और कचरे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी है। स्थानीय निवासी प्रेम शंकर यादव ने इस गंभीर समस्या को उठाते हुए बताया कि सड़क पर इतनी झाड़ियां और जंगली घास उग आई है कि रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस बंद रास्ते के कारण रात के समय आपातकालीन स्थिति में कोई एम्बुलेंस भी वहां से नहीं गुजर सकती, जिससे स्थानीय लोगों के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। सड़क की सफाई न होने और सफाईकर्मियों के गायब रहने को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। प्रेम शंकर यादव ने जिला प्रशासन और ग्राम प्रधान से मांग की है कि तुरंत इस रास्ते से झाड़ियों को हटवाकर सफाई करवाई जाए। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि यह जनता के टैक्स का पैसा है और अगर काम नहीं हुआ तो सवाल जरूर उठाए जाएंगे। इस बदहाली को लेकर सोनभद्र के जिलाधिकारी और रॉबर्ट्सगंज के खंड विकास अधिकारी (BDO) से तुरंत संज्ञान लेकर सफाई कराने की मांग की गई है।1
- कनहर सिंचाई परियोजना, जिसे अमवार बांध के नाम से भी जाना जाता है, को बनने में काफी लंबा समय लगा है। इस परियोजना के सफल होने के कारण कुल 21 गांव जलमग्न हो चुके हैं, जिसमें झारखंड के 4 गांव, छत्तीसगढ़ के 6 गांव और सोनभद्र के 11 गांव शामिल हैं। इन जलमग्न हुए गांवों के लोगों को अन्य जगहों पर विस्थापित किया गया है। हालांकि, विस्थापित किए गए इन लोगों को मिलने वाली सुविधाएं अब तक सुचारू रूप से मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। विस्थापितों को मिलने वाले भूमि समतलीकरण, पेयजल योजना, स्वास्थ्य चिकित्सा, रोजगार और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाएं सुचारू रूप से न मिलने के कारण विस्थापितों में भारी नाराजगी का माहौल बना हुआ है। विस्थापितों के इसी दर्द को ईश्वर चंद्र निराला ने बयां किया है।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में ओबरा-सी तापीय परियोजना की 660-660 मेगावाट क्षमता वाली दोनों इकाइयां बंद होने से कुल 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन पूरी तरह शून्य हो गया है। तकनीकी खराबी के कारण इन दोनों यूनिटों के बंद होने से अब प्रदेश में बिजली की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है और आपातकालीन बिजली कटौती की स्थिति बन गई है। इस गंभीर तकनीकी समस्या के सामने आने के बाद, परियोजना प्रबंधन बिजली उत्पादन को जल्द से जल्द दोबारा बहाल करने के प्रयासों में जुटा हुआ है।1
- गुजरात के भरूच पखा जान में जमकर बारिश हुई है। यहाँ 21 जुलाई 2026 की शाम को 4:25 बजे बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।1
- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में एक किसान अपनी मक्का की फसल को कोना कर रहा है। इस मक्का की फसल की बुवाई बिना किसी खाद के की गई है।1
- गढ़वा के चिनिया प्रखंड अंतर्गत रानीचेरी गांव में सोमवार को झारखंड वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के तत्वावधान में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम, रेंजर अजय टोप्पो, जिला परिषद सदस्य बनारसी सिंह, उप प्रमुख सुनैना देवी, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, मुखिया गोपाल यादव, महावीर सिंह और विजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने वन महोत्सव को सभी उत्सवों में सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि जंगल है तो जल है और जल है तो जीवन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंधाधुंध वृक्षों की कटाई के कारण ही जंगली हाथी और अन्य वन्यजीव गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के इन जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए हर व्यक्ति से जंगल बचाने में योगदान देने की अपील की। वहीं, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां ने कहा कि लोग केवल महुआ के पेड़ को उसकी आय के कारण बचाते हैं, जबकि जंगल का हर पेड़ मानव जीवन के लिए अमूल्य है। समारोह का सफल संचालन संजय प्रसाद ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने मिलकर पौधा रोपण किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। इस मौके पर भाजपा नेता कपिल प्रसाद, शिवलाल सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, गरीबा शाह, गुड्डू यादव, छोटू यादव सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।1
- आप सभी लोगों से निवेदन1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक की समस्या को दूर करने के लिए शुरू हुआ शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आए दिन और बढ़ता ही जा रहा है। लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं पर विचार-विमर्श करने के लिए अब तक कोई भी बड़ा पदाधिकारी प्रदर्शनकारियों के बीच नहीं पहुँचा है। अधिकारियों की इस अनदेखी के बीच, दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ निकाली गई रैली पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया है।1